कहानी ( जीवनार्थ) "साहस की आँधी" // वन्दना पुणतांबेकर

SHARE:

शादी के मण्डप में गाने औऱ डीजे की धूम से वहां का माहौल बड़ा ही शोर-गुल से भरा था . मीना ने स्वागत द्वार से देखा और अतिथियों की भीड़ को चीरते ह...

image
शादी के मण्डप में गाने औऱ डीजे की धूम से वहां का माहौल बड़ा ही शोर-गुल से भरा था . मीना ने स्वागत द्वार से देखा और अतिथियों की भीड़ को चीरते हुए वह लड़के के पिता के पास पहुँची. उसके पीछे सुषमा ,माला,कुमुद भी उसके साथ पहुँच गई. शादी के रस्मों की तैयारियां चल र लड़के के पिता ने इनको देखा तो थोड़े नर्वस हो गए. तभी मीना ने जोर-जोर से ताली बजाकर हाय, हाय की ऊंची आवाज में बोलने लगी.
इनकी आवाजों को सुनकर डीजे की आवाज बंद हो गई. मंडप में एकदम सन्नाटा छा गया। मीना ने जो नेक मांगा था. वह लड़के के पिता ने देने से इंकार किया तो ,उन तीनों ने अपने ही अंदाज में नेक मांगने का तरीका अपनाया. लड़के की शादी में जो नेक मिलना था. आज वह उम्मीद से कम था. वह चारों शादी के मंडप से नेक लेकर लौट रही थी. तभी अचानक तेज बारिश होने लगी .भागते हुए वह चारों एक शेड के नीचे जा पहुँची. रात गहरा गई थी.


तभी मीना ने अपना गुस्सा कुमुद पर निकला . वहीं सड़क पर उस पर चिल्लाने लगी.
बोली..."तुम हमारी बिरादरी में एक धब्बा हो,तुमने अभी तक अपने बिरादरी के तौर-तरीके नहीं सीखे. यदि तुम अगली बार भी इसी तरह व्यवहार करोगी, तो में तुम्हें इस बिरादरी से बर्खास्त कर दूँगी. कुमुद के कमरे की चाबी उसके कदमों में फेंककर तीनों रिक्शा पकड़ कर चली गई.


चीरता हुआ सन्नाटा कुमुद के कानों में कुछ अनकही सी दास्तां बयां कर रहा था. सिसकती धड़कनों से उसने चाबी उठाई. और बारिश थमने का इंतजार करने लगी.
कई सालों से वह मीना की धमकियां सहते-सहते तंग आ चुकी थी. यह उसके जिंदगी की एक सबसे बड़ी मजबूरी थी. कि वह किन्नरों के रंग-ढंग को नहीं अपना पा रही थी.


कुमुद तन से तो किन्नर थी। पर मन और भावनाओं से एक अति संवेदनशील औरत थीं. उसे यह सब करना अच्छा नहीं लगता था . सात साल की उम्र में ही उसे अपने परिवार से दूर होकर इस बिरादरी में आना पड़ा. जब उसकी माँ को पता चला कि वह एक सामान्य लड़की नहीं है. फिर भी माँ ने पिता से छुपाकर कुमुद की सात साल तक परवरिश की। माँ नहीं चाहती थी. कि कुमुद उससे अलग हो. मगर समाज और परिवार के सामने उसे अपना निर्णय बदलना पड़ा. औऱ कुमुद को किन्नरों के समाज में भेजना पड़ा. वक़्त की मार ने कुमुद को ओर भी तोड़ दिया था. सात साल की उम्र से उसे किन्नर समाज में रहने पर मजबूर कर दिया था. बचपन से ही इस बिरादरी में छोड़ देते तो आज शायद उसकी दुनिया भी सुषमा मीना जैसी होती .


