बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

इटली की लोक कथाएँ–2 : 7 किसान ज्योतिषी // सुषमा गुप्ता

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एक बार एक राजा की बड़ी कीमती अँगूठी खो गयी। उसने उसको सब जगह ढूँढ लिया पर वह उसे कहीं भी नहीं मिली।

सो उसने ऐलान करवा दिया कि अगर कोई ज्योतिषी यह बतायेगा कि उसकी अँगूठी कहाँ है तो वह उसको ज़िन्दगी भर के लिये मालामाल कर देगा।

अब वहाँ एक किसान भी रहता था जिसका नाम था गैम्बारा । वह बहुत ही गरीब था। उसके पास बिल्कुल भी पैसे नहीं थे। वह पढ़ा लिखा भी नहीं था।

उसने सोचा — “क्या ज्योतिषी बनने का बहाना करना बहुत मुश्किल होगा? मुझे लगता है कि कम से कम मुझे ज्योतिषी बनने की कोशिश तो करनी चाहिये।” यही सोच कर वह राजा के पास चला।

वहाँ जा कर उसने राजा को बताया कि वह एक ज्योतिषी था और राजा की अँगूठी का पता बताने के लिये आया था। तो राजा उसको देख कर बहुत खुश हुआ और उसका कहा मान गया। उसने उसको एक कमरा दे दिया ताकि वहाँ वह शान्ति से बैठ कर पढ़ लिख कर उसकी अँगूठी का पता बता सके।

उस कमरे में सिवाय एक चारपाई, एक मेज पर रखी बहुत बड़ी ज्योतिष की किताब, कागज, कलम और दवात के अलावा और कुछ नहीं था।

गैम्बारा मेज पर बैठ गया और बिना एक भी शब्द समझे बूझे उस किताब के पन्ने पलटने लगा। कभी कभी वह उस किताब पर कलम से कुछ निशान भी बनाता जाता था।

वह क्योंकि पढ़ना लिखना तो जानता नहीं था इसलिये उसने उस किताब पर जो निशान बनाये थे वे तो बस निशान ही थे उनका कोई मतलब तो था नहीं। उसको ज्योतिष जानने का कुछ न कुछ तो बहाना करना ही था।

जब राजा के नौकर उसका दोपहर का और शाम का खाना ले कर आते थे तो जिस तरीके से वह किताब खोल कर रखता था और उस पर निशान बनाता था उससे उनको लगता था कि वह एक बहुत बड़ा ज्योतिषी था।

उधर गैम्बारा के मन में भी चोर क्योंकि वह ज्योतिषी तो था नहीं सो वह भी जब वे उसके कमरे में आते थे कन्खियों से उनकी तरफ देखता रहता था कि कहीं उनको उसका राज़ पता न चल जाये।

असल में ये ही वे नौकर थे जिन्होंने राजा की अँगूठी चुरायी थी सो जब भी गैम्बारा उनकी तरफ देखता तो उनको यह लगता कि वह उनको शक की निगाहों से देख रहा है जबकि वह तो उनको साधारण तरीके से ही उनकी तरफ देखता था क्योंकि उसको तो कुछ पता ही नहीं था – न तो ज्योतिष का और न ही चोरों का।

और उन नौकरों को यह लग रहा था कि गैम्बारा अपनी विद्या में बहुत होशियार है सो डर के मारे वे बेचारे ठीक से उसके आगे झुक भी नहीं सकते थे। उनको हमेशा ही यह लगता रहता कि कब वह अपनी ज्योतिष विद्या से उनको पहचान न जाये।

वे बेचारे “ओ ज्योतिषी, आपकी छोटी से छोटी इच्छा भी हमारे लिये आपका हुकुम है।” कह कर डर के मारे जल्दी से वहाँ से चले जाते।

अब गैम्बारा काई ज्योतिषी तो था नहीं और पढ़ा लिखा भी नहीं था पर किसान था इसलिये चालाक था। उसको कुछ शक हो गया कि ये नौकर अँगूठी के बारे में जरूर कुछ जानते हैं तभी ये लोग इस तरीके से बरताव कर रहे हैं सो उसने उनके लिये एक जाल बिछाया।

एक दिन जब उनमें से एक नौकर उसके लिये दोपहर का खाना ले कर आया तो वह अपनी चारपाई के नीचे छिप गया। नौकर जब उसके कमरे के अन्दर आया तो उसने कमरे में किसी को नहीं देखा।

