---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

नन्दलाल भारती की कहानी - छोटे लोग

साझा करें:

छोटे लोग। कहानी। नयन लाल के बी.ए.पास करते ही उसके माता-पिता की आंखों में चमक आ गयी। उन्हें लगने लगा था कि जीवन का मधुमास जो पतझड़ में बदल...


छोटे लोग।

कहानी।


नयन लाल के बी.ए.पास करते ही उसके माता-पिता की आंखों में चमक आ गयी। उन्हें लगने लगा था कि जीवन का मधुमास जो पतझड़ में बदल गया था,नयनलाल को सरकारी नौकरी मिलते ही घर-मंदिर में मधुमास लौट आयेगा। खैर हर माँ-बाप को अपनी औलाद से ऐसी ही उम्मीद होती है। मां-बाप को अपनी औलाद को लेकर सपने बुनना भी चाहिये परन्तु उनके सपनों का आकस्मिक मानवीय सोच की दुर्घटना के शिकार न हो। भारतीय व्यवस्था में ऐसी आकस्मिक दुर्घटनायें आम है जो अक्सर हाशिये के लोगों के साथ अक्सर हो ही जाती है। कभी छोटे लोग के नाम पर,कभीं छोटी जाति के नाम पर कभी क्षेत्र के नाम पर कभी प्रान्त के नाम पर किसी और नाम से। ऐसी ही दुर्घटना नयनलाल के साथ हुई नतीजतन उसके मां-बाप गुणवन्ती और हरीलाल के सपनों का चकनाचूर होना था। नयनलाल को अभी नौकरी ज्वाइन किये चन्द महीने हुए ही थे। अर्धशासकीय मल्टीनेशनल खेती विकास कम्पनी में आरक्षण की व्यवस्था लागू होने की सुगबुगाहट शुरू हो गयी। प्रबन्धन ने जाति प्रमाण प्रस्तुत करने की सूचना जारी कर दी थी। जाति प्रमाण के सामने आते ही नयनलाल के कैरिअर की तबाही के भाषणयन्त्र शुरू हो गये। खैर सामन्तवादी सोच के धनिखाओं ने आरक्षण तो लागू नहीं होने दिया। सरकारी कानून ना जाने कहां खो गये पर छोटे लोग के नाम पर तथाकथित उच्च वर्णिक ब्रांचहेड आर.के.डंकना ने नयनलाल के उपर मुसीबतों के ओले आवारा बादलों की बरसात के साथ गिराने शुरू कर दिये थे जाति प्रमाण पत्र देखने के बाद। आर.के.डंकना बात-बात पर नयनलाल को दुरियाना भी शुरू कर दिये थे


आर.के.डंकना विजय दुर्धर जो स्टेटहेड थे से कहते हुए सुने गये साहब कम्पनी में छोटे लोग आने लगे है,कम्पनी सरकारी रवैये पर ना चलने लगे।


विजय दुर्धर-अरे क्यों चिन्ता करते हो डंकन किसको छोटा बनाये रखना है किसको बड़ा बनाये रखना है,ये हमें तय करना है और रच गये नयनलाल को छोटे बनाये रखने का भाषणयन्त्र । उसकी सी.आर.मध्यम गति से खराब की जाने लगी थी जो उसे पदोन्नति से दूर रखने के लिये काफी थी छोटा बनाये रखने के लिये छोटे लोग के खिलाफ। नयनलाल का सच भी डंकन साहब को झूठ लगता था,उसकी तकलीफें उन्हें बहाना लगती थी। नयनलाल को मिलने वाली तनख्वाह डंकना साहब को ज्यादा लगती थी। नयनलाल के लिये नौकरी किसी सजा से कम नहीं लग रही थी। वही दूसरी ओर डंकन साहब के खास धनपति जो नौकरी के शुरूआती दौर में विक्षिप्त हो गया था। धनपति भले ही पागल सरीखे हो गया था अतिसुन्दर जीवनसंगिनी का साथ भी था। डंकन साहब की जी हजूरी में तनिक भी कोताही नहीं बरतता था। मदद के लिये डंकन साहब भी रात-विरासत उसके घर पहुंच जाते थे। डंकन साहब धनपति की हर तरह से मदद करते थे आर्थिक लाभ भी खूब पहुंचाते थे। दफ्तर के दूसरे लोग डंकन साहब को नालायक लगते थे। डंकन साहब की कृपा धनपति पर खूब बरसती थी। दफ्तर के बड़े-बड़े बुद्धिमान धनपति के सामने बौने से हो गये थे। धनपति का प्रमोशन भी धड़ल्ले से हो रहा था ।धनपति के साथ के लोग पन्द्रह साल पिछड़ गये पर विक्षिप्त धनपति सब का कान काट रहा था। ना जाने डंकना साहब को धनपति से कौन लाभ मिल रहा था जिसकी वजह से डंकना साहब दूसरे कर्मचारियों की शिकायत भी करने में तनिक नहीं हिचकते थे। जब-जब डंकना साहब का स्थानान्तरण हुआ डंकना साहब ने धनपतिकुबेर का भी स्थानान्तरण वही करवाया जहां वे स्थानान्तरित हुए।

