---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

राजीव आनंद की दो लघुकथाएं - कीमत, वैचारिक दीवालियापन

साझा करें:

कीमत कमल नौकरी के लिए साक्षात्‍कार देते-देते थक चुका था। बेबसी की जिंदगी से लड़ते-लड़ते उसे कई बार लगा कि आत्‍महत्‍या कर ले परंतु शिक्षित ह...

कीमत

कमल नौकरी के लिए साक्षात्‍कार देते-देते थक चुका था। बेबसी की जिंदगी से लड़ते-लड़ते उसे कई बार लगा कि आत्‍महत्‍या कर ले परंतु शिक्षित होने के कारण वह आत्‍महत्‍या भी नहीं कर सकता था। आखिर उसके बीबी-बच्‍चों का क्‍या होगा उसके मरने के बाद, उसने सोचा। उसके मां-बाप आखिर कब तक उसके बीबी-बच्‍चों की देखभाल करेंगे। आजतक तो वे देखभाल कर ही रहे है।

कमल अपने पत्‍नी के कुछ गहनों को गिरवी रखकर नौकरी के लिए जी-तोड़ कोशिश करता रहा था। पिता के पेंशन के रूपए को छूने की उसे हिम्‍मत नहीं पड़ती थी और हिम्‍मत भी कैसी पड़ती, उसी पेंशन से तो किसी तरह वर्षों से घर चल रहा था। अंततः कमल ने एक फैसला बहुत सोचने के बाद किया और बैंक में पीयून की नौकरी के लिए साक्षात्‍कार देने पहुंचा। कमल नौकरी हासिल करने के लिए इतने साक्षात्‍कार दे चुका था कि उसे अब जानकारी हो गयी थी कि योग्‍यता की कोई पूछ नहीं है, हर नौकरी की कीमत है आज बाजार में इसलिए कीमत देने की योग्‍यता के अनुसार कमल ने पीयून के नौकरी का चयन किया।

आपका नाम, बोर्ड के एक सदस्‍य ने पूछा ?

कमल, कमल ने कहा ।

आपकी शैक्षणिक योग्‍यता, बोर्ड के एक अन्‍य सदस्‍य ने पूछा ?

एमए, फर्स्‍ट क्‍लास, कमल ने जवाब दिया ।

योग्‍यता तो आपकी अच्‍छी है फिर आप पीयून की नौकरी क्‍यों करना चाहते है !

इसलिए कि दूसरे पचास से ज्‍यादा नौकरियों के साक्षात्‍कारों में मैं असफल होता रहा हॅूं और नौकरी मेरी जरूरत है, कमल ने कहा।

परंतु मात्र जरूरत से तो नौकरी नहीं मिलती, बोर्ड के एक कुछ ज्‍यादा ही गंभीर दिख रहे सदस्‍य ने कहा।

इतना सुनना था कि कमल ने रूपये का एक बंडल टेबल पर जा कर रख दिया, जिसे उसने अपनी पत्‍नी के आखिरी बचे गहने को बेच कर लाया था।

कितने हैं ? बोर्ड के वहीं गंभीर दिख रहे सदस्‍य ने कुछ दार्शनिक अंदाज में पूछा ?

जी, पांच हजार, कमल ने उत्‍तर दिया ।

बोर्ड के सभी सदस्‍य सवालिया निगाह से कभी एक-दूसरे को और कभी कमल को देख ही रहे थे कि इतने में कमल ने कहा, सर, इससे ज्‍यादा मेरे पास नहीं है, हाँ ये मैं वादा करता हॅूं कि अपने पहले वर्ष की तनख्‍वाह का नब्‍बे प्रतिशत आप लोगों को दे दूंगा।

भगवान ने कमल की सुन ली, कुछ दिनों बाद कमल पीयून बन गया था

 

