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मोना डार्लिंग और जार्ज बुश

modern art

-शशिभूषण द्विवेदी

घड़ी की सुई रात के 11 बजा रही थी। दिल्ली जाने वाली अंतिम बस अब तक नहीं आई थी। स्टेशन पर मातमी सन्नाटा था। अधिकतर सवारियां जा चुकी थीं। जैसे जैसे वक्त बीत रहा था, मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। सुबह अगर समय से मीटिंग में नहीं पहुंचा तो ये नौकरी भी गई समझो। बास सरेशाम ही अपनी मोना डार्लिंग के साथ कार से दिल्ली के लिए निकल चुका है। साला मुझे यहां छोड़ गया बसों में धक्के खाने। खुद इस समय रंगरेलियां मना रहा होगा मोना डार्लिंग के साथ। मैंने बास को एक भद्दी सी गाली दी और सिगरेट सुलगा ली।

मेरी बगल में ही एक औरत बैठी थी अपने दुधमुंहे बच्चे को गोद में संभाले। मैंने उसे देखा। पसीने से चिपचिपाया उसका चेहरा। मुझे वितृष्णा सी हुई। फिर दया आई। यह मोना डार्लिंग नहीं हो सकती- मैंने सोचा। वैसे हो भी सकती है, कौन जाने। दफ्तर के बाद मैंने उसे देखा ही कहां। तो क्या दफ्तर के बाद मोना डार्लिंग भी पसीने से चिपचिपाए मांस के भद्दे लोथड़े मे बदल जाती होगी...और फिर वह दुधमुहां बच्चा?...नहीं...नहीं मोना डार्लिंग की तो अब तक शादी भी नहीं हुई और फिर इन मामलों में वह प्रिकाशन भी तो कितना लेती है। बास तक को कोई रियायत नहीं देती। बेशक यह मोना डार्लिंग नहीं हो सकती। वो तो इस वक्त होटल के ऐसी रूम में बास के साथ जादू की झप्पियां ले रही होगी।....

इधर अंधेरा बढ़ने के साथ साथ स्टेशन के मातमी सन्नाटे मे अब एक खौफ भी घर करने लगा था। पता नहीं खौफ औरत के चेहरे पर था या मेरे मन में। औरत ने और जोर से कसकर बच्चे को अपनी छाती सा लगा लिया।

ऐसे अंधेरे वक्त मे मेरे भीतर के तीनों दुश्मन दोस्त जाग उठते हैं। मैंने महसूस किया कि उनकी अंगड़ाइयां शुरू हो चुकी हैं। थोड़ी देर में बाहर आकर वे मेरा जीना हराम कर देंगे। मेरे इन तीनों दुश्मन दोस्तों में पहला कुछ प्रगतिशील किस्म का है। मैं इसे फिलासफर कहता हूं। दूसरा लफंगा है और हमेशा औरतों को देखकर लार टपकाता रहता है। तीसरा पोंगा पंडित है जो इन सबमें घाघ है। यह जब भी सामने आता है, मुझे परेशान करके चला जाता है। लफंगा किसी भी चीज को गंभीरता से लेता नहीं और फिलासफर तो साला और भी पागल है। मन को हमेशा द्वंद्व में रखता है। लेकिन दोस्ती गजब की है तीनों में। पल में तोला पल में माशा। दुनिया इधर की उधर हो जाए रहेंगे साले साथ ही। जैसे ही मुझे लगा कि ये तीनों मुझे घेरने के लिए तैयार हो चुके हैं, मैं स्टेशन से बाहर आ गया। वह खौफजदा औरत भी मेरे पीछे पीछे बाहर आ गई।

