विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका -  नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.
रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -

पिछले अंक

आदमखोर (कहानी संकलन) संपादक - डॉ. दिनेश पाठक शशि - 7- उमाशंकर दीक्षित की कहानी : असली सोना

साझा करें:

कहानी संग्रह आदमखोर (दहेज विषयक कहानियाँ) संपादक डॉ0 दिनेश पाठक ‘शशि’ संस्करण : 2011 मूल्य : 150 प्रकाशन : जाह्नवी प्रकाशन विवेक व...

kahani sangraha aadamkhor dahej vishyak kahaniya dinesh pathak shashi

कहानी संग्रह

आदमखोर

(दहेज विषयक कहानियाँ)

संपादक

डॉ0 दिनेश पाठक ‘शशि’

संस्करण : 2011

मूल्य : 150

प्रकाशन : जाह्नवी प्रकाशन

विवेक विहार,

शाहदरा दिल्ली-32

शब्द संयोजन : सागर कम्प्यूटर्स, मथुरा

----

असली सोना

पं. उमाशंकर दीक्षित

 

सेठ करोड़ीमल गुस्से में पागल थे। उन्होंने उन्हें धक्का देकर घर से बाहर धकेल दिया। उनके वहाँ से चले जाने के बाद भी वे बहुत देर तक उन्हीं के बारे में बक्-बक करते रहे। कम्बख्त, बेअकल चले आते हैं, बिना सोचे समझे। आखिर समाज में हमारी भी अपनी प्रतिष्ठा है’ हमारा अपना स्टेटस है। वह फटीचर की औलाद स्कूल का मामूली सा मास्टर। उस बेबकूफ ने अपने अन्दर झाँक कर भी नहीं देखा कि अपनी औकात क्या है? अरे, कहाँ राजा भोज कहाँ कंगला तेली। हमारी बराबरी करने चला है।

सेठ करोड़ीमल बैठे-बैठे तैश में अकेले बड़बड़ा रहे थे। तभी मैं आवश्यक कार्य से उनके पास पहुँच गया। मैंने देखा कि सेठ जी का मूड कुछ खराब है। उनके होंठ क्रोध के मारे अभी तक हिल रहे हैं। मैंने राम-राम करते हुए कहा-‘‘ताऊजी क्या बात है? सुबह-सुबह ताई जी से कुछ कहन-सुनन हो गई है क्या?’’

तब वे मेरी ओर पलट कर बोले-‘‘ना बेटा ना-तेरी ताई ने तो कुछ नहीं कहा। मेरा दिमाग तो वह मास्टर खिलाड़ीराम ने खराब कर दिया है।’’

यह सुनकर मैंने सीधे-सीधे लहजे में कहा-‘‘क्या बात हो गई ताऊजी। मास्टर साहब तो निहायत शरीफ और नेक इंसान हैं। जरूर आपकेा उनके बारे में कोई गलत फहमी हुई है।’’

हाँ-हाँ नेकी जैसे उसी में कूट-कूट कर भरी है। दुनिया में केवल वही नेक है और तो दुनिया में नेकी किसी में नहीं! वह तो बड़ा नासमझ और नालायक आदमी है। अरे, आदमी अपनी औकात को देखकर तो बात करे।’’

मैंने फिर कहा-‘‘ताऊजी, आखिर हुआ क्या है?’’

‘‘अरे बेटा रामू! वह फटीचर की औलाद अपनी बेटी का सम्बन्ध हमारे बेटे प्रवीन के संग करना चाहता है। कह रहा था कि उसकी बेटी कोमल और हमारा प्रवीन एक दूसरे से प्यार करते हैं। यहाँ गिड़गिड़ा रहा था बिल्ली की तरह। मुझे उसकी बात पर क्रोध हो आया। मैंने उसे धक्का मारकर बाहर निकाल दिया। उसमें जरा सी भी समझ होगी तो इधर पैर भी नहीं रखेगा।’’

