---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

असग़र वजाहत का ईरान व आज़रबाईजान यात्रा संस्मरण 2

साझा करें:

(असग़र वजाहत - इस्फ़हान के सड़क पर शाहरूख़ खान के पोस्टर के साथ) अनुक्रम यहाँ देखें अध्याय...

(असग़र वजाहत - इस्फ़हान के सड़क पर शाहरूख़ खान के पोस्टर के साथ)


अनुक्रम यहाँ देखें

अध्याय 1

मिट्टी का प्याला

दोनों तरफ़ सूखे, निर्जीव, ग़ैर आबाद पहाड़ थे जिन पर लगी घास तक जल चुकी थी। सड़क इन्हीं पहाड़ों के बीच से बल खाती गुज़र रही थी, रास्ता वही था जिससे मैं इस्फहान से होता शीराज़ पहुंचा था और अब शीराज़ से साठ किलोमीटर दूर 'परसीपोलस' यानी 'तख्ते जमशेद' देखने जा रहा था। शीराज़ में पता लगा था कि 'तख्ते जमशैद' तक 'सवारी' टैक्सियां चलती हैं। इरान में 'सवारी' का मतलब वे टैक्सियां होती हैं जिन पर मुसाफिर अपना-अपना किराया देकर सफ़र करते हैं। ये सस्ती होती हैं। 'तख्ते जमशैद' तक जाने के लिए मैं शीराज़ के बस अड्डे पर 'सवारी' की तलाश में आया था लेकिन टैक्सी वाले ने मेरी मर्ज़ी के खिलाफ़ मुझे एक टैक्सी में ठूंसा और टैक्सी चल दी। मैं 'सवारी' कहता रह गया लेकिन मेरी किसी ने एक न सुनी। भाषा न आने की सज़ा मिलती है। मुझे इस यात्रा के दौरान इस तरह की छोटी-बड़ी सजायें मिलती रही हैं। मेरे ख्याल से मुझे पांच हज़ार रियाल देने थे और इस टैक्सी में मेरे अलावा चार और लोगों को भी होना चाहिए था लेकिन मैं अकेला था और ज़ाहिर था कि चार दूसरे लोगों का किराया भी मुझसे ही वसूल किया जाना था। बहरहाल वीरान पहाड़ों पर करीब सवा घण्टे चलने के बाद टैक्सी ड्राइवर ने 'तख्ते जमशैद' की पार्किंग में गाड़ी खड़ी कर दी। सामने दूर तक फैले खण्डहरों में ऊंचे-ऊंचे खंभे ही नुमाया थे।

(इस्फ़हान के सड़क पर एक और पोस्टर)

ईसा से सात सौ साल पहले ईरान के एक जनसमूह ने जो अपने को आर्य कहता था, एक बहुत बड़ा साम्राज्य बनाया था। यह पूर्व में सिंध नदी से लेकर पश्चिम में डनदुब नदी और उत्तर में अरल झील से लेकर ईरान की खाड़ी तक फैला हुआ था। इतिहास में इस साम्राज्य को 'हख़ामनश साम्राज्य' के नाम से याद किया जाता है। अंग्रेजी में इसे 'अकामीडियन' साम्राज्य कहते हैं। बड़े आश्चर्य की बात है कि यह अपने समय में तो महत्वपूर्ण था ही हमारे समय में भी इसका महत्व बना हुआ है। इस साम्राज्य के एक महान शासक दारुस प्रथम ( 486 ई.पू.) ने विश्व का पहला मानव अधिकार दस्तावेज़ जारी किया था जो आज भी इस दस्तावेज़ का महत्वपूर्ण है। 1971 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने अनुवाद विश्व की लगभग सभी भाषाओं में कराया था ओर यह बांटा गया था। दस्तावेज़ मिट्टी के बेलन जैसे आकार के पात्र पर खोदा गया था और उसे पकाया गया था ताकि सुरक्षित रहे।

(हफ़ीज शीराज़ी का मज़ार)

