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परसाई व्यंग्य पखवाड़ा : करोड़पति कैसे बनें / व्यंग्य / अशोक जैन पोरवाल

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(परसाई व्यंग्य पखवाड़ा - 10 - 21 अगस्त के दौरान विशेष रूप से हास्य-व्यंग्य रचनाओं का प्रकाशन किया जा रहा है. आपकी  सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है.  )

  खेलोगे कूदोगे बनोगे करोड़पति

व्यंग्य

अशोक जैन पोरवाल

 

''बच्चों तुम तकदीर हो, कल के हिन्दुस्तान की। बापू के बलिदान की, नेहरू के अरमान की''। हमारे मोहल्लेनुमा कॉलोनी के एक छोटे से स्कूल के वार्षिक उत्सव के दिन सुबह से ही लाउडस्पीकर पर उक्त देश भक्ति पूर्ण गीत बज रहा था। जहाँ एक ओर अन्य दूसरे स्कूलों के विद्यार्थियों को लाने ले-जाने वाले ऑटो-रिक्शों के हार्न की जोर-जोर से आवाजें आ रही थी। वहीं दूसरी ओर नगर-निगम की 'घर-घर से कचरा' ले जाने वाली योजना के अंतर्गत कचरा ले जाने वाली गाड़ी के हार्न के साथ ही साथ स्वीपर द्वारा बजाई जाने वाली सीटी की आवाजें भी आ रही थी। सभी लोगों की तरह मैंने भी अपने घर के कचरे को बाहर रख दिया। जहाँ एक ओर स्वीपर कचरा-गाड़ी में कचरा ठूंस-ठूंस कर भर रहा था। वहीं दूसरी और ऑटो-रिक्शा वाला भी बच्चों को एक के ऊपर एक ठूंस-ठूंस कर भर रहा था। कचरे और बच्चों दोनों में कोई अंतर नजर नहीं आ रहा था। कुछ ही मिनिटों में कचरा-गाड़ी और ऑटो-रिक्शा दोनों आगे बढ़ गए। मैं भी दूध के पैकेट लेने के लिए घर से निकल पड़ा।

सर्दी के मौसम में सुबह-सुबह नन्हें-मुन्ने बच्चों को स्कूल भेजना उन्हें किसी सजा देने से कम नहीं होता है। किंतु, उनके अभिभावक भी क्या करें? आखिरकार बच्चों को पढ़ा-लिखाकर' 'नवाब' जो बनाना है? चौराहे पर दूध की डेरी (गुमटी) के पास अपने स्कूल की बस के आने के इंतजार में आठ-दस साल के कुछ बच्चे खड़े हुए थे। मैंने उनसे पूछा,'' तुम सभी स्कूल पढ़ने के लिए जाते हो....पढ़कर-लिखकर तुम क्या करोगे?'' मेरे अटपटे प्रश्न को सुनकर सभी बच्चे हंसने लगे। एक ने चुटकी लेते हुए उत्तर दिया,'' मेरी दादीमाँ कहती हैं, कि पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे 'नवाब' और खेलोगे-कूदोगे बनोगे 'गॅवार''....इसी बीच दूसरा बच्चा उस बच्चे को टोकते हुए बोला,'' गॅवार, नहीं बल्कि 'खराब' बोल।'' उनकी बातें सुनकर मैं उन्हें समझाते हुए बोला,'' बच्चों! दादीमाँ की वो बातें भी अब दादीमाँ की तरह पुरानी हो गई हैं। तब की और अब की बातों में बहुत अन्तर आ चुका है। इसी बीच मेरे पास कुछ किशोर बच्चे भी स्कूल जाने के लिए बस के इंतजार में आकर खड़े हो गए थे। ''मैं सभी बच्चों को बतलाते हुए पूछने लगा,'' तुम सभी को पता है, इस बार ओलंपिक में हमारे देश के खिलाड़ियों ने पहली बार जहाँ एक और 6 पदक जीते हैं। वहीं दूसरी ओर उन्हें लाखों-करोड़ों रूपयों की राशि भी पुरस्कार के रूप में मिली है जो कि अलग-अलग प्रदेश सरकारों के साथ ही साथ भारतीय खेल-मंत्रालय ने दी है। जिन्हें देखकर तुम्हारे मन में भी कुछ लडडू फूटे होंगे? मेरा मतलब है, क्या तुम्हें नहीं लगता है कि हमें भी खेलना चाहिये?'' सुनकर सभी बच्चों ने 'हाँ' में अपनी मुंडी घुमा दी।

मैंने उस बच्चे से कहा,'' तुम अपनी दादीमाँ और मम्मी-पापा से कहना कि एक अंकल मिले थे उन्होंने उक्त ''पढ़ोगे-लिखोगे.....'' वाली कहावत में संशोधन करते हुए मुझसे कहा था कि अब ''खेलोगे-कूदोगे बनोगे करोड़पति और पढ़ोगे-लिखोगे बनो शिक्षित -बेरोजगार या फिर शिक्षित-पति बोलना चाहिये ''मेरी ऐसी कहावत को सुनकर सभी बच्चे जोर-जोर से हंसने लगे। एक किशोर ने चुटकी ली। पूछा,'' अंकल वे सभी खिलाड़ी ओलंपिक में पदक जीतने के बाद लखपति अथवा करोड़पति जरूर बने हैं। किंतु वहाँ तक पहुँचना हर किसी के बस की बात भी तो नहीं है। बहुत ही मुश्किल होता है, खेल कूदकर-करोड़पति बनना।

''हाँ मुश्किल जरूर है किंतु असंम्भव नहीं है। जानते हो अमेरिका, चीन, जापान जैसे देशों में बच्चों के अभिभावकों के कहने पर वे बच्चे अपनी छोटी सी उम्र से ही स्कूल जाने की अपेक्षा अपने-अपने खेल के मैदानों में जाने को प्राथमिकता देने लगते हैं। यही करण है कि उन देशों के खिलाड़ियों द्वारा एक सौ के आस-पास हमेशा ओलंपिक में पदक जीते जाते हैं''।- मैं बोला।

''अच्छा अंकल क्या हमारे देश में भी खेल कूद को प्रोत्साहन देने के संबंध में कुछ योजनाएं है?''- एक किशोर ने पूछा।

''हाँ......हाँ क्यों नहीं। केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकारों की बहुत सारी योजनाएं हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू. जी. सी.) ने भी बारहवी पंचवर्षीय योजना के तहत खिलाड़ियों को केटेगरी एक और केटेगरी दो में बाँटकर उनकी पढ़ाई की ट्यूशन फीस माफ करने से लेकर सात हजार पाँच सौ रूपये मासिक तक की स्कॉलरशिप देने जैसी अनेकों सुविधाओं देने वाली योजनाएं बना रखी हैं। किंतु उन्हें पाने से पहले सभी खिलाड़ियों को सफल खिलाड़ी बनने का अपना एक मात्र लक्ष्य रखना होगा। साथ ही इस नई कहावत को भी ध्यान में रखना होगा। कि ''खेलोगे कूदोगे बनोगे करोड़पति''....।

 

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अशोक जैन 'पोरवाल' ई-8/298 आश्रय अपार्टमेंट त्रिलोचन-सिंह नगर
(त्रिलंगा/शाहपुरा) भोपाल-462039 (मो.) 09098379074 (दूरभाष) (नि.) (0755) 4076446

साहित्यिक परिचय इस लिंक पर देखें - http://www.rachanakar.org/2016/07/blog-post_59.html

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