बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

इटली की लोक कथाएँ–2 : 1 राजा क्रिन // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–2

इटली की लोक कथाएँ–2

संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

Cover Page picture: Colosseum, Rome, Italy

Published Under the Auspices of Akhil Bhartiya Sahityalok

E-Mail: sushmajee@yahoo.com

Website: http://sushmajee.com/folktales/index-folktales.htm

Read More such stories at: www.scribd.com/sushma_gupta_1

Copyrighted by Sushma Gupta 2014

No portion of this book may be reproduced or stored in a retrieval system or transmitted in any form, by any means, mechanical, electronic, photocopying, recording, or otherwise, without written permission from the author.

Map of Italy

विंडसर, कैनेडा

मार्च 2016

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Contents

सीरीज़ की भूमिका 4

इटली की लोक कथाएँ–2 5

1 राजा क्रिन 7

2 जिद्दी आत्माएँ 22

3 मरजोरम का बरतन 24

4 बिलियर्ड खेलने वाला 33

5 जानवरों की भाषा 42

6 तीन मकान 53

7 किसान ज्योतिषी 63

8 भेड़िया और तीन लड़कियाँ 69

9 एक देश जहाँ कोई कभी नहीं मरता 73

10 सेन्ट जोसेफ का भक्त 82

11 तीन बुढ़ियें 85

12 केंकड़ा राजकुमार 96

13 सात साल तक चुप 107

14 पोम और पील 119

15 आधा नौजवान 133

16 खुश आदमी की कमीज 148

17 स्वर्ग में एक रात 154


सीरीज़ की भूमिका

लोक कथाएँ किसी भी समाज की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा होती हैं। ये संसार को उस समाज के बारे में बताती हैं जिसकी वे लोक कथाएँ हैं। आज से बहुत साल पहले, करीब 100 साल पहले, ये लोक कथाएँ केवल ज़बानी ही कही जातीं थीं और कह सुन कर ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दी जाती थीं इसलिये किसी भी लोक कथा का मूल रूप क्या रहा होगा यह कहना मुश्किल है।

आज हम ऐसी ही कुछ अंग्रेजी और कुछ दूसरी भाषा बोलने वाले देशों की लोक कथाएँ अपने हिन्दी भाषा बोलने वाले समाज तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से बहुत सारी लोक कथाएँ हमने अंग्रेजी की किताबों से, कुछ विश्वविद्यालयों में दी गयी थीसेज़ से, और कुछ पत्रिकाओं से ली हैं और कुछ लोगों से सुन कर भी लिखी हैं। अब तक 1200 से अधिक लोक कथाएँ हिन्दी में लिखी जा चुकी हैं। इनमें से 400 से भी अधिक लोक कथाएँ तो केवल अफ्रीका के देशों की ही हैं।

इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि ये सब लोक कथाएँ हर वह आदमी पढ़ सके जो थोड़ी सी भी हिन्दी पढ़ना जानता हो और उसे समझता हो। ये कथाएँ यहाँ तो सरल भाषा में लिखी गयी है पर इनको हिन्दी में लिखने में कई समस्याएँ आयी है जिनमें से दो समस्याएँ मुख्य हैं।

एक तो यह कि करीब करीब 95 प्रतिशत विदेशी नामों को हिन्दी में लिखना बहुत मुश्किल है़ चाहे वे आदमियों के हों या फिर जगहों के। दूसरे उनका उच्चारण भी बहुत ही अलग तरीके का होता है। कोई कुछ बोलता है तो कोई कुछ। इसको साफ करने के लिये इस सीरीज़ की सब किताबों में फुटनोट्स में उनको अंग्रेजी में लिख दिया गया हैं ताकि कोई भी उनको अंग्रेजी के शब्दों की सहायता से कहीं भी खोज सके। इसके अलावा और भी बहुत सारे शब्द जो हमारे भारत के लोगों के लिये नये हैं उनको भी फुटनोट्स और चित्रों द्वारा समझाया गया है।

