---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

विजय शर्मा का व्यंग्य : देश के संकट

साझा करें:

ह मारे देश पर आजकल संकट के गहरे, घने, काले, लम्बे बादल मंडरा रहे हैं. इतना बड़ा संकट हमारे देश पर आज से पहले कभी नहीं आया, कम-से-कम मेरी जान...

मारे देश पर आजकल संकट के गहरे, घने, काले, लम्बे बादल मंडरा रहे हैं. इतना बड़ा संकट हमारे देश पर आज से पहले कभी नहीं आया, कम-से-कम मेरी जानकारी में नहीं. हो सकता है मेरी जानकारी आधी -अधूरी हो. इतिहास में हम बहुत दूर नहीं जा सकते क्योंकि इतिहास लिखना हमारी परम्परा में नहीं है. बीते हुए को लिपिबद्ध करना हमें हमारे आकाओं ने सिखाया और कहते है न गुरु गुड़ ही रहा चेला चीनी हो गया. आज हम इतिहास लिखने में इतने कुशल हो गए हैं कि जब-तब इतिहास को लिखने बैठ जाते हैं. कभी भगवे रंग में रंगने का प्रयास करते हैं. कभी उसे माक्र्सवादी चश्मे से देखने की कोशिश करते हैं. कभी दलित की दृष्टि से देखते हैं. कभी उसमें नारी विमर्श की खोज करते हैं. कभी उसे इस कोण से लिखते हैं, कभी उस कोण से और जब तक लिखना समाप्त कर पाते हैं तब तक हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है और नई कमान सम्भालने वाले उसे नए ढंग से संवारने में लग जाते हैं. आपने देखा ही होगा जब नई चिड़िया घोंसला अपनाती है तो पुराने सब तिनकों को बुहार कर बाहर कर देती है और नए सिरे से घास-फूस ला कर फिर से घोंसला बनाती है.

तो इतिहास लिखने की हमारी परम्परा रही नहीं है, पर जहाँ तक इतिहास की मेरी जानकारी है उसमें देश पर इतने भयंकर संकट की चर्चा कहीं नहीं मिलती है. देश बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है. आप और हम जिम्मेदार नागरिक होने के कारण इससे आँखें नहीं मूँद सकते हैं. अगर हमारे यहाँ उपलब्ध इतिहास पर दृष्टि डालें जो महाभारत के रूप में प्राप्त है तो वहाँ भी इस तरह के किन्हीं संकटों का उल्लेख हमें नहीं मिलता है. आगे चलकर कालीदास के साहित्य में भी कहीं इसका वर्णन नहीं है. हमें आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिककाल में भी इसका ऐसा चित्रण नहीं मिलता है. अगर साहित्य समाज का दर्पण है तो हम बेखटके कह सकते हैं कि यदि इस संकट का नजारा इन कालों के साहित्य में नहीं मिलता है तो इससे साफ जाहिर है कि इन कालों में यह संकट था ही नहीं. अतः हम निःसंकोच कह सकते हैं कि यह संकट इससे पहले देश पर कभी आया ही नहीं. यह हमारे समाज के लिए उत्तर आधुनिकतावाद की उपज है. इसे हम समाजवाद का संकट कह सकते हैं क्योंकि यह पूरे समाज पर छाया हुआ है. इसे हम साम्यवाद का संकट कह सकते हैं क्योंकि यह सभी पर समान रूप से गहराया हुआ है.

पर संतोष की बात है इस संकट से आपको अकेले नहीं जूझना है, सारा देश, सारे उद्योग, सारे बाजार, सारे मल्टीनेशनल आफ साथ हैं. सभी मिलकर इस समस्या का समाधान ढूँढ रहे हैं. करोड़ों खर्च करके इसका हल निकालने के लिए शोध कार्य किया जा रहा है. आखिर यह राष्ट्रीय संकट की बात है, इसे नजर अन्दाज नहीं किया जा सकता है. प्रयोगशालाओं में तरह-तरह के प्रयोग किए जा रहें हैं ये प्रयोग निष्फल नहीं रहे हैं. कोई इस समस्या को कुछ हद तक कम कर सकने की बात कह रहा है, तो