दारुस ने बाबुल की विजय के बाद इसे जारी किया था। कहा जाता है कि यह मानव अधिकारों संबंधी दस्तावेज़ फ्रांस की क्रांति (1789-1799 ई.) में जारी किए गये मानव अधिकार मैनेफ़ैस्टो से भी ज्यादा प्रगतिशील है। घोषणापत्र के अंश इस प्रकार हैं_ . . . अब मैं अहुर मज्द ; अग्निपूजकों के सबसे बड़े देवता की मदद से ईरान, बाबुल और चारों दिशाओं में फैले राज्यों का मुकुट अपने सिर पर रखते हुए यह घोषणा करता हूं कि मैं अपने साम्राज्य के सभी धर्मों, परम्पराओं और आचार-व्यवहारों का आदर करूंगा और जब तक मैं जीवित हूं तब तक मेरे गवर्नर और उनके मातहत अधिकारी भी ऐसा ही करते रहेंगे। मैं अपनी बादशाहत किसी देश ; राज्य पर लादूंगा ; आरोपित नहीं करूंगा। इसे स्वीकार करने के लिए सभी स्वतंत्र हैं और अगर कोई इसे अस्वीकार करता है तो मैं उससे कभी युद्ध नहीं करूंगा। जब तक मैं ईरान, बाबुल और चारों दिशाओं में फैले राज्यों का सम्राट हूं तब तक मैं किसी को किसी का 'शोषण' नहीं करने दूंगा और अगर यह होता है तो 'शोषित' का पक्ष लूंगा और अपराधी को दण्डित करूंगा। जब तक मैं सम्राट हूं तब तक बिना पैसे लिए-दिए या उचित भुगतान किए बिना कोई किसी की चल-अचल सम्पत्ति पर अधिकार न कर सकेगा। जब तक मैं जीवित हूं तक बेगार, बलात काम लिए जाने का विरोध करता रहूंगा। आज मैं यह घोषणा करता हूं कि हर आदमी अपना धर्म चुनने के लिए आज़ाद है। लोग कहीं भी रहने के लिए स्वतंत्र हैं और वे कोई भी काम कर सकते हैं जब तक कि उससे दूसरों के अधिकार खण्डित न होते हो. . .किसी को उसके रिश्तेदारों के किए की सज़ा न दी जायेगी। मैं गुलामी; दासप्रथा को प्रतिबंधित करता हूं और मेरे साम्राज्य के गर्वनरों तथा उनके अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि आदमी और औरतों को गुलाम की तरह बेचने खरीदने को अपने क्षेत्रों को समाप्त करें. . .गुलामी को पूरे संसार से समाप्त हो जाना चाहिए . . .मैं असुर मज्द से कामना करता हूं कि साम्राज्य के प्रति मुझे अपने आश्वासनों को पूरा करने में सफ़लता दें।

(हफ़ीज शीराज़ी का मज़ार - एक और दृश्य)

ईसा से पांच सौ साल पहले दारुस महान ने अपने साम्राज्य का आधार फ़ेडरल सिस्टम ऑफ़ गवरर्नेन्स ; गणतांत्रिक राज्य व्यवस्था बनाया था। राज्यों को काफ़ी अधिकार किए गये और केन्द्र की नीतियां उदार तथा जनहित में थी। साम्राज्य की आय का सबसे बड़ा स्रोत व्यापार कर था जिसे बढ़ाने तथा व्यापारियों की सुरक्षा पर साम्राज्य ध्यान देता था। दारुस ने अपने साम्राज्य के दो कोने को जोड़ने वाले एक ढाई हज़ार मील लंबे राजमार्ग का निर्माण भी कराया था। इतिहासकार कहते हैं कि पूरे साम्राज्य में डाक की व्यवस्था इतनी उत्तम थी कि डाक साम्राज्य के एक कोने से दूसरे कोने तक पन्द्रह दिनों में पहुंच जाती थी।

शताब्दियों तक दारुस महान की राजधानी 'तख्ते जमशैद' पहाड़, पत्थरों, मिट्टी, धूल और उपेक्षा के पहाड़ों के नीचे दबी पड़ी रही। यह इलाक़ा 'कोहे रहमत' के नाम से जाना जाता है। रहमत का मतलब ईश्वरीय कृपा है। 1931-1934 के बीच यहां अमेरिकी विश्वविद्यालयों के पुरातत्व विभागों ने खुदाई का एक व्यापक अभियान चलाया था ओर दारुस की राजधानी के अवशेष सामने आये थे।

ईरानी सरकार जो प्राय: पर्यटन के प्रति उदासीन है 'तख्ते जमशैद' की उपेक्षा नहीं कर पायी है। यहां पर्यटन विभाग के कार्यालय और पयर्टकों के लिए अन्य सुविधाएँ मौजूद हैं। यह अब ईरान का ही नहीं बल्कि विश्व का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन गया है।

'तख्ते जमशैद' आने से पहले कहीं पढ़ा था और लोगों ने बताया भी था कि खण्डहरों को देखकर यह कल्पना करनी चाहिए कि यह इमारत कितनी विशाल रही होगी। विस्तार का अंदाजा तो दूर से हो जाता है। कोहे रहमत के नीचे ऊंचे खंभों का लंबा सिलसिला और सामने के पहाड़ों को काट कर तराशी गयी मूर्तियां तथा गुफ़ाएं कई किलोमीटर में फैले नज़र आने लगते हैं।

