रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु रचनाएँ आमंत्रित.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ http://www.rachanakar.org/2018/10/2019.html देखें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

लोककथा // 2 आश्चर्यजनक बरतन // नौर्स देशों की लोक कथाएँ–1 // सुषमा गुप्ता

साझा करें:

2 आश्चर्यजनक बरतन [1] एक बार की बात है कि डेनमार्क देश में एक आदमी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ एक छोटे से घर में रहता था। वे बहुत मेहनत करते...

2 आश्चर्यजनक बरतन[1]

एक बार की बात है कि डेनमार्क देश में एक आदमी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ एक छोटे से घर में रहता था। वे बहुत मेहनत करते थे और बहुत ही सादा सी ज़िन्दगी गुजारते थे।

clip_image002उनके खेतों पर उनकी सहायता करने के लिये उनके पास एक घोड़ा था। ताजा अंडों के लिये उनके पास कुछ मुर्गियाँ थीं। और उनके पास एक गाय थी जो उनके बच्चों के पीने के लिये काफी दूध दे देती थी और थोड़ा सा मक्खन भी।

उनके खेत में उनकी जरूरत को लायक गेंहू उग जाता था जिससे वे अपने घर के लिये रोटी बना लेते थे।

इस तरह गरीब होने के बावजूद वे खुश थे। फिर एक दिन वह हो गया जिसने उनकी ज़िन्दगी ही पलट दी।

उनके गाँव में एक बहुत ही अमीर और ताकतवर आदमी आया और उसने सबकी जमीनें ले ली। उसने उनसे उनके अपने ही घर में रहने का किराया लेना शुरू कर दिया। और उनका किराया भी बहुत ज़्यादा था। हालाँकि वह आदमी पहले से ही बहुत अमीर था पर वह और अमीर बनना चाहता था।

[post_ads]

अपने घर में से न निकाले जाने के लिये उस आदमी और उसकी पत्नी ने उनके पास जो कुछ भी था करीब करीब सारा कुछ बेच दिया था।

उन्होंने अपनी मुर्गियाँ बेच दी थीं, उन्होंने अपना घोड़ा बेच दिया था। अब उस घर को अपने पास रखने के लिये गाय को बेचने की बारी थी।

सो उस आदमी ने अपनी गाय के गले में एक रस्सी बाँधी और दुखी मन से उसको बेचने के लिये ले चला।

सड़क पर एक अजनबी जा रहा था। उस अजनबी ने उस आदमी से पूछा — “क्या तुम यह गाय बेचने के लिये ले कर जा रहे हो?”

आदमी बोला — “हाँ, तुम इसका कितना दाम दोगे? मुझे यह पैसा अपने घर का किराया और अपने परिवार के लिये खाना खरीदने के लिये चाहिये। ”

clip_image004वह अजनबी बोला — “मैं अपना यह करामाती बरतन तुमको इस गाय के बदले में देने को तैयार हूँ। यह बरतन तुमको हर चीज़ देगा जो भी तुम इससे माँगोगे। यह बहुत ही आश्चर्यजनक बरतन है। ”

किसान ने उस बरतन को देखा तो उसकी तीन टाँगें थीं, वह बहुत गन्दा था, और देखने में तो वह कुछ खास आश्चर्यजनक बरतन भी नहीं लग रहा था।

वह उसको अभी खड़ा खड़ा देख ही रहा था कि वह बरतन बोला — “खरीद लो मुझे, तुम जो भी चाहोगे वह तुम्हें मिल जायेगा। ”

यह सुनते ही किसान बोला — “अरे यह तो बोलता भी है तब तो यह वाकई आश्चर्यजनक है। ”

उसने खुशी खुशी अपनी गाय उस अजनबी को दे दी और उस गाय के बदले में वह बरतन खरीद कर उसको अपने घर ले गया।

घर पहुँचते ही उसकी पत्नी ने बरतन की तरफ देखते हुए पूछा — “कितने पैसे मिले गाय के? क्या इतने पैसे मिल गये कि हम अपने मकान का किराया दे सकें और परिवार के लिये खाना खरीद सकें?”

उसके पति ने कहा — “मैं उस गाय के बदले में यह बरतन ले आया हूँ। ”

पत्नी बोली — “लगता है तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है। यह बरतन तो इतना पुराना है कि इसमें तो हम अपना खाना भी नहीं पका सकते। अब हम क्या करेंगे?”

