मंगलवार, 7 नवंबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–6 : 11 निक मछली // सुषमा गुप्ता

11 निक मछली[1]

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एक बार मसीना[2] में एक स्त्री रहती थी जिसके निक[3] नाम का एक बेटा था। वह अपना सारा समय चाहे दिन हो या रात समुद्र में तैर कर ही गुजारता था।

उसकी माँ उसको बस समुद्र के किनारे से ही आवाज देती रहती थी — “निक, पानी से बाहर आ, तू कोई मछली नहीं है जो हर समय पानी में ही रहता है।”

पर वह उसकी बात बिल्कुल नहीं सुनता और आगे तक तैरता चला जाता। इतना चिल्लाते चिल्लाते निक की माँ की ऑतें खराब हो गयीं।

एक बार जब उसकी माँ उसको समुद्र में से बाहर बुलाने के लिये बहुत देर तक चिल्लाती रही तो उसकी आवाज भी फटने लगी।

फिर भी वह जब किनारे पर नहीं आया तो उसके मुँह से निकला — “निक, जा तो तू फिर मछली ही बन जा।”

शायद स्वर्ग उस दिन सुन रहा था सो उसका कहा सच हो गया। देखते ही देखते निक आधा मछली और आधा आदमी बन गया। उसके पैर बतख की तरह जाल वाले थे और उसका गला मेंढक जैसा था।

उसके बाद तो निक ने फिर कभी किनारे पर कदम ही नहीं रखा। यह बात निक की माँ के दिल को इतनी लगी कि वह कुछ ही दिनों में मर गयी।

अब यह बात राजा के कानों तक पहुँची कि मसीना के समुद्र में एक ऐसा जानवर है जो आधा मछली है और आधा आदमी है।

यह सुन कर राजा ने अपने सब नाविकों को चेतावनी दे दी कि जो कोई नाविक निक को देखे तो वह उसको पकड़ कर उसके पास ले आये वह उससे बात करना चाहता था।

एक दिन एक नाविक खुले समुद्र की तरफ बढ़ता जा रहा था कि उसने निक को समुद्र में तैरते हुए देखा। वह वहीं नाव के पास ही तैर रहा था।

उसने निक से कहा — “मसीना के राजा तुमसे मिलना चाहते हैं।” निक तुरन्त ही राजा के महल के पास तक तैर गया।

राजा मुस्कुराते हुए उसके पास आया और उससे बोला — “निक मछली, तुम तो बहुत ही अच्छे तैराक हो। मैं चाहता हूँ कि तुम सिसिली टापू[4] के चारों तरफ तैरो और मुझे बताओ कि समुद्र कहाँ सबसे ज़्यादा गहरा है और वहाँ पर कौन सी ऐसी जगह ऐसी है जो देखने के काबिल है।”

राजा के हुकुम से निक मछली सिसिली टापू के चारों तरफ तैरा और थोड़े ही समय में राजा के पास वापस आ गया।

उसने बताया कि सारे समुद्र के नीचे उसने पहाड़, घाटियाँ, गुफाएं, और बहुत सारे तरीके की मछलियाँ देखीं। वह केवल उस जगह डरा जब वह लाइटहाउस[5] के पास से निकला क्योंकि वहाँ वह समुद्र की तली नहीं देख सका।”

राजा ने पूछा — “तो फिर मसीना किसके ऊपर बना हुआ है? यह तुमको वहाँ जा कर देखना हैे।”

निक वहाँ फिर गया और सारे दिन पानी के अन्दर रहा। वहाँ से लौट कर उसने राजा से कहा — “राजा साहब, मसीना एक चट्टान पर बना हुआ है और वह चट्टान तीन खम्भों पर रखी हुई है। एक खम्भा तो “आवाज” है दूसरा खम्भा है “लकड़ी का एक टूटा हुआ टुकड़ा” आीर तीसरा है “टूटा हुआ”।

ओ मसीना ओ मसीना एक दिन तुम बहुत पतले हो जाओगे

राजा को यह सुन कर बहुत आश्चर्य हुआ और उसने निश्चय किया कि वह निक को नैपिल्स[6] ले जायेगा जहाँ वह ज्वालामुखी वाली समुद्र की तली देखेगा।

निक वहाँ भी गया और वहाँ से आ कर राजा को बताया कि वहाँ उसको ठंडा पानी मिला, फिर गरम पानी मिला और कुछ जगह पर उसको ताजा पानी के स्रोत भी दिखायी दिये।

