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हिमकर श्याम की नववर्षाभिनंदन कविता - शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

-हिमकर श्याम

व्यथित मन में मधु रस घोलो

शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

 

झोली में लेके ख्वाब नया

देखो आया है साल नया

अरमानों की गठरी खोलो

शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

 

जो बीत गया सो बीत गया

वो दुःख का गागर रीत गया

उम्मीदों का दर फिर खोलो

शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

 

दूर नहीं खुशियों का प्याला

उस पार खड़ा है उजियाला

संग ज़माने के अब हो लो

शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

 

राह नयी है, लक्ष्य नया है

जीवन में संकल्प नया है

पहले अपने पर तो तोलो

शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

 

क्या खोया, क्या पाया हमने

खूब हिसाब लगाया हमने

जख्म पुराने सारे धोलो

शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

 

छंद नया है, राग नया है

होठों पे फिर गीत नया है

सरगम के नव सुर पे डोलो

शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

 

पीड़ा- ताप मिटे जीवन की

पूरी हो इच्छा हर मन की

अंतर्मन के बंधन खोलो

शुभ-मंगल सब मिलकर बोलो

3 टिप्पणियाँ

  1. achhi rachana. angreji naw varsh mangal may ho.
    Manoj 'Aajiz'

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    उत्तर
    1. शुक्रिया मनोज जी, आपको और आपके प्रियजनों को नववर्ष की अशेष शुभकामनाएँ.

      हटाएं
  2. pdhne me deri hui, bahut achchha geet hai,

    जवाब देंहटाएं

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