हर्ष छाया का दीपावली विशेष व्यंग्य : 2011 की दीपावली में ट्विस्ट

SHARE:

"पुरुषोत्तम राम" चौदह साल के वनवास के बाद घर लौट रहे थे... पूरा शहर बहुत खुश था। आज उनके चहेते राम, लक्ष्मण और सीता के साथ वापस आ...

image

"पुरुषोत्तम राम" चौदह साल के वनवास के बाद घर लौट रहे थे...

पूरा शहर बहुत खुश था। आज उनके चहेते राम, लक्ष्मण और सीता के साथ वापस आ रहे थे। सारा शहर जग-मग सजा हुआ था। आज का दिन "दीपावली" के नाम से मनाया जाने वाला था।

शहर भर में दीये जले हुए थे ऐसा लग रहा थ जैसे आकाश से सारे तारे ज़मीन पर आ गये हों। जहाँ तहाँ सड़कों पर, घरों के छतों पर, खिड़कियों पर, दरवाज़ों पर बस दीये ही दीये...और हर घर के आगे रंगोली..बहुत ही अद्भुत दृश्य था। अभी राम बस शहर के बाहर थे...

जैसे ही वह शहर में घुसे उन्हें घरों से आवाज़ें आ रही थी..."चलो, पहले पूजा कर लें फटा-फट फिर दीवाली मनायेंगे, पुरुषोत्तम राम बस आते ही होंगे"। राम, सीता और लक्ष्मण यह सब देख और सुन बहुत प्रसन्न थे...

जैसे जैसे राम शहर में आते गये वैसे वैसे घरों में, पूजा या तो ख़त्म हो चुकी थी या शुरु हो रही थी, दीवाली मनाने के पहले सब पूजा कर लेना चाहते थे और राम बहुत उत्सुक थे कि पूजा के बाद ऐसा तो क्या होने वाला है जिसकी इन सब को इतनी जल्दी है? "मेरे आने की खुशी में दीवाली कैसे मनाने वाले हैं, मेरे शहर के लोग?" ..सोच सोच वह मन ही मन प्रसन्न हो रहे थे...

अब राम शहर के ज़रा और अन्दर आ चुके थे..उन्होंने देखा कहीं कहीं ताश के पत्ते बाहर आने लगे, और कहीं कहीं ’बोतल’ खुलने लगी...धीरे धीरे सब घरों में परिवार ,दोस्त इकठ्ठा होने लगे..ताश के पत्ते बाँटे जाने लगे और ’पेग’ बनाये जाने लगे...देखते ही देखते सारा शहर ज़ोरों से शराब पीने लगा और खुल कर जुआ खेलने लगा..जैसे जैसे राम और शहर में घुसे वैसे वैसे लोग "पटाखे" जलाने लगे..और धीरे धीरे सारा शहर पटाखों की आवाज़ से गूंजने लगा...बहुत शोर...कान फट जाये उतनी आवाज़..और बारूद के बदबू वाले धुएं से साँस लेना मुश्किल होने लगा..सीता और लक्ष्मण का भी दम घुटने लगा।

अचानक एक लावारिस "रॉकेट" लक्ष्मण की धोती के बहुत करीब से ’जम्म्म’ करके गुज़रा, उनकी धोती में छेद होते होते बचा, इस बात का शुक्र तो वह मना ही रहे थे कि धोती जल नहीं गयी वरना उतार, फेंकनी पड़ जाती...अचानक सीता ने इशारा किया तो राम ने देखा कि वह रॉकेट अब एक खिड़की से किसी घर में घुस गया, और उस घर के परदे में आग लग गयी और वह आग फिर करीब रखे पटाखों पर फैली और सारे पटाखे आनन फानन जलने-फटने लगे...जो भाग सकते थे भागे, एक सज्ज्न के मुँह पर ही एक पटाख़ा ऐसा फटा कि वह वहीं बेहोश हो गये...और उस घर में धीरे धीरे आग बढने लगी...और फिर उस "फ़्लैट" से आग बाकी की बिल्डिंग में फैलने लगी..