ये सब कथाएँ “देश विदेश की लोक कथाएँ” नाम की सीरीज के अन्तर्गत छापी जा रही हैं। ये लोक कथाएँ आप सबका मनोरंजन तो करेंगी ही साथ में दूसरे देशों की संस्कृति के बारे में भी जानकारी देंगी। आशा है कि हिन्दी साहित्य जगत में इनका भव्य स्वागत होगा।

सुषमा गुप्ता

मई 2016

इटली की लोक कथाएँ–2

इटली देश यूरोप महाद्वीप के दक्षिण पश्चिम की तरफ भूमध्य सागर के उत्तरी तट पर स्थित है। पुराने समय में यह एक बहुत ही शक्तिशाली राज्य था। रोमन साम्राज्य अपने समय का एक बहुत ही मशहूर राज्य रहा है। उसकी सभ्यता भी बहुत पुरानी है – करीब 3000 साल पुरानी। इसका रोम शहर 753 बीसी में बसाया हुआ बताया जाता है पर यह इटली की राजधानी 1871 में बना था। इटली में कुछ शहर बहुत मशहूर हैं – रोम, पिसा, फ्लोरैन्स, वेनिस आदि। यहाँ की टाइबर नदी बहुत मशहूर है। यूरोप में लोग केवल लन्दन, पेरिस और रोम शहर ही घूमने जाते हैं।

रोम में रोम का कोलोज़ियम और वैटिकन सिटी में वहाँ का अजायबघर सबसे ज़्यादा देखे जाते हैं। पिसा में पिसा की झुकती हुई मीनार संसार के आदमी द्वारा बनाये गये आठ आश्चर्यों में से एक है। इटली का वेनिस शहर नहरों में बसा हुआ एक शहर है। इस शहर में अधिकतर लोग इधर से उधर केवल नावों से ही आते जाते हैं। यहाँ कोई कार नहीं है कोई सड़क पर चलने वाला यातायात का साधन नहीं है, केवल नावें हैं और नहरें हैं। शायद तुम्हें मालूम नहीं होगा कि असल में वेनिस शहर कोई शहर नहीं है बल्कि 118 द्वीपों को पुलों से जोड़ कर बनाया गया जमीन का एक टुकड़ा है इसलिये ये नहरें भी नहरें नहीं हैं बल्कि समुद्र का पानी है और वह समुद्र का पानी नहर में बहता जैसा लगता है।

इटली का रोम कैसे बसा? कहते हैं कि रोम को बसाने वाला वहाँ का पहला राजा रोमुलस था। रोमुलस और रेमस दो जुड़वाँ भाई थे जो एक मादा भेड़िया का दूध पी कर बड़े हुए थे। दोनों ने मिल कर एक शहर बसाने का विचार किया पर बाद में एक बहस में रोमुलस ने रेमस को मार दिया और उसने खुद राजा बन कर 7 अप्रैल 753 बीसी को रोम की स्थापना की। इटली के रोम शहर में संसार का मशहूर सबसे बड़ा कोलोज़ियम है जहाँ 5000 लोग बैठ सकते हैं। पुराने समय में यहाँ लोगों को सजाएँ दी जाती थीं।

इटली के अन्दर वैटीकन सिटी है जो ईसाई धर्म के कैथोलिक लोगों का घर है पर यह एक अपना अलग ही देश है। वहाँ इसके अपने सिक्के और नोट हैं। इसकी अपनी सेना है। पोप इस देश का राजा है। इसका अजायबघर बहुत मशहूर है। यह संसार का सबसे छोटा देश है क्षेत्र में भी और जनसंख्या में भी – 842 आदमी केवल 4 वर्ग मील के क्षेत्र में बसे हुए।