राजा को यह सब समझ में नहीं आया तो निक ने राजा से दो बोतलें माँगीं – एक गरम पानी से भरी हुई और एक ताजा पानी से भरी हुई।

पर राजा यह सुन कर बहुत दुखी था कि उसके लाइटहाउस के नीचे की जगह के नीचे तो तली ही नहीं थी। वह निक मछली को वापस मसीना ले गया और उससे कहा कि वह यह देख कर उसे बताये कि लाइटहाउस के नीचे कितनी गहरायी थी।

निक फिर पानी के नीचे गया और दो दिन तक वहाँ रहा। जब वह सतह पर लौटा तो उसने राजा को बताया कि उसको तो वहाँ उसकी तली ही दिखायी नहीं दी।

इसकी वजह यह थी कि नीचे की एक चट्टान धुँए का एक खम्भा सा ऊपर फेंक रही थी और उससे सारा पानी धुँधला हो रहा था।

अब राजा की उत्सुकता और बढ़ गयी। वह बोला — “तुम लाइटहाउस से नीचे कूद मार कर देखो।”

असल में यह लाइटहाउस भी धरती से निकली हुई एक चट्टान की नोक पर खड़ा था। पुराने समय में यहाँ एक आदमी रहता था जो जहाजों को समुद्र में ज्वार आने की खबर बिगुल बजा कर और एक झंडा लहरा कर दिया करता था ताकि वे गहरे समुद्र से दूर रहें।

निक मछली वहाँ से कूदा। राजा ने उसका एक दिन इन्तजार किया, दो दिन इन्तजार किया, फिर तीन दिन, पर निक का कोई पता नहीं था। अन्त में वह एक पीले पड़े भूत की सी शक्ल के साथ बाहर निकला।

राजा ने पूछा — “क्या बात है निक, क्या हुआ?”

“मैं तो डर के मारे मर ही गया था। मैंने वहाँ एक इतनी बड़ी मछली देखी जिसमें एक पूरा का पूरा जहाज आ जाये। वह मुझे न निगल ले इसलिये मैं मसीना को थामने वाले तीन खम्भों में से एक खम्भे के पीछे छिप गया।”

उसका यह हाल सुनते समय राजा का मुँह खुला का खुला रह गया। पर उसकी यह उत्सुकता तभी भी बनी रही कि लाइटहाउस के नीचे कितनी गहरायी थी।

पर निक ने मना कर दिया कि वह अब वहाँ नीचे जाने को तैयार नहीं था। वह बोला — “योर मैजेस्टी, मैं उधर जाने में बहुत डरता हूँ। मैं वहाँ जाने को तैयार नहीं हूँ।”

जब राजा उसको फिर से जाने को नहीं मना सका तो उसने अपना रत्न जड़ा ताज उतारा और उसको समुद्र में फेंक दिया और बोला — “निक जाओ, मेरा ताज ले कर आओ।”

“मैजेस्टी, यह तो बड़ा अच्छा विचार है। एक राज्य का ताज।”

राजा बोला — “निक, यह दुनियाँ में अपने किस्म का एक ही ताज है जाओ और उसको ले कर आओ।”

निक बोला — “अगर आपका हुकुम है तो मैं उसे जरूर ले कर आऊँगा। पर मेरा मन कहता है कि अब की बार मैं अगर नीचे गया तो मैं फिर वापस नहीं आ पाऊँगा।

मुझे थोड़ी सी मसूर दे दीजिये। अगर मैं बच गया तब तो मैं ऊपर आ जाऊँगा पर अगर आप मसूर ऊपर आती देखें तो समझ लीजियेगा कि मैं फिर कभी नहीं लौटूँगा।”

राजा ने उसको थोड़ी सी मसूर दे दी और निक समुद्र में कूद गया। उसके जाने के बाद राजा ने उसका बहुत इन्तजार किया। काफी बाद में समुद्र की सतह पर मसूर तैरती नजर आयी पर लोग निक मछली के वापस आने का अभी तक इन्तजार कर रहे हैं।


[1] Nick Fish (Story No 147) – a folktale from Italy from its Palermo area.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino”. Translated by George Martin in 1980.

[2] Messina – a port city in Italy on its Sicily Island – see its map above.

[3] Nick – the name of the boy

[4] Sicily Island is in the Mediterranean Sea in the South-West of Italy. See it in the map.

[5] Lighthouse – is tall tower on the seashore showing light to the ships. They are a guide point for ships.

[6] Naples is a historical port town of Italy situated on the Mediterranean Sea shore on the Western side of South of Italy.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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