राम ने किसी से कहा अरे जाकर "फ़ायर ब्रिगेड" को फ़ोन करो, तो पता चला कुछ दिन पहले ही मुनिसिपल कॉरपोरेशन ने खुदाई की थी, "ब्रोड बैंड" केबल डालने के लिये सो इस इलाके के फ़ोन चल नहीं रहे..तो राम चिल्लाये.."अरे तो अपने मोबाईल से फ़ोन क्यूं नहीं करते"..जवाब आया.."अब हम पहले मोबाईल का ही इस्तेमाल करते हैं लेकिन आज त्यौहार है, आप आने वाले थे, सब बहुत खुश हैं, एक दूसरे को बधाई देते नहीं थक रहे सो मोबाईल लाइन्स जैम हो गयी हैं"...

राम कोई उपाय सोच ही रहे थे कि अचानक उन्होंने देखा एक बच्चे के माँ बाप अपने बच्चे को गोद में लिये अस्पताल की ओर भाग रहे हैं..उस दस साल के बच्चे का हाथ लगभग जल चुका था...उन्होंने देखा कि वह गाड़ी से उतर भाग रहे थे, क्योंकि रास्ते खचा खच जाम थे, गाडियाँ न आगे जा रही थी न पीछे...और चारों तरफ़ "पैं-पैं” की आवाज़ें..पीछे ट्राफ़िक में कहीं एक बेचारी सी "फ़ायर ब्रिगेड" की वैन अपना "टुन टुना" बजाते हुए रास्ता बनाने की कोशिश में थी, जो था ही नहीं...

अचानक लक्ष्मण ने देखा कि किसी एक घर से लोग बहुत ज़ोरों से लड़ते झगड़्ते बाहर आ निकले, एक आदमी दूसरे आदमी को बहुत ज़ोरों से कूट रहा था..क्यूं?..तो पता चला कि उनमें से एक ने दूसरे की बहन को शराब के नशे में छेड दिया, और बात मार पीट तक उतर आयी...उतने में अचानक देखा गया कि सामने सड़क पर एक आदमी के पीछे तीन आदमी भाग रहे थे उनमें से एक के हाथ में एक ख़तरनाक दिखता छुरा था..जुए में एक पैसा हार के भाग रहा था और बाकी उस से पैसे रखवाने के लिये उसका पीछा कर रहे थे, उसे जान से मार डालने की धमकी दे रहे थे..

चारों तरफ़ आनन फ़ानन एक अजीब डरावना सा विध्वंस मचा हुआ था..दूर एक और बिल्डिंग में आग लगी हुई थी..कुछ लोग घबराकर बचने के लिये दस और ग्यारह मंज़िल की खिड़की से कूद रहे थे...

राम बौखला गये..उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और अभी तो आधा शहर ही देखा था..लक्षमण एक झगड़ा छुड़ाते तो कोई दूसरा शुरू हो जाता...वह भी थकने लगे थे..सो राम को लगा कि अब तो हनुमान को बुलाना ही पड़ेगा..उनके पास एक करामाती बाण था..लेकिन यह एक बाण चलाकर इस सारे शहर को बचाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था..अब उन्हें क्या पता था कि ऐसे और बाणों की ज़रूरत पड़ेगी क्योंकि अब तो वह घर लौट रहे थे सो वनवास से लौट्ते लौट्ते वह रास्ते भर में "सोवेनीयर" ( जाते हुए एक भेंट..) के तौर पर लोगों को यह करामाती बाण बाँटते आ रहे थे और एक उन्होंने अपने पास यादगार के रूप में लिये रख लिया था।

शहर का हाल देखते हुए उन्हें लगा कि, इस बाण को शहर बचाने के बजाय हनुमान को बुलाने में खर्च करना चाहिये और फिर हनुमान संकेत मिलते ही अपनी वानर सेना के साथ आ शहर के लिये कुछ कर पाये..आखिर जो रावण से अकेले टकरा सकता है और सारी लंका में आग लगा देता है वह हनुमान यहाँ कुछ नहीं कर पायेगा तो कौन कर पायेगा? सो राम ने अपना धनुष कंधे से उतारा और वह करामाती तीर दूर ऊपर हवा में छोड़ा...

