नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

रबीअ बहार के कुछ क़तात


-रबीअ बहार


कुछ क़तात

मजनू होना भी मुश्किल है लैला भी आसान नहीं है/
प्यार में दीवाने होते थे वह दौर-ए-जीशान नहीं है/

प्यार भी अब तो सोच समझकर साजिश जैसा होता है /
लफ्ज़ -ए-मुहब्बत के मानों में पहले जैसी जान नहीं है /



अंदाज़-ए-अदावत भी जुदा लगता है /
ज़हर भी इस तरह देते हैं दवा लगता है/

अब मुहब्बत भी सियासत की तरह होती है/
बेवफा यार भी अब जान-ए-वफ़ा लगता है/


शम्स को आइना दिखाता हूँ/
बर्फ की मूरतें बनाता हूँ /

इससे मेरा है खून का रिश्ता /
मैं ग़ज़ल को लहू पिलाता हूँ/


फिक्र छोड़ दे प्यारे होगा जो भी होना है /

आदमी अजल से ही वक़्त का खिलोना है /

दोलतें अमीरों की हैं इन्हीं से बावस्ता /

जिनकी आसमान चादर और ज़मीं बिछौना है /


प्यार जब कर गया असर चुपचाप /

हो गयी सब को फिर खबर चुपचाप /

आइनों में शुमार है अपना /

हम भी कहते हैं सच मगर चुपचाप /

एक भी राज़ दोस्तों पे न खोल /

ये लगा देंगे एक सिफर चुपचाप /


रंग -ओ- निकहत गुलाब जैसी है /

उस की मस्ती शराब जैसी है /

जी में आता है चूम लूं उस को /

वो मुक़द्दस किताब जैसी है /

3 टिप्पणियाँ

  1. कतात बहुत बढिया है , पढ़कर अच्छा लगा !

    जवाब देंहटाएं
  2. अच्छी हैं भाई. शुक्रिया.

    जवाब देंहटाएं
  3. इससे मेरा है खून का रिश्ता /
    मैं ग़ज़ल को लहू पिलाता हूँ/

    ...वाह!
    मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूं,
    वह गजल आपको सुनाता हूं।

    लाइनें वाकई लाजवाब हैं।

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.