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इटली की लोक कथाएँ–1 : 12 तोता // सुषमा गुप्ता

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एक बार की बात है कि एक शहर में एक व्यापारी रहता था। उसके एक बेटी थी। एक बार उस व्यापारी को अपने व्यापार के काम से कहीं बाहर जाना था पर वह अप...

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एक बार की बात है कि एक शहर में एक व्यापारी रहता था। उसके एक बेटी थी।

एक बार उस व्यापारी को अपने व्यापार के काम से कहीं बाहर जाना था पर वह अपनी उस बेटी को अकेले छोड़ने से डरता था क्योंकि एक राजा की नजर उसकी बेटी पर थी और वह उस राजा से अपनी बेटी की शादी करना नहीं चाहता था।

जाना जरूरी था सो जाने से पहले उसने अपनी बेटी से कहा — “बिटिया, मैं ज़रा अपने धन्धे के काम से बाहर जा रहा हूँ पर तुम मुझसे वायदा करो कि जब तक मैं वापस नहीं आता तब तक न तो तुम घर के दरवाजे से बाहर झाँकोगी और न ही किसी और को घर के अन्दर झाँकने दोगी।”

वह बोली — “पिता जी, मुझे घर में बिल्कुल अकेले रहते हुए बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है। क्या मैं एक तोता भी अपने साथ के लिये नहीं रख सकती?”

व्यापारी जो बेचारा अपनी बेटी के लिये ही जीता था तुरन्त बाजार गया और अपनी बेटी के लिये एक तोता खरीद लाया। उसको एक बूढ़ा मिल गया था जिसने उस तोते को एक गीत के बदले में उसे बेच दिया।

वह उस तोते को अपनी बेटी के पास ले गया और उस तोते को उसको दे कर और आखीर तक उसको उपदेश देने के बाद अपने काम पर चला गया।

जैसे ही वह व्यापारी अपने घर से बाहर गया तो उस राजा ने जो उससे शादी करना चाहता था उस लड़की से मिलने की तरकीब सोचनी शुरू कर दी। उसने एक बुढ़िया को बुलाया और उसको उस लड़की के लिये एक चिठ्ठी दे कर उस लड़की के घर भेजा।

इस बीच उस लड़की ने तोते से बात करना शुरू कर दिया — “मुझसे बात करो ओ तोते, मुझसे बात करो न।”

तोता बोला — “अच्छा तो लो सुनो, मैं तुमको एक बड़ी अच्छी कहानी सुनाता हूँ —

“एक बार की बात है कि एक राजा था जिसकी एक ही बेटी थी। वह उसकी अकेली बच्ची थी। उसके न तो कोई और बेटा था और न ही और कोई बेटी ही थी।

उसके साथ कोई खेलने वाला भी नहीं था इसलिये उसके माता पिता ने उसके लिये एक इतनी बड़ी गुड़िया बनवा दी जितनी बड़ी वह खुद थी। उन्होंने उसको वैसे ही कपड़े भी पहना दिये जैसे उनकी बेटी पहनती थी।

अब जहाँ भी वह राजकुमारी जाती उसकी गुड़िया भी उसके साथ ही जाती। दोनों को एक साथ देख कर कोई यह नहीं कह सकता था कि उनमें से कौन सी राजकुमारी थी और कौन सी गुड़िया थी।

एक दिन राजा अपनी बेटी और उसकी गुड़िया को ले कर अपनी गाड़ी में जंगल में से जा रहा था कि रास्ते में दुश्मनों ने उसकी गाड़ी पर हमला कर दिया।

राजा मारा गया और दुश्मन राजा की बेटी को ले कर भाग गये पर गुड़िया को वे वहीं छोड़ गये। उसको नहीं ले गये सो वह वहीं छोड़ी हुई गाड़ी में ही पड़ी रही।

लड़की खूब रोयी खूब चिल्लायी तो दुश्मनों ने उसको भी वहीं छोड़ दिया और भाग गये। वह लड़की बेचारी अकेली जंगल में भटकती रही। भटकते-भटकते वह एक रानी के दरबार में पहुँच गयी और वहाँ जा कर वह उस रानी की नौकरानी बन गयी।

