काशीनाथ सिंह पर सृजन संवाद

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प्रयास आसनसोल द्वारा हिंदी अकादमी, आसनसोल नगर निगम के सहयोग से  आयोजित कथाकार काशीनाथ सिंह के रचनाकर्म पर  केन्द्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी (...

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प्रयास आसनसोल द्वारा हिंदी अकादमी, आसनसोल नगर निगम के सहयोग से  आयोजित कथाकार काशीनाथ सिंह के रचनाकर्म पर  केन्द्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी (सृजन संवाद 3)दिनाकं 2. 12. 12 को आसनसोल नगर निगम सभागार में सम्पन्न हुई .इस संगोष्ठी में काशीनाथ जी को सृजन  सम्मान 2012 से सम्मानित किया गया साथ ही साहित्यिक पत्रिका  संबोधन के काशीनाथ सिंह  विशेषांक  का  विमोचन हुआ . संगोष्ठी तीन सत्रों में संपन्न हुई .प्रथम सत्र सम्मान सत्र ,दूसरा सत्र ..भूमण्डलीकरण और कथाकार काशीनाथ सिंह।  तीसरा सत्र समकालीन कथा साहित्य और कथाकार काशीनाथ सिंह .इस संगोष्ठी में जो साहित्यकार और विद्वत जन शामिल हुए उनमे से प्रमुख .कथाकार काशीनाथ सिंह.कथाकार शिवमूर्ति  ,नारायन सिंह ,कृपा शंकर चौबे ,गौतम सान्याल आशीष त्रिपाठी ,कामेश्वर  सिंह,पल्लव , अभिजीत  सिंह आदि हैं 

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प्रथम सत्र में सर्वप्रथम प्रयास के साथी  राजीव लोचन सिन्हा ने प्रसाद के गीत बीती बिभावारी जाग री की  संगीतमाय प्रस्तुति  दी . अतिथियों का स्वागत संयोजन समिति की सदस्य डा कुसुम राय  ने किया .प्रयास संस्था  के सचिव डॉ कृष्ण कुमार श्रीवास्तव ने सं.स्था के उदेश्य और और उसकी गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए  कहा कि-  संस्था का मूल उद्देश्य हिंदी साहित्य को पठनीयता के संकट से उबारने में अपना छोटा सा योगदान देना है .इसी क्रम में प्रयास द्वारा रचना केन्द्रित त्रैमासिक गोष्ठियां की जाती रही है साथ ही रचनाकार  की उपस्थिति में उसके संपूर्ण लेखन  पर केंद्रित वार्षिक अयोजन सृजन संवाद अयोजित किया जाता है इसके पूर्व यह आयोजन .कथाकार संजीव के संपूर्ण लेखन  पर(2010),तथा कथाकार शिवमूर्ति के संपूर्ण लेखन  पर(2011)केंद्रित  रहा है .इसी सत्र में संस्था के संरक्षक डॉ संत राम ने शाल ओढाकर  तथा सत्र की अध्यक्षता कर रहे कथाकार शिवमूर्ति ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर काशीनाथ जी को सृजन सम्मान 2012 से सम्मानित किया

Asansol 2-3.12.2012 (1)