मैं जैसे ही कुछ कहने को उद्यत हुआ तभी ताई दो गिलासों में चाय ले आईं और बोलीं- ‘‘देख रामू बेटा! तेरे ताऊजी तो बेकार गर्म हो रहे हैं। ये सब पुरानी दकियानूसी की बातें करते हैं। समय की नजाकत को नहीं पहचानते। ये नहीं सोचते समय कहाँ से कहाँ पहुँच गया है। गम्भीरता से किसी बात को लेते ही नहीं। देख भैया! हमारे एक ही तो बेटा है। हम उसके मन की न करें तो हमारा माँ-बाप होना ही बेकार है।’’

सेठजी गरज उठे-‘‘अरे लक्ष्मी-तू बिना सोचे समझे बोलने लगती है। उस फटीचर मास्टर की हैसीयत ही क्या है? वह दहेज में हमें क्या दे देगा? फिर सम्बन्ध बराबर वालों में किए जाते हैं। तू ही देख मनोहर लाल के लड़के की सगाई में ही दस लाख कैश और एक सेन्ट्रो कार आई है। उसका लड़का तो हमारे प्रवीन के बराबर पढ़ा लिखा भी नहीं है। हमारे प्रवीन ने तो एम.बी.ए. प्रथम श्रेणी में पास की है। फिर हमारे क्या कमी है जो बिना विचारे अपने इकलौते बेटे को कुएँ में धकेल दूँ। कोठी, दो, दो कारें, कारखाना ऊपर से करोड़ों की सम्पत्ति का वही अकेला वारिस है। वह घटिया दो कौड़ी का मास्टर मेरी क्या बराबरी करेगा। यदि मै उसकी लड़की का विवाह अपने बेटे के साथ कर भी दूँ तो क्या दुनिया मुझ पर थूकेगी नहीं? उस मास्टर के बच्चे में इतनी सामर्थ है कि शादी में बीस लाख रूपये खर्च कर सके!’’

मैंने बात काटते हुए उन्हें टोका- ‘‘ताऊजी, आप यह तो सब सच कह रहे हो। परन्तु लड़के लड़की दोनों सममुच आपस में प्यार करते हों तो? हो सकता है हमारे प्रवीन ने ही मास्टर जी को समझा-बुझाकर आपके पास भेजा हो। अभी तो मास्टर साहब ने यह बात आपके सामने रखी है, कल को आपसे स्वयं प्रवीन यही सब कहे तक क्या करोगे आप? आपके द्वारा अधिक प्रतिबन्धित होकर यदि वे दोनों कोर्ट-मैरिज करके और आपसे अलग होकर रहने लगें तो आपकी यह शानवान, कोठी बंगला और करोंड़ों की सम्पत्ति कहाँ रह जायेगी। कहाँ रह जायेगा आपका यह ऊँचा स्टेटस? एक कौड़ी भी दहेज में मिलेगी नहीं, लड़का भी हाथ से निकल जायेगा। बदनामी मुफ्त में मिलेगी। मेरी तो राय यही है कि आप समझदारी से काम लें। मास्टर जी को बेइज्जत करके भी आपने अपनी ही इज्जत पर दाग लगाया है। मास्टर साहब की लड़की कोमल ने भी पूरी यूनिवर्सिटी में एम.ए. में टॉप किया है। उसने हमारे प्रवीन के साथ एम.बी.ए. भी किया है। हो सकता है वे एक दूसरे को प्रेम करते हों। इस बात से तो प्रवीन को भी आन्तरिक क्लेश पहुँचेगा।’’ ताई ने भी मेरी बात का पूर्ण समर्थन किया।

मेरी बात सुनकर करोड़ीमल बोले-‘‘बेटा-तेरी बात सोलह आने सच है, परन्तु ये प्रेम-विवाह अक्सर असफल ही होते हैं। भावुकता में बंधे ये सम्बन्ध शीघ्र ही तलाक में बदल जाते हैं। ऐसे में लाखों को दहेज पर तो पानी फिर जाता है। और अन्त में दुलहिन भी चली जाती है। रही मेरे बेटे प्रवीन की बात सो वह ऐसा नहीं है। वह मेरी मर्जी के विरूद्ध शादी नहीं करेगा।’’