इटली की बहुत सारी लोक कथाएँ हैं। इटली की सबसे पहली लोक कथाएँ 1550 में ल्खिी गयी थीं। इतालो कैलवीनो का लोक कथाओं का यह संग्रह जिसमें से हमने ये लोक कथाएँ ली हैं इटैलियन भाषा में 1956 में संकलित करके प्रकाशित किया गया था। इनका सबसे पहला अंग्रेजी अनुवाद 1962 में छापा गया। उसके बाद सिलविया मल्कही ने इनका अंग्रेजी अनुवाद 1975 में प्रकाशित किया। फिर मार्टिन ने इनका अंग्रेजी अनुवाद 1980 में किया। ये लोक कथाएँ हमने मार्टिन की पुस्तक से ले कर अपने हिन्दी भाषा भाषियों के लिये यहाँ हिन्दी भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं। आशा है कि ये लोक कथाएँ तुम लोगों को पसन्द आयेंगी।

इतालो ने इस पुस्तक में 200 लोक कथाएँ संकलित की हैं। हमने उन 200 लोक कथाओं में से 125 लोक कथाएँ चुनी हैं। फिर भी क्योंकि वे बहुत सारी लोक कथाएँ हैं इसलिये वे सब पढ़ने की आसानी के लिये एक ही पुस्तक में नहीं दी जा रही हैं। ये सब लोक कथाएँ पुस्तक में लिखी हुए क्रम से ही यहाँ दी गयीं हैं।

इन लोक कथाओं का पहला संकलन “इटली की लोक कथाएँ–1” में हमने इतालो की पुस्तक की 1–18 नम्बर की कथाओं में से 15 लोक कथाएँ दी थीं। इस दूसरे संकलन में हम उसकी पुस्तक की 19–40 नम्बर तक की लोक कथाओं में से 17 लोक कथाएँ दे रहे हैं।

1 राजा क्रिन

एक बार एक राजा था जो एक सूअर के बच्चे को अपने बेटे की तरह मानता था। उसका नाम भी उसने राजा क्रिन रखा हुआ था।

राजा क्रिन महल में सब जगह घूमता रहता था और अक्सर ठीक से ही रहता था जैसे वह किसी शाही परिवार में जन्मा हो। हाँ कभी कभी उससे कुछ गड़बड़ जरूर हो जाती थी।

एक बार ऐसे ही एक मौके पर उसके पिता यानी राजा ने उसकी पीठ सहलाते हुए उससे कहा — “क्या बात है बेटा, तुम आज कल गड़बड़ क्यों कर रहे हो?”

राजा क्रिन बोला — “ओयिंक ओयिंक। मुझे एक पत्नी चाहिये। ओयिंक ओयिंक। मुझे बेकर की बेटी चाहिये।”

राजा ने अपने बेक करने वाले को बुलाया। उस बेकर के तीन बेटियाँ थीं। राजा ने उससे पूछा — “मेरा बेटा राजा क्रिन तुम्हारी सबसे बड़ी बेटी से शादी करना चाहता है। क्या तुम्हारी सबसे बड़ी बेटी मेरे सूअर बेटे से शादी करने के लिये तैयार है?”

बेकर तो यह सुन कर बड़े पशोपेश में पड़ गया। एक तरफ तो वह बहुत खुश था कि उसकी बेटी की शादी एक राजा के बेटे से हो रही थी पर दूसरी तरफ बहुत दुखी था कि उसकी बेटी की शादी एक सूअर से हो रही थी। उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे और क्या करे।

वह राजा को मना भी नहीं कर सकता था सो उस समय तो उसने राजा से कहा — “राजा साहब मैं अपनी बेटी से पूछ लूँ।” यह कह कर वह अपने घर चला आया।

पर जब उसने यह सब अपनी सबसे बड़ी बेटी को बताया तो उसने यह तय कर लिया कि वह उस सूअर से शादी कर लेगी।