वह लड़की बहुत होशियार थी सो रानी उसको बहुत प्यार करती थी। यह देख कर रानी के दूसरे नौकर उससे जलने लगे और उस लड़की को रानी की नजरों में नीचे गिराने के लिये जाल बिछाने लगे।

उन्होंने उस लड़की से कहा — “तुमको तो मालूम है कि रानी जी तुमको बहुत प्यार करती हैं और तुमको हर बात बता देती हैं पर एक बात ऐसी है कि जो हमको मालूम है और तुमको नहीं मालूम।”

लड़की ने पूछा — “ऐसी कौन सी बात है?”

नौकरों ने तब उसको बताया — “वह बात यह है कि रानी के एक बेटा था जो मर गया है।”

यह सुन कर वह लड़की रानी के पास गयी और बोली — “रानी जी क्या यह सच है कि आपके एक बेटा था और वह मर गया है?”

यह सुन कर रानी तो बेहोश होते-होते बची। भगवान जाने यह सच्चाई उस लड़की को किसने बतायी क्योंकि केवल यह कहने की सजा कि “रानी का बेटा मर गया था” मौत थी। इसलिये उस लड़की को भी मरने की सजा सुनायी जानी चाहिये थी।

पर रानी को उस लड़की पर दया आ गयी और उसने उसको बजाय मौत की सजा सुनाने के एक तहखाने में बन्द कर दिया।

तहखाने में बन्द होने के बाद वह लड़की बहुत ही उदास और नाउम्मीद हो गयी। उसका खाना पीना छूट गया और वह रात रात भर रोने लगी।

एक दिन आधी रात को जब वह रो रही थी तो उसने दरवाजे की कुंडी खिसकने की आवाज सुनी और पाँच आदमी अन्दर आते देखे। उन पाँच आदमियों में से चार आदमी जादूगर थे और पाँचवाँ रानी का बेटा था। रानी के बेटे को उन जादूगरों ने वहीं उसी रानी के तहखाने में कैद कर रखा था जिसको वे इस समय घुमाने ले जा रहे थे।”

उसी समय उस लड़की की नौकरानी ने तोते की वह कहानी बीच में ही रोक दी। वह उस लड़की के लिये किसी की चिठ्ठी ले कर आयी थी।

असल में वह चिठ्ठी उसी राजा की थी जो उस लड़की से बहुत प्यार करता था और उससे शादी करना चाहता था। और उस लड़की का पिता भी उसी के डर से अपनी बेटी को अकेला छोड़ना नहीं चाहता था। पर उस राजा ने किसी तरह व्यापारी की उस लड़की तक पहुँचने की तरकीब निकाल ली थी।

पर लड़की को तो उस तोते की कहानी बहुत अच्छी लग रही थी और वह यह जानने के लिये बहुत उत्सुक थी कि उस कहानी में आगे क्या हुआ क्योंकि अभी तो उसमें उस कहानी का सबसे अच्छा हिस्सा आने वाला था।

वह अपनी नौकरानी से बोली — “मैं कोई चिठ्ठी नहीं लूँगी जब तक मेरे पिता जी नहीं आ जाते। तोते, तुम अपनी कहानी जारी रखो।”

वह नौकरानी वह चिठ्ठी वहाँ से वापस ले गयी और तोते ने अपनी कहानी फिर से शुरू कर दी —

“सुबह को जेलर ने देखा कि उस लड़की ने तो कुछ खाया ही नहीं है। यह बात उसने जा कर रानी से कही।

यह सुन कर रानी ने उस लड़की को बुला भेजा तो लड़की ने उसे बताया कि उसका बेटा तो ज़िन्दा था और वह भी वहीं उसी तहखाने में ही चार जादूगरों का कैदी था। वे उसको हर रात घुमाने ले जाते थे।

