शनिवार, 30 सितंबर 2017

इटली की लोक कथाएँ–1 : 1 छोटा निडर जौन // सुषमा गुप्ता

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–1

इटली की लोक कथाएँ–1

संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

Cover Page picture: Pisa’s Leaning Tower, Italy

Published Under the Auspices of Akhil Bhartiya Sahityalok

E-Mail: sushmajee@yahoo.com

Website: http://sushmajee.com/folktales/index-folktales.htm

Read More such stories at: www.scribd.com/sushma_gupta_1

Copyrighted by Sushma Gupta 2014

No portion of this book may be reproduced or stored in a retrieval system or transmitted in any form, by any means, mechanical, electronic, photocopying, recording, or otherwise, without written permission from the author.

Map of Italy

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विंडसर, कैनेडा

मार्च 2016

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Contents

सीरीज़ की भूमिका 4

इटली की लोक कथाएँ–1 5

1 छोटा निडर जौन 7

2 तीन डैक का जहाज 14

3 एक आदमी जो केवल रात को बाहर निकलता था 32

4 और सात 39

5 एक लाश 52

6 पैसा परमेश्वर है 64

7 एक छोटा चरवाहा 71

8 एक छोटी लड़की जो नाशपाती के साथ बेची गयी 82

9 साँप 90

10 तीन किले 102

11 एक राजकुमार जिसने मेंढकी से शादी की 113

12 तोता 121

13 बारह बैल 134

14 एक पागल और एक चालाक 143

15 कैनेरी राजकुमार

 

सीरीज़ की भूमिका

लोक कथाएँ किसी भी समाज की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा होती हैं। ये संसार को उस समाज के बारे में बताती हैं जिसकी वे लोक कथाएँ हैं। आज से बहुत साल पहले, करीब 100 साल पहले, ये लोक कथाएँ केवल ज़बानी ही कही जातीं थीं और कह सुन कर ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दी जाती थीं इसलिये किसी भी लोक कथा का मूल रूप क्या रहा होगा यह कहना मुश्किल है।

आज हम ऐसी ही कुछ अंग्रेजी और कुछ दूसरी भाषा बोलने वाले देशों की लोक कथाएँ अपने हिन्दी भाषा बोलने वाले समाज तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से बहुत सारी लोक कथाएँ हमने अंग्रेजी की किताबों से, कुछ विश्वविद्यालयों में दी गयी थीसेज़ से, और कुछ पत्रिकाओं से ली हैं और कुछ लोगों से सुन कर भी लिखी हैं। अब तक 1200 से अधिक लोक कथाएँ हिन्दी में लिखी जा चुकी हैं। इनमें से 400 से भी अधिक लोक कथाएँ तो केवल अफ्रीका के देशों की ही हैं।

इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि ये सब लोक कथाएँ हर वह आदमी पढ़ सके जो थोड़ी सी भी हिन्दी पढ़ना जानता हो और उसे समझता हो। ये कथाएँ यहाँ तो सरल भाषा में लिखी गयी है पर इनको हिन्दी में लिखने में कई समस्याएँ आयी है जिनमें से दो समस्याएँ मुख्य हैं।

एक तो यह कि करीब करीब 95 प्रतिशत विदेशी नामों को हिन्दी में लिखना बहुत मुश्किल है़ चाहे वे आदमियों के हों या फिर जगहों के। दूसरे उनका उच्चारण भी बहुत ही अलग तरीके का होता है। कोई कुछ बोलता है तो कोई कुछ। इसको साफ करने के लिये इस सीरीज़ की सब किताबों में फुटनोट्स में उनको अंग्रेजी में लिख दिया गया हैं ताकि कोई भी उनको अंग्रेजी के शब्दों की सहायता से कहीं भी खोज सके। इसके अलावा और भी बहुत सारे शब्द जो हमारे भारत के लोगों के लिये नये हैं उनको भी फुटनोट्स और चित्रों द्वारा समझाया गया है।

ये सब कथाएँ “देश विदेश की लोक कथाएँ” नाम की सीरीज के अन्तर्गत छापी जा रही हैं। ये लोक कथाएँ आप सबका मनोरंजन तो करेंगी ही साथ में दूसरे देशों की संस्कृति के बारे में भी जानकारी देंगी। आशा है कि हिन्दी साहित्य जगत में इनका भव्य स्वागत होगा।

