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कवियों को संबोधित करती एक कविता: गोष्ठियाए हुए कवि



-हितेश व्यास

हे महाकवियों !
महाकाव्यों की रचना के बाद
ऐसा क्या अपच रह गया था
जिसके लिए तुम्हें गोष्ठियों में पुनःपुः जन्म लेना पड़ता है

हे यशकमियों!
यश-रस का पान गोष्ठियों के सिवाय कहाँ हो सकता है
अहोरूपम अहोध्वनि का गगनोच्चार यहीं संभव है
हे कण्ठ कला विशारदो!
तुम जब तरन्नुम की बयार चलाते हो
तो गुरुत्व आकर्षण को ठेंगा दिखाते हुए
हम सब हवा में तैरने लग जाते हैं

तुम जब गायन पर लगाम लगाते हो गायकों!
हम सब धड़ाम से अतुकान्त के गर्त में गिर पड़ते हैं
हे अतीत में महान रचना कर चुके महान कवियों!
तुम कविता लाते हो या भूतकाल के बक्से से
गोटेदार जरी वाली साड़ी जो विवाहकालीन
झिलमिलाहट को तहाए हुए सोयी रहती है
अकसर तुम कविता के अंश भूल जाते हो
जैसे विस्मृति के चूहों ने कुतर डाला हो
जरी का वेश
हे जगत गति से रहित सुकवियों! तुम धन्य हो
कविता चाहे छायावाद प्रगतिवाद नई कविता और
साठोत्तरी कविता को लांघते हे सदी के अंतिम मुहाने पर
दस्तक दे रही हो

तुम द्विवेदीयुगीन कवियों के साथ
कदमताल करते नजर आते हो
हे तथाकथित विद्वानो!
क्या ये गोष्ठियाँ तुम्हारे लिए कूड़ाघर हैं
जहाँ तुम नियमित रूप से अपनी विद्वता झाड़ते हो
तुम्हारी विद्वता का डंका गोष्ठियों के
साउण्डप्रूफ कक्षों तक ही गूंजता है

हे चलायमान विद्वानों!
तुम्हें नमस्कार है
हे शाश्वत अध्यक्षों!
तुम अध्यक्षता ओढ़ते हो
अध्यक्षता बिछाते हो
अध्यक्षता लाते हो
अध्यक्षता ले जाते हो
अध्यक्षता का बाना धारण करते-करते तुम भूल गए
उस पोटली को जिसमें तुम्हारी सामान्य हैसियत बन्द है

हे छुटपुट कवियो!
इतिहास और बनियो की बही में
फुटकल खातों की कोई वकत नहीं होती
चाय की पर्चियों की तरह वे रोज नष्ट कर दे जाते हैं
डेली वेजेज पर आने वाले वर्कचार्ज!
तुम तो कहार हो
तुम्हारी वाह-वाह के कंधों पर
सवार होकर उठती है बड़े कवियों की पालकियाँ
हे बहुसंख्यकों!
तुम कालीन की तरह बिछते हो
तुम पर विराजते हैं बड़े कवि या छा जाते हैं तम्बू की तरह
तुम यज्ञ की समिधाएँ हो
जिसका लाभ उठाते हैं पुरोहित
गोष्ठी के हवन में स्वाहा हो जाने वाली
होलिकाओ!
तुम्हें समर्पित है यह कविता!

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रचनाकार – हितेश व्यास राजस्थान उच्च शिक्षा विभाग में प्राध्यापक हैं. इनकी कुछ अन्य रचनाएँ आप रचनाकार में यहाँ पर पढ़ सकते हैं –

http://rachanakar.blogspot.com/2006/02/blog-post.html
http://rachanakar.blogspot.com/2005/12/blog-post_22.html
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http://rachanakar.blogspot.com/2005/12/blog-post_09.html
http://rachanakar.blogspot.com/2005/12/blog-post_08.html

संपर्क – के. आर. 82, सिविल लाइन्स, कोटा – 324001 , राजस्थान (भारत)

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