बरतन बोला — “तुम मुझे साफ करो और आग पर रखो तो तुमको वह सब कुछ मिल जायेगा जो तुम्हें चाहिये। ”

पत्नी तो यह सुन कर बहुत खुश हो गयी। यह बरतन तो बोलता है तो फिर यह यकीनन आश्चर्यजनक भी होगा। उसने तुरन्त ही बरतन साफ किया और उसे आग पर रख दिया।

बरतन बोला — “मैं भागता हूँ, मैं भागता हूँ। ”

पत्नी ने आश्चर्य से पूछा — “अरे तुम भागते कहाँ हो?”

बरतन बोला — “मैं तुम लोगों के पेट भरने के लिये बाहर भागता हूँ। ”

[post_ads_2]

और इससे पहले कि पत्नी उसको रोक सके वह यह कह कर चूल्हे पर से उतर कर दरवाजे से बाहर भागा और सड़क पर निकल गया। पत्नी तो उसको भागता हुआ देखती की देखती ही रह गयी।

वह अपनी तीन छोटी टाँगों पर भी पत्नी की दो लम्बी टाँगों से भी ज़्यादा तेज़ी से भाग रहा था। वह बरतन उस अमीर आदमी के घर में घुस गया जिसने गाँव वालों की जमीनें ले ली थीं और उसकी रसोई में चला गया।

अमीर आदमी की पत्नी ने उस बरतन को देखा तो बोली — “आहा, लगता है कि मेरे पति ने मेरे लिये यह नया बरतन खरीदा है। मैं इसमें आज एक नयी तरह की खीर बनाऊँगी। मैं अपने अमीर परिवार के लिये बहुत ही बढ़िया स्वादिष्ट खीर बनाऊँगी। ”

उस अमीर आदमी की पत्नी ने खीर बनाने के लिये उस बरतन में आटा, चीनी, मक्खन, किशमिश और बादाम आदि डाले। वह उनको चला कर आग पर रखने ही वाली थी कि बरतन बोला — “मैं भागता हूँ, मैं भागता हूँ। ”

यह कहता हुआ वह दरवाजे से बाहर निकला और सड़क पर आ गया। सब आने जाने वालों और गाड़ियों को हटाता हुआ वह भागा चला जा रहा था। अमीर आदमी की पत्नी तो बस उसको देखती ही रह गयी। वह तो उससे यह भी न पूछ सकी कि “तुम कहाँ भाग रहे हो?”

भागता भागता वह बरतन उस गरीब आदमी के घर आ गया। गरीब परिवार ने जब उस बरतन को अपने घर के दरवाजे में घुसते हुए देखा तो वह तो बहुत खुश हो गया।

उसने बरतन में झाँक कर देखा तो वह बरतन तो बहुत ही बढ़िया स्वादिष्ट खुशबूदार खीर से भरा हुआ था। जब वह बरतन सीढ़ियाँ चढ़ रहा था तो वे आपस में बोले — “देखो न यह कितना आश्चर्यजनक बरतन है। ” और वह बरतन जा कर फिर से चूल्हे पर बैठ गया।

उसमें परिवार के खाने के लिये बहुत सारी खीर थी। उनके अभी के खाने के बाद भी वह खीर उनके हफ्ते भर के लिये और पड़ोसियों को खिलाने के लिये भी बहुत थी।

अगले दिन उस बरतन ने फिर कहा — “मुझे साफ करो और आग पर रखो। ”

पति पत्नी दोनों ने मिल कर उस बरतन को फिर से घिस घिस कर चमका कर साफ किया। साफ करके उन्होंने उसे फिर आग पर रखा तो वह फिर बोला — “मैं भागता हूँ, मैं भागता हूँ। ”

पति पत्नी ने पूछा — “अरे तुम कहाँ भागे जाते हो?”