स्टेटहेड,विजय दुर्धर साहब के तो आर.के.डंकना साहब इतने खास थे कि उनकी इच्छा पूर्ति के लिये चांद भी धरती पर उतार लाये। इसके अलावा डंकना साहब में कोई योग्यता नहीं थी। मामूली से ग्रजुयेट थे अंग्रेजी तो दूर हिन्दी भी लिखने में इतने हाथ तंग थे कि बड़े अफसर की तरह दस्तख्त कर लेते। विभाग में दनादन तरक्की की चोटी पर चढ़ते जा रहे थे,उनसे वरिठ निम्नवर्णिक ए.ए.ध्यान का तो कैरिअर खत्म हो गया था। वही हाल नयनलाल के साथ शुरू हो गया खैर नयनलाल तो मामूली से क्लर्क की नौकरी पर लगा था पर वह जानता था कि मामूली क्लर्क पर लगे योग्य लोग उच्च पदों पर जा सकते थे। कई को तो जनरल मैनेजर के पद से रिटायर होते भी देखा था। इसी उम्मीद में नयनलाल आंसू से अपने कैरिअर का कैनवास रंगने का भरसक प्रयास कर रहा था। अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ अगर मुंह खुला तो नौकरी जाने का खतरा भी था। स्टेटहेड,विजय दुर्धर साहब नयनलाल के गांव के पास के ही थे इसके बाद भी वे नयनलाल की परछाईं से भी नफरत करते थे। सुनने में आता है कि क्षेत्रवाद भी भ्रष्टाचार का कारण बनता है परन्तु स्टेटहेड,विजय दुर्धर लकीर से हटकर फायदा पहुंचाने की बात तो दूर उसको हकों पर तलवार लटकाये रखते थे। स्टेटहेड,विजय दुर्धर के मातहत काम करने वाले अफसर ही नहीं चपरासी भी नयनलाल को दोयम दर्जे का आदमी ही समझते थे क्योंकि नयनलाल निम्नवर्णिक जो था।

स्टेटहेड,विजय दुर्धर के हाथ के नीचे प्रशासन में काम कर रहे एस.एस.चोरावत ने तो हद की कर दिया था। नयनलाल की एल.टी.सी का भुगतान नहीं होने दिया था। पुराना स्कूटर खरीदने के लिये नयनलाल ने आवेदन लगाया था पर दो साल तक लोन पास नहीं होने दिया था। स्टेटहेड,विजय दुर्धर और आर.के.डंकना साहब की सह पर एस.एस.चोरावत ने तो नयनलाल की पत्नी के मेडिकल बिलों की जांच करवाने के लिये कमेटी तक बैठवा दिया था ।सांच को आंच कहां नयनलाल ने एक-एक खुराक दवाई का हिसाब दिया था । मुंह की खानी तो पड़ी थी पर जली हुई रस्सी की तरह इनकी ऐंठने नहीं गयी थी। मौंके-बेमौंके नयनलाल का अहित में तथाकथित उच्च मानसिकता वास्तव में दोगली मानसिकता के लोग जुटे रहते थे। आर.के डंकना साहब होंठों पर मुस्कान लिये हर साल मौन कैंची चलाये जा रहे थे और उपर बैठे स्टेटहेड,विजय दुर्धर अपनी मुहर लगाये जा रहे थे। नयनलाल को दफतर की सरकारी सुविधा भी उनकी आंखों में धंसने लगी थी। कहते छोटे लोगों की सरकारी सुविधाओं की लत लग रही है। चम्बल संभाग की गर्मी आग में आलू भुनने जैसा होती है,ऐसी गर्मी में सरकारी दफ्तर का रो-रोकर चलने वाला पंखा भी नयनलाल की सीट से आर.के डंकना ने अपने तथाकथित रिश्तेदार के घर शिफ्ट करवा दिये थे। नयनलाल की नाक से टपकता से उठा पसीना नख तक बहता रहता था ऐसी परिस्थिति में काम थोपने का सिलसिला भी ।

