रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

अनुराग



डॉ॰ बिमला नाज़िर गोहाँई

निशचल मन में न जाने कितनी
सही ग़लत बातें घर कर जाती हैं;
उसको छूना, परखना
और परख के- ज़िन्दगी में बसाने में ही
ला-जवाब होता है समय का पल॥


पथरीली राहें दुखःमय तो होती ही हैं
उन बीहड़ राहों को पार करने के बाद
अगर पैर छूते हैं श्यामली गलीचा
आह! ला-जवाब हो जाता है समय का पल॥


धूल और पसीने से लिखी हुई ज़िन्दगी
अमृतमय जीवन का पंख है
जो धूल – पसीने की गंध न ले
वह मिट्टी का इंसान है ही नहीं
मिट्टी की ख़ुशबू से ही तो
ला-जवाब हो जाता है.... समय का गहरा पल


भाग-भाग के पीछा करती हूं
सही ग़लत राहों में
सही-ग़लत अनुभव रख कर
सही-ग़लत शब्दों के साथ
ज़िन्दगी तो सही-ग़लत का ही भण्डार है
ग़लत जो रूठ उठे,
.... सही जो चूम ले
बनना-बिगड़ना, लड़ना- झगड़ना,
..... रूठना-मनाना
इन सब एहसासों में से ही निकलता है
.... सुनहरा जीवन का पल


रचनाकार - डॉ॰ बिमला नाज़िर गोहाँई भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण में भूविज्ञानी (कनिष्ठ) पद पर कार्यरत हैं।

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.