रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

गोवर्धन यादव की कहानी - नए वर्ष से एक मुलाकात

साझा करें:

अं तिम सप्ताह दिसंबर का चल रहा है। चार दिन की केजुअल बाकी है। यदि जेब में मनीराम होते तो मजा आ जाता। दोस्तों की ओर से भी तरह-तरह के प्रस्त...

अंतिम सप्ताह दिसंबर का चल रहा है। चार दिन की केजुअल बाकी है। यदि जेब में मनीराम होते तो मजा आ जाता। दोस्तों की ओर से भी तरह-तरह के प्रस्ताव मिल रहे थे। परंतु सभी को कोई न कोई बहाना बनाकर टाल देता हूं, बिना पैसों के किया भी क्या जा सकता था। अतः आफिस से चिपके रहकर समय पास करना ही श्रेयस्कर लगा।

31 दिसम्बर का दिन, पहाड़ जैसा कट तो गया पर शाम एवं रात्रि कैसे कटेगी यह सोचकर दिल घबराने-सा लगा। उड़ने को घायल पंछी जैसी मेरी हालत हो रही थी। अनमना जानकर पत्नी ने कुछ पूछने की हिम्मत की, पर ठीक नहीं लग रहा है, कहकर मैं उसे टाल गया।

खाना खाने बैठा तो खाया नहीं गया। थाली सरका कर हाथ धोया। मुंह में सुपारी का कतरा डाला। थोड़ा घूम कर आता हूं, कहकर घर के बाहर निकल गया।

ठंड अपने शबाब पर थी। दोनों हाथ पतलून की जेब में कुनकुना कर रहे थे। तभी उंगलियों के पोर से कुछ सिक्के टकराए। अंदर ही अंदर उन्हें गिनने का प्रयास करता हूं एक सिक्का और दो चवन्नियां भर जेब में पड़ी थीं। सोचा एक पान और एक सिगरेट का सेजा जम जायेगा। पान के ठेले पर चिर-परिचितों को पाकर आगे बढ़ जाता हूं। दूसरे पान के ठेले पर भी यही नजारा था। एक के बाद एक पान के ठेलों को पीछे छोड़ता हुआ काफी दूर चला आया था।

उद्विग्न मन लिये, मैं सड़क के किनारे-किनारे चला जा रहा था। तभी मैंने महसूस किया कि कोई व्हीकल मेरे पीछे आ रही है। तनिक पलट कर देखा। एक चमचमाती जेन ठीक मेरे पीछे रेंग रही थी। मैं और थोड़ा हटकर चलने लगता हूं कि वह आगे निकल जाए, पर अब वह मुझसे सटकर चलने लगी।

सहसा गाड़ी में से एक हाथ निकलता है और मेरी कलाई को मजबूती से थाम लेता है। इस अप्रत्याशित घटना से मैं हड़बड़ा जाता हूं। मेरी पेशानी पर पसीना चू उठता है। मैं कुछ समझूं इससे पूर्व ही वह दरवाजा खोलकर मेरे सामने खड़ा हो गया। उसका इस तरह ऐंठकर खड़ा हो जाना मुझे ड्रेकुला की तरह लगा। मैं अंदर ही अंदर बुरी तरह से कांप उठा। उसने बड़ी बेतकल्लुफी से मेरे कंधे पर अपने भारी भरकम हाथ की धौंस जमाते हुए कहा, ‘क्यों... क्या हालचाल हैं।’ उसकी कड़कदार आवाज सुनकर मेरी तो जैसे घिग्गी ही बंध गई थी। कुछ कहना चाह भी रहा था, परंतु जीभ जैसे तालू से चिपक गई थी और शब्द आकर गले में फंस गए थे। मेरी आंखें बराबर देख रही थीं। वह मंद-मंद मुस्करा रहा था। उसकी यह मुस्कान मुझे बड़ी वीभत्स सी लग रही थी।