बाहर एक ढाबा है जहां कुछ चारपाइयां और मेजे थीं। फूस की छत से लटके तीन चार बल्ब टिमटिमा रहे थे। फिजा में सिगरेट का धुंआ था और शराब का सुरूर। लोगों की बातचीत वहां मक्खियों की भिनभिनाहट जैसी लग रही थी। बीच बीच में ढाबे के सरदार मालिक और ग्राहकों की आवाजें आतीं- बहादुर, पानी ला,बहादुर, ये बर्तन उठा। हाफ पैंट कमीज लटकाए बहादुर फिरकनी की तरह यहां वहां नाच रहा है। ढाबे के मालिक के काउंटर पर एक ब्लैक एंड व्हाइट पोर्टेबल टीवी रखा था जिस पर खबरें आ रही थीं। खबरों में अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश का भाषण चल रहा था। बुश के मुंह से डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स, वार अगेंस्ट टेरेरिज्म जैसे कुछ बिंदास शब्द सुनाई देते हैं। मैं उकता जाता हूं। बुश मुझे किसी पगलाए बंदर की तरह लगता है। हालांकि स्क्रीन पर बार बार हथकड़ी बेड़ियों में जकड़े सद्दाम हुसैन को दिखाया जाता है। एक पल पहले इराक का वह धड़कता हुआ दिल जहां बेखौफ बगदाद में घूमता नजर आ रहा था वहीं अगले पल गिलमेगस महान का वही वंशज किसी बदहवास भालू की तरह लगने लगता है। मानो बता रहा हो कि बगदाद में अलिफ लैला की कहानियां दम तोड़ चुकीं और दजला फरात के पानी में भी अब वह ताब नहीं। बीच बीच में अबू गरेब जेल के दृश्य भी दिखते है जिसमे एक महिला अमेरिकी सैनिक नंग धड़ंग इराकी सैनिकों के गुप्तांगों पर उंगलियों से बंदूक का निशाना साध रही है और उसके पुरुष साथी उन पर लात घूंसे बरसा रहे हैं। महिला सैनिक की हरकतों पर ढाबे में बैठे लोग कुछ अश्लील फब्तियां कसते हैं। एकाएक जैसे उन सबका पौरुष जाग जाता है। उधर फर्जी अदालत में जज पर चीखता हुआ सद्दाम है जिस पर मानवता के खिलाफ अपराध का मुकदमा चल रहा है। कुछ ही क्षणों सदियां बीत जाती हैं। मुझे उबकाई सी आती है कि तभी इराक जिंदाबाद के नारे के साथ सद्दाम फांसी के फंदे पर झूलता नजर आता है। मैं चुपचाप एक कुर्सी खींचकर धम्म से बैठ जाता हूं। मेरे तीनों दुश्मन दोस्त अब पूरी तरह जाग चुके हैं और पूरी बेशर्मी के साथ खीस निपोरे सामने मेरी मेज पर आ बैठे हैं।

अचानक मेरा लफंगा दुश्मन दोस्त शराब की फरमाइश करनेश् लगता है और मेरे बार बार मना करने के बावजूद बहादुर को एक अद्धा और गिलास लाने को कह देता है। बदले में लफंगा मुझे बास और मोना डार्लिंग की रंगरंगेलियों के रसभरे किस्से सुनाने लगता है। उसकी बातें सुनकर मुझे भी अपने भीतर एक उत्तेजना भरी सरसराहट महसूस होती है। लेकिन इसी बीच पंडित बिदक जाता है और इस्तेहारी अंदाज में घोषणा करता है कि शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लेकिन मोना डार्लिंग से ज्यादा नहीं। लफंगा बचाव की मुद्रा मे ंहै। मुझे आश्चर्य होता है कि फिलासफर अब तक चुप कैसे रह गया? हम तीनों की नजरें एकसाथ फिलासफर की ओर उठ जाती है। फिलासफर इत्मीनान से अपना गिलास शिप करते हुए धीरे से कहता है,यारों, बेफिक्र रहो। बुश के भाषण से ज्यादा न तो शराब हानिकारक है और न ही मोना डार्लिंग। पोंगा पंडित फिलासफर की बात सुनकर कसमसा उठता है। इससे पहले कि वह कुछ कहता, हम सबकी नजरें ढाबे के बाहर झटके से आकर रुकी एक चमचमाती हुई कार पर जा टिकती हैं। शहर के बाहर इस फटेहाल से ढाबे पर इस तरह रात के साढ़े ग्यारह बजे किसी चमचमाती कार का आकर रूकना हम सबको थोड़ा विचित्र लगता है। लेकिन हम हल्के नशे में थे और सांस रोककर लगातार उसी ओर देख रहे थे। इस बीच ढाबे में हलचल कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी।