देश का संकट २

कोई इसे पचास प्रतिशत तक घटाने में कामयाब होने की बात कह रहा है. कोई-कोई नब्बे प्रतिशत सफल होने का दावा कर रहा है. परंतु संकट इतना जटिल, इतना उलझन भरा है कि अभी तक कोई भी इससे शत-प्रतिशत उबारने का वायदा नहीं कर पा रहा है. वैसे भी आज फैशन के इस दौर में १००क् की गारंटी कौन दे. प्रतिस्पर्धा में कोई कोर्ट में नालिश न ठोंक दे, सो कुछ शोधकर्ता ९९क् पर संतोष करने को मजबूर हैं. हमारे बासमती और नीम का पेटेंट भले ही अमेरिका ले ले, पर हमारे इस राष्ट्रीय संकट के समाधान को पेटेंट करने के लिए वह भी उत्सुक नजर नहीं आता है.

आज बाजारवाद का बोलबाला है. हर बात के बीच में बाजार खडा है और हम बीच बाजार खड़े हैं. कोई कबीर नहीं है जिसके हाथ में लुकाठी हो और ना ही कोई कबीर के साथ चलने को तैयार है. किसे अपना घर जलाना है. आज कौन इतना मूर्ख है जो अपना घर जलाए. अब जब बाजार बीच में आ गया है जैसा कि अक्सर होता है प्रतिस्पर्धा बड़ी जबर्दस्त है सो कुछ लोगों को मजबूरन दाम कम करने पड़ रहे हैं. कोई इस संकट के हल को १०क् छूट पर बेच रहा है. कोई उसी दाम में मात्रा १०क् ज्यादा देने को तैयार है, फायदा न होने की हालत में दाम वापस करने को सहमत है, तो कोई आपको जबरदस्ती एक हल के साथ दूसरा मुफ्त में थमाने को या यों कहें ठेल देने को तत्पर है. बच-बच के रहना रे. पर कहाँ बच पाएंगे.

अब आप इस संकट को अवश्य पहचान गए होंगे. अगर अभी भी नहीं पहचान पाए तब आपने जरूर अपने बाल धूप में सफेद किए हैं और आपको गॉदरेज हेयर डॉय लगानी चाहिए, अगर यह सूट न करे तो वैस्मोल हेयर डाई आजमाइए और उसका कमाल देखिए. अच्छा क्या कहा आपने, इससे आपको एलर्जी है, तो गार्नियर हेयर डाई ट्राई कीजिए.

यह संकट आपको पाँच मिनट आराम नहीं करने देता है. हर पाँच मिनट पर यह आपको सोचने पर मजबूर कर देता है और इस संकट की एक विशेषता यह है कि आप इसके बारे में जितना ज्यादा सोचते हैं यह उतना बढ़ता जाता है. और यह तब और भी ज्यादा संकटपूर्ण स्थिति को प्राप्त होता जाता है. यह संकट अपने आप में कई और संकटों को समाए हुए है. कभी यह एक रूप में प्रकट होता है, कभी दूसरे रूप में. पहले-पहल यह संकट मात्र स्त्रियों को ग्रस रहा था, वह भी केवल प्रौढ स्त्रियों को. धीरे-धीरे इसने अपनी गिरफ्त में पुरुषों को भी ले लिया, पहले केवल वृद्धावस्था की ओर जाते पुरुषों को, पर अब यह इतना सर्वव्यापी हो चुका है कि युवा और बच्चे भी इसकी गुंजलक में कस चुके हैं. बल्कि अब इसका सारा ध्यान युवा और बच्चों खासकर बच्चियों की ओर है. वे ही बाजार की असली ताकत हैं, टारगेट हैं. आज हरेक की जबान पर बस एक ही राग है ‘अब जिन्दगी है तेरी जुल्फों में’.

कमाल है, आप अभी तक इस संकट को नहीं पहचान पा रहे हैं और यह है कि सुरसा के मुँह की तरह बढ़ता जा रहा है. उठिए, जागिए और इसका सामना कीजिए. इसको जानने-समझने के लिए आपको कहीं दूर नहीं जाना होगा. यह आफ घर, आफ अपने कमरे में चीख-चीख कर कह रहा है मुझे जानो, मुझे पहचानो, मैं हूँ, मैं हूँ, डॉन. यह टीवी के पर्दे पर हर क्षण उपलब्ध है, हर चैनल पर हाजिर है. जब देखो तब लहरा रहा है.