वह अकेली वही खड़ी बारिश रुकने का इंतजार करने लगी.
रात बहुत गहरा गईं थी.,कुमुद को अपनी करनी पर अब मलाल हो रहा था. वह सोच रही थी. कि काश वह भी इनके साथ घर चली जाती तो उसे अभी अकेला नहीं रहना पड़ता..
मौसम ने बड़ा ही भयानक रुख ले लिया था. बारिश और बिजली की चमक लगातार अपना क्रोध रूप दिखा रही थी.
कुमुद को कोई रिक्शे वाला भी नजर नहीं आ रहा था. तेज बारिश और रात गहरा ने की वजह से सड़कों पर सन्नाटा पसर गया था. वह उसी शेड के नीचे बारिश रुकने का इंतजार करने लगी.
तभी एक कार आकर रुकी .कुमुद ने उससे लिफ्ट मांगी. कार का दरवाजा खोल कर वह अंदर बैठ गई भीगी होने के कारण सीट पर भी नमी आ गई थी. तभी कार चालक के उससे पूछा....,"कहां जाना है मैडम....?
उसने अपना पता बताया ,जब उसे पता चला कि उसने एक किन्नर को लिफ्ट दी है. तो उसने यह बोल कर उतार दिया कि वह उस राह पर नहीं जा रहा है.


बारिश अब थम सी गई थी. कुमुद अंधेरे को चीरते हुए पैदल ही घर की ओर चल पड़ी. तभी उसके कानों में किसी के रोने की आवाज सुनाई पड़ी. उसने देखा कि पास ही कूड़े के ठेर में कुछ हलचल दिखाई दी.
पहले तो वह घबरा गई ,मगर हिम्मत से पास जाकर देखा तो वहां एक नवजात शिशु कपड़े में लिपटा पड़ा था. बारिश की वजह से वह पूरी तरह भीग चुका था. कुमुद ने बिना सोचे उस शिशु को गोद में उठा लिया वह एक लड़की थीं.
इस काली रात में उसे ऐसा महसूस हो रहा था. कि उसे कोई चमकता हुआ हीरा मिल गया हो. वह उसे लेकर रेलवे स्टेशन की ओर चल पड़ी. सुबह की पहली पौ फटने वाली थी. उसने यह फैसला लिया कि वह अब इस शहर को छोड़कर कहीं और बस जायेगी.
उसने उस बच्ची की चाय वाले से दूध और चम्मच लेकर उसे दूध पिलाया ओर अपने सूखे आँचल में लपेट लिया. गर्माहट की वजह से वह सो चुकी थी.
कुमुद को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था. कि वह कहां जाय, क्या करे.


तभी सामने से सुषमा आते हुए नजर आई. जैसे ही उसने सुषमा को देखा वह पास ही बने बाथरूम में घुस गई. सुषमा ने उसे देख लिया था. वह भी उसके पीछे बाथरूम में घुस गई . उसने कुमुद की गोद में बच्ची देख हैरानी से पूछा...",कहां से चुराया रे इसे.....? , चल पुलिस को दे देते हैं. दीदी को पता चला तो तेरी खाल नोच लेगी,रात का गुस्सा थूक दे,जल्दी चल यहाँ से. वह गिड़गिड़ा कर बोली...," मैंने चुराया नहीं है, नाले के पास कचरे के ठेर पर मिली , लड़की है. में इसे अपने पास ही रखूंगी. मुझे पुलिस के पास नहीं जाना ....।
सुषमा चिल्लाई..,"पागल हो गई है क्या....?,क्या अपनी बिरादरी में कोई इसे पालने देगा.? इसे क्या नाम देगी ,जल्दी चल पुलिस को सौप देते हैं.
सुषमा उनका हाथ खींचकर जबरदस्ती ले जाने लगी.


आज कुमुद को न जाने कहा से इतनी ताकत आ गई थी. कि वह अपनी जगह से जरा भी नहीं हिली .
कुमुद बोली..",मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो,में वैसे भी इतने सालों में तुम्हारे रहन-सहन को नहीं अपना सकी,अब तो मेरे जीने की यही एक उम्मीद है,मुझे मत रोको.
सुषमा को भी लगा कि शायद कुमुद सच कह रही है. वह आये दिन मीना की डांट फटकार खाती रहती हैं. इसे यह जीने की उम्मीद मिली है. तो में इसे नहीं रोकूँगी. उसने कुमुद को अपने ब्लाउज से कुछ रुपये निकालकर दिये और उसके सिर पर हाथ रख कर बोली..,"कर ले मन की भगवान तेरी हमेशा मदद करे, कभी भी जरूरत पड़े तो मुझे याद करना, में यहां सब कुछ सम्भाल लूंगी.
उसकी आँखों में आंसू देख कुमुद को भी उसके निर्णय पर गर्व महसूस हुआ. घर जाकर सुषमा ने मीना को बताया कि वह सारा इलाका छान आई ,कुमुद उसे कही नहीं मिली.