प्रत्युत्तर न पाकर, उसने फिर वही प्रश्न दागा। कड़ाके की ठंड में मैं पसीना-पसीना हुआ जा रहा था। आंखें पथरा-सी गई थीं और सोचने- समझने की शक्ति एकदम गायब हो गई थी। मैं बुत बना उसके सामने खड़ा था।

‘अरे यार, तेरा तो नर्वस ब्रेक डाउन हो गया लगता है, मैं कोई भूत-वूत नहीं बल्कि तेरे बचपन का दोस्त हूं। बरसों-बरस बाद तू मुझे दिखाई दिया सो सोचा कि कुछ सरप्राईज दूंगा, गौर से मेरी तरफ देख तो सही।’

उसके शब्दों में अब आत्मीयता की खुश्बू आ रही थी, जिसने संजीवनी का काम किया। मैं अब होश में आने लगा था, बल्कि अब नॉर्मल हो गया था। मैंने उसके चेहरे को पहचानने की कोशिश की पर असफलता ही हाथ लगी। पहचान लायक कोई भी अवशेष उसके चेहरे पर नजर नहीं आ रहे थे। एक हारे हुए जुआरी की तरह मेरी हालत हो गई थी।

‘वेरी सॉरी यार, मैं तुझे सचमुच नहीं पहचान पाया।’ मैंने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी असमर्थता उस पर प्रकट कर दी।

‘हां यार मुझे बड़ी हैरानी हो रही है कि तू मुझे पहचान नहीं पाया। सुन, तेरे बारे में मैं सब कुछ बताता हूं। तेरा नाम गोवर्धन यादव है न? तू मुकनाई का रहने वाला है न? तुम डाक विभाग में कार्य करते हो न? तुमने छिन्दवाड़ा में अपना मकान बना लिया है न?’ उसने और भी ढेरों बातें मेरे बारे में बतलाईं।

उसने सचमुच ही मेरा सारा कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया था। निश्चित ही वह मेरा पूर्व परिचित रहा होगा। तभी तो उसने इतनी सारी बातें मेरे बारे में बतलाईं। इतना सब कुछ घटित होने के बाद भी मैं उसे पहचान नहीं पा रहा था। मेरी नजरें झुक आईं और निराशा का भाव मेरे चेहरे पर उतर आया था। उसने मुझे भरपूर नजरों से घूरा और जोरदार ठहाका लगाया। और मुझ से कहने लगा, ‘अरे यार, इसमें इतना परेशान होने कि क्या बात है। अब तुम पूरे समय मेरे साथ रहोगे। तुम खुद-ब-खुद मुझे जान जाओगे। फिर भी यदि नहीं पहचान पाओगे तो मैं तुम्हें खुद ही अपने बारे में बता दूंगा। चल आ बैठ।’ उसने शालीनता से कार का दरवाजा खोला। मैं यंत्रवत् गाड़ी में जा धंसा। गाड़ी का स्टेयरिंग सम्हालते हुए अपने जेब से सिगरेट का पैकेट निकाला और मेरी ओर बढ़ा दिया। मैं एक सिगरेट ले लेता हूं। उसने भी एक सिगरेट अपने ओठों से दबाते हुए लाईटर जलाया। लाईटर के जलते ही एक जल-तरंग की आवाज थिरकने लगती है। सिगरेट जलाते हुए मैंने एक लंबा कश खींचा। तब तक वह गाड़ी स्टार्ट कर चुका था।

गाड़ी अब एक आलशीन बगीचे में से होते हुए गुजर रही थी। जगह-जगह फव्वारे रंग-बिरंगी रोशनी में थिरक रहे थे। बगीचे में लाईटिंग भी बड़े करीने से की गई थी। तभी कार एक आलीशान महल के सामने जाकर रुकती है। वह हार्न बजाता है। एक सूटेड-बूटेड वाचमैन आकर कार का दरवाजा खोलता है। वह कार के बाहर आ जाता है। उसके बाहर आते ही वाचमैन ने जोरदार सैल्यूट मारा। अब वह आगे बढ़ने लगता है। वाचमैन ने आगे बढ़कर कांच का आदमकद दरवाजा खोला। अब वह अन्दर प्रवेश करने लगता है। मैं यंत्रवत् उसके पीछे हो लेता हूं।