एक कहावत है अगर बास कर्मचारी को सुनते हैं तो कर्मचारी भी पूरी ईमानदारी बरतते हैं। यहां तो नयनलाल काम के प्रति समर्पित था पर दुख में था। बास ही नहीं दफ्तर के दूसरे लोग भी छोटे लोग कहकर उपहास करते,ईमानदारी के साथ किये गये काम के बदले दण्ड मिलता बेचारे निरापद नयनलाल को। एक कहावत दबी जबान सुनने को और आती है बास आफिस का तनाव दूर कर सकते है। सच भी है काम की अधिकता से कर्मचारियोंमें होने वाले तनाव को बास अपने सौम्य और भावनात्मक व्यवहार से काफी हद तक कम कर सकते है। इससे काम भी समय पर पूरा होजाता है। बास भी परिवार के मुखिया की तरह अपनत्व की सौम्यता भी दिखा सकते है।कर्मचारियों के लिये काम बोझ नहीं लगता। काम के निपटान के लिये कर्मचारियों को अलग से समय की जरूरत भी नहीं पड़ती। समय लेने का तात्पर्य यह होता है कि कर्मचारी बीमार होने की लम्बी छुट्टी लेकर घर बैठ जाते हैं जिससे कम्पनी के काम में बाधायें आती है। काम समय से पूरा नहीं होता है। यदि कर्मचारी स्वस्थ होता है और बास परिवार के मुखिया की तरह सौम्यता के साथ काम लेता है तो कर्मचारी काम सही ढंग से करता है और काम समय से पूर्व अथवा समय पर पूरा हो जाता है। बास बिना किसी भेदभाव के कर्मचारी के साथ पेश आता है तो कर्मचारी में कम से कम छुट्टियों पर जाते है। लेकिन यह तभी सम्भव है जब बास कर्मचारी की मनोदश समझे उसके हितों का ध्यान रखे और मानवता के प्रति ईमानदारी बरतते हुए बिना किसी जातीय भेदभाव के हर कर्मचारी से प्यार से काम ले।

नयनलाल पूरी ईमानदारी,कर्तव्यनिठा के साथ काम करता था परन्तु उसके साथ सभी अधिकारियों-वी.पी.दुर्धर,देवेन्द्र दुर्धर,अवध दुर्धर,आर.पी.दुर्धर,कनक नाथ दुर्धर,जगजीत दुर्धर,देवकी और डंकना ने दोयम दर्जे का आदमी मानकर अन्याय ही किया। नयनलाल काम के बोझ से हमेश दबा रहता था,उसके जीवन का मधुमास इन अफसरों ने पतझड़ बना दिया,उसके खुली आंखों के सपने मारते रहे छोटे लोग कहकर। नयनलाल,उच्च शिक्षित और कर्तव्यनिष्ठ होने के बाद भी दण्डित किया जा रहा था। उसे अपरोक्ष रूप आत्महत्या करने तक को हत्तोत्साहित किया जाने लगा था। उसके आगे बढ़ने के रास्ते बन्द किये जाने का भाषणयन्त्र जारी था सिर्फ जातीय अयोग्यता की आड़ में। नयनलाल को हमेश तनाव में रखा जाता था ताकि वह हत्तोत्साहित होकर नौकरी छोड़ दे या दुनिया ।ढेर सारी खूबियों के बाद भी नयनलाल को दण्ड मिल रहा था। नयनलाल संस्थाहित में बड़ी ईमानदारी से काम तो कर रहा था पर उसे दफ्तर में घुटन महसूस हो रही थी। घुटन में काम करते हुए उसे कई बीमारियों ने घेर लिया था। विभाग में किसी का कभी नयनलाल को सहयोग नहीं मिला परन्तु छोटे लोग के नाम पर उसकी योग्यता का बलात्कार कर्मपूजा का चीरहरण जरूर किया गया। नयनलाल की भावनाओं को समझना तो दूर उसकी मेहनत की कमाई पर गिद्ध नजरें टिकी रहती थी। काम नयनलाल करता था,अतिरिक्त प्रतिपूर्ति ओवर टाइम धनपतिकुबेर और ऐसे दूसरे लोगों के हिस्से चला जाता था। धनपतिकुबेर को तो तनख्वाह से अधिक दूसरी कमाई का लाभ मिल जाता था। यह सब डंकना साहब की कृपादृटि का प्रतिफल था। हाँ नयनलाल पर तो हमेशा कोपदृटि बनी रहती थी बस छोटे लोग के नाम पर।