देश का संकट ३

हाँ, साहेबान, मैं बात कर रही हूँ बालों पर आए देश व्यापी संकट की. महाभारत में जब द्रौपदी ने केश

खुले रखने का ऐलान किया तब उसे इस खतरे की जानकारी न थी, वरना वह अपने उलझे बालों के लिए लिवॉन का इस्तेमाल अवश्य करती. बालों की कीमत बस आप जाने या फिर जाने लिवॉन. कालीदास की लम्बे, घने, काले बालों वाली नायिकाओं को भी इस संकट का आभास न था, अन्यथा वे बालों का झड़ना रोकने के लिए पैंटीन-प्रो का इस्तेमाल अवश्य करतीं.

यह उत्तर आधुनिकतावाद की देन है. आज इसके पाँव अंगद की तरह जम चुके है. शीघ्र यदि इसके समाधान के लिए किसी डाई, किसी शैम्पू, किसी तेल, किसी जेल का इंतजाम न किया तो शायद आपको समाज निकाले का सामना करना पड़े. पति, पत्नि एक दूसरे के साथ बाहर जाना बन्द कर देंगे. युवा पडोसी आपको आँटी बुलाने लगेंगे. बालों में हो शान तो हर काम है आसान.

कोई साबुन न इस्तेमाल कर लीजिएगा वर्ना लोग पूछेंगे ‘आपकी तबियत तो ठीक है न’. बालों के लिए तो बस जरा-सा लिवॉन काफी है. तेल की तरह नहीं चपोतना है. वैसे अगर आप पैराशूट हेयर ऑयल लगाएंगे तो बालों में तीन गुना नई जान आ जाएगी. ऐसी जान की वाकई बाकी सब बेजान लगे. क्लीनिक प्लस शैम्पू आफ बालों का अन्दाज बदल सकता है. पैंटीन से दो महीनों में बालों का झड़ना ५०क् बन्द. बालों के लिए कोई समझोता नहीं .

उफ कितने संकट छाए हुए हैं आजकल हमारे बालों पर. बाल बीमार हैं. इन्हें क्लीनिक ले जाना पड़ेगा. कभी सफेदी का संकट. कभी डैंड्रफ का. कभी बाल का झड़ना. कभी लटें सीधी नहीं हो रहीं हैं. कभी घुँघराले बालों का घुँघरालापन समाप्त हो रहा है. कभी घुँघराले केश सीधे-सपाट नहीं हो पा रहें हैं, जब कि आज रात पार्टी का कोड, आज का स्टाइल है, सीधे-सपाट बाल. बदले बाल, बदले अन्दाज. और अगर आफ बाल सीधे-लम्बे हैं पर आफ उनको घुँघराले बाल पसन्द हैं तो हाजिर है सन सिल्क कर्ल कंट्रोल जिससे आफ कर्ल रहें सुलझे-सुलझे.

इन राष्ठ्रीय संकटों से हमें निपटना है, वरना हम किसी को मुँह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे. डैंड्रफ यदि आपको आफ मनपसन्द काले कपडों को पहनने से रोक रहा है तो उसे कहिए चल हट. और यदि तब भी वह आपकी बात न माने तो उसे उसे एंटी डैंड्रफ शैम्पू से धो डालिए. नया क्लीनिक प्लस इंतजार कर रहा है, क्या आज आप अपने बालों को क्लीनिक ले गए? बालों की कीमत जाने आप जाने बाजार.

देखने से लगता है कि हमारे देश में न तो गरीबी का संकट है, न अशिक्षा का, न बेरोजगारी है, न कोई महामारी, है तो बस एक ही संकट है. बालों पर आया हुआ संकट. यही है आज हमारे देश का सबसे बड़ा संकट. यही है आज के भारत का ज्वलंत प्रश्न. यदि हमने शीघ्र इसे हल न किया तो आगामी इतिहास, आने वाली पीढी, हमें कभी माफ नहीं करेगी. हमें इसे जल्द-से-जल्द दूर करना है तभी दिमाग रहेगा कूल.

((

संपर्क:

vijshain@yahoo.com

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

|कथा-कहानी_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|हास्य-व्यंग्य_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|आलेख_$type=two$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|संस्मरण_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|उपन्यास_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लोककथा_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4062,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3026,कहानी,2266,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,99,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,244,लघुकथा,1255,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,327,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2009,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,711,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,798,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,89,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,209,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: विजय शर्मा का व्यंग्य : देश के संकट
विजय शर्मा का व्यंग्य : देश के संकट
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2009/04/blog-post_4211.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2009/04/blog-post_4211.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