कथाकार काशीनाथ सिंह के संपूर्ण लेखन  पर चर्चा आरंभ  करते  हुए काशी हिन्दू  विश्वविद्यालय से पधारे डॉ आशीष त्रिपाठी  ने अपने बीज वक्तव्य में  कहा कि काशीनाथ जी के रचना कर्म के मूलतः तीन  आयाम हैं ..कहानी, उपन्यास,संस्मरण। किन्तु मै  उन्हें मूलतः कहानीकार मानता हूँ.काशीनाथ जी की प्रतिबद्धता तो प्रेमचंद की परम्परा के तहत है ,किन्तु कथा ढांचा ,शिल्प के स्तर पर नई राह बनाते हैं .उनकी कहानी कला चेखव के निकट है ,,,प्रतिपल जीवन की नई भंगिमा ही उनका विषय है ... काशीनाथ जी ने अपनी रचना प्रक्रिया पर बोलते हुए कहा ..सिर्फ  होने से कुछ नही होता ,अपने होने का  हक़ अदा कीजै ..  उन्होंने कहा  भद्र लोक से जुड़ कर लेखक नहीं बना जा सकता सामान्य जनजीवन ही  लेखकीय स्रोत है उन्होंने स्वीकार किया कि अहिन्दी भाषी क्षेत्र में यह सम्मान मुझे एक परिघटना की तरह लगता है . ..अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कथाकार शिवमूर्ति ने  कहा -प्रेमचंद को पढ़ते हुए यह लगा की यह तो हमारे गाँव जंवार  की, अपने आस -पास कि  कहानियां है ,इस तरह तो मै भी लिख सकता हूँ .काशीनाथ सिंह को  पढ़ कर  यह लगा  कि सामान्य से  समान्य  विषय ,सन्दर्भों को भी रचना का विषय बनाया जा  सकता है ,कहानी  'अपना रास्ता लो बाबा' का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस चाचा ने कंधे पर बैठा  कर घुमाया ,पढाया,कथानायक उसे ही नही पहचानना चाहता है ,प्रयास के आयोजन उत्तरोतर  विकास की और हैं इसके लिए उन्होंने आयोजकों को बधाई दी .इस सत्र  का धन्यवाद ज्ञापन हिंदी अकादमी नगर निगम आसनसोल के सचिव जितेन्द्र तिवारी ने किया .इस  सत्र का संचालन डॉ दामोदर मिश्र ने किया। 

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द्वितीय सत्र ..भूमण्डलीकरण और कथाकार काशीनाथ सिंह के वक्ता अभिजीत सिंह एवं प्रसिद्ध पत्रकार कृपा शंकर चौबे थे .अध्यक्षता आलोचक गौतम सान्याल ने की . इस  सत्र का संचालन अजय साव  ने किया .अपने वक्तव्य में  अभिजीत सिंह ने कहा -जिस तरह तुलसी के विना राम कथा पर और रेणु के विना ग्राम कथा पर चर्चा नही की जा सकती ,उसी तरह हिंदी कथा साहित्य में काशीनाथ सिंह के बिना भूमण्डलीकरण पर चर्चा नही की जा सकती .उन्होंने कहा कि आत्मालोचन की प्रक्रिया उनके यंहा बहुत गहरे तक समायी है . कृपा शंकर चौबे ने अपने वक्तव्य में कहा कि  काशी का अस्सी की पांच कहानियों में वैश्विकरण की आंच को महशूस किया जा सकता है यह सिर्फ बनारस की नहीं सम्पूर्ण हिंदुस्तान  की  कहानी है .रेहन पर रग्घू उदारीकरण के कारण गाँव में हो रहे परिवर्तन को रेखांकित करता है .काशीनाथ जी की सबसे बड़ी पहचान उनकी भाषा है।इस सत्र के अध्यक्ष  गौतम सान्याल ने कहा कि जब मै  साठोत्तरी कहानीकारों की टीम बनाता  हूँ तो हर बार उसमे काशीनाथ सिंह का नाम आ जाता है .मै कई बार अपने प्रिय कथाकार   संजीव को भी उसमे स्थान नही दे पाता ,उन्हें बारहवें खिलाडी के रूप में ही स्थान दे पाता  हूँ . उन्होंने कहा  कि  हिंदी आलोचना कोअभी  यह पता ही नही है की संरचना के क्षेत्र में काशीनाथ जी ने कितना महत्वपूर्ण कार्य किया है .आज के सात आठ साल बाद बाद जब कैम्पस नावेल की चर्चा होगी तो हिंदी के पहले कैम्पस नावेल अपना मोर्चा का महत्व  समझ में आएगा .