डंकना साहब ने नयनलाल के साथ पशुता तक का व्यवहार कर डाला,पहले उसकी सीट पर चल रहे मरियल पंखे को उठवा लिये,फिर उसे खुले नन्हें से बरामदे में टाइपराइटर देकर बहरिया दिया जहां झुलसा देने वाली लू में वह झुलसने को विवश था। गर्मी की प्रचण्डता को देखकर दफ्तर के लिये सरकारी खर्चे पर कूलर लगाने का बजट स्वीकृत हुआ पर नयनलाल के लिये आया कूलर आर.के.डंकना साहब अपने घर उठवा ले गये । धनपतिकुबेर के मुंह से जरूर सुनने को मिला था कि छोटे लोगों को सरकारी सुविधा की लत लग जायेगी तो काम कौन करेगा। कहावत सुनने में आती है कम्पनी के नुकसान को कम करने और लाभ को बढाने में बास अहम् भूमिका निभाता है वी.पी.दुर्धर,देवेन्द्र दुर्धर,अवध दुर्धर,आर.पी.दुर्धर,कनक नाथ दुर्धर,जगजीत दुर्धर,देवकी और आर.के डंकना जैसे अफसर संस्था,मानवसमाज,देश और नवयुवकों के लिये खतरा साबित होते है। भ्रष्टाचार के जनक साबित होते है। ऐसे लोगों को क्या कहा जा सकता है जातीयता को योग्यता मानकर शैक्षणिक का बलात्कार करते है सिर्फ छोटे लोग के नाम पर। इस तरह के लोग ठीक वैसे ही लगते है जैसे वामन जो चक्रवर्ती सम्राट बलि से छलकर उनका सर्वस्व ठग लिया था। जातीय भेदभाव के नाम पर चेहरा बदलकर हाशिये के आदमी अथवा छोटे लोगों की नसीब कैद करने वाले लोग आदमी के वेा में नरपिशाच लगते है आज के विज्ञान के युग में भी। नयनलाल का भविष्य भेद के भंवर में फंसा हिचकोले खा रहा था इसी बीच उसे महात्मा ज्योतिराव फुले द्वारा लिखित किताब गुलामी, मराठी का हिन्दी भाषान्तर पढ़ने को मिल गयी। यह पुस्तक पढ़ ही रहा था कि डाँ.रमा पांचाल द्वारा सम्पादित पुस्तक सिन्धु संस्कृति के निर्माताओं के वंशज महाराजा बली हाथ लग गयी। इन पुस्तकों का पढ़कर नयनलाल को वैदिककाल से वर्तमान के भाणयन्तकारियों और उनके पात्रों के विाय में जानने और समझने का अवसर मिला। इन पुस्तकों से उसे ज्ञात हुआ कि वह सिन्धु सभ्यता के वंशावली से हैं,सच भी यही हैं। देश की आबादी के अस्सी प्रतिशत लोग जिन्हें शोषित वंचित आदिवासी के नाम से जाना जाता है जो लोग विकास की लय आजाद देश में नहीं पकड़ पाये हैं, भाषणयन्त्र के शिकार हैं, असल में वे लोग छोटे लोग नहीं है। छोटे लोग तो वे है जो लोग खुद का बड़ा घोषित कर,शोषित-वंचित समुदाय का हक हड़प रहे है। ऐसा ही तो आधुनिक वैज्ञानिक युग में जहां दूरियों की सीमायें टूट चुकी है परन्तु जातीय भेद की दूरियों पर आंच तक नहीं आयी है जिसकी वजह से नयनलाल और उस जैसे अनगिनत लोगों को आंसू से रोटी गीला करना पड़ रहा था। नयनलाल एकदम आश्वस्त हो चुका था कि वह और उसके लोग छोटे लोग नहीं हो सकते।


