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अमित कुमार सिंह की कुछ कविताएँ





माँ


दुनिया का सबसे
प्यारा शब्द
जिसे सुनकर
सिर श्रद्धा से झुक
जाता है,

जिसकी मिठास
मिश्री से भी मीठी है
जिसकी गइराई
समंदर की तरह,
जो धरती जैसा,
विशाल हृदय रखती है,

जिसकी नहीं है
दुनिया में कोई मिसाल
'माँ' तू है बेमिसाल।


धरती पर हमें चलना।
सिखलाती
जिन्दगी से लड़ना
बतलाती,
खुद विष पीकर
अमृत बाँटने वाली
माँ तुम शक्ति पुंज हो
ममता का अनूठा
कुंज हो।
॥॥

परिवर्तन

नया दौर आया,
लेकर नया जमाना
परिवर्तन का मंत्र जपता
हर कोई बन गया है
इसका दीवाना।

परिवर्तन की इस
आंधी में,
बदल गयी है
कविताओं की
भी बानी,
दीर्घ से लघु
में सिमटने की
महत्ता अब
इसने है पहचानी।

समय का है
लोगों के पास अभाव
तीन-चार पंक्तियों में
दे सको यदि पूरी कविता
का भाव,
तो मेरे पास आओ
अन्यथा इसे लेकर
यहाँ से चले जाओ।

और जाते-जाते
मेरा ये सबक अपनाओ-
लिखना नहीं रहा
अब तुम्हारे बस का रोग
पेट पालने के लिए
करो कोई और उद्योग।


सुन के ये
पावन वचन
सिहर गया
मेरा तन बदन
और अपनी जीविका
चलाने के लिए
करने लगा मैं
कविताओं की जड़ों
पर वार।
ओढ़ लबादा परिवर्तनशीलता का
करने लगा मैं भी,
कविताओं की बोनसाई तैयार।
॥॥।

कौन है बूढ़ा?

जीवन के सब रंग
देख चुका,
बैठा हूँ
उम्र के आखिरी
पड़ाव पर!

ढ़ल चुकी
है काया
अपनों के बीच
में ही हो
गया हूँ पराया।

सेवा निवृत्ति के बाद
अचानक सा
सब बदल गया
घिरा रहने वाला
भीड़ों से
दिख रहा है आज
बिल्कुल अकेला।

वही है तन,
वही है काया
पल भर में ही
खुद को मैंने
उपेक्षित क्यों है पाया।

जटिल है स्थिति ये
समाधान की है
सिर्फ आस।

गूँज रहा है
प्रश्न ये,
मन में मेरे बार-बार,
क्षण भर पहले
भरा रहने वाला
अनंत ऊर्जा से
हो गया हूँ
क्या मैं अब ऊर्जाहीन,
बूढ़ा, लाचार
और बेकार?

पर आज के युवाओं
में फैले इच्छा शक्ति
की थकान और
वैचारिक शिथिलता को
देखकर सोचता हूँ-

कैसा है समाज
ये रूढ़ा,
कहना किसे चाहिए
और कह किसे
रहा है बूढ़ा।

॥॥॥।

यमराज का इस्तीफा

एक दिन
यमदेव ने दे दिया
अपना इस्तीफा।
मच गया हाहाकार
बिगड़ गया सब
संतुलन,
करने के लिए
स्थिति का आकलन,
इन्द्र देव ने देवताओं
की आपात सभा
बुलाई
और फिर यमराज
को कॉल लगाई।

'डायल किया गया
नंबर कृपया जाँच लें'
कि आवाज तब सुनाई।

नये-नये ऑफ़र
देखकर नम्बर बदलने की
यमराज की इस आदत पर
इन्द्रदेव को खुन्दक आई,




पर मामले की नाजुकता
को देखकर,
मन की बात उन्होने
मन में ही दबाई।
किसी तरह यमराज
का नया नंबर मिला,
फिर से फोन
लगाया गया तो
'तुझसे है मेरा नाता
पुराना कोई' का
मोबाईल ने
कॉलर टयून सुनाया।

सुन-सुन कर ये
सब बोर हो गये
ऐसा लगा शायद
यमराज जी सो गये।

तहकीकात करने पर
पता लगा,
यमदेव पृथ्वीलोक
में रोमिंग पे हैं,
शायद इसलिए,
नहीं दे रहे हैं
हमारी कॉल पे ध्यान,
क्योंकि बिल भरने
में निकल जाती है
उनकी भी जान।

अन्त में किसी
तरह यमराज
हुये इन्द्र के दरबार
में पेश,
इन्द्रदेव ने तब
पूछा-यम
क्या है ये
इस्तीफे का केस?

यमराज जी तब
मुँह खोले
और बोले-

हे इंद्रदेव।
'मल्टीप्लैक्स' में
जब भी जाता हूँ,
'भैंसे' की पार्किंग
न होने की वजह से
बिन फिल्म देखे,
ही लौट के आता हूँ।

'बरिस्ता' और 'मैकडोन्लड'
वाले तो देखते ही देखते
इज्जत उतार
देते हैं और
सबके सामने ही
ढ़ाबे में जाकर
खाने-की सलाह
दे देते हैं।

मौत के अपने
काम पर जब
पृथ्वीलोक जाता हूँ
'भैंसे' पर मुझे
देखकर पृथ्वीवासी
भी हँसते हैं
और कार न होने
के ताने कसते हैं।

भैंसे पर बैठे-बैठे
झटके बड़े रहे हैं
वायुमार्ग में भी
अब ट्रैफिक बढ़ रहे हैं।
रफ्तार की इस दुनिया
का मैं भैंसे से
कैसे करूँगा पीछा।
आप कुछ समझ रहे हो
या कुछ और दूँ शिक्षा।

और तो और, देखो
रम्भा के पास है
'टोयटा'
और उर्वशी को है
आपने 'एसेन्ट' दिया,
फिर मेरे साथ
ये अन्याय क्यों किया?

हे इन्द्रदेव।
मेरे इस दु:ख को
समझो और
चार पहिए की
जगह
चार पैरों वाला
दिया है कह
कर अब मुझे न
बहलाओ,
और जल्दी से
'मर्सिडीज़' मुझे
दिलाओ।
वरना मेरा
इस्तीफा
अपने साथ
ही लेकर जाओ।
और मौत का
ये काम
अब किसी और से
करवाओ।
॥॥॥

''मशहूर''


कठिन है रास्ता ये
मंजिल है दूर
घबराना नहीं
ऐ राही,
नहीं है तू
मजबूर!

प्रयत्न करता जा
बस तू
करता ही जा,
लेकिन इसमें
लगन हो जरूर।

कामयाबी की
बुलंदी तू
छुएगा,
हो जायेगा
इस तरह
ऐ दोस्त!
तू भी एक दिन
मशहूर!
॥॥।
रचनाकार - अमित कुमार सिंह – टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ में सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हैं. आपकी कुछ अन्य रचनाएँ रचनाकार पर यहाँ पढ़ें-
http://rachanakar.blogspot.com/2005/12/blog-post.html
http://rachanakar.blogspot.com/2006/01/blog-post_02.html
http://rachanakar.blogspot.com/2006/03/blog-post_15.html
http://rachanakar.blogspot.com/2006/04/blog-post_24.html

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