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सीताराम गुप्ता का आलेख : मन रूपी कम्प्यूटर में फीड करें सकारात्मक सोच का सॉफ़्टवेयर

मन रूपी कम्प्यूटर में फीड करें सकारात्मक सोच का सॉफ़्टवेयर

- सीताराम गुप्ता

sitaram guptaएक सज्जन हैं जो देर-देर तक कम्प्यूटर पर काम करते रहते थे। बाद में पता चला कि वे कम्प्यूटर पर कुछ काम-वाम नहीं करते थे बल्कि गेम खेलते रहते थे। अपने जरूरी काम भी छोड़ देते थे और गेम खेलने में लगे रहते थे। उनकी इस आदत से न केवल उनके घर वाले परेशान थे बल्कि वे स्वयं भी बहुत दुखी थे। उन्होंने बहुत कोशिश की कि गेम न खेलें लेकिन सब व्यर्थ। एक दिन उन्होंने कम्प्यूटर से सारे गेम डिलीट कर दिये और अब वे केवल जरूरी काम के लिए ही कम्प्यूटर पर बैठते हैं। यदि कम्प्यूटर में अनुपयोगी कार्यक्रम भरे होंगे तो वे हमारा समय ही नष्ट करेंगे। इसलिए जरूरी है कि हम कम्प्यूटर में केवल उपयोगी कार्यक्रम ही फीड करें।

कम्प्यूटर जैसी ही स्थिति हमारे मन की भी होती है। यदि हमारे मन में अनुपयोगी, बेवकूफी भरे, निरर्थक या नकारात्मक विचार रूपी कार्यक्रम भरे होंगे तो वे हमारी सफलता और उन्नति में बाधक ही होंगे। कम्प्यूटर का नियम है कि जो उसमें डालेंगे वही निकलकर बाहर आएगा। मनुष्य मन की भी यही स्थिति है। मन में जैसे विचार उत्पन्न होंगे बाह्य जगत में उनकी वैसी ही प्रतिक्रिया होगी। मनुष्य का स्वास्थ्य, व्यक्तित्व तथा कर्म सभी उसकी सोच द्वारा ही निर्धारित होते हैं। स्वास्थ्य के प्रति नकारात्मक सोच या रोग के प्रति भय, जो एक नकारात्मक सोच ही है, हमें रोगी बना देती है तो समृद्धि के प्रति नकारात्मक विचार और निराशा हमारी निर्धनता के लिए उत्तरदायी हैं। हमारे विचार हमारे विश्वास की अभिव्यक्ति होते हैं और जिसका जैसा विश्वास होता है वैसा ही फल भी मिलता है। हमारे विचार ही फल या अंतिम परिणति के रूप में हमारे सामने आते हैं। अत: जीवन में अच्छे स्वास्थ्य, प्रभावशाली व्यक्तित्व, सुख-समृद्धि, दीर्घायु तथा सक्रिय जीवन और संतुष्टि के लिए मन को सदैव सकारात्मक व आशावादी विचारों से ओतप्रोत रखना अनिवार्य है।

कुछ लोग इस पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। उनका कहना है कि कम्प्यूटर में असंख्य कार्यक्रम फीड किये जा सकते हैं। अपनी आवश्यकता और रुचि के अनुसार कार्यक्रमों का चुनाव कर लीजिए। बात ठीक भी है लेकिन जब हमारे सामने मिष्ठान्न आदि स्वादिष्ट व्यंजन रखे होते हैं तो कम स्वादिष्ट लेकिन पौष्टिक व्यंजनों को छोड़कर हम सबसे पहले मिष्ठान्न आदि पर ही हाथ साफ करते हैं। मधुमेह का रोगी भी सामने आने पर थोड़ी बहुत मिठाई खा ही लेता है जो उसके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसलिए कम्प्यूटर से उन सब कार्यक्रमों को डिलीट कर देना आवश्यक है जो बेशक रोचक और आकर्षक हों लेकिन अनुपयोगी हों। जब तक उसमें एक भी अनुपयोगी कार्यक्रम है वह हमें आकर्षित करता रहेगा और उसके आकर्षण के कारण हम अपने समय और क्षमता का दुरुपयोग करते रहेंगे। इसीलिए मन में समाए नकारात्मक विचारों का समापन भी अनिवार्य है। न जाने कब वे वास्तविकता का रूप लेकर हमारे जीवन को संकट में डाल दें। ये एक हिंसक विचार ही तो है जो एक विस्फोट द्वारा सैकड़ों-हजारों निरीह लोगों को मौत की नींद सुला देता है।