बरतन बोला — “मैं तुम्हारे अनाज रखने की जगह भरने के लिये भागा जाता हूँ। ”

और यह कह कर वह फिर घर से बाहर सड़क पर भाग गया। वह फिर उसी अमीर आदमी के अनाजघर में गया और जा कर उसके दरवाजे पर बैठ गया।

वहाँ के एक काम करने वाले ने उस बरतन को देखा तो बोला — “अरे इस चमकते हुए काले लोहे के बरतन को तो देखो कितना सुन्दर है यह। देखते हैं कि इसमें कितना गेंहू आता है। ”

clip_image006कह कर उन्होंने उस बरतन में एक बुशैल[2] गेंहू पलट दिया। इतना गेहूँ पलटने के बाद वे यह सोच रहे थे कि शायद वह भर जायेगा और उसमें से गेंहू बाहर गिर पड़ेगा पर उनके आश्चर्य का तो ठिकाना ही न रहा जब उन्होंने देखा कि उतने गेहूँ ने तो केवल उसकी तली ही छुई थी।

सो वे उसमें गेंहू भरते गये और भरते गये और जल्दी ही अनाजघर खाली हो गया।

बस तभी वह बरतन बोला — “मैं भागता हूँ, मैं भागता हूँ। ” और वह बरतन तो उन काम करने वालों को भी वहीं छोड़ कर सड़क पर भागा चला गया।

भागा भागा वह फिर से उस गरीब परिवार के घर आ गया और उनके अनाजघर में घुस गया। पति यह देख कर बहुत आश्चर्यचकित हुआ और उसने अपनी पत्नी को बुला कर उसे दिखाया।

दोनों ने मिल कर उस बरतन का गेंहू अपने अनाजघर में खाली कर लिया। अब तो उनके पास अपने लिये ही साल भर का खाना मौजूद नहीं था बल्कि उसमें से बहुत सारा गेंहू उन्होंने अपने पड़ोसियों को भी बाँट दिया।

कितना अच्छा बरतन था वह?

अगले दिन उस बरतन ने फिर कहा — “मुझे साफ करो और आग पर रखो। ”

पति पत्नी दोनों ने मिल कर फिर इस बरतन को घिस घिस कर चमका कर साफ किया। साफ करके उन्होंने उसे फिर आग पर रखा तो वह फिर बोला — “मैं भागता हूँ, मैं भागता हूँ। ”

पति पत्नी दोनों ने फिर पूछा — “अरे तुम कहाँ भागे जाते हो?”

बरतन बोला — “मैं तुम्हारे मकान का किराया देने जाता हूँ। ”

अमीर आदमी के पास बहुत पैसा था। उस पैसे को रखने और गिनने के लिये उसके पास एक अलग घर था।

सो वह बरतन उसके उस पैसे वाले घर तक पहुँच गया जिसमें वह अपना पैसा रखता था। वहाँ वह अमीर आदमी अपने उस घर का दरवाजा खोल कर अपना पैसा गिनने के लिये अन्दर जा रहा था।

बरतन उसको पीछे छोड़ कर आगे निकल गया और फर्श पर उस आदमी के पास ही बैठ गया जहाँ वह पैसे गिनने वाला था। अमीर आदमी ने सोचा ऐसा लगता है कि मेरी पत्नी ने मेरे पैसे रखने के लिये कोई नया बरतन खरीदा है। वह बहुत खुश हुआ।

वह उन पैसों को गिनने लगा जो उसने पिछले महीने कमाये थे और उन पैसों को गिन गिन कर वह उस बरतन में डालने लगा। धीरे धीरे वह बरतन भर गया। अब वह आदमी वहाँ से बाहर निकला।

बरतन बोला — “मैं भागता हूँ, मैं भागता हूँ। ” कह कर वह बरतन फिर एक बार उस आदमी से पहले ही भाग कर दरवाजे से बाहर निकल गया।

अपने पैसे को इस तरह जाते देख कर उस अमीर आदमी ने उस बरतन का पीछा किया पर वह अपनी तीन टाँगों पर इतनी तेज़ भाग रहा था कि वह आदमी उसको पकड़ ही नहीं सका।

बरतन भागता भागता फिर अपने उस गरीब परिवार के घर आ पहुँचा। वे गरीब लोग बरतन को वापस आया देख कर फिर से बहुत खुश थे।

इस बार तो वह बरतन इतने सारे पैसों से भरा हुआ था कि वे उससे सालों तक किराया दे सकते थे। और वे ही नहीं बल्कि उनके पड़ोसी भी।

अगले दिन उस बरतन ने फिर कहा — “मुझे साफ करो और आग पर रखो। ”

पति पत्नी दोनों ने मिल कर फिर उस बरतन को घिस घिस कर चमका कर साफ किया। साफ करके उन्होंने उसे आग पर रखा तो वह फिर बोला — “मैं भागता हूँ, मैं भागता हूँ। ”

पति पत्नी ने फिर पूछा — “अब तुम कहाँ जाते हो?”