वह चीखकर बोली..," कहां मर गई चार घंटे में तूने अच्छे से नहीं देखा होगा,वही कही आस पास होगी,वह सुषमा को खूब खरीखोटी सुना रही थी. सुषमा खामोशी से सब सुन रही थी.
लेकिन आज उसको अपने फैसले पर गर्व हो रहा था. उसने मन ही मन फैसला किया. कि कुमुद जहाँ भी रहे पूरी जिंदगी उसका साथ देगी.
इधर कुमुद के आँखों से आंसुओं की धारायें बह रही थी. मुठ्ठी में बंधे रुपयों को देख ,आज सुषमा उसे बहुत ही नेक दिल लग रही थी.
वह पास ही खड़ी ट्रेन में चढ़ गई. उसे खुद भी नहीं मालूम था. कि अब उसे करना क्या है। वह उस मासूम बच्ची को देखती ही जा रही थी.
तभी टी सी ने आकर पूछा, कहां जाना है..? सिर पर घूंघट ओढ़कर बोली..,"साब यह ट्रेन कहा तक जाती है।


दो बार टी सी ने घूर कर देखा।
"तुम्हें कहा जाना है...?
"इसका आखरी स्टाप जहाँ हो वहां उतार देना. टी सी अजीब नजरों से घूर रहा था. गोद में सोती नवजात बच्ची को देख कुछ न बोल।
ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुँच चुकी थी. सारा डिब्बा खाली हो चुका था. कुमुद को समझ नहीं आया कि कहा जाय . शाम होते ,होते बादलों ने फिर से अपना रुख बदल लिया. घनघोर बारिश के आसार नजर आने लगे.
थोडी दूर पैदल चलने पर उसे एक झुग्गी झोपड़ी वाली बस्ती नजर आई उसने अपने बदन के गहने उतार लिए. ओर बस्ती में प्रवेश कर गई. वहां कई औरतें नल पर पानी भर रही थी. उसे भी अब भूख प्यास लग रही थी. वह नल के पास जाकर पानी मांगने लगी. तो वहाँ खड़ी एक बुजुर्ग महिला पूछने लगी.
  "तुम कौन हो हमारी बस्ती में क्या कर रही हो...?
कुमुद ने अपनी कहानी बताई. तो वहां खड़ी एक अधेड़ महिला बोली, मेरे पास एक खोली हैं. काम चलता है तो देती हूं .
कुमुद में वह खोली लेली. देखा तो एक सीलन वाला छोटा सा कमरा. सामने एक चूल्हा बना था. दरवाजे के पास एक मटका रखा था.
रात होने लगी थी. भूख प्यास से व्याकुल कुमुद बच्ची को वही छोड़ खाने का इंतजाम करने लगी .
आज पूरी रात वह सो नहीं पाई विचारो का सिलसिला उसे सोने नहीं दे रहा था. सुबह, सुबह नल पर बर्तनों की आवाज से कुमुद की नींद खुल गई.
अलसाई आँखों से बाहर का नजारा देखा.


समय के साथ वक़्त गुजरता जा रहा था. कुमुद ने एक फैक्ट्री में बोरे भरने का काम चालू कर दिया था.रोजनदारी पर काम मिला था. खर्चा निकल जाता था.
आज उसकी बेटी बरखा 8 साल की हो गई थी. बारिश में मिली थी. तो उसका नाम बरखा रख दिया था. बरखा बहुत ही सुंदर थी. पास ही के स्कूल में पढ़ने जाती. कुमुद ने हर परिस्थिति से लड़ कर उसकी परवरिश की.
अब वह बड़ी हो गई थी. वह हर समय अपने पिता के बारे में पूछती मगर कुमुद कोई न कोई कारण से बात बदल देती.
बरखा को कॉलेज कंप्लीट करते ही अच्छी नौकरी मिल गई थी. घर के हालातों में भी अब सुधार आ गया था.
समय चलते कुमुद को किसी बीमारी ने घेर लिया था. उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा. तब डॉ से बरखा को पता चला कि उसकी माँ एक किन्नर है. अब तो न जाने कितने सवालिया निशान उस पर लगने लगे. इन सवालों ने बरखा को तोड़ कर रख दिया था.