रानी यह सुन कर बहुत खुश हुई। उसने तुरन्त ही अपने 12 सिपाही क्रोबार ले कर तहखाने में भेज दिये। उन्होंने उन चारों जादूगरों को मार डाला और रानी के बेटे को उनसे छुड़ा कर ले आये।

रानी अपना बेटा पा कर बहुत खुश हुई। उसके बाद रानी ने उस लड़की की शादी अपने बेटे से कर देने के लिये सोचा क्योंकि उसी ने तो उसको ज़िन्दा किया था और जादूगरों के हाथ से बचाया था।”

तभी उस लड़की की नौकरानी ने फिर से दरवाजा खटखटाया और ज़ोर दिया कि उसको वह चिठ्ठी पढ़ लेनी चाहिये।

लड़की बोली — “ठीक है ठीक है। अब जब यह कहानी खत्म हो ही गयी है तो मैं यह चिठ्ठी पढ़ सकती हूँ।”

पर तभी तोता जल्दी से बोला — “पर यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई अभी तो कहानी और बची है। तुम सुनो तो।”

वह आगे बोला — “लेकिन वह लड़की उस रानी के बेटे से शादी नहीं करना चाहती थी। उसने रानी से उसके बदले में धन माँगा और एक आदमी के कपड़े माँगे।

रानी ने जब उसको धन और कपड़े दोनों दे दिये तो वह उस राज्य को छोड़ कर वहाँ से दूसरे शहर चल दी।

इस दूसरे शहर के राजा का बेटा बीमार था और कोई डाक्टर उसको ठीक नहीं कर पा रहा था। उसकी बीमारी यह थी कि आधी रात से ले कर सुबह तक वह ऐसा हो जाता था जैसे किसी भूत प्रेत या आत्मा ने उसके ऊपर अपना असर कर रखा हो।

यह लड़की आदमी के वेश में वहाँ गयी और उन लोगों से कहा कि वह डाक्टर है और किसी दूसरे देश से आया है। वह राजा के बेटे का इलाज करना चाहता है और इस इलाज के लिये वह उस राजा के नौजवान बेटे के साथ एक रात अकेला रहना चाहता है।

कोई राजा के बेटे का इलाज कर दे इससे अच्छी बात और क्या हो सकती थी सो उसको राजा के बेटे के साथ एक रात अकेले रहने की इजाज़त दे दी गयी।

सबसे पहले तो उस लड़की ने राजा के बेटे के पलंग के नीचे देखा तो वहाँ उसको एक चोर दरवाजा दिखायी दिया। उसने वह चोर दरवाजा खोला और उसके अन्दर चली गयी। वहाँ से वह एक बरामदे में निकल आयी थी। बरामदे के दूसरे छोर पर उसको एक जलता हुआ लैम्प दिखायी दिया।”

उसी समय नौकरानी ने फिर से दरवाजा खटखटाया और उस लड़की को बताया कि एक बुढ़िया उस लड़की से मिलना चाहती थी।

वह बुढ़िया कहती थी कि वह उस लड़की की चाची थी। पर असल में यह बुढ़िया उस लड़की की कोई चाची वाची नहीं थी यह तो उसी राजा की भेजी हुई बुढ़िया थी जो उसको बहुत प्यार करता था और उससे शादी करना चाहता था।

पर वह लड़की तो कहानी सुनने में इतनी मस्त थी कि उसने अपनी नौकरानी से कहा कि वह अभी इस समय किसी बुढ़िया वुढ़िया से मिलना नहीं चाहती और फिर तोते से बोली — “तोते, तुम अपनी कहानी जारी रखो।”

तोते ने अपनी कहानी फिर आगे बढ़ायी — “सो वह लड़की उस बरामदे में आगे बढ़ती गयी, बढ़ती गयी और लैम्प के पास तक पहुँच गयी। वहाँ जा कर उसने देखा कि एक बुढ़िया आग पर एक बरतन में राजकुमार का दिल उबाल रही है।