गैम्बारा चारपाई के नीचे से ज़ोर से चिल्लाया — “यह उनमें से एक है। यह उनमें से एक है।” यह सुनते ही नौकर ने खाने की थाली नीचे रखी और डर के मारे भाग गया।

अब दूसरा नौकर आया तो उसने भी कुछ ऐसी ही आवाज सुनी जैसे वह जमीन के नीचे से आ रही हो — “यह उनमें से दूसरा है। यह उनमें से दूसरा है।” यह सुनते ही वह दूसरा नौकर भी भाग गया।

फिर तीसरा नौकर कमरे में आया तो वह चिल्लाया — “यह उनमें से तीसरा है। यह उनमें से तीसरा है।” यह सुन कर वह नौकर भी भाग गया।

अब तीनों नौकरों ने आपस में बात की — “लगता है कि इस ज्योतिषी को हमारी चोरी के बारे में पता चल गया है। अब अगर यह ज्योतिषी राजा को हमारे बारे में बता देता है तो हमारी तो नौकरी ही खत्म।”

सो उन लोगों ने उस ज्योतिषी के पास जाने का निश्चय किया और अपनी चोरी की बात मान लेने का फैसला किया। वे तीनों उस ज्योतिषी के पास गये।

उन्होंने शुरू किया — “हम लोग गरीब आदमी हैं। जो कुछ भी आपने मालूम किया है अगर आप वह राजा साहब से कह देंगे तो हम तो कहीं के नहीं रहेंगे। आप सोने से भरा हुआ यह बटुआ ले लीजिये और हमें छोड़ दीजिये।”

गैम्बारा ने वह बटुआ तो उनसे ले लिया और बोला — “मैं तुमको नहीं पकड़वाऊँगा पर इस शर्त पर कि तुम लोग जैसा मैं कहूँ वैसा ही करोगे।” वे चोर राजी हो गये।

गैम्बारा फिर बोला — “तुम अँगूठी लो और उस टर्की को बाहर खेत में निकाल कर उसको यह अँगूठी निगलवा दो। उसके बाद तुम सब कुछ मेरे ऊपर छोड़ दो मैं देख लूँगा।” नौकरों ने वैसा ही किया।

अगले दिन गैम्बारा राजा के पास गया और बोला कि काफी कुछ पढ़ने के बाद मैं यह जान गया हूँ कि वह अँगूठी कहाँ है।

राजा खुश हो कर बोला — “कहाँ है?”

“एक टर्की ने उसको निगल लिया है।”

हालाँकि ज्योतिषी की बात पर राजा को विश्वास तो नहीं हुआ कि कोई टर्की मेरी अँगूठी कैसे निगल सकती है पर फिर भी उसने उस टर्की को अपने सामने लाने का हुकुम दिया।

वह टर्की राजा के सामने लायी गयी और उसको काटा गया तो उसमें से अँगूठी निकल आयी।

इसके बदले में राजा ने ज्योतिषी को बहुत सारी दौलत दी और साथ में एक दावत भी दी जिसमें उसने अपने राज्य के और आस पास के राज्यों के बहुत सारे लोग बुलाये थे।

बहुत सारी खाने की चीज़ों में एक गैम्बैरी भी पकायी गयी थी। गैम्बैरी क्रेफ़िश का दूसरा नाम है।

क्रेफ़िश को उस देश में कोई जानता नहीं था। असल में दूसरे देशों को लोग उसको उस देश के राजा के लिये वह भेंट में ले कर आये थे और वहाँ के लोग इस मछली को पहली बार देख रहे थे।

राजा उस किसान से बोला — “तुम तो ज्योतिषी हो तुम बताओ कि इस प्लेट में रखी यह क्या चीज़ है।”

बेचारा किसान जिसने उसको पहले कभी सुना नहीं कभी देखा नहीं था अपने आप में बुदबुदाया — “आह गैम्बारा, गैम्बारा, आज तू मारा गया।”

राजा जो उस ज्योतिषी का असली नाम नहीं जानता था खुशी से चिल्लाया — “बहुत अच्छे, बहुत अच्छे ज्योतिषी। तुमने ठीक जाना। इसका नाम गैम्बेरी ही है। तुमसे बड़ा ज्योतिषी तो इस दुनियाँ में कोई है ही नहीं।”

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया व इटली की बहुत सी अन्य लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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