रामू और सेठानी वहाँ से उठकर चले गये। कुछ देर बात सेठ जी भी शान्त हो गये। शनैः शनैः कुछ समय और व्यतीत होता गया। प्रवीन को अपने पिता से मास्टर साहब के साथ इतने अभद्ब व्यवहार की आशा कदापि न थी। वह अब अधिक उदास रहने लगा। उसने शर्म के कारण मास्टर साहब के घर जाना भी छोड़ दिया। अब उसे हर पल कोमल की चिन्ता सताने लगी। कहीं ऐसा न हो कि वह अपने पिता के व्यवहार के कारण अपना इरादा बदल दे।

चिन्ता और फिक्र के कारण उसका स्वास्थ्य भी बिगड़ने लगा। बहुत ही कमजोर और पीला पड़ गया। आँखें गड्डों में घुस गईं। उसका किसी काम में मन नहीं लगता था। उसके यौवन का बसंत असमय ही पतझड़ में परिवर्तित होने लगा। उसके मन में हर समय कोमल का ही ध्यान बना रहता।

पुत्र की यह हालत देखकर सेठ-सेठानी भी चिन्तित होने लगे। सेठजी ने बेटे को लाख तरह से समझाया पर प्रवीन के समक्ष उसकी एक न चली। आखिर बेटे की दशा पर तरस खा कर सेठ करोड़ी मल ने अपने नौकर के द्वारा मास्टर साहब को संदेश पहुँचाया कि आप 20 तोले सोने के आभूषण, एक मारूति कार और पाँच लाख रूपये नकद दहेज में देने की व्यवस्था करलें, सेठजी आपकी बेटी को अपनी पुत्रवधू बनाने को राजी हैं।

मास्टर साहब ने नौकर के साथ ही कहला भेजा कि इतना सब दहेज में देने को मेरे पास कुछ नहीं है। मेरे पास तो केवल कन्या रूपी असली धन है बस, वही दे सकूँगा। हाँ, बरातियों का आदर सत्कार अच्छी तरह कर दिया जायेगा। वैसे मैं दहेज लेने और देने के सर्वथा विरूद्ध हूँ। मैंने तो कोमल और प्रवीन की भावनाओं का सम्मान करते हुए सेठजी से इस विवाह का प्रस्ताव किया था। सेठजी इसे मेरी कमजोरी न समझें।

जब नौकर ने यह समाचार सेठजी को सुनाया तो सेठ जी फिर आग-बबूला हो उठे। उस पर दहेज का जो भूत सवार था वह सिर चढ़कर बोलने लगा और पूरे घर को अधर करके रख दिया। फिर कुछ दिन पहले नगर के एक बड़े नामी गिरामी सर्राफ दिनेशचन्द्र जो अपनी बेटी का रिश्ता लेकर उनके पास आये थे वे दस लाख नकद, एक मारूती कार देने की कह गये थे- यद्यपि उनकी लड़की कुछ काली और मोटी थी- उनको फोन करके कह दिया कि हमें आपका रिश्ता स्वीकार है। आप बसन्त पंचमी के दिन सगाई करने आ जायें।

प्रवीन उनकी मर्जी के खिलाफ दहेज के लोभ में फँसे अपने पिता से रुष्ट होकर घर से निकल पड़ा। वह अपनी कार को स्वयं ड्राइव करते हुए कोमल से मिलने मास्टर साहब के घर की ओर चले जा रहा था। घोर-निराशा के कारण उसका मानसिक सन्तुलन बिगड़ने लगा और अचानक उसकी कार का सामने खड़े एक ट्रक से एक्सीडेन्ट हो गया। कार का आगे का हिस्सा ट्रक की बौडी में घुसकर चकना-चूर हो गया। बेचारा प्रवीन ड्राइविंग सीट पर बैठा हुआ उसमें बुरी तरह फँस गया। ट्रैफिक पुलिस ने बड़ी कठिनाई से उसे निकाला। लेकिन उसके शरीर से इतना रक्त निकल चुका था कि वह बेहोश हो गया था।