ऐसा वह इसलिये कर रही थी क्योंकि राजा ने उसके लड़कों को फाँसी दिलवा दी थी। लड़की ने उस बरतन से राजकुमार का दिल निकाल लिया और उसको राजकुमार के पास खाने के लिये ले गयी। जैसे ही राजकुमार ने अपना दिल खाया राजकुमार ठीक हो गया।

राजा को बाद में पता चला कि वह कोई लड़का नहीं था बल्कि एक लड़की थी।

राजा बोला — “तुमने मेरे बेटे को ठीक किया है इसलिये अपना आधा राज्य मैं तुमको देता हूँ पर तुम क्योंकि एक लड़की हो इसलिये तुम मेरे बेटे से शादी कर लो और रानी बन जाओ।”

व्यापारी की लड़की बोली — “यह तो बड़ी अच्छी कहानी है। अब तो कहानी खत्म हो गयी अब मैं उस स्त्री से मिल सकती हूँ जो कहती है कि वह मेरी चाची है।”

पर तोता फिर बोला — “पर अभी यह कहानी खत्म नहीं हुई। अभी तो कहानी और है। तुम सुनती रहो।”

और तोतेेे ने अपनी कहानी आगे बढ़ायी — “सो उस लड़की ने इस राजा के बेटे से भी शादी नहीं की और दूसरे शहर चल दी।

इस शहर के राजा का बेटा भी किसी के जादू के असर में था। वह बोलता नहीं था। वहाँ भी उसने उस लड़के के साथ एक रात अकेले रहने की इजाज़त माँगी जो उसको तुरन्त ही दे दी गयी।

रात को वह उस लड़के के पलंग के नीचे छिप गयी। आधी रात को उसने खिड़की के रास्ते से दो जादूगरनियाँ आती देखीं। उन्होंने उस लड़के के मुँह से पत्थर का एक छोटा सा टुकड़ा निकाला तो वह बोलने लगा। पर जाने से पहले वे जादूगरनियाँ उस पत्थर के टुकड़े को फिर से उस लड़के के मुँह में रख गयीं तो वह फिर नहीं बोल सका।”

तभी किसी ने फिर दरवाजा खटखटाया पर व्यापारी की लड़की अपनी कहानी सुनने में इतनी मस्त थी कि उसने उस खटखटाहट की आवाज ही नहीं सुनी और उस तोते ने अपनी कहानी जारी रखी — “उस लड़की ने फिर से राजा से उसके बेटे के कमरे में रहने की इजाज़त माँगी जो उसको मिल गयी।

अगली रात जब वे जादूगरनियाँ दोबारा आयीं और उन्होंने वह पत्थर का टुकड़ा राजा के बेटे के मुँह से निकाल कर उसके बिस्तर पर रखा तो उस लड़की ने उसके बिस्तर की चादर को एक झटका दिया और वह पत्थर उस राजकुमार के बिस्तर से नीचे गिर गया।

लड़की ने हाथ बढ़ा कर उस पत्थर को उठा लिया और अपनी जेब में रख लिया। सुबह को जब वे जादूगरनियाँ जाने लगीं और उन्होंने उस पत्थर के टुकड़े को राजा के बेटे के मुँह में रखने के लिये खोजा तो उनको वह पत्थर ही नहीं मिला। पत्थर न पा कर वे वहाँ से भाग लीं।

अगले दिन राजकुमार ठीक था तो उस शहर वालों ने उस लड़के का नाम ही डाक्टर रख दिया।”

दरवाजे पर खटखटाहट चालू रही और व्यापारी की लड़की “अन्दर आ जाओ” कहने ही वाली थी कि उसने पहले तोते से पूछा — “अभी यह कहानी और है या खत्म हो गयी?”