मुख्य इमारत का जाने के लिए सीढ़ियां चढ़कर ऊपर आया तो ऊंचे-ऊंचे पत्थर के खंभे नज़र आये। यह दारुस का दरबार हाल था। इन खंभों पर खड़ी इमारत की कल्पना करते हुए मैंने इसकी तुलना लाल किले के दीवाने आम से की तो दीवाने आम बच्चों का खेल लगा। दारुस के दीवाने आम के खंभों की ऊंचाई लाल किले वाले खंभों से कम से कम तीन गुनी है। लंबाई और चौड़ाई में भी दारुस का दीवाने आम शाहजहां के दीवाने आम से छ: सात गुना बड़ा होगा। आश्चर्य यह होता हे कि इतने बड़े दीवाने आम में हज़ारों लोगों तक सम्राट या अन्य अधिकारियों की आवाजें क़ैसे पहुंचती होगीं और व्यवस्था कैसे बनायी जाती होगी।

दारुस ने 'परसीपोलिस' यानी 'तख्ते जमशैद' निर्माण (518 ई.पू.) के आसपास शुरू किया था और सौ साल बाद यह निर्माण कार्य पूरा हुआ था। दारुस ने 'तख्ते जमशैद' की परिकल्पना केवल एक महल या क़िले के रूप में नहीं थी। वह राजसी इमारतों के ऐसे विशाल समूह का निर्माण करना चाहता था जिसकी कोई दूसरी मिसाल न हो। वह चाहता था कि साम्राज्य की शक्ति, वैभव, सम्पन्नता, बुद्धिमत्ता और सौंदर्य प्रियता को दर्शाने वाली इमारतों की एक बेमिसाल प्रस्तुति की जाये जो अद्वितीय हो। दारुस के पुत्र ज़ेरज़ेस ( 519-465 ई.पू.) की शपथ_ मैं उस काम को पूरा करूंगा जो मेरे पिता ने शुरू किया था। दीवार पर अंकित है।

(इस्फ़हान का एक भवन)

ऊपर तेज़ सूरज चमक रहा था जिसकी रौशनी में कई किलोमीटर फैले खण्डहर अतीत की रहस्यमयी कहानियां सुना रहे थे। पर्यटक यहां काफ़ी थे लेकिन क्षेत्र इतना बड़ा था कि वे बस खेत में कुछ दानों की तरह छिटके हुए दिखाई पड़ रहे थे। कुछ पर्यटक बहुत दूर 'कोहे रहमत' में बनायी गयी गुफ़ाओं के मुख पर बनी देवताओं की मूर्तियां देख रहे थे और इतने छोटे लग रहे थे कि उन पर नज़र जमाना भी मुश्किल था। दीवाने आम के पीछे दूसरी इमारतों के खण्डहर थे जो दूर तक फैले चले गये थे और 'कोहे रहमत' में बनी गुफ़ाओं से मिल गये थे। एक दिन यह सब देखने के लिए नाकाफ़ी था। दरवाज़ों पर पत्थर में काटी गयी देवताओं की मूर्तियां, कहीं सिपाहियों की आकृतियां और पहाड़ों पर युद्ध के उकेरे दृश्य साम्राज्य और सम्राटों की जिंदगी के जीवित दस्तावेज़ लगते थे।

'तख्ते जमशैद' से कुछ किलोमीटर दूर 'नक्शे रुस्तम' है। रुस्तम एक पौराणिक चरित्र है जिसने फिरदौसी के 'शाहनामे' में अमर कर दिया है। रुस्तम ने कला और मार्मिकता की ऊंचाइयों को छू लिया है। बुनियादी तौर पर योद्धा होने के साथ-साथ वह प्रेमी भी है। संवेदनशील पिता भी है और एक त्रासदी का नायक भी है। 'नक्शे रुस्तम' पहाड़ पर एक ऐसी जगह हे जो समतल है। कहा जाता है रुस्तम यहां नाचा था इस कारण पहाड़ क़ा यह हिस्सा समतल हो गया है। 'नक्शे रुस्तम' पहाड़ी को सम्राटों की गैलरी कहा जाये तो ग़लत न होगा। यहां 'हख़ामनश' साम्राज्य ही नहीं बल्कि पूर्व और परवर्ती साम्राज्यों जैसे सासानी साम्राज्य के सम्राटों ने भी अपनी विजयों से संबंधित चित्र पत्थर पर अंकित कराये हैं। इस स्थान पर सम्राटों के मकबरे बनाने तथा उन पर इतिहास अंकित करने की भी परंपरा रही है। यही पत्थर पर तराश कर बनाये गये चित्रों में सासानी सम्राट शापुर प्रथम (241-272 ई.पू. )का वह प्रसिद्ध चित्र भी है जिसमें ईरानियों द्वारा पराजित रोम का सम्राट वैलेरियन घुटने टेके शापुर प्रथम के सामने बैठा है और शापुर घोड़े पर सवार हैं। कुछ इतिहासकार तो कहते हैं कि ईरान के सम्राट शापुर प्रथम ने पराजित रोम में सम्राट को अपने दरबार में चारों हाथों पैरों पर चलकर (260 ई.पू.) आने के लिए बाध्य किया था। इस घटना का आतंक शताब्दियों कायम रहा था।