सुषमा गुप्ता

मई 2016

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इटली की लोक कथाएँ–1

इटली देश यूरोप महाद्वीप के दक्षिण पश्चिम की तरफ भूमध्य सागर के उत्तरी तट पर स्थित है। पुराने समय में यह एक बहुत ही शक्तिशाली राज्य था। रोमन साम्राज्य अपने समय का एक बहुत ही मशहूर राज्य रहा है। उसकी सभ्यता भी बहुत पुरानी है – करीब 3000 साल पुरानी। इसका रोम शहर 753 बीसी में बसाया हुआ बताया जाता है पर यह इटली की राजधानी 1871 में बना था। इटली में कुछ शहर बहुत मशहूर हैं – रोम, पिसा, फ्लोरैन्स, वेनिस आदि। यहाँ की टाइबर नदी बहुत मशहूर है। यूरोप में लोग केवल लन्दन, पेरिस और रोम शहर ही घूमने जाते हैं।

रोम में रोम का कोलोज़ियम और वैटिकन सिटी में वहाँ का अजायबघर सबसे ज़्यादा देखे जाते हैं। पिसा में पिसा की झुकती हुई मीनार संसार के आदमी द्वारा बनाये गये आठ आश्चयोंर् में से एक है। इटली का वेनिस शहर नहरों में बसा हुआ एक शहर है। इस शहर में अधिकतर लोग इधर से उधर केवल नावों से ही आते जाते हैं। यहाँ कोई कार नहीं है कोई सड़क पर चलने वाला यातायात का साधन नहीं है, केवल नावें हैं और नहरें हैं। शायद तुम्हें मालूम नहीं होगा कि असल में वेनिस शहर कोई शहर नहीं है बल्कि 118 द्वीपों को पुलों से जोड़ कर बनाया गया जमीन का एक टुकड़ा है इसलिये ये नहरें भी नहरें नहीं हैं बल्कि समुद्र का पानी है और वह समुद्र का पानी नहर में बहता जैसा लगता है।

इटली का रोम कैसे बसा? कहते हैं कि रोम को बसाने वाला वहाँ का पहला राजा रोमुलस था। रोमुलस और रेमस दो जुड़वाँ भाई थे जो एक मादा भेड़िया का दूध पी कर बड़े हुए थे। दोनों ने मिल कर एक शहर बसाने का विचार किया पर बाद में एक बहस में रोमुलस ने रेमस को मार दिया और उसने खुद राजा बन कर 7 अप्रैल 753 बीसी को रोम की स्थापना की। इटली के रोम शहर में संसार का मशहूर सबसे बड़ा कोलोज़ियम है जहाँ 5000 लोग बैठ सकते हैं। पुराने समय में यहाँ लोगों को सजाएँ दी जाती थीं।

इटली के अन्दर वैटीकन सिटी है जो ईसाई धर्म के कैथोलिक लोगों का घर है पर यह एक अपना अलग ही देश है। वहाँ इसके अपने सिक्के और नोट हैं। इसकी अपनी सेना है। पोप इस देश का राजा है। इसका अजायबघर बहुत मशहूर है। यह संसार का सबसे छोटा देश है क्षेत्र में भी और जनसंख्या में भी – 842 आदमी केवल 4 वर्ग मील के क्षेत्र में बसे हुए।

इटली की बहुत सारी लोक कथाएँ हैं। इटली की सबसे पहली लोक कथाएँ 1550 में ल्खिी गयी थीं। इतालो कैलवीनो का लोक कथाओं का यह संग्रह जिसमें से हमने ये लोक कथाएँ ली हैं इटैलियन भाषा में 1956 में संकलित करके प्रकाशित किया गया था। इनका सबसे पहला अंग्रेजी अनुवाद 1962 में छापा गया। उसके बाद सिलविया मल्कही ने इनका अंग्रेजी अनुवाद 1975 में प्रकाशित किया। फिर मार्टिन ने इनका अंग्रेजी अनुवाद 1980 में किया। ये लोक कथाएँ हम मार्टिन की पुस्तक से ले कर अपने हिन्दी भाषा भाषियों के लिये यहाँ हिन्दी भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं। आशा है कि ये लोक कथाएँ तुम लोगों को पसन्द आयेंगी।

इतालो ने इस पुस्तक में 200 लोक कथाएँ संकलित की हैं। हमने उन 200 लोक कथाओं में से 125 लोक कथाएँ चुनी हैं। फिर भी क्योंकि वे बहुत सारी लोक कथाएँ हैं इसलिये वे सब पढ़ने की आसानी के लिये एक ही पुस्तक में नहीं दी जा रही हैं। ये सब लोक कथाएँ पुस्तक में लिखी हुए क्रम से है यहाँ दी गयीं हैं। इस पुस्तक के पहले संकलन यानी “इटली की लोक कथाएँ–1” में इतालो की पुस्तक की 1–18 नम्बर की 15 कथाएँ दी जा रही हैं।