एक कम्प्यूटर की एक निश्चित क्षमता होती है। यदि उसे सारे उपयोगी कार्यक्रमों से भर देंगे तो अनुपयोगी के लिए जगह ही नहीं रहेगी। उसी प्रकार मन को भी केवल सकारात्मक उपयोगी विचारों से परिपूर्ण कर लेंगे तो नकारात्मक अनुपयोगी विचारों के लिए स्थान ही नहीं बचेगा और हमारी समस्या का समाधान हो जाएगा। सकारात्मक सोच से उत्पन्न कर्म हमारे जीवन को उत्तम दिशा प्रदान कर सकेंगे।

कहना सरल है लेकिन करना भी थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन असंभव नहीं। थोड़ा शांत स्थिर होकर विचारों के प्रवाह को देखना है। ये विचार उपयोगी हैं अथवा अनुपयोगी इस पर चिंतन करना है। फिर अनुपयोगी विचारों से छुटकारा पाना है तथा उपयोगी विचारों को दृढ़ करना है। उपयोगी विचार किसी भी हाल में खिसकने न पाएँ तथा अनुपयोगी विचार ठहरने न पाएँ। अनुपयोगी विचारों से छुटकारा पाने का एक तरीका तो ये है कि मन को उपयोगी विचारों से पूरी तरह ओतप्रोत कर लें। दूसरे किसी भी अनुपयोगी या नकारात्मक विचार को सकारात्मक विचार में परिवर्तित कर लें। यदि किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थिति के प्रति घृणा या विद्वेष का भाव है तो उसके स्थान पर प्रेम, करुणा और मैत्री जैसे भाव जगाएँ। सकारात्मक विचार के सम्मुख नकारात्मक विचार स्वत: समाप्त हो जाएँगे। चाहे तो मुँह से बोलकर कहें या मन में कहें कि मैं अमुक व्यक्ति से प्रेम करता हूँ, उसका आदर करता हूँ, उसको स्वीकार करता हूँ। फिर धीरे-धीरे इस कल्पनाचित्र या भाव का निर्माण करें। जैसे-जैसे भाव का निर्माण होगा वैसे-वैसे संबंधों में सुधर होकर मैत्री और सहयोग का विकास और विस्तार होगा।

स्वास्थ्य और समृद्धि के प्रति उत्तम भाव अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की सृष्टि में सहायक होंगे। मन रूपी कम्प्यूटर में निम्नलिखित भाव ;या आवश्यकतानुसार कोई भी उपयोगी भाव जो केवल सकारात्मक हों तथा वर्तमान काल में हों, फीड कर दीजिए और जीवन में मनचाही स्थितियों का निर्माण कीजिए:

1. मैं पूर्ण रूप से स्वस्थ हूँ तथा अत्यंत सक्रिय जीवन व्यतीत कर रहा हूँ।

2. मेरा व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली है तथा मैं सभी का सम्मान करता हूँ तथा सबसे प्रेम करता हूँ।

3. मैं पूर्ण रूप से सफल और समृद्ध जीवन व्यतीत कर रहा हूँ, जीवन में प्रचुरता का आनंद ले रहा हूँ।

आज जीवन में जो चाहें उसी की इच्छा करें, उसी की कल्पना करें तथा उस भाव को स्थायी बना लें लेकिन याद रहे यह इच्छा, कल्पना या भाव उपयोगी हो, सकारात्मक हो। तभी आप लाभान्वित हो सकेंगे, पूरा समाज लाभान्वित हो सकेगा।

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संपर्क:

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सीताराम गुप्ता

ए.डी.-106-सी, पीतमपुरा,

दिल्ली-110034

फोन नं.011-27313954/27313679

Email : srgupta54@yahoo.com

2 टिप्पणियाँ

  1. बिल्कुल सही लिखा है आपने!

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  2. सूचनाः

    "साहित्य प्रेमी संघ" www.sahityapremisangh.com की आगामी पत्रिका हेतु आपकी इस साहित्यीक प्रविष्टि को चुना गया है।पत्रिका में आपके नाम और तस्वीर के साथ इस रचना को ससम्मान स्थान दिया जायेगा।आप चाहे तो अपना संक्षिप्त परिचय भी भेज दे।यह संदेश बस आपको सूचित करने हेतु है।हमारा कार्य है साहित्य की सुंदरतम रचनाओं को एक जगह संग्रहीत करना।यदि आपको कोई आपति हो तो हमे जरुर बताये।

    भवदीय,

    सम्पादकः
    सत्यम शिवम
    ईमेल:-contact@sahityapremisangh.com

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