बेकर की बेटी से उसकी शादी हो रही थी यह सुन कर तो राजा क्रिन के रोंगटे खड़े हो गये। वह बहुत खुश हो गया। अपनी शादी वाली रात को वह सारे शहर में जा कर बहुत खुश खुश चक्कर काट कर आया और अपने शरीर में कीचड़ भी खूब अच्छी तरह लपेट कर आया।

लौट कर वह अपनी पत्नी के कमरे में आया जहाँ उसकी पत्नी उसका इन्तजार कर रही थी। अपनी पत्नी को सहलाने के इरादे से राजा क्रिन ने अपने शरीर को अपनी पत्नी की स्कर्ट से कई बार मला।

इससे उसकी पत्नी की सारी स्कर्ट कीचड़ से लथपथ हो गयी। यह देख कर उसकी पत्नी का मन खराब हो गया। उसने राजा क्रिन को पलट कर सहलाने की बजाय पैर से मारा और बोली — “ओ गन्दे सूअर, चले जाओ यहाँ से। तुमने तो मेरी सारी स्कर्ट ही खराब कर दी।”

राजा क्रिन बोला — “तुमने मेरा अपमान किया है तुमको इसकी सजा भुगतनी पडेगी।” यह कह कर बेचारा राजा क्रिन वहाँ से चला गया।

उस रात बेकर की बेटी अपने बिस्तर में मरी पायी गयी। यह खबर सुन कर राजा बहुत दुखी हुआ। पर वह क्या करता।

फिर कुछ दिन बीत गये। अब उसका बेटा फिर से गड़बड़ करने लगा था। राजा ने उससे फिर पूछा — “बेटे अब तुम्हें क्या चाहिये।”

तो उसने फिर वही कहा — “ओयिंक, ओयिंक, मुझे एक पत्नी चाहिये। अब की बार मुझे बेकर की दूसरी बेटी चाहिये।”

राजा दुखी मन से बोला — “पर उसकी एक बेटी तो मर चुकी है वह तुमको अपनी दूसरी बेटी क्यों देगा।”

“मुझे नहीं मालूम पर मुझे तो वही चाहिये।”

राजा ने फिर अपने बेकर को बुलाया और उससे पूछा कि क्या वह अपनी दूसरी बेटी की शादी उसके बेटे से करना पसन्द करेगा? बेकर बेचारा क्या जवाब देता। वह तो अभी तक अपनी पहली बेटी के दुख से ही नहीं उभर पाया था।

उसने राजा को फिर वही जवाब दिया — “मैं अपनी बेटी से पूछ लूँ सरकार।” पर जब उसने अपनी दूसरी बेटी से पूछा तो आश्चर्य की बात कि वह भी उससे शादी करने के लिये राजी हो गयी।

शादी वाले दिन राजा क्रिन ने अपनी दूसरी पत्नी के साथ भी वैसा ही किया जैसा उसने अपनी पहली शादी वाले दिन अपनी पहली पत्नी के साथ किया था।

उस रात को भी वह सारे शहर में जा कर खुश खुश चक्कर काट कर आया और अपने शरीर में कीचड़ भी खूब अच्छी तरह लपेट कर आया।

जब वह कीचड़ में सना अपनी पत्नी के पास आया और उसकी स्कर्ट से अपना शरीर मला तो उसने भी वही कहा — “उफ़, ओ गन्दे सूअर। चले जाओ यहाँ से। तुमने तो मेरी सारी स्कर्ट ही खराब कर दी।”

यह सुन कर राजा क्रिन ने उससे भी यही कहा — “तुमने मेरा अपमान किया है तुमको इसका फल भुगतना पड़ेगा।” और अगले दिन बेकर की दूसरी बेटी भी अपने बिस्तर में मरी पायी गयी।

राजा यह सब देख कर बहुत दुखी हुआ पर कर कुछ नहीं सका। वह बेकर से बहुत शरमिन्दा था।

फिर कुछ समय निकल गया। राजा क्रिन ने फिर गड़बड़ शुरू की तो उसके पिता राजा ने उससे पूछा — “अब तुम्हें क्या चाहिये राजा क्रिन?”

