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दामोदर लाल ‘जांगिड‘ की कृष्ण जन्माष्टमी विशेष रचना

कृष्ण मुरारी

कृष्ण मुरारी फिर ले लो अवतार धरा पर कृष्ण मुरारी।

 

भक्त करे अरदास, तुम्ही से आस ,

डिगेगा अब उनका विश्वास,

मिटाओ आकर उनकी त्रास,

शीघ्र ही अब बनवारी।

फिर ले लो अवतार धरा पर कृष्ण मुरारी।

 

धर्म पर हुऐ हैं इतने प्रहार,

हुआ है वो बेबस लाचार,

अधर्म से त्रस्त सकल संसार,

बचाओ आकर फिर एक बार,

तकें हैं राह तुम्हारी।

फिर ले लो अवतार धरा पर कृष्ण मुरारी।

 

हरण कहीं हो कृष्णा का चीर,

दिखे न कोई यादव वीर,

सुनो तो तुम यमुना के तीर,

धेनुओं का क्रंदन गम्भीर,

पुकारे हैं दुखीयारी ।

फिर ले लो अवतार धरा पर कृष्ण मुरारी।

 

सुदामा की निर्धनत भांप,

कलेजा जाऐ तेरा कांप,

रही है फिर कांिलदी हांफ,

बसेरा करे कालिए सांप,

दया करना उपकारी ।

फिर लेलो अवतार धरा पर कृष्ण मुरारी।

 

दामोदर लाल ‘जांगिड‘

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