1 छोटा निडर जौन

एक बार की बात है कि इटली के एक शहर में एक बहुत ही निडर लड़का रहता था। उसका नाम था जौन। वह किसी से डरता नहीं था इसलिये सब उसको छोटा निडर जौन कह कर बुलाते थे।

एक बार उसको दुनियाँ देखने की इच्छा हुई तो उसने कुछ पैसे लिये और दुनियाँ देखने निकल पड़ा। चलते चलते वह एक सराय में आया और वहाँ आ कर उसने सराय के मालिक से खाना और रात भर रहने के लिये की जगह माँगी।

सराय का मालिक बोला — “आज तो पूरी सराय भरी हुई है। कोई जगह खाली नहीं है पर अगर तुमको डर न लगे तो मैं तुम्हें एक जगह ऐसी बता सकता हूँ जहाँ तुम आराम से ठहर सकते हो।”

छोटा निडर जौन बोला — “नहीं नहीं, मुझे डर नहीं लगता। मैं क्यों डरूँगा? तुम मुझे जगह बताओ।”

सराय का मालिक बोला — “लोग तो उस महल के बारे में सुन कर ही काँप जाते हैं क्योंकि वहाँ अभी तक जो भी गया वहाँ से ज़िन्दा वापस लौट कर नहीं आया। जो वहाँ बड़ी बहादुरी से रात गुजारने जाते हैं सुबह को वहाँ फ्रायर्स केवल उस आदमी की लाश लाने के लिये ही जाते हैं।”

जौन बोला — “कोई बात नहीं, मैं वहाँ जाऊँगा। तुम मुझे बस वह जगह बता दो कि वह जगह है कहाँ।”

सराय के मालिक ने उसको वह जगह बता दी और उसको एक लैम्प दे दिया। जौन ने उससे लैम्प लिया, पीने के लिये एक बोतल शराब ली और खाने के लिये एक सौसेज लिया और सीधा उस महल की तरफ चल दिया।

आधी रात को वह अपना खाना खाने के लिये खाने की मेज पर बैठा कि तभी उसने चिमनी से आती हुई एक आवाज सुनी — “क्या मैं इसे नीचे फेंक दूँ?”

जौन लापरवाही से बोला — “हाँ हाँ फेंक दो।”

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तभी चिमनी में से अँगीठी के ऊपर एक आदमी की टाँग आ गिरी। जौन ने एक गिलास शराब पी।

कुछ पल बाद वही आवाज फिर बोली — “क्या मैं इसे नीचे फेंक दूँ?”

जौन ने फिर उसी लापरवाही से जवाब दिया — “हाँ हाँ फेंक दो।” और एक और टाँग चिमनी में से अँगीठी के ऊपर आ गिरी।

इसी तरह से वह आवाज पूछती रही और जौन उसको उसी लापरवाही से कहता रहा — “हाँ हाँ फेंक दो।”

आखिर वहाँ दो टाँगें और दो हाथ आ कर गिर गये और फिर एक धड़। जैसे ही वह धड़ नीचे आ कर गिरा दोनों बाँहें और दोनों टाँगें उस धड़ से जुड़ गयीं और वहाँ एक बिना सिर वाला आदमी उठ कर खड़ा हो गया।

फिर एक और आवाज आयी — “क्या मैं इसे भी नीचे फेंक दूँ?” और जौन ने उसको फिर उसी लापरवाही से जवाब दिया — “हाँ हाँ इसे भी फेंक दो, तुमसे कहा न।”

फिर एक सिर नीचे आ गिरा। नीचे गिर कर वह सिर कूदा और उस बिना सिर वाले धड़ पर जा कर लग गया। वह तो अब सचमुच में ही एक बहुत बड़े साइज़ का आदमी बन गया था।

जौन ने उसकी तरफ अपना शराब का गिलास उठा कर कहा — “तुम्हारी तन्दुरुस्ती के लिये।” और वह गिलास उसने एक ही साँस में खाली कर दिया।

वह बड़े साइज़ का आदमी बोला — “अपना लैम्प उठाओ और मेरे साथ आओ।”

जौन ने अपना लैम्प तो उठाया पर वह वहाँ से हिला नहीं। इस पर वह आदमी बोला — “तुम आगे चलो।”

जौन बोला — “नहीं तुम आगे चलो।”

आदमी चिल्लाया — “मैं कहता हूँ कि तुम आगे चलो।”

जौन भी चिल्ला पड़ा — “तुम आगे चल कर मुझे रास्ता दिखाओ तभी तो मैं चलूँगा। मुझे क्या पता तुम मुझे किधर ले जाना चाहते हो।”