“मुझे एक पत्नी चाहिये और वह भी बेकर की तीसरी बेटी।”

राजा कुछ गुस्से से बोला — “क्या तुम्हारे अन्दर अभी भी इतनी हिम्मत है कि तुम उस बेकर की तीसरी बेटी को अपनी पत्नी बनाने के लिये माँगो?”

“ओयिंक ओयिंक, मैं जरूर माँगूँगा। मुझे वह चाहिये।”

सो बेकर की तीसरी सबसे छोटी वाली बेटी को बुलवाया गया और उससे पूछा गया कि क्या वह राजा के सूअर बेटे से शादी करने के लिये तैयार थी। आश्चर्य कि बेकर की वह बेटी भी खुशी से उस सूअर से शादी करने के लिये तैयार हो गयी।

शादी के दिन फिर राजा क्रिन फिर पहले की तरह से सारे शहर का चक्कर काट कर आया और कीचड़ में लिपट कर अपनी पत्नी के कमरे में घुसा। पहले की तरह से ही उसने उसको सहलाने के लिये अपना शरीर अपनी पत्नी की स्कर्ट से मला।

पर इस लड़की ने उसको दुतकारा नहीं, वह उससे गुस्सा भी नहीं हुई बल्कि बदले में उसकी कीचड़ को अपने रूमाल से पोंछा और बोली — “मेरे सुन्दर क्रिन, मैं तुमको बहुत प्यार करती हूँ।” राजा क्रिन तो यह सुन कर बहुत खुश हो गया।

अगली सुबह जब सब लोग यह सोच रहे थे कि उनको फिर से एक लाश देखने को मिलेगी पर वहाँ तो कुछ और ही निकला। बेकर की तीसरी बेटी तो बहुत खुश खुश बाहर आयी।

यह देख कर तो सभी लोग बहुत खुश हो गये और बेकर तो बहुत ही खुश हो गया क्योंकि सबसे ज़्यादा दुखी तो वही था जिसने इस शादी की वजह से अपनी दो बेटियों खो दी थीं। अब कम से कम उसकी एक बेटी तो ज़िन्दा थी और वह भी राज घराने की बहू के रूप में।

राज्य भर में खूब खुशियाँ मनायी गयीं। राजा ने भी अपने बेटे की शादी की खुशी में खूब बड़ी दावत दी।

बेकर की लड़की को राजा क्रिन के बारे में कुछ शक था सो अगली रात उसको उत्सुकता हुई कि वह राजा क्रिन को देखे। सो उस समय जब वह सो रहा था तो उसने एक मोमबत्ती जलायी और उसको देखने चली।

वहाँ जा कर उसने देखा तो वहाँ तो राजा क्रिन की बजाय एक बहुत ही सुन्दर नौजवान लेटा हुआ था। पर जब वह अपने हाथ में मोमबत्ती ले कर उसको देख रही थी तो उसकी मोमबत्ती के मोम की एक बूँद पिघल कर उस नौजवान की बाँह पर गिर पड़ी। इससे वह नौजवान चौंक कर उठ पड़ा और बहुत गुस्सा हुआ।

वह बोला — “तुमने मेरा जादू तोड़ दिया इसलिये अब तुम मुझे कभी नहीं देख पाओगी।

तुम अब मुझे तभी देख पाओगी जब तुम मुझे ढूँढते ढूँढते सात बोतल आँसू बहाओगी, सात लोहे के जूते तोड़ोगी, सात लोहे की मैन्टिल्स और सात लोहे के टोप तोड़ोगी।” यह कह कर वह वहाँ से गायब हो गया।

यह सब देख कर वह लड़की बहुत दुखी हो गयी और इतनी दुखी हुई कि उसके पास उसको ढूँढने के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचा।

