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सरिता सुराणा ‘जैन’ की कविता : गांधी एक बार फिर आओ



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गांधी एक बार फिर आओ
राह भूले पथिक को
मंजिल तक पहुँचाओ।
भटकी नैया पाल लगाने
तुम दीप स्तम्भ बन आओ। गांधी ...

सुन मानवता का करूण क्रन्दन
अबलाओं की आर्द्र पुकार।
बच्चा-बच्चा चीख रहा है
मुझे दिलाओ मेरा अधिकार।
तुम अग्रदूद बन आओ। गांधी ...

सत्याग्रह का संदेश देकर
सोई हुई शक्तियाँ जगाओ।
आहत मनुष्य को फिर से
अहिंसा का पाठ पढ़ाओ।
तुम मार्गदर्शक बन जाओ। गांधी ...

तुम्हारा भारत जूझ रहा है
आतंकवाद की मार से!
हत्याओं के भार से!
आत्महत्या, बलात्कार से!
इन सबको दूर भगाने
तुम क्रान्तिदूत बन आओ।
गांधी एक बार फिर आओ।

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रचनाकार सरिता सुराणा ‘जैन’ हर विधा में लिखती हैं. आपकी रचनाएँ देश भर के तमाम प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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