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गिरगिट – विनोद सिल्ला की कविताएँ

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1.

गिरगिट

मेरे घर के सामने
एक पेड़ पर
गिरगिट बैठा था
अपने रंग बदलने के
हुनर पे ऐंठा था
बोला रंग बदलने में
नहीं है कोई
मेरा सानी
बड़ा इतरा रहा था
मचलता जा रहा था
मैंने कहा
गिरगिट भाई
आज इंसान
जितने रंग बदलता है
जिस स्फूर्ति से बदलता है
उसका कोई मुकाबला नहीं
इतना सुनके
गिरगिट शर्मिंदा हो गया
फिर उसने कभी
अपने हुनर पर
गर्व नहीं किया

-विनोद सिल्ला©

2.

शोपिंग

घर से तैयार हो
लेकर पैसे
सपरिवार
भरे बाजार
हम लुटने निकले
लूटने वाले
चम्बल के
डाकू नहीं
शहरी थे इज्जतदार
दूसरे लोग भी
बढ़ा रहे थे हौंसला
कह रहे थे
शोपिंग करने
निकले हो
"सिल्ला" जी

-विनोद सिल्ला

3.

जाति

मैं
जहाँ-जहाँ
जाता हूँ
मेरे गुण-दोष
मेरे साथ
जाएँ या न जाएँ
पर मेरी जाति
मेरे साथ
अवश्य चली
जाती है
ऐसा हो रहा है
महसूस कि
पता नहीँ
भगवान सर्वव्यापक
है या नहीँ
परंतु भारत में
जाति सर्वव्यापक
जरूर है

-विनोद सिल्ला©

4.

माँ

माँ ने
अपने दोनों बेटों का
पालन-पोषण
बङे ही लाड- चाव
से किया
उनको पढाया-लिखाया
काबिल बनाया
और वे अब शायद
मां से भी बङे हो गए
आज वे दोनों
अलग हो गए
घर के बीचोंबीच
दीवार बन गई
घर का सारा
सामान बांट लिया
कोशिश की आखिर उन्होंने
अपनी जननी
अपनी मां को
बांटने की
तो फैंसला हुआ
मां को
दोनों बारी-बारी
रखेंगे एक-एक महीना

-विनोद सिल्ला

5.

जुदाई

मैं
कितनी दूर से
उससे मिलने आया
पर वो रो रहा था
उसे गम था
किसी से बिछुङने का
वो बहा रहा था आंसू
कोई नहीं समझ रहा था
उसकी पीङा
सब के सब
उसके बहते आंसू
रोमांच से देख रहे थे
कह रहे थे
क्या खूबसूरत है झरना
पर वास्तव में
नदी के
बिछङने के
गम में
पहाड़ रो रहा था

-विनोद सिल्ला

6.

हवा की सीख

फूल खिले हुए थे
हवा फूलों को
छेड़ रही थी
परिवेश को
महका रही थी
आलम को खुशनुमा
बना रही थी
काश ये इंसान भी
हवा से ये हूनर
सीख लेता
तो सारा जहां
खुशबू से भर जाता

-विनोद सिल्ला

7.

मोहब्बत

मुझे
खूब दबाया गया
सूलियो पर
लटकाया गया
मेरा कत्ल भी
कराया गया
मुझे खूब रौंदा गया
खूब कुचला गया
मैं बाज़ारों में निलाम हुई
गली गली बदनाम हुई
तख्तो-ताज भी
खतरा मानते रहे
रस्मो-रिवाज़ मुझसे
ठानते रहे
जबकि मैं एक
पावन अहसास हूँ
हर दिल के
आस-पास हूँ
बंदगी का
हसीं प्रयास हूँ
मैं हूँ महोब्बत
जीवन का पहलू
खास हूँ

-विनोद सिल्ला

8.

ऊंची दुकान फीका पकवान

उपवन में
बैंगनी फूल
खिले हुए थे
बहुत सुंदर
लग रहे थे
मैं फूलों के गया पास
ये क्या
इनमें सुगंध तो
है ही नहीं
ये तो बिलकुल
आज के
इंसान की तरह
दिखावा प्रधान
लगे मुझे
ऊंची दुकान फीका पकवान

-विनोद सिल्ला

9.

वोट

तेरा वोट उन्हें
बैठा देगा
सिंहासन पर
लगा देगा
उनकी गाड़ी पर
लाल बत्ती
वो अपनों को
ठेके दिलवाएंगे
आला अधिकारियों की
कसरत करवाएंगे
लूट-लूट के वतन को खाएंगे
पूरे पाँच साल तक
बदले में
तुझे क्या मिलेगा
सिर्फ एक बोतल शराब
जिसका नशा
मतदान के तुरंत बाद
उतर जाएगा

-विनोद सिल्ला

10.

लज़ीज खाना

मैं जब
कई दिनों बाद
गया गाँव
मां ने
अपने हाथों से
बनाई रोटी
कद्दू की बनाई
मसाले रहित सब्ज़ी
रोटी पर रखा मक्खन
लस्सी का
भर दिया गिलास
खाने में जो
मजा आया
इसके सामने मुझे लगा
किसी रैस्टोरैंट का
शाही पनीर
कुछ भी नहीं

-विनोद सिल्ला

परिचय

नाम - विनोद सिल्ला
शिक्षा - एम. ए. (इतिहास) , बी. एड.
जन्मतिथि -  24/05/1977
संप्रति - अध्यापन

प्रकाशित पुस्तकें-

1. जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
2. खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
3. मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
4. यह कैसा सूर्योदय (काव्यसंग्रह)
5. जिंदा होने का प्रमाण(लघुकथा संग्रह)

संपादित पुस्तकें

1. प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
2. मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
3. दुखिया का दुख (काव्यसंग्रह)

सम्मान

1. डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2011
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
2. लॉर्ड बुद्धा राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2012
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
3. उपमंडल अधिकारी (ना) द्वारा
26 जनवरी 2012 को
4. दैनिक सांध्य समाचार-पत्र "टोहाना मेल" द्वारा
17 जून 2012 को 'टोहाना सम्मान" से नवाजा
5. ज्योति बा फुले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2013
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
6. ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा
14-15 जून 2014 को ऊना (हिमाचल प्रदेश में)
7. अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा
कैथल  में (14 जुलाई 2014)
8. लाला कली राम स्मृति साहित्य सम्मान 2015
(साहित्य सभा, कैथल द्वारा)
9. दिव्यतूलिका साहित्य सम्मान-2017
10. प्रजातंत्र का स्तंभ गौरव सम्मान 2018
(प्रजातंत्र का स्तंभ पत्रिका द्वारा) 15 जुलाई 2018 को राजस्थान दौसा में
11. अमर उजाला समाचार-पत्र द्वारा
'रक्तदान के क्षेत्र में' जून 2018 को
12. डॉ. अम्बेडकर स्टुडैंट फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा
साहब कांसीराम राष्ट्रीय सम्मान-2018
13. एच. डी. एफ. सी. बैंक ने रक्तदान के क्षेत्र में प्रशस्ति पत्र दिया, 28, नवंबर 2018

पता :-

विनोद सिल्ला

गीता कॉलोनी, नजदीक धर्मशाला
डांगरा रोड़, टोहाना
जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
पिन कोड-125120
vkshilla@gmail.com

कविता 2542436770247286148

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  1. समसामयिक परिवेश का यथार्थ चित्रण। बधाई एवं शुभकामनाएं

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  2. शुक्रिया अनिल कुमार देहरी रायगढ़ जी

    उत्तर देंहटाएं

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