वह अब कुमुद की हर बात पर से बरखा का भरोसा उठ गया था . बरखा हमेशा यही सोचती की मुझे यह चुराकर लाई हैं. वह अपने असली माँ बाप के बारे में सोच कर परेशान रहने लगी..उसका मन अब कुमुद की सेवा में जरा भी नहीं लगता. वह एक दिन घर छोड़ कर भाग गई. और अपना स्वतन्त्र जीवन यापन करने लगी. इधर कुमुद की हालत बिगड़ती जा रही थी. आज पूरे तीन साल हो चुके थे. कुमुद से बरखा को अलग होकर बरखा एक अच्छे पद पर कार्यरत थी. आज उसे उच्च पद पर प्रमोशन मिला था. आज उसकी प्रमोशन पार्टी थी.
कुमुद के बीमारी की खबर जब सुषमा को लगी तो वह उससे मिलने चली आई. जब उसे यह पता चला कि जिस लड़की के लिए उसने सारा जीवन इतना संघर्ष किया. आज वह लड़की उसे पूछती नहीं है. वह खुद बरखा से जाकर मिली .


बरखा अपने पार्टी की तैयारी कर रही थी. तभी डोर बेल बजी सामने एक किन्नर को देख कर वह दंग रह गई.
सुषमा ने वह सारी बाते बताई की वह उसे किस हालातों में मिली. जब सच्चाई का पता चला तो बरखा बदहवास होकर अपनी माँ से मिलने पहुँची.
आज उसे अपने किये पर बहुत मलाल हो रहा था. वह कुमुद से लिपटकर खूब रोई. अब सारी गलतफहमियां दूर हो गई थीं। वह माँ को घर ले आई. तभी ऑफिस से फोन आया. कि मैडम आपको अवार्ड सेरेमनी में जल्दी पहुंचना है. उसने कुमुद को अपने साथ ले जाने का फैसला लिया. कुमुद को पार्टी में ले गई.
सभी को बताया कि आज में जिस जगह पर खड़ी हू. उंसकी हकदार में नहीं मेरी माँ हैं. सारा हाल तालियों से गूंज उठा.


कुमुद को आज सही मायने में नया जीवन मिला. सभी लोगों ने तहेदिल से कुमुद का स्वागत किया. और सम्मान से नवाजा गया.
बरखा ने अपने शब्दों में कहा कि हम सब उस भगवान के बनाये हुए बंदे हैं। शारीरिक कमियों से किसी भी इंसान को कम नहीं समझना चाहिए। आज मेरी माँ ने मुझे जिस साहस के साथ पाल,पोस कर बड़ा किया है. यह मेरे लिए गर्व की बात है.


कुमुद की जीवन भर की "साहस की आंधी" आज थम चुकी थी. उसके आँखों से अश्रुधारा बह रही थी. बरखा ने अवॉर्ड माँ के हाथों में रखा. वह माँ के सीने से लगकर गर्व महसूस कर रही थी.....।

वन्दना पुणतांबेकर
इंदौर(म.प्र)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: कहानी ( जीवनार्थ) "साहस की आँधी" // वन्दना पुणतांबेकर
कहानी ( जीवनार्थ) "साहस की आँधी" // वन्दना पुणतांबेकर
https://lh3.googleusercontent.com/-fM-izkC7uIM/XA4GkehnVUI/AAAAAAABF10/mNDu-DUjxFQX7gRQFN-onF70_XVUijPvwCHMYCw/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-fM-izkC7uIM/XA4GkehnVUI/AAAAAAABF10/mNDu-DUjxFQX7gRQFN-onF70_XVUijPvwCHMYCw/s72-c/image_thumb%255B1%255D?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2018/12/blog-post_90.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2018/12/blog-post_90.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content