दूर, शहर के बाहर, जंगल में बैठे हनुमान ने आकाश में राम का बाण देखा...बाण की नोक पर "एस ओ एस" लिखा नीओन साईन चमक रहा था..हनुमान तब खाना खा रहे थे लेकिन राम का ”एस ओ एस” बाण देख सब छोड़ कर भागे और उनके एक इशारे पर सारी वानर सेना इक्कठा हो उनके पीछे दौड़ पड़ी...

अब वह तो बेचारे सब थे तो जंगले के बाशिंदे..."बॉम्ब" क्या होता है उन्हें क्या पता था..वह तो तीर कमान, भाला,गदा इत्यादि समझते थे...सो कुछ् तो शहर में घुसने के पहले ही "धमा-धम" की आवाज़ सुन सरपट वापस जंगल की ओर हो लिये..बाकी शहर के और अन्दर तक पहुँचे और अलग अलग इलाकों में फैल गये...एक जगह कुछ सात आठ वानर राहत कार्य में इतने व्यस्त थे कि कुछ बच्चों ने कब उनकी पूँछ पर सौ-सौ की लड़ी लगा दी उनको पता भी नहीं चला और फिर अचानक जब लड़ी ज़ोरों से आवाज़ करते हुए फटने लगी तब उनकी जान निकल गयी और वह डर के मारे यहाँ वहाँ भागने लगे और उनकी पूँछ पर लगी आग इधर उधर फैलने लगी..

एक बेचारे वानर ने आव देखा न ताव और सामने से आती गाड़ी को देख उस जलते हुए पटाखे को बुझाने के लिये पटाखे पर लपका..किसी बच्चे ने देखे बग़ैर वह पटाखा जलाकर बीच सड़क फेंक दिया था...अगर वह गाड़ी के आते आते ठीक उसके नीचे फटता तो बहुत बुरा अकस्मात हो सकता था, अब वह वानर पटाखे पर हड़्बड़ी में कूद तो गया और उस पटाखे को बुझा भी दिया और उस बुझे हुए पटाखे को किनारे फैंक ही रहा था कि गाड़ी से एक आदमी बाहर निकला और वानर के मुँह पर तमाचा दे मारा.."साले! चलती गाड़ी के सामने आता है?!..जाहिल!..कुछ हो जाता तुझे, तो मेनका गाँधी मेरी जान को रोती!"...

वानर बेचारा भौंचक्का सा सोचता ही रह गया कि "मैं तो शायद मदद ही कर रहा था.." और तब तक वह आदमी गाड़ी में बैठ आगे चल दिया...एक एक करके वानर बेचारे अपनी जान बचा भागने लगे...शहर का यह प्रकोप उनसे झेला नहीं जा रहा था, वानर सेना के शहर में आने के कुछ दस मिनट के अन्दर अन्दर सारे वानर दुम दबा वापस जंगल को भाग लिये..