वैचारिक दिवालियापन

चौबीस बंसत पार कर रोहित एक क्षेत्रिय दल का सदस्‍य इस ख्‍याल से बना था कि पुस्‍तकों में पढ़े हुए बिरसा, तिलका, नीलाम्‍बर-पिताम्‍बर के विचारों को आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ले जा सकेगा। दल के विकास कार्यों के एजेंडा में आदिवासी समाज को जागरूक करना, उनके लुप्‍त होती संस्‍कृति व भाषा पर विचार गोष्‍ठी करना, जल, जंगल, जमीन छीने जाने के विरूद्ध आदिवासियों को संगठित करना आदि था जो रोहित को दल का सदस्‍य बनने की प्रेरणा दिया था।

दल के कुछ सदस्‍यों को एक बुजुर्ग कार्यकर्ता हरीश के नेतृत्‍व में एक आदिवासी बहुल गांव में कैंप करने के लिए भेजा गया। रोहित बहुत खुश था कि उसे अब बिरसा, तिलका, नीलाम्‍बर, पीताम्‍बर के विचारों को लोगों के बीच रखने का मौका मिलेगा। एक-एक कर नेतागण मंच पर आते और अपने-अपने विचार रखते। रोहित को समझ में नहीं आ रहा था कि बिरसा, तिलका के संबंध में ये कैसा विचार दल के लोग सभा में उपस्‍थित आदिवासी लोगों के सामने रख रहे है। रोहित से रहा नहीं जा रहा था वह अधीर था कि कब उसकी पारी आए विचार व्‍यक्‍त करने की, देखते-देखते उसकी पारी भी आ गयी। रोहित मंच पर आया और कहना शुरू किया, भाईयों एवं बहनों, हमलोग यहां एकत्रित हुए है अपने पूर्वजों बिरसा, तिलका, नीलाम्‍बर, पीताम्‍बर जैसे महापुरूषों के विचार जानने के लिए, सभा में तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी। रोहित आगे कहना शुरू किया कि बिरसा, तिलका ने एक समाज जो समानता पर आधारित हो की कल्‍पना किया और अपने जीवनकाल में इसके लिए संघर्ष करते रहे परंतु हमलोग उनके विचारों को आगे नहीं बढ़ा पा रहे है। आज बिरसा मुंडा की मूर्तियों चारों ओर देखी जा सकती है, उनके नाम पर वोट भी मांगा जाता है परंतु बिरसा द्वारा जाग्रत चेतना पर धूल-मिट्‌टी जम गयी है, हमलोगों को उसे हटाना होगा।

दल के अन्‍य कार्यकर्ता रोहित का भाषण सुन कर अवाक थे। ये कहने लगा रोहित, सभी दल के पूराने कार्यकर्ताओं ने बुजुर्ग नेतृत्‍व की तरफ सवालिया निगाह से देखा, जैसे कह रहे हों, ‘रोहित तो सच बोलने लगा, इससे तो आदिवासियों में सचमुच जागरूकता आ जायेगी।'

बृद्ध नेतृत्‍व उठा, बोलते हुए रोहित के कंधे पर हाथ रखा, रोहित नया-नया दल का कार्यकर्ता था, उसे कहां राजनीतिक इशारा समझ में आता, वो नजरअंदाज कर आगे बोलने लगा, आज हमारे देश के महानगरों में नौकर, नौकरानियां, ईंट भट्ठे पर कार्य करने क्‍यों जाते है हमलोग इसलिए नहीं कि हम गरीब है, भूमिहीन है, विस्‍थापित है अपने जंगल और जमीन से बल्‍कि इसलिए क्‍योंकि हमलोगों में वो एकजुटता नहीं है जो अंग्रेजों के शासन में तिलका मांझी के नेतृत्‍व में था, बिरसा मुंडा के नेतृत्‍व में था, नीलाम्‍बर, पीताम्‍बर के नेतृत्‍व में था।