वह एक लोहार के पास गयी और उसने उससे सात जोड़ी लोहे के जूते, सात लोहे के मैन्टिल्स और सात लोहे के टोप बनवाये और उनको ले कर अपने पति को ढूँढने चल दी।

वह दिन भर रोती रही और चलती रही जब तक रात नहीं हो गयी। जब रात हुई तो वह एक पहाड़ पर थी। रात को ठहरने के लिये उसने वहाँ कोई जगह ढूँढने की कोशिश की तो उसको एक मकान मिल गया। उसने उस मकान का दरवाजा खटखटाया तो एक बुढ़िया ने उसका दरवाजा खोला।

एक लड़की को सामने खड़ा देख कर बोली — “ओ बेचारी लड़की, अफसोस मैं तुमको यहाँ शरण नहीं दे सकती क्योंकि मेरा बेटा हवा है। वह जब शाम को आता है तो वह घर की सारी चीज़ें उलट पलट कर देता है। जो भी उसके रास्ते में आता है वह उन सबको मिटा देता है।”

वह लड़की उससे प्रार्थना करने लगी कि वह किसी तरह से रात भर के लिये उसको वहाँ रुकने दे सुबह होते ही वह वहाँ से चली जायेगी पर इस समय वह कहाँ जायेगी। सो वह बुढ़िया उस पर दया करके उसको घर के अन्दर ले गयी।

थोड़ी देर बाद उस बुढ़िया का बेटा हवा आ गया और आते ही बोला — “आदमी, आदमी, मुझे आदमी की बू आ रही है। कहाँ है आदमी?” पर उसकी माँ ने उसको खाना खिला कर शान्त किया।

सुबह को हवा की माँ बहुत तड़के ही उठी और लड़की को उठाया और बोली — “इससे पहले कि मेरा बेटा जागे तुम यहाँ से चली जाओ और यह चेस्टनट लेती जाओ। यह मेरी तरफ से तुमको एक भेंट है। जब भी तुम किसी मुश्किल में पड़ जाओ तो इसको तोड़ लेना।”

लड़की ने वह चेस्टनट लिया, हवा की माँ को धन्यवाद दिया और अपने सफर पर चल दी। अगली रात होते होते वह एक दूसरे पहाड़ पर आ गयी। वहाँ भी उसको एक मकान मिल गया। वह उस मकान तक गयी और उसका दरवाजा खटखटाया।

वहाँ भी एक बुढ़िया ने ही उस मकान का दरवाजा खोला और बोली — “बेटी, मैं तुमको अपने घर में रख लेती पर मैं बिजली की माँ हूँ। ओह तुम बेचारी। अगर मेरा बेटा बिजली आ गया और उसने तुमको पकड़ लिया तो?”

लड़की ने उससे भी बहुत प्रार्थना की कि वह उसको केवल रात भर के लिये ठहरने की जगह दे दे इस रात में वह अकेली कहाँ जायेगी तो उसको उस लड़की पर दया आ गयी और वह भी उसको घर के अन्दर ले गयी।

जब बिजली घर लौटा तो उसने इधर उधर कुछ सूँघा और बोला — “आदमी? यह आदमी की बू कहाँ से आ रही है?” पर काफी ढूँढने पर भी वह उस लड़की को न पा सका। सो अपना खाना खाने के बाद वह सोने चला गया।

बिजली की माँ भी सुबह सवेरे तड़के ही उठी और उस लड़की को जगा कर उससे बोली — “इससे पहले कि मेरा बेटा जागे तुम यहाँ से चली जाओ और मेरी तरफ से यह अखरोट लेती जाओ तुम्हारे काम आयेगा। जब कभी तुम किसी भारी मुसीबत में हो तो इसको तोड़ लेना।”

लड़की ने उससे वह अखरोट ले लिया, उसको धन्यवाद दिया और अपने रास्ते चल दी। वह फिर सारा दिन चलती रही और जब रात हुई तो अब वह एक तीसरे पहाड़ पर थी। यहाँ भी उसको एक मकान दिखायी दे गया। यह गरज का मकान था।

