रवींद्र नाथ टैगोर 150 वीं जयंती वर्ष पर यशवंत कोठारी की विशेष प्रस्तुति

SHARE:

मैं अपने परिवेश के प्रति बहुत ही सतर्क रहता हूं ! -रवीन्द्रनाथ टेगौर - - तथा श्रीमती सत्यवती देवी ने रवींद्रनाथ ठाकुर से उनकी रचना प...

clip_image001

मैं अपने परिवेश के प्रति बहुत ही सतर्क रहता हूं !

-रवीन्द्रनाथ टेगौर

- -

तथा श्रीमती सत्यवती देवी ने रवींद्रनाथ ठाकुर से उनकी रचना प्रक्रिया पर बातचीत की थी, जो ‘फारवर्ड’ पत्रिका में 23 फरवरी, 1936 के अंक में छपी थी, प्रस्तुत है वह सदाबहार बातचीत।

सुदर्शन: क्या आप अपनी रचनाओं की पृप्ठभूमि पर कुछ बोलना चाहेंगे ? कहानियाँ आप के मन में कैसे पनपती हैं ?

कवि: बहुत कम उम्र से ही मैंने कहानियाँ लिखनी शुरु की। जमींदार होने के नाते, मुझे गांव जाना पड़ता था। इस तरह मैं गांव के सहज-सरल लोगों के संपर्क में आया, ग्राम्य बंगाल का सौंदर्य और परिवेश दोनों भाते थे, बंगाल नदियों का देश है, इन नदियों का सौंदर्य और विस्तार आश्चर्यचकित कर देने वाला है, वहां का जीवन मैंने बहुत करीब से देखा है और इसने मुझे प्रेरित किया है, मेरा जन्म और लालन-पालन कलकत्ते में हुआ था। अतः ग्राम्य जीवन से मैं अपरिचित था, इसी वजह से गांव मेरे लिए रहस्यावृत्त-सा था, ज्यों-ज्यों मैं सहज-सरल ग्रामीणों के संपर्क में आता गया, त्यों-त्यों मैं उन्हीं में से एक हो गया, मैंने अनुभव किया कि इनका परिवेश, इनकी दुनिया, कलकत्ता की दुनिया से एकदम पृथक है। मेरी शुरु की कहानियाँ इसी पृष्ठभूमि पर आधारित है और वे ग्राम्य जीवन से मेरे संपर्क की कथा कहती है। इन रचनाओं में यौवन की ताजगी है। इन कहानियों के लिखे जाने से पहले बंगला साहित्य में ऐसा कुछ नहीं लिखा गया था। निःसंदेह बंकिम चंद्र ने कुछ कहानियाँ लिखी थी, पर वे रचनाएं रोमांटिक थी, मेरी रचनाएं ग्राम्य जीवन के सुख-दुख, शोपण तथा संघर्पो पर आधारित थीं, उनमें एक गंवईपन भी है, उन कहानियों को आज जब मैं पढ़ता हूं, इनमें से काफी भूल गया हूं - दुर्भाग्यवश मेरी याददाश्त बहुत अच्छी नहीं है, कभी कल लिखी गयी चीज मैं आज भूल जाता हूं- बहरहाल, आज भी वे रचनाएं मेरे सामने उन बीते क्षणों को एकदम उसी रुप में ला खड़ा करती हैं, इन रचनाओं में एक विश्वव्यापी अपील है,क्योंकि दुनिया भर में आदमी के दुख और सुख एक ही है, मेरी बाद की रचनाओं में यह ताजगी और कोमलता नहीं आ पायी है,

सुदर्शन: क्या जीवित व्यक्तियों की आपकी रचनाओं में स्थान मिला है ?

कवि: जी हां, मेरी कहानियों के कुछ पात्र एकदम जीवन से उठाये गये हैं, उदाहरणतः ‘छुट्टी’ कहानी में लड़के ‘फटिक’ का चरित्र, गांव के एक बालक पर आधारित है, इस कोमल, कल्पनाशील बालक को देखकर मुझे लगा, अगर इसे अपने परिवेश से दूर कलकत्ता ले जाकर, एक असहानुभूति शील परिवार में, मामी के पास रखा जाये तो इस नन्हे बच्चे पर क्या बीतेगी ?

चंद्रगुप्त: आप अपनी किस रचना को श्रेष्ठ समझते हैं ?

कवि: ‘हंसते हुए’ यह कहना बहुत कठिन हें। कइ्र ऐसी रचनाएं है, जो प्रिय हैं...नदी के किनारे व्यतीत मेरा जीवन हर्ष और विवाद से परिपूर्ण था। थोड़ी-सी कल्पना, चित्र और दृश्य रचनाओं का सृजन करते थे। एक रचना, जिसका उल्लेख मैं करना चाहूंगा, ग्रामीण परिवेश लिये हुए है। कहानी में वर्णित उस लड़की को मैंने गांव में देखा है। लड़की बहुत जिद्दी, बागी और असाधारण थी। अपनी आजादी को वह किसी भी कीमत पर खोना नहीं वाहती थी। प्रतिदिन दूर से वह मुझे निहारती थी। कभी-कभी वह अपने साथ एक बच्चे को भी लाती थी और मेरी ओर उंगली उठाकर उस बच्चे से कुछ कहती थी। दिन-प्रतिदिन वह इस तरह आती रही। फिर एक दिन वह नहीं आयी। उस दिन नदी में पानी लेने आयी हुई ग्रामीण औरतों की बातचीत मैंने सुनी तो पता चला कि वह लड़की ससुराल जा रही है। ग्रामीण औरतें उस लड़की के भविष्य पर बहुत चिंतित थीं, क्योंकि लड़की बागी थी और व्यवहार-कुशल नहीं थी। अगले दिन नदी में एक छोटी-सी नाव दिखी। उस लड़की को जबर्दस्ती नाव पर बिठाया जा रहा था। संपूर्ण परिवेश उदासी और व्यथा से परिपूर्ण था। उसकी सखियां बेकाबू-सी हो रही थीं और कुछ उस लड़की से न डरने का अनुरोध कर रही थीं। धीरे-धीरे वह नाव नदी में अदृश्य हो गयी। यही घटना मेरी एक कहानी का आधार बन गयी। उस कहानी का शीर्षक है-‘समाप्ति’।