हमने देखा कार से कुल तीन लोग उतरे। पचास पचपन साल का एक अधेड़ जो सस्ती पेंट शर्ट में किसी चिरकुट क्लर्क सा लग रहा था। उसके साथ जींस और टी शर्ट पहने एक खूबसूरत बांका नौजवान था और उन दोनों के साथ थी बीस पच्चीस साल की एक छमिया (लफंगा लड़कियों के बारे में इसी भाषा में बात करता है।) बेशक लड़की खूबसूरत थी और बिंदास। उसके कंधे पर इम्पोर्टेड पर्स और हाथ में महंगा मोबाइल था। बेहद लो कट की जींस और टीशर्ट में उसकी देह का हर गोलार्द्ध जैसे फट पड़ने को आतुर था। मैंने भर नजर देखा। लड़की का हाथ लड़के के हाथ में था। वे तीनों मेरी सामने वाली मेज पर आकर बैठ जाते हैं। इधर हम चारों इस झटके से उबर भी नहीं पाए थे कि देखते हैं कि अधेड़ बहादुर को एक अद्धा और तीन गिलास लाने का आदेश दे रहा है। बहादुर लड़की पर एक नजर डालकर मुस्कुराता है और तत्परता से अपने काम में जुट जाता है। लड़की भी अंग्रेजी में कुछ बुदबुदाती है। इधर लफंगा भी पूरे मूड में आ गया है। एक आंख दबाकर बड़े अश्लील ढंग से वह मुझसे पूछता है,क्यों क्या ख्याल है? कौन हो सकती है ये छमिया?

पता नहीं देखने में तो बाप बेटी और भाई बहन लगते हैं। मैं कहता हूं। लफंगा मेरी इस मूर्खता पर जोरदार ठहाका लगाता है। पोंगा पंडित हस्तक्षेप करते हुए कहता है, मुझे तो कोई धंधेबाज लड़की या वेश्या लगती है। शरीफ खानदान की कोई लड़की इस तरह आधी रात को मर्दो के साथ शराब पीने तो आएगी नहीं। अब तक माहौल मे एक तुर्शी आ गई थी। फिलासफर ने अटक अटककर उसी तुर्शी में कहा,हां...खानदानी औरतें तो सिर्फ बिस्तर पर ही वेश्या बनती है। वैसे वेश्या भी तो औरत ही होती है न पंडितजी! पंडित फिर खिसिया जाता है और हैं है कर बेशर्मी से हंसने लगता है। लड़की अपना दूसरा पैग ले चुकी है। अधेड़ का तीसरा पैग खत्म हो चुका है और अब वह थोड़ा थोड़ा बहकने भी लगा है। रह रहकर वह लड़की से लाड़ जताने लगता है। कभी उसके गाल पर चिकोटी काटता है तो कभी उसके हाथ सहलाने लगता है। लड़की हर बार हाथ झटक लेती है और अपने मोबाइल से चिपक जाती है। बार बार वह लड़के से भी सटने की कोशिश करती है। लड़के ने भी तीन पैग लेकर अपनी सिगरेट सुलगा ली है। इस बीच खाने का भी आर्डर दिया जा चुका है। अधेड़ चौथा पैग लेकर बार बार अपने ही गिलास से लड़की को थोड़ा सा और पी लेने का आग्रह कर रहा है। लड़की भी बाल झटककर बार बार कह रही है, नो अंकल नो...इट्स टू मच। इसके बाद वह लड़के के हाथ से सिगरेट लेकर कश लेने लगती है। लड़का फिलहाल संतुलित दिख रहा है मगर अधेड़ नशे में तारी है और लड़की भी झूमने लगी है। इसी बीच लड़की के मोबाइल पर किसी का फोन आता है। थोड़ी देर तक लड़की हंसते खिलखिलाते फोन पर बतियाती है और फिर चीख चीखकर रोने लगती है। फिलासफर उसकी एक एक हरकत गौर से देख रहा है। वह उहापोह में है। इतनी सुंदर लड़की को वह वेश्या या कालगर्ल मानने को तैयार नहीं। अपने अव्यावहारिक तर्कों से वह लड़की के सार्वजनिक रूप से शराब पीने की आजादी की तरफदारी कर रहा है। उसका कहना है कि कोई पिता जब अपने बेटे के साथ शराब पी सकता है तो बेटी के साथ क्यों नहीं पी सकता? हालांकि गु्त्थी है कि तब भी नहीं सुलझ रही। लफंगे और पोंगा पंडित ने साफ निर्णय दे दिया है कि लड़की निश्चित रूप से कोई हाई क्लास कालगर्ल है और लोगो को उल्लू बनाने के लिए अंकल अकंल कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि अगर वह कोई हाई क्लास कालगर्ल है तो यहां इस फटेहाल ढाबे पर क्या रही है? पोंगा पंडित मुंह बिचकाते हुए एक वाहियात सी थ्योरी देता है। उसके अनुसार संभव है कि अधेड़ लड़की का बाप या चाचा ही हो। देखने में ही साला चिरकुट लगता है। लड़का रईस है। हो सकता है कि अधेड़ और लड़के के बीच लड़की को लेकर कोई सौदा हुआ हो और वे उसे यहां शराब पिलाने लाए हों। शराब पीकर बूढ़ा जा पड़ेगा कही और चिड़िया उड़ेगी लड़के के बिस्तर पर...कलजुग है भाई..कुछ भी हो सकता है।