अंदर पहुंचते ही मुझे ऐसा लगा कि मैं जन्नत में आ गया हूं, जगह-जगह कलात्मक पेंटिंग्स लगी हुई थीं। झाड़-फानूसों से रोशनी बिखर रही थी। दीवारों से सटकर आदमकद अप्सराओं की नग्न-अर्धनग्न मूर्तियां मादकता बिखेर रही थी पूरे फर्श पर बेशकीमती कालीन बिछा हुआ था। हॉल में हल्की गुलाबी-सी रोशनी छाई थी। हर एक टेबल पर प्रेमी-प्रेमिकाएं अस्त-व्यस्त मुद्राओं में बैठे चियर्स कर रहे थे। हल्की धीमी आवाज में कोई इंगलिश-टयूनिंग माहौल में उत्तेजना भर रही थी। कई जोड़े डांसिंग फ्लोर पर एक दूसरे की कमर में हाथ डाले थिरक रहे थे। एक जवान बाला थिरकती जाती थी और खाली होते पैमानों को भरती जा रही थी।

अब वह इठलाती, बलखाती मेरी ओर बढ़ी चली आ रही थी। आगे बढ़कर उसने गिलास मेरे ओठों से लगा दिया। उसके अपने चेहरे पर चिपकी मुस्कुराहट, अस्त-व्यस्त कपड़ों से झांकते गदराए यौवन ने मेरे अंदर एक सनसनी सी पैदा कर दी। मैंने उसके नाजुक हाथों से गिलास ले लिया और एक ही सांस में पूरा उतार लिया। वह एक के बाद एक गिलास मेरी ओर बढ़ाती चली गई। मुझे बिल्कुल ही नहीं मालूम कि मैं कितने गिलास चढ़ा चुका होऊंगा। अब उसने मेरा हाथ थाम लिया और अब वह डांसिंग फ्लोर की ओर बढ़ने लग जाती है। डांसिंग फ्लोर पर मैं न जाने कब तक डांस करता रहा। मुझे याद नहीं और न ही वह कथित मित्र मुझे याद आया।

सहसा माईक पर एक स्वर उभरता है। ‘लेडीज़ एण्ड जेन्टलमैन,’ थिरकते हुए जोड़े थम जाते हैं। प्रायः सभी की निगाहें डायस की ओर मुड़ जाती हैं। वह कोई और नहीं मेरा अपना कथित मित्र था। फ्लैश लाइट में वह हीरे का सा जगमगा रहा था। उसने मौन भंग करते हुए मेरा नाम लेकर पुकारा और कहा कि मैं डायस पर पहुंच जाऊं। बहके हुए कदमों से मैं वहां पहुंच जाता हूं।

बड़े मनोहारिक तरीके से उसने मेरा परिचय दिया। कहा, ‘दोस्तों... आप इन्हें नहीं जानते। ये एक अच्छे गीतकार हैं, तथा गायक भी हैं। इनके अंदर एक से बढ़कर एक अनमोल खजाने छुपे हुए हैं और जब ये गाते हैं तो लगता है कि कोई झरना आकाश से उतर रहा हो और मीठी स्वर लहरी बिखेर रहा हो पर... ?’ अचानक उसकी सूई ‘पर’ पर अटक जाती है। लोग अपनी सांसों को रोककर आगे कुछ सुनना चाह रहे हैं। पर वह एक लंबी चुप्पी साध लेता है। थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने कहा, ‘हां तो दोस्तों मैं तो इनके बारे में एक चीज बतलाना तो भूल ही गया। जानते हैं, इनकी जेब में अब भी एक सिक्का और दो चवन्नियां पड़ी हैं। वर्ष के अंतिम दिन, ये बेचारे जश्न नहीं मना पा रहे थे। रास्ते में इनसे अनायास ही मुलाकात हो गई और मैं इन्हें यहां उठा लाया। शायद मैंने ठीक किया वरना आज महफिल बिना गीत-संगीत के सूनी-सूनी सी लगती।’

