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अशोक मिश्र का व्यंग्य - भ्रष्टाचार में भी फिसड्डी

व्यंग्य

भ्रष्टाचार में भी फिसड्डी!

-अशोक मिश्र

एक दिन सुबह घरैतिन की निगाह बचाकर अखबार के पहले पन्ने पर हीरोइन की न्यूनतम कपड़ों में छपी तस्वीर को मुग्ध भाव से निहार रहा था। निगाह थी कि तस्वीर से हटने का नाम नहीं ले रही थी। तभी पता नहीं कैसे, निगाह फिसली और अखबार में छपी एक खबर की हेडिंग पर पड़ी। हेडिंग पढ़कर मैं उछला और सोफे से नीचे आ गिरा। मेरे गिरने की आवाज सुनकर किचन में नाश्ता तैयार कर रही घरैतिन भूकंप की आशंका से बाहर की ओर भागीं। मैं कराहता हुआ उठा और फिर सोफे पर सज गया। अपनी कमर सहलाते हुए मैं आश्चर्य से खबर पढ़ने लगा।

खबर के मुताबिक पिछले कई सालों से भ्रष्टाचार की मैराथन दौड़ में बांग्लादेश और नेपाल जैसे छटांक भर के देशों के धावक सूखी रोटी प्याज के साथ खाकर भी नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। कभी वे अपना ही रिकार्ड तोड़ते हैं, तो कभी दूसरों का। वहीं भारतीय धावक हवाला, चारा, ताबूत, पेट्रोलियम और तेलगी जैसे घोटाले करने के बावजूद फिसड्डी साबित हो रहे हैं। इससे भारत की प्रतिष्ठा पर आंच आ रही है। इससे शर्मसार होकर प्रधानमंत्री ने भारी मन से यह घोषणा की है कि जो भी सरकारी या गैरसरकारी मुलाजिम किसी उम्दा किस्म के घोटाले को अंजाम देने में सफल हो जाएगा, उसे शीर्ष नागरिक सम्मान से नवाजा जाएगा। हां, यह घोटाला किसी दूसरे घोटाले की नकल न होकर मौलिक होना चाहिए। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि देश के सम्मान को बचाए रखने के लिए मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और सभी दलों के राष्ट्रीय और छुटभैये नेताआें को यह अधिकार दिया जाता है कि यदि वे जरूरत समझें, तो घोटाला प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित कर सकते हैं। केंद्र सरकार इसके लिए जरूरी आर्थिक संसाधन मुहैया कराएगी।

खबर के मुताबिक नेता विरोधी दल ने लोगों से अपील की थी कि केंद्र सरकार की इस घोषणा को शक की निगाह से न देखा जाए। अब देशवासियों को यह साबित करना है कि भारतीय धरती घोटालावीरों से खाली नहीं है। छंटाक भर के देश महान भारत को पटकनी नहीं दे सकते। अब भारत उदय होकर रहेगा। उन्होंने अपनी पार्टी के शासनकाल में हुए घोटालों से प्रेरणा लेने की भी अपील की। यह खबर वाकई धमाकेदार थी। लेकिन पता नहीं यों, मेरा मन यह मानने को तैयार नहीं था कि प्रधानमंत्री और नेता विरोधी दल ने ऐसी अपील कर सकते हैं। रिश्वतखोरी, घोटालेबाजी और राजनीतिक सट्टेबाजों का सिरमौर देश पिछड़ रहा है। पिछले सत्तावन साल से पुष्पित-पल्लवित भ्रष्टाचार का भरा-पूरा पे़ड एकाएक सूखकर गिर गया, यह बात कुछ हजम नहीं हुई।

मैं हलक फाड़कर चिल्लाया, 'नहीं...ऐसा नहीं हो सकता। देश की इज्जत से खिलवाड़ नहीं करने का हक किसी को नहीं है।` इतना कहकर मैंने एक मुक्का सामने रखी मेज पर मारा। तभी पता नहीं कैसे- या हुआ, घरैतिन जोर से चिल्लाईं, 'हाय दैया..मर गई।` मैं हड़बड़ा गया। जो कुछ मैंने देखा, वह यह था कि मैं अपने बिस्तर पर था और घरैतिन बैठी रो रही थीं। जिसे मैंने मेज समझ कर मुक्का मारा था, वह घरैतिन की पीठ थी। दरअसल मैं सपना देख रहा था।

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संपर्क---

अशोक मिश्र

ए-५ स्पोर्ट्स एंड सर्जिकल गुड्स कांप्लेक्स,

कपूरथला रोड, जालंधर (पंजाब)

मोबाइल : ०९२१६८२२३३२

ईमेल- ashok@jal.amarujala.com

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