सोमवार, 18 सितंबर 2017

रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 7 रैवन और उल्लू // सुषमा गुप्ता

यह तब की बात है जब रैवन और उल्लू दोनों ही बरफ की तरह सफेद हुआ करते थे। एक दिन रैवन एक चट्टान पर बैठा बैठा खरगोश ढूँढ रहा था कि उसको उसका पुराना दोस्त उल्लू दिखायी दे गया। वह वहाँ से उड़ कर उसके पास जा बैठा।

वे दोनों एक दूसरे को बहुत दिनों से जानते थे और एक दूसरे से यह दावा करते थे कि वह एक दूसरे से ज़्यादा ताकतवर हैं।

रैवन ने उससे कहा - "चलो दोस्त, आज कुश्ती लड़ते हैं।"


उल्लू बोला - "मगर मैं आज तुम्हारे साथ कुश्ती लड़ना नहीं चाहता मेरा मूड नहीं है।" पर रैवन सुन ही नहीं रहा था।

रैवन ने फिर कहा - "चलो न उल्लू, चल कर कुश्ती लड़ते हैं।"

उल्लू ने फिर वही कहा - "नहीं रैवन, आज नहीं। आज मैं कुश्ती लड़ना नहीं चाहता। मेरा मूड नहीं है कुश्ती लड़ने का।"

पर रैवन यह सब सुनना नहीं चाहता था सो उसने उल्लू से वहीं कुश्ती लड़ना शुरू कर दिया। वे दोनों कुश्ती लड़ते हुए जमीन पर लुढ़कने लगे।

कि इतने में उल्लू को कीचड़ का एक गड्ढा दिखायी दे गया। बस उसने तुरन्त ही रैवन को कीचड़ के उस गड्ढे में धकेल दिया।

रैवन का सारा शरीर काली कीचड़ में सन गया। अब वह कहीं से भी सफेद नहीं रह गया था। यह देख कर रैवन बहुत गुस्सा हो गया।

उस चालाक रैवन ने उल्लू से कहा - "दोस्त उल्लू, तुमने मुझे इस गड्ढे में फेंक तो दिया पर अब कम से कम तुम मुझे अपना हाथ दे कर इस गड्ढे में से बाहर तो निकाल लो।"

पर उल्लू भी होशियार था। वह रैवन की चालों में आने वाला नहीं था। उल्लू बोला - "वह तुम ही थे जिसने कुश्ती शुरू की थी। मैंने तो तुमसे मना किया था कि मैं आज कुश्ती लड़ना नहीं चाहता। अब भुगतो।"

रैवन ने कुछ पल सोचा और फिर बोला - "दोस्त, अगर तुम मुझे यहाँ से निकाल दोगे तो मैं अपनी आधी चीज़ें तुम्हें दे दूँगा।"

उल्लू उसकी बातों में आ गया और उसकी आधी चीज़ों के लालच में उस गड्ढे की तरफ बढ़ा और उसने रैवन को उस गाढ़ी और काली कीचड़ में से बाहर निकाल लिया।

जैसे ही रैवन बाहर निकला उसने अपने पंख ज़ोर से फटकारे और उसके शरीर की बहुत सारी कीचड़ छिटक कर चारों तरफ बिखर गयी।

उनमें से कुछ छींटे उल्लू के शरीर पर भी जा पड़े जिससे उसके सफेद शरीर पर काले धब्बे दिखायी देने लगे।

इसी वजह से आज तक रैवन पूरा काला है और उल्लू काले धब्बे वाला है।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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