उसके उद्बोधन को सुनकर मेरा सारा नशा जाता रहा। मुझे ऐसा लगा जैसे स्वर्ग से उठा कर धरती पर फेंक दिया गया होऊं। अपने आप को संयत करते हुए मैंने माईक सम्हाला और कहा, ‘मित्रों, मैं अभी तक इस व्यक्ति को नहीं जान पाया जो मुझे उठाकर यहां लाया। इन्होंने अपनी ओर से दोस्ती का हाथ बढ़ाया था। और मैंने इन्हें एक विश्वास के साथ गले लगाया था। यह घटना ज्यादा पुरानी नहीं है अपितु चंद घंटों पहले की है। इन्होंने दोस्ती को ऐसे झटक दिया जैसे धूल पड़ने पर आदमी अपने कपड़े झाड़ने लगता है। अब मैं इन्हें दोस्त कहूं या दुश्मन। खैर जो भी हो, इन्होंने एक विश्वास तोड़ा है, एक दिल तोड़ा है और जब दिल टूटता है तो एक दर्द भरा गीत मुखरित होता है-

तुम कहते हो गीत सुनाओ ‘तो’ कैसे गाऊं और गवाऊं रे।

मेरे हिरदा पीर जगी है कैसे गाऊं और गवाऊं रे।

आशाओं की पी पी कर खाली प्याली, मैं बूंद-बूंद को तरसा हूं,

उम्मीदों का सेहरा बांधे, मैं द्वार-द्वार भटका हूं ,

तुम कहते हो राह बताऊँ तो कैसे राह दिखाऊं रे।

मन एक व्यथा जागी है। कैसे हमराही बन जाऊं रे।

रंग-रंगों में रंगी नियति नटी क्या-क्या दृश्य दिखाती है,

पांतो की हर थिरकन पर मदमाती-मस्ताती है,

तुम कहते हो नाच दिखाऊं तो कैसे नाचू और नचाऊं रे।

मनमयूर विरहा रंजित है, कैसे नांचू और नचाऊं रे।

दिन दूनी सांस बांटता सपन रात दे आया हूं,

तन में थोड़ी सांस बची है, मन में थोड़ी आस बची है,

तिस पर तुमने सुरभि मांगी तो कैसे-कैसे मैं बिखराऊं रे।

तुम कहते हो गीत सुनाओ तो कैसे गाऊं और गवाऊं रे।

गीत गाते-गाते मैं लगभग रुआंसा हो गया था। अब फफक कर रो पड़ता हूं, तमाम लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ा, मैं नहीं जानता और न ही जानना उपयुक्त समझा। जिस मजबूती के साथ उसने मेरी कलाई थामी थी, उससे कहीं दूनी ताकत से मैंने उसका हाथ पकड़ा और लगभग घसीटता हुआ उसे बाहर ले आया। बाहर आते ही मैं वाक्युद्ध पर उतर आया था।