पुलिस ने उसे तुरन्त सी.एफ.सी. हास्पीटल में लेजाकर भर्ती करा दिया। उसकी तलाशी लेने में उसके पर्स से उसके घर का एड्रेस और टेलीफोन नम्बर मिल गया। पुलिस ने फोन द्वारा सेठ करोड़ीमल को यह सब सूचित कर दिया।

सेठ और सेठानी के तो जैसे होश ही उड़ गये। उनके पैरों से जमीन खिसकने लगी। वे दूसरी गाड़ी में बैठकर तुरन्त सी.एफ.सी. हास्पीटल पहुँचे। वहाँ देखा कि प्रवीन इमरजैन्सी में है और उसकी हालत अत्यन्त गम्भीर है। उसके शरीर से अत्यधिक खून निकल चुका है। वह उस समय पूर्ण रूप से अचेत पड़ा था। डॉक्टर लेग उसके ग्रुप का खून तलाशने में लगे थे। मगर उसके ग्रुप का खून नहीं मिल पा रहा है। न तो वह खून अस्पताल में है और न पूरे शहर के कैमिस्टों की दुकानों में। रात्रि के लगभग बारह बज चुके थे। आगरा तक जाने-आने में और विलम्ब ही होगा। इधर प्रवीन की जान खतरे में है, उसे तुरन्त ही खून मिलना चाहिए। सेठ-सेठानी और उनके सभी हितैषियों ने अपने-अपने खून टेस्ट करवा दिए, परन्तु किसी का खून प्रवीन के खून से मैच नहीं कर पा रहा था।

इसी ऊहापोह में काफी समय व्यतीत हो चला था। सेठ जी पागलों की तरह चिल्ला उठे-‘‘अरे, कोई मेरे बच्चे को बचा लीजिए। मैं ही इसका हत्यारा हूँ। मैंने स्वयं उसे दहेज की बलि पर चढ़ा दिया। डाँक्टर! मुझसे चाहे जितना धन ले लो परन्तु मेरे बेटे को कैसे भी बचा लीजिए।’’

उत्तर में डॉक्टर ने कहा-‘‘सेठजी, अब हम कर ही क्या सकते हैं। अब तो इसका ईश्वर ही रक्षक है।’’-यह सुनते ही सेठानी पछाड़ खाकर रोने लगी। लोग उन्हें सान्त्वना देने लगे।

तभी एक जूनियर डॉक्टर ने आकर सूचना दी कि ‘‘अभी-अभी एक युवती का ब्लड प्रवीन के ब्लड से मैच कर गया है। वह स्वेच्छा से खून देने को तैयार है। शायद भगवान ने उसकी सुनली।’’

डाक्टर साहब-’’खून किसी का भी लो परन्तु मेरे बेटे को बचा लीजिए।’’ सेठ करोड़ीमल ने रोते हुए कहा।

अब कक्ष से सभी को बाहर कर दिया गया और प्रवीन के बैड के पास ही उस खून प्रदान करने वाली युवती का पलंग डाल दिया गया। डाँक्टरों ने शिरिंज लगाकर उसका खून प्रवीन के शरीर में चढ़ाना शुरू कर दिया।

लगभग चार घंटों की प्रतीक्षा के बाद आपरेशन थियेटर का दरवाजा खुला। डॉक्टर ने प्रसन्न मुद्बा में बताया-‘‘सब कुछ ठीक है, अब प्रवीन को होश आ चुका है। आप उससे मिल सकते हैं, परन्तु अभी उससे बातें न कीजिएगा।’’

यह सुनकर सेठ-सेठानी की जान में जान आई और वे तुरन्त प्रवीन के निकट जा पहुँचे। दोनों ने बेटे के सिर पर हाथ फिराया। उसके ठीक बराबर वाले पलंग पर खून दान देने वाली युवती पर जब सेठजी की दृष्टि गई तो एक दम सकते में पड़ गये। यह बहुत ही खूबसूरत और स्मार्ट लड़की आखिर है कौन? मर्द भी इतना साहस नहीं दिखा पाते जितना इस युवती ने दिखाया है। पूछने पर सेठजी को मालूम हुआ कि यह युवती और कोई नहीं, मास्टर खिलाड़ीराम की पुत्री कोमल है, जिसके पिता को उन्होंने अपमानित करके घर से भगा दिया था। आज उसी ने उनके एक मात्र बेटे को जीवन दान दिया है। जिसे करोड़ों रूपये देकर भी सेठजी नहीं खरीद सकते थे।