तृतीय सत्र समकालीन कथा साहित्य और कथाकार काशीनाथ सिंह  के  वक्ता आलोचक पल्लव और कामेश्वर प्रसाद सिंह थे .अध्यक्षता कथाकार नारायण सिंह ने की .इस सत्र का संचालन कथाकार सृंजय ने किया .पल्लव ने अपने वक्तव्य में कहा कि -काशीनाथ सिंह का लेखन भूमंडलीकरण के राक्षस  को पहचानने में मदद करता है .उन्होंने कहानी सरायमोहन की रचना उस समय की जब विमर्शवादी दौर आरम्भ हो चुका  था और काशीनाथ सिंह उन रुझानों के चक्कर  में पड़े बगैर प्रगतिशील नजरिये से अपनी बात कह रहे थे .वे अपने लेखन को रुढियों में फंसने से बचाते हैं .रेहन  पर रग्घू के अंत में बहु रघुनाथ से कहती है -तुम कंहा जाते हो ,मेरा पति चला गया लेकिन तुम कंहा जाते हो ?यह नया स्त्री चरित्र है जिसकी उद्भावना काशीनाथ जी के यंहा की गयी है .कामेश्वर प्रसाद सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि-साहित्य के तिकड़म मै नही जानता हूँ .मेरा मानना है की बड़ा मनुष्य ही बड़ा रचनाकार हो सकता है .उन्होंने काशीनाथ सिंह के समकालीनों यथा ज्ञानरंजन ,रविन्द्र कालिया आदि से उनकी तुलना की .साथ ही काशीनाथ जी की रचनाओं के कुछ अंशों का पाठ किया .अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कथाकार नारायन सिंह ने कहा साहित्य कोई समाधान नही देता वह आपको बीच रास्ते  पर ला कर छोड़ देता है जिससे आप खुद विकल्प खोज सकें .प्रेमचंद ने कभी कहा था कि श्रेष्ठ रचनाएँ वे होती हैं जो आप को वेचैन करती हैं .काशीनाथ जी की रचनाएँ इस सन्दर्भ में खरी उतरती हैं .अंत में उन्होंने वैयक्तिक सम्बन्धों के आधार पर कहा उनका व्यक्तित्व उनकी रचना से बड़ा है .उनकी कहानियां उनकी रचना के आगे कंही नही ठहरतीं .सर्वांत में रचनाकार से संवाद हुआ ,उनसे प्रश्न पूछे गये ,इस संवाद में विजय भारती , बिजय नारायण ,प्रमोद प्रसाद ,महेंद्र प्रसाद कुशवाहा ,दिलीप कुमार ,रविशंकर सिंह ,कथाकार महावीर राजी ,कथाकार सृंजय आदि ने भाग लिया .काशीनाथ जी ने सभी प्रश्नों के समुचित उत्तर दिए ,धन्यवाद ज्ञापन प्रयास  संस्था के संरक्षक डॉ संत राम जी ने दिया .

गोष्ठी के दूसरे दिन अग्निगर्भी  बांग्ला कवि काजी नजरुल इस्लाम की जन्म स्थली चुरुलिया भ्रमण  का कार्यक्रम बना .उबड़ खाबड़ रास्ता काशीनाथ जी तथा शिवमूर्ति जी द्वारा गाये गये लोकगीतों की तानो के कारण अत्यंत सुगम लग रहा था .कवि तीर्थ में उनकी विरासत को संजोने के लिए किये गये वैयक्तिक प्रयासों की सबने भूरि भूरि प्रशंसा  की .हिंदी समाज अपने रचनाकरों को ऐसा सम्मान दे सके इसकी कामना की गयी .सृजन संवाद -4 में फिर मिलने  की शुभेक्षा   के साथ सबने विदा ली .

                                                                                                   

डॉ कृष्ण  कुमार श्रीवास्तव

(सचिव)प्रयास

आसनसोल ,मो  नं .09475559155

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ 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रचनाकार: काशीनाथ सिंह पर सृजन संवाद
काशीनाथ सिंह पर सृजन संवाद
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