तोता बोला — “यह कहानी तो अभी और है। तुम सुनती रहो। पर वह लड़की वहाँ डाक्टर के रूप में भी रुकने के लिये तैयार नहीं थी सो वह एक और शहर चली गयी।

इस शहर में जा कर उसने सुना कि वहाँ का राजा पागल हो गया है। वह पागल इसलिये हो गया था कि जंगल में उसको एक गाड़ी में पड़ी एक गुड़िया मिल गयी थी और वह उस गुड़िया के प्यार में पागल था।

बस वह हमेशा ही अपने कमरे में बैठा रहता और उस गुड़िया को देखता रहता और रोता रहता। रोता वह इसलिये था कि वह ज़िन्दा नहीं थी। वह लड़की राजा के सामने गयी तभी भी वह उस गुड़िया को लिये बैठा था और रो रहा था।

उसको देखते ही वह बोली — “अरे यह तो मेरी गुड़िया है। यह आपको कहाँ से मिली?”

और राजा उसको देखते ही बोला — “यह तो मेरी दुलहिन है।”

राजा इस बात पर चकित था कि उन दोनों की सूरतें कितनी मिलती जुलती थीं और किस तरीके से वह उसको देखते ही पहचान गया।”

दरवाजे पर फिर से खटखटाहट हुई तो अब की बार तोता बहुत परेशान हो गया क्योंकि वह अपनी कहानी को इससे आगे नहीं बढ़ा पा रहा था पर फिर भी वह बोला — “एक मिनट, एक मिनट। बस ज़रा सी कहानी और बची है वह हम और खत्म कर लें फिर तुम अपनी चाची से मिल लेना।”

पर उसको उस कहानी को आगे बढ़ाने का कोई मसाला ही नहीं मिल रहा था। अब वह उस कहानी को आगे कैसे बढ़ाये।

तभी किसी ने दरवाजा फिर से खटखटाया और आवाज लगायी — “दरवाजा खोलो बेटी, दरवाजा खोलो। मैं तुम्हारा पिता।”

सो तोता बोला — “ठीक है, बस तुम्हारे पिता जी आ गये। अब हम यह कहानी यहीं खत्म करते है। राजा ने उस लड़की से शादी कर ली और वे लोग खुशी-खुशी रहने लगे।”

कहानी खत्म हो गयी थी सो वह लड़की तुरन्त ही दरवाजा खोलने चली गयी और दरवाजा खोल कर अपने पिता से लिपट गयी।

पिता बोला — “मुझे लग रहा है कि आज तुम मेरा कहा मान कर घर में ही रहीं। और हाँ तुम्हारा तोता कैसा है?”

“बहुत अच्छा है पिता जी।”

सो वे दोनों तोते को देखने अन्दर गये तो उन्होंने देखा कि तोता तो वहाँ कहीं नहीं था बल्कि उस तोते की जगह एक बहुत ही सुन्दर नौजवान खड़ा था।

वह नौजवान उस लड़की के पिता से बोला — “मुझे माफ कीजियेगा जनाब। मैं एक राजा हूँ जिसको एक तोते में बदल दिया गया था क्योंकि मैं आपकी बेटी से बहुत प्यार करता था।

मुझे मालूम था कि मेरा एक दुश्मन राजा इनको भगा ले जाना चाह रहा था तो मैं एक तोते का रूप रख कर इनको एक इज़्ज़तदार ढंग से इनका मन बहलाने के लिये और इनको उस दुश्मन राजा के चंगुल से बचाने के लिये यहाँ आ गया।

मुझे पूरा भरोसा है कि मैंने अपने ये दोनों काम सफलता से निभा दिये हैं और अब मैं आपसे अपनी शादी के लिये आपकी बेटी का हाथ माँगता हूँ। अगर आप इजाज़त दें तो।”

यह सुन कर व्यापारी बहुत खुश हुआ। उसने शादी के लिये हाँ कर दी और अपनी बेटी की शादी उस राजा से कर दी।

यह सुन कर वह दुश्मन राजा तो बहुत गुस्से से भर गया पर वह कुछ कर नहीं सका। दूसरा तोता राजा और व्यापारी की बेटी दोनों बहुत दिनों तक खुशी-खुशी राज करते रहे।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओंको आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian 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रचनाकार: इटली की लोक कथाएँ–1 : 12 तोता // सुषमा गुप्ता
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