मकान देख कर उसने वहाँ भी उस मकान का दरवाजा खटखटाया तो वहाँ भी एक बुढ़िया ने उसका दरवाजा खोला। उसने भी अपने बेटे की वजह से उसको रात को शरण देने से मना कर दिया। पर फिर वह भी इस लड़की के काफी प्रार्थना करने के बाद उसको अन्दर ले आयी और रात भर के लिये उसे शरण दी।

शाम को जब गरज आया तो उसको भी अपने घर में आदमी की बू आयी पर ढूँढने पर भी जब उसको कोई आदमी नहीं दिखायी दिया तो वह भी खाना खा कर सोने चला गया।

सुबह को गरज की माँ भी तड़के ही उठी और उस लड़की को जगा कर बोली — “इससे पहले कि मेरा बेटा उठे तुम यहाँ से चली जाओ और मेरी तरफ से यह हैज़लनट लेती जाओ। जब किसी मुसीबत में फँस जाओ तो इसको तोड़ लेना।”

लड़की ने उस बुढ़िया से वह हैज़लनट लिया, उसे धन्यवाद दिया और फिर अपने सफर पर चल दी। वह मीलों चलती रही और चलते चलते एक शहर में आ गयी।

वहाँ आ कर उसने सुना कि वहाँ की राजकुमारी की शादी एक सुन्दर नौजवान से होने वाली थी जो उसी राजकुमारी के किले में रहता था। इस लड़की को कुछ ऐसा लगा कि यही उसका पति था सो उसको इस शादी को रोकने के लिये कुछ करना था, पर वह क्या करे? वह किले में अन्दर कैसे घुसे?

उसको चैस्टनट की याद आयी तो उसने वह चैस्टनट निकाल कर तोड़ दिया। उसके अन्दर से बहुत सारे हीरे जवाहरात निकल कर नीचे बिखर गये।

उसने वे सब हीरे जवाहरात बटोरे और उनको ले कर राजकुमारी के महल की खिड़की को नीचे बेचने के लिये ले गयी और आवाज लगाने लगी — “हीरे जवाहरात ले लो। बहुत सुन्दर हीरे जवाहरात ले लो।”

राजकुमारी ने अपनी खिड़की से नीचे झाँका तो एक लड़की को हीरे जवाहरात बेचते पाया। उसने उस लड़की को अपने महल में बुला लिया और उससे उन हीरे जवाहरातों की कीमत पूछी।

लड़की बोली — “मैं ये सारे हीरे जवाहरात आपको मुफ्त दे दूँगी अगर आप मुझको अपने महल में ठहरे हुए नौजवान के सोने के कमरे में एक रात गुजारने की इजाज़त दे दें तो।”

यह सुन कर राजकुमारी डर गयी कि शायद यह लड़की उसके होने वाले पति से बात करे और उसको वहाँ से भगाने की कोशिश करे।

पर उसकी दासी ने कहा — “आप यह सब मेरे ऊपर छोड़ दीजिये। हम उस नौजवान को सोने वाली दवा खिला देंगे और वह रात भर सोता ही रहेगा, उठेगा ही नहीं। तो ऐसी हालत में यह कर ही क्या सकती है?”

सो उन्होंने यही किया। जब वह नौजवान सोने गया तो दासी ने उसको खाने के साथ सोने वाली दवा खिला दी और वह जा कर गहरी नींद सो गया।

दासी रात को उस लड़की को भी उस नौजवान के कमरे में छोड़ आयी। वहाँ जा कर लड़की ने देखा कि वह तो और कोई नहीं उसका अपना पति ही था। उसको देख कर वह बहुत खुश हुई कि उसको उसका खोया हुआ पति मिल गया।