अब दल के बुर्जग नेतृत्‍व के लिए असहनीय होता जा रहा था रोहित का भाषण और रोहित की नसें तन गयी थी, आंखें नम थी, बाहें फड़कने लगी थी, कहां सुनने वाला था रोहित दल के अन्‍य कार्यकर्ताओं की कानाफूसी, उसे तो पुस्‍तकों में पढ़ी बातों को मूर्त रूप देना था, किताबी बातें कह कर टालना नहीं था। रोहित कहना जारी रखा, आज के आदिवासी समाज के युवा बिरसा, तिलका, नीलाम्‍बर, पीताम्‍बर की विद्रोह गाथा को न तो सुनना चाहते है और न जानने की कोशिश कर रहे हैं बल्‍कि होहल्‍ला वाली संगीत सुनने लगे हैं, नगाड़े की थाप तो बस अब दल अपनी राजनीतिक उद्दे‌श्‍य के लिए बजवाते हैं और दल के लोग फोटो खिंचवाते है।

अब असहनीय हो गया था रोहित का भाषण उसके ही पार्टी नेतृत्‍व और कार्यकर्ताओं के लिए। बुजुर्ग नेतृत्‍व ने अचानक उड़ते हुए लपकर रोहित से माइक छीन लिया और कहा कि कुछ अप्रत्‍याशित कारणों से यह विचार संगोष्‍ठी स्‍थगित की जाती है।

सभी श्रोतागण धीरे-धीरे वापस जाने लगे।

इधर मंच पर खड़ रोहित कुछ समझ नहीं पा रहा था कि कौन सी अप्रत्‍याशित कारण से यह संगोष्‍ठी अचानक स्‍थगित कर दी गयी। अभी वह पूछने ही वाला था कि इतने में दल के बुजुर्ग नेतृत्‍व ने उसे समझाना शुरू किया कि भाई रोहित अभी नये-नये आए हो, थोडी अभ्‍यास कर लो तब भाषण देना, ऐसा बेबाक भाषण कहीं दिया जाता है ? अरे भाई, बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, नीलाम्‍बर, पीताम्‍बर ये सभी आदिवासी अस्‍मिता के प्रतीक हैं, रोहित गौर से सुन रहा था और समझने की कोशिश कर रहा था। आदिवासी अस्‍मिता का इस्‍तेमाल पार्टी हित में करना सीखो, अदिवासी अस्‍मिता को वोट लेने के लिए इस्‍तेमाल करना हमारा उदेश्‍य होना चाहिए, न कि आदिवासियों में सच्‍ची जागरूकता पैदा करना, अगर सच्‍ची जागरूकता इनमें पैदा कर दोगे तो फिर पार्टी कॉर्पोरेट जगत को क्‍या जवाब देगी। इन लोगों के भूमि को पार्टी कॉर्पोरेट हाउस को कैसे बेच सकेगी, जैसा भाषण तुम दे रहे थे, उस तरह के भाषण से तो पार्टी दिवालिया हो जाएगी।

रोहित को समझ में आ गया था कि उसके भाषण से पार्टी दिवालिया हो या न हो, उसकी पार्टी वैचारिक रूप से तो दिवालिया हो ही चुकी है। पार्टी ज्‍वाइन करने के कारण रोहित की अन्‍तरात्‍मा उसे धिक्‍कार रही थी।

राजीव आनंद

मो. 9471765417

ईमेल-rajiv71@gmail.com

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

|कथा-कहानी_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|हास्य-व्यंग्य_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|आलेख_$type=two$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|संस्मरण_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|उपन्यास_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लोककथा_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4062,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3027,कहानी,2267,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,99,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,244,लघुकथा,1255,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,327,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2009,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,711,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,798,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,89,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,209,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: राजीव आनंद की दो लघुकथाएं - कीमत, वैचारिक दीवालियापन
राजीव आनंद की दो लघुकथाएं - कीमत, वैचारिक दीवालियापन
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2012/10/blog-post_9265.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2012/10/blog-post_9265.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