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शरद कुमार श्रीवास्तव की हास्य-व्यंग्य कविता - डीप फ्रीज़र में दिल...

शरद कुमार श्रीवास्तव 

फ्रीजर में दिल

दैवी अनुकम्पा से,

बडों के आशीर्वाद से

नया फ्रिज घर में आया!

जिसे देखकर सबसे पहले

मेरा दिल फूला ना समाया!

 

खुश् हुआ, घर में कोई चीज तो पड़ी दिखाई

बन्जर खेती हरियाई

बुद्धि ने पूछाः

इतने बडे फ्रिज में क्या रखोगे भाई

तुम तो अकेले हो,

विधि के विधान से परिवार से गये ढ्केले हो

 

फिर उसी बुद्धि ने सुझाया

पानी, दूध, खाने का सामान थोड़ा रख लेना

फल-सब्जी कुछ दिनों की,  भी रख लेना

मदिरा ! ना बाबा, शराब तो मैं पीता नहीं

फिर ! कुछ सोना रखा जा सकता है

नहीं यह विचार मेरी इकलौती अगूंठी

फ्रिज में गंवा सकता है

 

यह क्या?  देखा तो! फ्रिज में जगह काफी है

और तो और, डीप फ्रीजर, डियर अभी बाकी है

उसका क्या करोगे?

आइसक्रीम कुलफी खाओ

मजे से ऐश उडाओ!

नहीं भाई, क्या मुझे मरवाओगे

डायबिटीज का मरीज हूँ,

यह बात क्या छुपाओगे?

 

इसी पशोपेश में मैं था अड़ा

काफी उधेड्बुन में मैं था पड़ा

कि कैसे हो डीप फ्रीजर का इस्तेमाल

देर से पर दुरुस्त आया यह खयाल

क्यों न रखूं  इसमे दिल को अपने

बहुत दिनो से दिखाता रहा जो थोथे सपने

जो कभी चहकता है तो कभी लरजता है

सो कभी धधकता है तो कभी बहकता है

 

दिल अगर खुश हो तो जहाँ महकता है

कभी जोर से मचलता है जनाब

यह दिल ही ऐसी चीज है लाजवाब

ये दिल ही तो है जिसमें उफान आते हैं

कई मीलों की गति से तूफान आते हैं

यह दिल जब किसी पर आ जाता है

तो इन्सां, जहाँ से, खुद आपसे खो जाता है

दिल है कि दीन दुनिया जानता नहीं

यह दिल ही तो है जो मानता नहीं

अगर दिल में गम हो तो मालामाल भी कंगाल है

दिल अगर खुश हो तो कंगाल भी मालामाल है

 

यह दिल बलशील और नटशील है

कल्पना के पंख बांधे दौड्ता मीलोंमील है

कभी उष्मित जोश से यह बल्लियों उछलता है

तो कभी हिमशीत हतोत्साह के पहाड़ से फिसलता है

कभी दिल साफ तो कभी काला दिल

कभी दिल शान्त तो कभी मतवाला दिल

भरी हैं खूबियाँ इसमे कि ये है हमारा दिल

बहुत कुछ कर सकता है फिर भी बेचारा दिल

खूब हो चुकी तारीफ दिल की क्या दिल को चाटूँ

या नापाक दिल को चाक करके रेवडियाँ बाटूँ

 

नहीं मालूम दिल में क्रोध दिल में कामनायेँ हैं

इसी दिल में कितने लोभ कितनी वासनायें हैं

दिल की कुटिलता को सरलता से जानना होगा

सब विवादों के पार्श्व में दिल ही है मानना होगा

 

इसी से सोचता हूँ कि दिल फ्रीजर में रख दूँ
नया क्या सोचता हूँ डीप- फ्रीजर में रख दूँ

उभयचर के लोभ से दिल को बचाने

नदी के पार कानन में छुपाने

मानवों का पूर्वज वृक्षों पर चढ़ा था

यही पंचतंत्र की कथाओं में पढ़ा था

 

अब कोइ डर  मगर से दिल को नहीं है

और कोइ खौफ दिल का दिल को नहीं है

छल कपट क्रोध लोभ जैसी बलाऍं

बसेरा कर रहीं दिल में कामनायें वासनायें

इन बलाओं से बुद्धि विवेक बचाना होगा

इसलिये दिल को फ्रीजर में छुपाना होगा

शरद कुमार श्रीवास्तव

3 टिप्पणियाँ

  1. इन बलाओं से बुद्धि विवेक बचाना होगा

    इसलिये दिल को फ्रीजर में छुपाना होगा

    बहुत खूब !!

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  2. dil ki baat to dil hi jaane par hum itna kahte hain ki yeh ek dil se nikli aur seedhe dil men jaane wali baut sunder rachna hai rachnakar kar ko itni sunder rachna dene ke liye hamari taraf se badhai aur sadhuvad

    जवाब देंहटाएं
  3. गंभीर विचार प्रकट करती हास्य रचना

    जवाब देंहटाएं

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