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बच्चन पाठक 'सलिल' की कविता - नया वर्ष मंगलमय हो

नया वर्ष मंगलमय हो
               -- डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'

परम पिता से यही प्रार्थना हमारी आज
नया साल आया, आप सबका मंगल हो ,
परिजन, पुरजन सबहीं प्रसन्न रहें
राजनीति गलियों में भले दंगल हो।

चाहे मॉल खूब बने, इन सारे शहरों में
पर्यावरण शुद्ध रहे, खूब जंगल हो
योजना सिंचाई की न द्रौपदी का चीर बने
हर एक राज्य में ही, भाखरा नंगल हो।

बीता है पुराना साल दिल दहलाने वाला
खुशियाँ उमंग लिए नया साल आया है
देते हैं बधाई आज सब एक दूसरे को
प्रेम का माहौल यह सब को ही भाया है।

लगता विषाद की है निशा अब बीत गयी
हर्ष का वितान आज चारों ओर छाया है
हिंसा,अशांति उठ जाये इस धरती से
नर नारी कह उठे नया साल आया है।

जमशेदपुर
झारखण्ड

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