कुछ रात बीतने पर वह उसके पास गयी और उसको जगाने लगी — “उठो देखो, मैं तुम्हारे लिये कितनी दूर चल कर आयी हूँ। मेरे सात लोहे के जूते फट गये हैं। सात लोहे के मैन्टिल्स और सात लोहे के टोप भी टूट गये हैं। मैंने सात बोतल आँसू भी बहाये हैं। इस सबके बाद ही मैंने तुम्हें देखा है। उठो, उठो।”

वह सुबह तक उसको उठाती रही पर राजकुमार तो उस सोने वाली दवा के असर से ऐसा सोया ऐसा सोया कि उसकी तो आँख ही नहीं खुली।

जब लड़की का धीरज छूट गया तो सुबह उसने अखरोट तोड़ दिया। उस अखरोट में से एक के बाद एक सिल्क और कई तरह के कपड़ों के सुन्दर सुन्दर गाउन निकलने लगे। हर नया गाउन उससे पहले वाले गाउन से कहीं ज़्यादा सुन्दर और कीमती होता।

जब दासी सुबह आयी तो वह तो यह तमाशा देख कर हक्का बक्का रह गयी कि उस लड़की के चारों तरफ गाउन ही गाउन बिखरे पड़े हैं। वह तुरन्त भागी भागी राजकुमारी के पास गयी और जा कर उसे सब बताया।

राजकुमारी भी यह सुन कर आश्चर्य में पड़ गयी और वह भी तुरन्त दौड़ी दौड़ी दासी के पीछे पीछे वहाँ आयी जहाँ उस लड़की ने अपने चारों तरफ इतने सारे गाउन फैला रखे थे। उन सब गाउन को देख कर उसका मन ललचा गया और उसने उस लड़की से उन सब गाउन की कीमत पूछी।

लड़की ने फिर वही शर्त रखी कि अगर वह उसको उस नौजवान के कमरे में एक रात और सोने देगी तो वह वे सारे गाउन उसको मुफ्त दे देगी।

इस बार भी राजकुमारी ने दासी के कहने पर उस लड़की को उस नौजवान के कमरे में सोने भेज दिया। और इस बार भी उन्होंने उस नौजवान को बेहोशी की दवा खिला कर सुला दिया।

पर इस बार उस लड़की को देर से उसके कमरे में ले जाया गया और जल्दी ही निकाल लाया गया सो उसकी यह दूसरी रात भी बेकार गयी और वह उसको न उठा सकी।

अब उस लड़की के पास केवल एक ही गिरी बची थी – हैज़लनट। कोई और चारा न देख कर उसने उस गिरी को भी तोड़ दिया। उस गिरी में से बहुत सारे घोड़े गाड़ियाँ निकल पड़े।

राजकुमारी ने उनको लेने के लिये जब उनकी कीमत पूछी तो उस लड़की ने उनकी भी वही कीमत माँगी कि वह उसको अगर उस नौजवान के कमरे में एक रात सोने दे तो वह उन सबको उसको मुफ्त ही दे देगी। राजकुमारी फिर राजी हो गयी।

राजा दो रात से कुछ अजीब सा महसूस कर रहा था सो उसको लगा कि उसके खाने में कुछ था जिसकी वजह से उसको ऐसा महसूस हो रहा था सो उस दिन भी राजकुमार को जब खाने के बाद वह दवा दी गयी तो राजकुमार ने उसको खाने का बहाना तो किया पर उनकी निगाह बचते ही फेंक दिया और जा कर सो गया।

रात को जब उस लड़की ने उससे फिर से बात की तो वह तुरन्त ही उठ गया। उसने देखा कि वहाँ तो उसकी पत्नी बैठी थी। उसको देख कर वह बहुत खुश हो गया।

उन घोड़ों और गाड़ियों के साथ उन दोनों को वहाँ से भागने में कोई परेशानी नहीं हुई। वे लोग अपने घर पहुँच गये और घर में खूब खुशियाँ मनायी गयीं।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया व इटली की बहुत सी अन्य लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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