उधर हनुमान बेचारे किसी घर में लगी आग से दो तीन को बचा कर नीचे लाते तो तुरन्त किसी और बिल्डिंग मे आग लग जाती...बेचारे हाँफ़ने लगे थे पर राम का आदेश था सो पीछे नहीं हट सकते थे...कभी ट्राफ़िक के बीच से उठा कर किसी "फ़ायर ब्रिगेड" वैन को किसी इलाके तक पहुँचा देते ताकी उनका काम उतना कम हो..पर कहीं कहीं जितनी ऊँची बिल्डिंग थी उतनी ऊँची फ़ायर ब्रिगेड् के पास सीढी नहीं थी..सो वहाँ तो उन्हें ही जाना पड़ता...फ़ायर ब्रिगेड का कोई ख़ास फ़ायदा नज़र नहीं आ रहा था...क्षेत्रीय सरकार ने बिल्डरों के साथ मिलकर पैसे खाने के चक्कर में जितने और जैसे तैसे प्लान एप्रूव कर दिये थे उतना खर्चा शहर की बाकी व्यवस्था पर नहीं किया था क्योंकि उन कामों में उन्हें ख़ुद कोई ख़ास फ़ायदा नहीं था..सो यदा कदा समाज के नाम पर किसी सड़क, स्टेशन या एयरपोर्ट का नाम बदलने के अलावा उन्होंने और किसी बात पर विषेश ध्यान देना उचित नहीं समझा था...

सो लेदेकर हनुमान आखिर थक हार राम के पास आधी बेहोशी की हालत में माफ़ी माँग लौटने लगे...लेकिन उन्होंने यह ज़रूर कहा कि "स्वामी, आप कहें तो मैं आपको और भाई लक्ष्मण और सीतामाता को अपने कंधे पर बिठा यहाँ से बाहर ले जा सकता हूँ, इस से ज़्यादा मैं कुछ न कर पाउँगा"..

राम ने सोचा ऐसे कैसे हार मान ली जाए..सो राम,सीता,लक्ष्मण और हनुमान के बीच किसी एक पचास मंज़िला बिल्डिंग की छत पर एकान्त में एक ’ब्रेन स्टोर्मिंग’ सेशन चला और कुछ ही मिनिटों में यह तय किया गया कि अमरीका से सुपरमैन या बैट्मैन या दोनों को बुलाया जाय..नीचे जलते-कटते शहर की हालत देख यह तय किया गया कि दोनों को ही बुला लिया जाय...हनुमान अपनी पूरी शक्ति लगा अमरीका की तरफ़ उडे, करीब पंद्रह मिनट् में वह वहाँ पहुँचे और दोनों को आने के लिये कहा..दोनों ने यशस्वी राम की कहानी गूगल में पढी थी और बहुत प्रभावित भी हुए थे सो वह हनुमान के साथ एक पल में हो लिये...

राम ने आकाश की ओर देखा और उनकी छाती फूल गयी..क्या दृश्य था..सीता और लक्ष्मण भी यह द्रुश्य एक टक देखते रह गये..दूर आसमान में एक तरफ़ सुपरमैन दूसरी तरफ़ बैट्मैन और बीच में हनुमान..आकाश में उड़ते हुए उनकी तरफ़ आ रहे थे...राम को लगा अब तो शहर बच जायेगा...

पचासवीं मंज़िल की छत पे खड़े होकर काले आसमान के नीचे पूरे शहर को तहस नहस देख दोनों सुपरमैन और बैट्मैन की हवा निकल गयी..उन्होंने कहा कि हम मदद तो कर सकते थे लेकिन शहर की दूसरी राहत एजेंसियों का काम करना आवश्यक है..हमारे अमरीका में तो उनके साथ मि्लकर ही हम काम करते हैं, उन एजेन्सियों की बहुत मदद मिलती है और जहाँ वह नहीं पहुंच पाते वहाँ वहाँ हम ध्यान दे पाते हैं और इस तरह दोनों मिलकर राहत कार्य संभालते हैं..

यहाँ तो आपके शहर में फ़ायर ब्रिगेड की सीढी बहुत से बहुत पंद्रह्वीं मंज़िल तक जाती है उसके बाद का तो सारा हमें करना पडेगा..फिर ट्राफ़िक जाम देखिये..लगभग सारे फ़ायर ब्रिगेड वैन तो यहाँ वहाँ अपना "टुन-टुना" बजाते जाम में अटके हुए हैं तो पहले उनको उठा उठा अपनी जगह पहुँचायें या लोगों को बचायें..

