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डॉ. कान्ति प्रकाश त्यागी की हास्य-व्यंग्य कविता : फन्दे

कविता

फन्दे

-डॉ. कान्ति प्रकाश त्यागी

 

एक लड़की पड़ोस के लड़के का स्वेटर बुन रही थी I

खटिया पर लेटी दादी अम्मा, यह सब देख रही थी II

 

बिटिया क्या स्वेटर बुन रही हो I

बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रही हो II

 

दादी अम्मा ! स्वेटर तो बुन रही हूँ I

आप ही के कदमों पर चल रही हूँ II

 

बिटिया ! चिड़िया फ़ंसी या नहीं फ़ंसी I

दादी की बात पर लड़की कुछ हंसी II

 

अभी इधर भी फ़न्दे डाल रही हूँ I

और उधर भी फ़न्दे डाल रही हूँ II

 

डा०कान्ति प्रकाश त्यागी

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