सेठजी की आँखें शर्म से झुक गईं। वे पश्चाताप करके धरती में गढ़े जा रहे थे। इसी बींच में कोमल वहाँ से उठकर चुपचाप न जाने कब चली गई; किसी को पता ही न चला। सेठ जी शर्म के कारण उससे वहाँ कुछ कह भी न सके।

दूसरे दिन प्रवीन को अस्पताल से छुट्टी मिल गई और वह घर पर आ गया। सेठ जी आज पैदल ही चल कर चुपके से मास्टर साहब के घर पहुँच गये। वहाँ कोमल का आभार व्यक्त करते हुए अनेक आशीर्वाद दे डाले-‘‘बेटी, मुझे माफ कर देना। मैंने तुम्हें पहचानने में बड़ी भूल की। फिर मास्टर जी की ओर रुख करके हाथ जोड़कर क्षमा माँगने लगे-‘‘मास्टर साहब-मुझे माँफ कर दीजिए। वास्तव में उस समय मेरी आँखों पर दहेज के लोभ का चश्मा लगा हुआ था, जिसको मैंने अब उतार कर फैंक दिया है। मैं अब आपकी बेटी को अपने घर की बहू बनाने के लिए आपसे भीख माँगता हूँ। मुझे आपका एक पैसा भी नहीं चाहिए। मेरे लिए आपकी बेटी ही असली सोना है।

उसी समय वहाँ प्रवीन की माँ भी आ पहुँचीं। उसने कोमल के सिर पर आशीर्वाद का हाथ रखते हुए कहा-‘‘जब ऊपर वाले ने ही तुम दोनों की जोड़ी मिला दी है तो उसे कौन नकार सकता है। प्रवीन की रग-रग में तुम्हारा खून समा चुका है फिर भला वह तुमसे अलग अब कैसे हो सकता है। नेकी और इन्सानियत की दौलत जो तुम्हारे और तुम्हारे माता-पिता के पास है, वह दौलतमंद लोगों के पास कहाँ है? सचमुच तुम्हारा स्टेटस हमसे बहुत ऊँचा है।’’ -यह कहकर उन्होंने एक हीरा से जड़ा सैट उसको अपने हाथों से पहना दिया और उसे अपनी बहू स्वीकार कर लिया। ’’’

-----------------------.

संपादक‘जमुना जल’

104-चन्द्रलोक कॉलोनी,

.कृष्णा नगर, मथुरा - 4

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * || * उपन्यास *|| * हास्य-व्यंग्य * || * कविता  *|| * आलेख * || * लोककथा * || * लघुकथा * || * ग़ज़ल  *|| * संस्मरण * || * साहित्य समाचार * || * कला जगत  *|| * पाक कला * || * हास-परिहास * || * नाटक * || * बाल कथा * || * विज्ञान कथा * |* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4082,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,341,ईबुक,196,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3038,कहानी,2273,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,102,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,29,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,244,लघुकथा,1265,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,19,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,327,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2011,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,712,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,800,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,18,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,89,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,209,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: आदमखोर (कहानी संकलन) संपादक - डॉ. दिनेश पाठक शशि - 7- उमाशंकर दीक्षित की कहानी : असली सोना
आदमखोर (कहानी संकलन) संपादक - डॉ. दिनेश पाठक शशि - 7- उमाशंकर दीक्षित की कहानी : असली सोना
http://lh4.ggpht.com/-Qg4oWQT7a98/TleI0vN-isI/AAAAAAAAKiM/QumBJahlafI/aadamkhor1%25255B2%25255D.jpg?imgmax=800
http://lh4.ggpht.com/-Qg4oWQT7a98/TleI0vN-isI/AAAAAAAAKiM/QumBJahlafI/s72-c/aadamkhor1%25255B2%25255D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2011/08/7.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2011/08/7.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