पंडित की बातों से फिलासफर खीझ जाता है। वह कहता है. तुम साले हमेशा जार्ज बुश की भाषा में बात करते हो। तथ्य सिर्फ इतना है कि एक लड़की है जो दो लोगों के साथ बैठकर शराब पी रही है। हो सकता है कि वह अपने मित्रों के साथ शराब पीने आई हो जैसे तुम लोग आए हो। चूंकि वह शराब पी रही है इसलिए तुम्हारी नजर में वह अनिवार्य रूप से वेश्या ही होगी जैसे बुश की नजर में सद्दाम अनिवार्य रूप से मानवता के लिए खतरा है। भले रासायनिक हथियारों के नाम पर उसके पास पिद्दी का शोरबा भी न मिला हो। बहस एक बार फिर लड़की से हटकर बुश की ओर मुड़ गई। तभी लड़की उठ खड़ी होती है। लड़का भी उसका हाथ पकड़कर खड़ा हो जाता है। अधेड़ सबका बिल चुकाता है और बचे हुए पैसे लड़की के पर्स में ठूंस देता है। लड़का और लड़की तेजी से कार की ओर बढ़ जाते है। अधेड़ भी लड़खड़ाते हुए उनके पीछे चला आता है।

मै फिर घड़ी देखता हूं। बारह बच चुके हैं। मेरे तीनों दुश्मन दोस्त नींद के आगोश में जा चुके है। मैं उठकर ढाबे से बाहर आ जाता हूं। कार स्टार्ट हो चुकी है। कार की खिड़की से लड़की मुझे देखती है। शराब के सुरूर में उसकी आंखें मतवाली हुई जा रही है। वह मुझे आंख मारती है और हौले से मुस्कुरा देती है। मैं उसकी मुस्कान का कोई अर्थ नहीं निकाल पाता। कार जा चुकी है। दिल्ली जाने वाली अंतिम बस अब तक नहीं आई। मैं होटल के कमरे में बास के साथ अलमस्त बिखरी मोना डार्लिंग की कल्पना करता हूं। स्टेशन पर अपने दुधमुंहे बच्चे के साथ खड़ी वह खौफ़जदा औरत भी मेरे साथ बाहर आ गई है। पसीने से चिपचिपाया उसका चेहरा देखकर इस बार मुझे बिल्कु्ल वितृष्णा नहीं हुई। बास की अब मुझे कोई परवाह नहीं और न ही जार्ज बुश की जो अब भी टीवी के परदे पर बड़बड़ा रहा था। दरअसल शराब का नशा भी अब अपने पूरे ऊरूज पर था और हां, सद्दाम भी मारा जा चुका था।

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संपर्क: संपादकीय विभाग, संपादकीय-मंथन पृष्ठ, सहारा इंडिया काम्प्लैक्स, सी-2,3,4 सैक्टर-11, नोयडा (उप्र)

2 टिप्पणियाँ

  1. बेनामी7:31 pm

    VERY INTERESTING . YOUR STORY DOES NOT LET ME DOWN IN BETWEEN NOR IT LEAVES ANY REASON TO STOP READING IN BETWEEN.
    MOST INTERESTING THE WAY U MANAGED THE 3 FRIENDS OF YOURS & OF COURSE THEIR INTERACTION AMONG THEMSELVES.

    LOVE TO READ SOME MORE STUFF LIKE THIS.

    KEEP GOING FRND .
    BEST OF LUCK & THANKS FOR POSTING .

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  2. gaurav2:01 pm

    intresting story..........

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