बरतन बोला — “अब मैं तुम लोगों के लिये न्याय माँगने जाता हूँ ताकि तुम्हारी यह परेशानी हमेशा के लिये दूर हो जाये। ” यह कह कर वह बरतन फिर भाग गया और फिर से उस अमीर आदमी के घर पहुँचा।

अमीर आदमी ने देखा कि एक बरतन सड़क पर भागा जा रहा है। वह बरतन तो उसी के मकान की तरफ ही आ रहा था। उसने उस बरतन को पहचान लिया।

वह गुस्से से बोला — “तो तुम ही वह बरतन हो जो मेरा दलिया ले कर भागे थे। तुम ही वह बरतन हो जो मेरे अनाजघर से गेंहू ले कर भागे थे जो मैंने हर एक के खेत से इकठ्ठा किया था।

और तुम ही वही बरतन हो जो मेरे कमरे से वह पैसे ले कर भी भागे थे जो मैंने हर एक का घर ले कर इकठ्ठा किया था। अब तुम यहाँ आओ तो। मैं देखता हूँ तुमको। ”

कह कर वह आदमी उस बरतन पर कूद पड़ा और उसको कस कर पकड़ लिया। वह उसे छोड़ ही नहीं रहा था।

पर “मैं भागता हूँ, मैं भागता हूँ। ” कहता हुआ वह बरतन वहाँ से फिर भाग लिया।

आदमी चिल्लाया — “अब तुम जहाँ चाहो वहाँ जाओ चाहे उत्तरी ध्रुव जाओ और चाहे दक्षिणी ध्रुव, पर अबकी बार मैं तुमको नहीं छोड़ने वाला। ” कह कर उसने उस बरतन को और कस कर पकड़ लिया। सो वह बरतन उस आदमी को लिये हुए ही भागता रहा।

गरीब लोगों ने उसको अपने घर के दरवाजे के सामने से गुजरते देखा पर वह वहाँ रुका नहीं और चिल्ला कर बोला — “मैं तुम्हारी मुसीबत को साथ लिये जा रहा हूँ। ”

उनको नहीं मालूम कि वह कहाँ तक दौड़ा। यह भी हो सकता है कि वह उत्तरी ध्रुव तक दौड़ गया हो या फिर दक्षिणी ध्रुव ही चला गया हो क्योंकि उसके बाद उन दोनों को फिर किसी ने कभी नहीं देखा।

वह गरीब परिवार अब गरीब नहीं रह गया था। उनको अपनी जमीन वापस मिल गयी थी। उनके पास अब कपड़ों के लिये पैसे थे सो उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू कर दिया। गाँव में सब लोग अब खुशी से रहने लगे थे।

clip_image004[1]


[1] The Wonderful Pot - a folktale from Denmark, Europe. Adapted from the Web Site :

http://www.mikelockett.com/stories.php?action=view&id=218

Collected and retold by Mike Lockett

[2] A Bushel is about 36 Kilograms, or by old Indian measure about one mound – 40 Ser – see the measure’s picture above.

---

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से सैकड़ोंलोककथाओं के पठन-पाठन का आनंद आप यहाँ रचनाकार के  लोककथा खंड में जाकर उठा सकते हैं.

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3841,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2786,कहानी,2116,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,17,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,831,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,4,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1919,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,648,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,688,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,55,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: लोककथा // 2 आश्चर्यजनक बरतन // नौर्स देशों की लोक कथाएँ–1 // सुषमा गुप्ता
लोककथा // 2 आश्चर्यजनक बरतन // नौर्स देशों की लोक कथाएँ–1 // सुषमा गुप्ता
https://lh3.googleusercontent.com/-eC2gRLrg7mo/W9CVrzhhV5I/AAAAAAABE1w/B9YMV9byCnEFx-m_QyQGKc04SJu718MSgCHMYCw/clip_image002_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-eC2gRLrg7mo/W9CVrzhhV5I/AAAAAAABE1w/B9YMV9byCnEFx-m_QyQGKc04SJu718MSgCHMYCw/s72-c/clip_image002_thumb?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2018/10/2-1.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2018/10/2-1.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