इस पर वह बड़े साइज़ का आदमी आगे आगे चल दिया और जौन रास्ते पर रोशनी दिखाता हुआ उसके पीछे पीछे चल दिया।

वे लोग उस महल के कमरों पर कमरे पार करते चले गये। इस तरह उन दोनों ने करीब करीब पूरा महल पार कर लिया। आखीर में जा कर उनको नीचे जाने के लिये एक सीढ़ी मिली। वे लोग उस सीढ़ी से नीचे उतर गये। सीढ़ी के आखीर में एक दरवाजा था।

आदमी ने जौन से कहा — “इसे खोलो।”

जौन बोला — “तुम खोलो।”

सो उस आदमी ने अपने कन्धे के धक्के से वह दरवाजा खोला तो उसके अन्दर भी नीचे जाने के लिये एक घुमावदार सीढ़ियाँ थीं। वह आदमी बोला — “चलो नीचे चलो।”

जौन फिर बोला — “तुम आगे चलो।”

सो वह आदमी फिर आगे आगे चला और जौन उसके पीछे पीछे चला।

सीढ़ियाँ उतर कर वे दोनों एक तहखाने में आ गये। उस तहखाने में पत्थर का एक टुकड़ा रखा था। आदमी ने कहा — “इसे उठाओ।”

जौन बोला — “यह कोई छोटा सा पत्थर नहीं है जिसको मैं उठा सकूँ। तुम उठाओ।”

उस आदमी ने उस बड़े से पत्थर को ऐसे उठा लिया जैसे वह कोई बड़ा सा पत्थर न हो कर पत्थर की गोली हो। उस पत्थर के नीचे सोने से भरे तीन बरतन रखे थे।

वह आदमी बोला — “इन बरतनों को ऊपर ले चलो।”

जौन बोला — “तुम ले कर चलो।”

उस आदमी ने एक एक करके वे तीनों बरतन उठाये और उनको ऊपर ले गया। फिर वे दोनों उन तीनों बरतनों को ले कर उसी कमरे में आ गये जिसमें जौन पहले बैठा हुआ था और जिसमें अँगीठी लगी हुई थी।

वह आदमी बोला — “ओ छोटे जौन, अब इसका जादू टूट गया।” यह कहने के बाद उस आदमी की पहले एक टाँग निकली और चिमनी से उड़ कर बाहर चली गयी।

वह बोला — “इसमें से एक बरतन तुम्हारा है।” फिर उसकी एक बाँह निकली और वह भी चिमनी से हो कर ऊपर चली गयी।

वह फिर बोला — “यह दूसरा बरतन उन फ्रायर्स का है जो यह सोचते हुए कल सुबह तुम्हारे मरे हुए शरीर को लेने आयेंगे कि तुम मर गये हो।” यह कहने के बाद उसकी दूसरी बाँह भी चिमनी से उड़ कर ऊपर चली गयी।

वह फिर बोला — “यह तीसरा बरतन उस गरीब आदमी का है जो सबसे पहले यहाँ आयेगा।” इतना कहने के बाद उसकी दूसरी टाँग भी उड़ गयी और अब वह आदमी अपने धड़ पर बैठा रह गया।

वह फिर बोला — “यह महल तुम्हारा है तुम इसमें आराम से रहो।” यह कहने के बाद उसका धड़ भी उसके सिर से अलग हो कर चला गया।

अब केवल उसका सिर ही वहाँ रह गया। वह फिर बोला — “इस महल के मालिक और उनके बच्चे यहाँ से हमेशा के लिये चले गये हैं।” यह कह कर वह सिर भी चिमनी से हो कर बाहर निकल गया।

जब सुबह हुई तो बाहर शोर मचा। फ्रायर लोग यह सोच कर कि जौन तो अब तक मर गया होगा उसके मरे हुए शरीर को रखने के लिये एक ताबूत ले कर आये थे पर वहाँ तो उन्होंने जौन को खिड़की पर खड़े हो कर अपना पाइप पीते देखा तो वे तो आश्चर्य में पड़ गये।

जौन ने उनको अपनी सारी कहानी सुना दी और उनको उनका सोने से भरा बरतन दे दिया। इस तरह जो फ्रायर्स जौन की लाश ले जाने आये थे वे सोने से भरा बरतन पा कर बहुत खुश हुए।

सोने से भरा वह तीसरा बरतन उस गरीब आदमी को दे दिया गया जो वहाँ सबसे पहले आया।

जौन उस महल में बहुत साल तक रहा और उस सोने को इस्तेमाल करता रहा। पर एक दिन उसने अपने पीछे देख लिया तो उसको अपनी परछाँई दिखायी दे गयी। उसको देख कर वह इतना डर गया कि वहीं मर गया।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओंको आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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