सब तो होगा नहीं और फिर सारी मेहनत के बाद भी हम बदनाम होंगे..और यह हम होने नहीं दे सकते क्योंकि इस वक़्त हम दोनों ’होलीवुड" में काफ़ी "पॉप्यूलर" हैं और हम पर एक के बाद एक फ़िल्में बन रही हैं सो हम अपना नाम ख़राब नहीं होने दे सकते, हमारी "मार्किट" पर असर पड़ेगा और फ़िल्में बननी बन्द हो सकती हैं और वैसे भी देखिये, आप तो "सर्वव्यापी’ हैं..सारे शहर में आपके "क्लोन" भाग दौड़ में लगे हुए हैं फिर भी कुछ हो नहीं पा रहा...इस मारा मारी में आप जैसे यश्स्वी के भी "क्लोन", आधे थक के किनारे बैठे हैं और कुछ "ओवर एग्ज़रशन" के मारे बेहोशी की हालत में हैं..और हमें तो आप-सा वरदान भी नहीं हम तो वैसे भी ’एक व्यापी" हैं..प्रभु हमें माफ़ करें...इतना कह वह दोनों चंगू-मंगू वहाँ से लमपट हो लिये...

कुछ देर राम ने नीचे सारे शहर का नज़ारा देखा..आग, धुआँ, शोर, चीखना, चिल्लाना, जुआ, शराब, पैं-पैं, पूँ-पूँ...तब लक्ष्मण ने उन्हें आवाज़ दी, देखा तो सीता मारे "पोल्यूशन" के बेहोश हो गयी थीं..सारा गंध तो हवा के सहारे ऊपर ही आ रहा था..और आज तो वह "बारूद” वाला बदबू मारता घना धुंआँ भी था..सीता, चैदह साल के स्वच्छ हवा पानी के बाद यह सब नहीं झेल पायीं..

लक्ष्मण ने झट हनुमान को संजीवनी बूटी लाने को कहा तो हनुमान ने समझाया कि वह जड़ीबूटी काम तो करती है पर उसे भी तो काम करने के लिये अमुक वातावरण चाहिये, और इधर जो हाल है उसमें तो बूटी यहाँ पहुँचते पहुँचते मुर्झा जायेगी सो सीतामाता को उस बूटी के पास ले जाना ही ठीक रहेगा...लक्ष्मण ने कुछ बहस करनी चाही तो राम ने उसे इशारे से चुप किया और हनुमान की ओर देखा..हनुमान ने अपनी "पोज़िशन" बनायी..राम सीता को ले हनुमान के एक कंधे पर बैठे और लक्ष्मण दूसरे कंधे पर ...नीचे शहर अपना किया अब खुद ही झेल रहा था और उड़ते हुए हनुमान के कंधे पर बैठे राम, सीता और लक्ष्मण वापस जंगल की ओर लौटते हुए काले आकाश में ओझल हो गये...

हर्ष छाया...

 

साभार - जीन्स गुरू

(http://harshchhaya.blogspot.com/2011/10/blog-post_25.html)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: हर्ष छाया का दीपावली विशेष व्यंग्य : 2011 की दीपावली में ट्विस्ट
हर्ष छाया का दीपावली विशेष व्यंग्य : 2011 की दीपावली में ट्विस्ट
http://lh5.ggpht.com/--UKGxqfMz7k/TqepDiGf6DI/AAAAAAAAKuI/puS_bHkJfFY/image%25255B5%25255D.png?imgmax=800
http://lh5.ggpht.com/--UKGxqfMz7k/TqepDiGf6DI/AAAAAAAAKuI/puS_bHkJfFY/s72-c/image%25255B5%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2011/10/2011_26.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2011/10/2011_26.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content