नयनलाल के व्यवहार में आयी परिवर्तन से विभाग में जैसे खलबली मच गयी। उसको रोकने के अपरोक्ष रूप से खूब प्रयास होने लगे थे। सी.आर. तो पहले से शनै-शनै खराब की जा रही थी,उसके भविष्य पर कालिख तो पोत दी गयी थी।इसके बाद भी कई बार पदोन्नति के मौके भी आये वह कई अग्नि परीक्षायें भी पास कर लिया लेकिन परिणाम उसके पक्ष में कभी नहीं आया। वह हत्तोत्साहित होने की बजाय और उत्साहित होता चला गया जिसका परिणाम यह हुआ कि सभ्य समाज के बीच उसकी पहचान उभर कर आ गयी। सेवा में उसके जीवन के पच्चीस मधुमास पतझड़ में बदल चुके थे पर उसके मन में कल से आस थी जो कुसुमित रहती थी। अरसे बाद उसे डी.पी.सी में बुलाया गया पर इस बार भी परिणाम में कोई बदलाव नहीं हुआ होता भी कैसे यह तो महज खानापूर्ति थी,उसकी योग्यता पर एकबार फिर अयोग्यता की मुहर लग गयी। नयनलाल ने कमरकस लिया और बोर्ड आफ डायरेक्टर को लिखित में अन्याय के खिलाफ अर्जी लगा दिया। खैर इस अर्जी से भी नयनलाल को कोई तरक्की नहीं मिली मिलती भी कैसे सी.आर.जो खराब कर दी गयी थी तरक्की से दूर रखने के लिये।


अचनाक आर.के डंकना साहब के विदेश अध्ययन की मंजूरी विभाग से मिल गयी। उस डंकना साहब को जो लिखने-पढ़ने से काफी दूर थे पर ग्रेजुयेट थे। विदेश में जाकर क्या समझेंगे,क्या बोलेंगे। इस समस्या का समाधान डंकना साहब के एक भक्त उदय के मस्तिक में उपज गयी। खैर उस वक्त गजनी पिक्चर बनी तो नहीं थी शायद ऐसा कुछ उन्होंने किसी विदेशी पिक्चर में देखा हो। गजनी के तर्ज पर जैसे नायक फोटो खींचकर कोडिंग कर लेता है। ठीक वैसे ही आर.के.डंकना साहब के प्रतिदिन के उपयोग हेतु डायलाग और लेक्चर की मैनुस्क्रिप्ट तैयार की गयी थी। इस मैनुस्क्रिप्ट रचना में नयनलाल भी सहभागी था। मैनुस्क्रिप्ट तैयार करने में सप्ताह भर लगे थे पर यह आयडिया कामयाब भी रही। डंकना साहब दिल्ली प्रस्थान करने से नयनलाल से बोले-तुम्हारा कोई काम तो नहीं है मुख्यालय में कोई काम हो तो बताओ दो दिन दिल्ली में रूकना है,तुम्हारा काम करवा दूंगा।


नयनलाल-नहीं।
डंकना साहब-माथा ठोंकते हुए बोले तुम्हारी पदोन्नति का मामला तो है क्यों नहीं कोई काम।
नयनलाल-मेरा काम नही हो सकता।
डंकना-मैं जा रहा हूं,प्रशासन हेड से बात करूंगा।
नयनलाल-म नही मन बोला अभी तक तो कब्र खोदते रहे एकदम से मेरे कैरिअर की चिन्ता कैसे होने लगी।
डंकना साहब-कुछ बोले ।
नयनलाल-नहीं साहब ।
धनपतिकुबेर-साहब आबे बढ़कर तुम्हारा काम करवाने को कह रहे है। तुम कह रहे हो नहीं होगा।
डंकना साहब-तुमने अपनी पदोन्नति के विषय में जितने पता्रचार कियो हो सब पत्रों की एक-एक प्रति दे दो। तुम्हारी पदोन्नति जरूर होगा। तुम्हारे इतना योग्य प्रदेश में तो कोई नहीं है। 


नयनलाल को ना जाने क्यों दाल में काला क्या पूरी दाल काली लगने लगी थी। वह बोला हड़ताल आज है सभी दुकानें बन्द है। फोटोकापी नहीं हो पायेगी। बाद में जब जायेंगे तो दे दूंगा।