(इस्फ़हान का प्राचीनकालीन पुल)

कोई गाइड किसी पर्यटन ग्रुप को एक दीवार दिखाकर बता रहा था कि कभी यह दीवार इतनी चमकीली हुआ करती थी कि लोग इसमें अपनी शकल देख लिया करते थे। इस तरह की न जाने कितनी गाथाएं यहां से जुड़ी हैं। कहते हैं कि किसी पौराणिक सम्राट जमशैद की भी यही राजधानी होती थी और उसके पास एक दैवी प्याला था जो 'जामे जमशैद' के नाम से मशहूर था। जमशेद का ज़िक्र भी फिरदौसी ने 'शाहनामा' में भी किया है। प्याले में वह पूरे संसार की छबियां तथा भविष्य ओर भूत को देख सकता था।

'तख्ते जमशैद' बनने के केवल दो सौ साल बाद हख़ामनश साम्राज्य (550-530 ई.पू.) का पतन सिकन्दर महान के हाथों (331-323 ई.पू.) हुआ। उसने साम्राज्य की राजधानी को जलाकर राख कर दिया था और लूट को बीस हज़ार ख़च्चरों और पांच हज़ार ऊंटों पर लाद कर ले गया था। इतने बड़े साम्राज्य के इस दर्दनाक पतन से प्रेरित होकर ही शायद मिर्ज़ा ग़ालिब ने लिखा होगा_

और ले आयेंगे बाज़ार से गर टूट गया

जामे-जम से मेरा जामे सिफ़ाल अच्छा है

यानी जमशैद के जाम-जम से तो अच्छा मेरा मिट्टी का प्याला है। और ले आयेंगे बाज़ार से अगर टूट गया।

(क्रमशः अगले अंक में जारी)

अनुक्रम यहाँ देखें

Tag ,,,

Add to your del.icio.usdel.icio.us Digg this storyDigg this

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 4
  1. रवि जी,

    बहुत सुन्दर संस्मरण है। कई नई बातें मालुम हुईं। वर्तनी की गलतियाँ कुछ अधिक हैं। "राजधानी" को हर जगह "राजधनी" लिखा गया है। वाक्य-विन्यास की भी गलतियाँ हैं। इतने सुन्दर लेख में ये अशुद्धियाँ खलती हैं।

    जवाब देंहटाएं
  2. लक्ष्मी जी,
    गलतियों की ओर ध्यान इंगित करने हेतु धन्यवाद. दरअसल फ़ॉन्ट रूपांतरण में ऐसी गलतियाँ घुस आती हैं उन्हें दूर करने का पूरा उपाय भविष्य में किया जाएगा. रहा सवाल वाक्य विन्यास का, तो इसमें फेरबदल संभव अकसर नहीं हो पाता.

    जवाब देंहटाएं
  3. लक्ष्मी जी,
    इतनी सुन्दर टिप्पणी और यात्रावृत्त तो अब स्वप्न सा लगने लगा है । शायद भविष्य में आप मेरे ऐसे सपने को पूरा करने की और कोशिश करें ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बेनामी5:44 pm

    BAHO BAHO DHANVAD ACHHA LAGA READ KAR

    जवाब देंहटाएं
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

|कथा-कहानी_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|हास्य-व्यंग्य_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|आलेख_$type=two$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|संस्मरण_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|उपन्यास_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लोककथा_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4061,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3023,कहानी,2265,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,99,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,244,लघुकथा,1255,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,327,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2009,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,711,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,797,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,88,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,208,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: असग़र वजाहत का ईरान व आज़रबाईजान यात्रा संस्मरण 2
असग़र वजाहत का ईरान व आज़रबाईजान यात्रा संस्मरण 2
http://bp2.blogger.com/_t-eJZb6SGWU/RgN0Xy5qBjI/AAAAAAAAAj8/lEInZHmGyIo/s400/Hindi+film+posters+at+Esfehan.JPG
http://bp2.blogger.com/_t-eJZb6SGWU/RgN0Xy5qBjI/AAAAAAAAAj8/lEInZHmGyIo/s72-c/Hindi+film+posters+at+Esfehan.JPG
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2007/03/asghar-wazahat-ka-iraan-yatra-sansmaran_23.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2007/03/asghar-wazahat-ka-iraan-yatra-sansmaran_23.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