‘मित्र, तुमने मुझे जिगरी यार कहा; दोस्त कहा, मेरे गले में हाथ डाला और चिकनी-चुपड़ी बातें बनाकर यहां ले आए। तुमने मेरा स्वागत बड़ी गर्मजोशी के साथ किया। तुमने सबकी नजरों में मेरा मान बढ़ाया तो दूसरी ओर, तुमने मेरे साथ बड़ा ही भद्दा मजाक भी कर डाला। तुमने मुझे जलील किया। आखिर क्यों?’ मैं एक सांस में न जाने कितना कुछ बोल गया। परंतु वह न जाने किस मिट्टी का बना था कि उस पर कोई असर ही नहीं हो रहा था। बल्कि मेरे द्वारा अपमानित किए जाने के बावजूद उसके चेहरे पर पूर्व की तरह मंद-मंद मुस्कान खेल रही थी। उसने न तो अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की और न ही प्रयास किया। बल्कि मेरे आंखों में आंखें डालकर उसने कहा, ‘अच्छा मित्र तो तुम मेरा नाम जानना चाहते हो! तो सुनो मेरा नाम वक्त है। लोग मुझे समय के नाम से भी जानते हैं। मैं सन् ’????-?? का मिला-जुला रूप तुम्हारे सामने खड़ा हूं। बस कुछ ही मिनटों के बाद मैं तुमसे विदाई ले लूंगा और फिर तुम्हारे सामने एक नूतन वर्ष के रूप में-एक नई सदी के रूप में प्रकट हो जाऊंगा। सारी दुनिया एक नई सदी का बेसब्री से इंतजार कर रही है। पर मित्र जाते-जाते मैं तुमसे एक पते की बात कहे जा रहा हूं। सच कहूं तुम मेरे अब भी मित्र हो। मैंने तुम्हें हकीकत के दर्शन कराए हैं। एक वास्तविकता से परिचित कराया है। और तुम हो कि बुरा मान गए। मेरी एक बात हमेशा ध्यान में रखना, जिस तरह तुम अपने गीतों में नये-नए रंग भरते हो-ठीक उसी की तरह अपने जीवन में ऐश्वर्य का भी रंग भरो। जी तोड़-ईमानदारी से मेहनत करो और उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ चलो। खूब धन कमाओ। बलशाली बनो, ताकि तुम कंचन और कामिनी का जी भरके उपभोग कर सको। धन एक ऐसी शक्ति है जिससे तुम अध्यात्म के शिखर पर भी जा सकते हो। सिद्धार्थ किसी भिखारी के घर नहीं जन्मे थे बल्कि वे राजा के बेटे थे, राजकुमार थे। धन बल से तृप्त होने के बाद ही वे बुद्ध कहला पाए। मैं भी उन्हीं का साथ देने को तत्पर रहता हूं जो सचमुच में कुछ बनना चाहते हैं। अच्छा दोस्त अब मैं विदा ले रहा हूं सारी दुनिया मेरी बाट जोह रही है।’’

सारा शहर पटाखों की गूंज से थिरक उठा। एक आतिशबाजी रंग-बिरंगी फुलझड़ियां बिखेरती हुई आसमान की तरफ उठती है। सहसा मेरा ध्यान उस ओर बंध जाता है तभी एक जोरदार धमाका होता है। काली अंधेरी रात में, नीले आकाश के बोर्ड पर एक-एक शब्द क्रमशः उभरते चले जाते हैं-‘हेप्पी न्यू ईयर’, ‘वेलकम न्यू ईअर’, ‘स्वागतम् नई शताब्दी।’

नजरें झुका कर देखता हूं वह गायब हो चुका था

--

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

---***---

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|हास्य-व्यंग्य_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=1$au=0

|कथा-कहानी_$type=blogging$count=8$page=1$va=1$au=0$com=0$src=random

|लघुकथा_$type=blogging$count=8$page=1$va=1$au=0$com=0$src=random

|कविता_$type=blogging$au=0$count=7$page=1$va=1$com=0$s=200$src=random

|विविधा_$type=blogging$au=0$count=10$page=1$com=0$va=0$src=random

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3996,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,110,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2968,कहानी,2228,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,529,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,94,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,339,बाल कलम,25,बाल दिवस,3,बालकथा,62,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,10,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,26,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,240,लघुकथा,1217,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1995,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,700,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,782,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,75,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,196,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: गोवर्धन यादव की कहानी - नए वर्ष से एक मुलाकात
गोवर्धन यादव की कहानी - नए वर्ष से एक मुलाकात
http://lh6.ggpht.com/-hgOh6Yh1NXc/T-l7rRwrIeI/AAAAAAAAMrU/wM9HztlRh7U/clip_image002%25255B3%25255D.png?imgmax=800
http://lh6.ggpht.com/-hgOh6Yh1NXc/T-l7rRwrIeI/AAAAAAAAMrU/wM9HztlRh7U/s72-c/clip_image002%25255B3%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2012/12/blog-post_1813.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2012/12/blog-post_1813.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