एक पोस्टमास्टर था। वह मेरे पास आता था। वह अपने घर से काफी दिनों से बाहर था और वापस लौटने के लिए परेशान था। गांव का परिवेश अच्छा नहीं था। उसे लगता था कि जंगलियों के बीच उसे जबरदस्ती रखा गया है। वह छुट्टी पाने को इतना बेचैन था कि नौकरी से इस्तीफा तक देने के लिए तैयार था। वह मुझसे मिलता और ग्रामीण जीवन के बारे में बातें करता। वस्तुतः उसी की बातों से कहानी ‘पोस्टमास्टर’ लिखने की प्रेरणा मिली।

चतुर्वेदी: ‘काबुलीवाला’ की रचना कैसे हुई ? इस कहानी की अपील विश्वव्यापी है तथा यह बहुत ही लोकप्रिय रचना हैं।

कवि: मेरी इस रचना में थोड़ी-सी कल्पना है। यद्यपि एक काबुलीवाला हमारे घर आया करता था और वह हम लोगों से काफी घुल-मिल गया था। मैंने कल्पना की कि उसके देश में उसकी भी कोई छोटी बच्ची होगी, जो उसे याद करती होगी।

चतुर्वेदी: कहानी का वह अंश जिसमें काबुलीवाला अपनी ससुराल जाने की बात कहता हे, मुझे बहुत अच्छा लगा।

कवि: हमारे इधर जेल को ‘श्वसुर-बाड़ी’ भी कहा जाता है। क्या आपके उधर भी ऐसा ही कहा जाता है ?

चतुर्वेदी: जी हां। ‘ठहाका’ हमारे इधर भी इसे ससुराल ही कहते हैं।

चंद्रगुप्त: आपकी बाद की कहानियों की शैली पृथक है। आपको अपनी पिछली रचनाएं कैसी लगती हैं ?

कवि: मेरी बाद की रचनाओं में वह ताजगी नहीं है, यद्यपि वे कई समस्याएं ‘सामाजिक’ उठाती हैं और इनमें मनोवैज्ञानिक अपील भी है। जब मैं युवक था, तब मेरे सामने कोई सामाजिक अथवा राजनीतिक समस्या नहीं थी। अब ऐसी कई समस्याएं हैं। जो लिखते वक्त स्वतः रचनाओं में चली आती है। मैं अपने परिवेश के प्रति बहुत ही सतर्क रहता हूं। और जब तक उचित परिवेश न मिले, तब तक मैं कोई भी कलात्मक कार्य नहीं कर सकता। जब मैं युवक था, मैं जो कुछ देखता, वह करुणा के साथ घुल-मिलकर मेरी रचनाओं में आ जाता। अतः मेरी नजर में उन रचनाओं का साहित्यिक मूल्य अधिक है। वे स्वतः स्फुर्त भी हैं। मेरी बाद की रचनाओं की ‘शैली इसलिए भी पृथक है कि उसमें कहानी के लिए आवश्यक तकनीक है। वैसे अब भी यह इच्छा होती है कि मैं अपने यौवन के दिनों में वापस लौट जाउं। मेरा जीवन कई भागों में विभक्त है और मेरी समस्त रचनाएं कई कालखंडों में विभाजित की जा सकती हैं। हम सब एक ही जीवन में कई बार जन्म लेते हैं। एक काल-खंड से निकलकर जब हम अगले काल में प्रवेश करते हैं तो वह पुनर्जन्म के समान होता हैं। अतः हमारी रचनाएं भी निरंतर नव-जन्म लाभ करती हैं। मेरे साथ यह अंतर इतना तीव्र है कि मैं अपने पिछले साहित्यिक जन्मों को बहुत जल्द भूल जाता हूं। पिछले दिनों जब मैं अपने यौवन काल की कहानियों के प्रूफ पढ़ रहा था तो लगा कि इनमें आज भी कितनी ताजगी है ?

0 0 0

काजल घोष एवं आशीष सिन्हा

सारिका -16 अक्टूबर, 1982 से साभार

 

प्रस्तुति-यशवन्त कोठारी

यशवन्त कोठारी

86, लक्ष्मीनगर ब्रह्मपुरी बाहर,

जयपुर 302002 फोन 2670596

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: रवींद्र नाथ टैगोर 150 वीं जयंती वर्ष पर यशवंत कोठारी की विशेष प्रस्तुति
रवींद्र नाथ टैगोर 150 वीं जयंती वर्ष पर यशवंत कोठारी की विशेष प्रस्तुति
http://lh6.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/S_4Nw7vUMtI/AAAAAAAAIB0/UITZ0UvFau8/clip_image001_thumb.gif?imgmax=800
http://lh6.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/S_4Nw7vUMtI/AAAAAAAAIB0/UITZ0UvFau8/s72-c/clip_image001_thumb.gif?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2010/05/150.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2010/05/150.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content