डंकना साहब-अभी दे दो। मैं वही करवाकर दे दूंगा,तुम्हारे नाम से कोरिअर करवा दूंगा।
आखिरकार नयनलाल को सारा रिकार्ड देना पड़ गया । दो महीने की विदेश यात्रा के बाद डंकना साहब स्वदेश लौटे थे और उनके दफ्तर आते ही नयनलाल दस्तावेज के बारे में जानकारी चाहा तो फटेमुंह डंकना साहब का जबाब था यार तुम्हारे दस्तावेज तो हेडआफिस में दे दिया था जबकि सारे रिकार्ड डंकना साहब नट कर दिये। प्रमोशन तो दूर रिकार्ड भी खत्म हो गये एक साजिश के तहत् छोटे लो जानकर।
नयनलाल बुदबुदाया छोटे लोग का भला कौन चाहेंगे?


नयनलाल को पददलित बनाये रखने में तथाकथित उंचे दोगली मानसिकता के लोग कामयाब रहे। नयनलाल ऐसी राह पर चल चुका था जहां से उसे न पीछे देखना सम्भव था और ना लौटना मुमकिन था। वह मानता था कि वह संर्घारत् जीवन व्यतीत कर रहा है लेकिन वह अपनी जिद पर अडिग था। वह कहता जब तक मेरा अस्तित्व है प्रयास जारी रखूंगा। एक उसका अथक प्रयास कामयाब हुआ उसके किये गये परहित के कामों की सर्वत्र सराहना हुई। कलम के सिपाही को   पी.एच.डी.की उपाधि प्रदान कर विश्वविद्यालय ने सम्मानित किया पर विभाग में तरक्की नही हुई । नयनलाल के कद की उंचाई देखकर वी.पी.दुर्धर,देवेन्द्र दुर्धर,अवध दुर्धर,आर.पी.दुर्धर,कनक नाथ दुर्धर,रणवीर दुर्धर,देवकी और डंकना इतने बौने हो गये थे कि नयनलाल से आंख मिलाने में नीचे गड़ जाते थे। कमेरी दुनिया का आदमी छोटा नहीं हो सकता क्योंकि सृजन और विकास का आधार तो वही होता है ऐसे फरिश्ते छोटे लोग कैसे हो सकते है। नरपिशाच छोटे लोग तो वे होते हैं जो शोषित-वंचित,कमेरी दुनिया के लोगों खून पीते हैं। 


डाँ.नन्दलाल भारती


 

Email- nlbharatiauthor@gmail.com

vktkn nhi] 15&,e&oh.kk uxj ]bankSj Ae-izA&452010]

http://www.nandlalbharati.mywebdunia.com

http;//www.nandlalbharati.blog.co.in/

http:// nandlalbharati.blogspot.com http:// http;//www.hindisahityasarovar.blogspot.com/ httpp://wwww.nlbharatilaghukatha.blogspot.com/ httpp://wwww.betiyaanvardan.blogspot.com

httpp://www.facebook.com/nandlal.bharati


दूरभाा-0731-4057553  चलितवार्ता-09753081066
000000000
जनप्रवाह।साप्ताहिक।ग्वालियर द्वारा उपन्यास-चांदी की हंसुली का धारावाहिक प्रकाशन
उपन्यास-चांदी की हंसुली,सुलभ साहित्य इंटरनेशल द्वारा अनुदान प्राप्त
नेचुरल लंग्वेज रिसर्च सेन्टर,आई.आई.आई.टी.हैदराबाद द्वारा भाषा एवं शिक्षा हेतु रचनाओं पर शोध  ।

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

|कथा-कहानी_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|हास्य-व्यंग्य_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|आलेख_$type=two$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|संस्मरण_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|उपन्यास_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लोककथा_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4061,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3023,कहानी,2265,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,99,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,244,लघुकथा,1255,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,327,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2009,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,711,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,797,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,88,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,208,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: नन्दलाल भारती की कहानी - छोटे लोग
नन्दलाल भारती की कहानी - छोटे लोग
http://lh3.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/S0L-B3mFOhI/AAAAAAAAG_E/tRNjTmxIR2A/image_thumb.png?imgmax=800
http://lh3.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/S0L-B3mFOhI/AAAAAAAAG_E/tRNjTmxIR2A/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2013/04/blog-post_1442.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2013/04/blog-post_1442.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