---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

निशान्त शर्मा का आलेख - ऐल्डर ऐब्यूज़ : बूढ़े माँ- बाप की दर्द भरी दास्ताँ

साझा करें:

ऐल्डर ऐब्यूज़ : बूढ़े माँ- बाप की दर्द भरी दास्ताँ तू आधार है माँ इस जीवन का, तुम अम्बर की छाया बने पिता । दोस्तों, हम सबके लिए जीवन की पहल...


ऐल्डर ऐब्यूज़ : बूढ़े माँ- बाप की दर्द भरी दास्ताँ

clip_image001

तू आधार है माँ इस जीवन का,
तुम अम्बर की छाया बने पिता


दोस्तों, हम सबके लिए जीवन की पहली पाठशाला माँ होती है और पिता वो जीवनदाता सूर्य, जिसकी धूप में जीवन का एक नन्हा सा पौधा पोषित होकर एक दिन सुदृढ़ और सुन्दर वृक्ष में परिणित हो जाता है। फिर ऐसा क्या हो जाता है कि एक दिन वही ज़ुबान उस माँ के लिए ज़हर उगलने लगती है,  जिसने कभी उसे पहला लफ्ज़ बोलना सिखाया था ? हम क्यों नहीं आगे बढ़ा पाते अपने हाथ, पिता के उन काँपते हाथों को थामने के लिए, जिन्होंने हमें कभी उँगली पकड़कर चलना सिखाया था ? जी हाँ, ज़िन्दगी के इन्हीं पलों का नाम है, *ऐल्डर ऐब्यूज़* ।


आज के दौर में इंसान को शायद सिर्फ  खुद से ही मतलब रह गया है । रिश्तों-नातों की तो बात ही क्या करॆं, अपने माँ- बाप तक से उसका रिश्ता बहुत कमज़ोर हो गया है, और कमज़ोर होते- होते ये कब टूट जाता है, पता ही नहीं चलता । अपने बच्चों को स्वार्थरहित प्रेम देने वाले माता-पिता उनसे उनके बेहतर भविष्य के अलावा और ज़्यादा कुछ नहीं माँगते । उनकी खुशी के लिये वो हर सम्भव प्रयास करते हैं,  ख़ुद को भूखा रखकर वो अपने बच्चों का पेट भरते हैं, लेकिन बदले में उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय और तिरस्कार से पूर्ण नज़र आता है । माँ-बाप के लिए उनका बच्चा आँखों का तारा होता है। उनके लिए उनके बच्चे से बढ़कर दुनिया की कोई दौलत नहीं होती।  माँ अगर बच्चे के  रोने से बेचैन हो जाती है तो पिता भी उसके लिए दिन और रात को एक कर, दुनिया की सारी खुशियों को उसके लिए खरीदने की कोशिश करता है। ऐसा करते वक्त उनके मन में तनिक भर भी ये बात नहीं आती कि आज जिसे वो पलकों पर बिठा कर रखते हैं, कल उसी की आँखों में वो तिनके  की तरह खटकने लगेंगे। घर में बूढ़े माँ-बाप जब अपने ही बच्चों की बेरुखी का शिकार होने लगें, तब इसे ऐल्डर ऐब्यूज़ का नाम दिया जाता है। जब बूढ़े माँ- बाप अपने ही घर के सदस्यों द्वारा शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किये जाने लगें, तब वे ऐल्डर ऐब्यूज़ के बेहद ख़ौफनाक मोड़ पर खड़े होते हैं।


एक समय ऐसा होता है, जब बच्चे माता-पिता की बातों को मानते हैं और उन्हें मान- सम्मान देते हैं, लेकिन समय के आगे बढ़ने के  साथ-साथ इन्हें माता-पिता की बातें नागवार गुज़रने लगती हैं, और फिर जन्म लेती है ऐल्डर ऐब्यूज़। जब एक बार ऐल्डर ऐब्यूज का सिलसिला शुरू हो जाये तो ये थमने का नाम नहीं लेता, बल्कि ये अमानवियता की हदें तक पार करने लगता है। तभी तो दुनिया- भर में बुज़ुर्गों को अपनों के होते हुए भी जीवन के आखिरी दिनों में वृद्धाश्रमों का सहारा लेना पड़ता है।
अब से कुछ समय पहले चलें, तो घर के बड़े- बुज़ुर्गों को बहुत मान- सम्मान दिया जाता था। अपने हर खास और आम फैसले में उन्हें शामिल किया जाता था, लेकिन अग़र नज़र डालें आज के परिदृश्य पर, तो हालात बेहद बदहाल दिखायी पड़ते हैं। आज बूढ़े माँ-बाप को युवा पीढ़ी पुराने कपड़ों की तरह अपनी जिंदगी से बेदखल कर देती है, उन्हें उनके हाल पर बेसहारा भटकने के लिये छोड़ दिया जाता है। ऐल्डर ऐब्यूज़ के इस बढ़ते प्लेग की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए वर्ष 2006 में *इन्टरनेश्नल नेटवर्क फॉर प्रीवेन्शन ऑफ ऐल्डर ऐब्यूज़* ने 15 जून को *वर्ल्ड ऐल्डर ऐब्य़ूज़ अवेयरनैस डे* के रूप में डिज़ाइन किया। सर्वेक्षण कहते हैं कि पूरॆ यूरोप में लगभग तीन लाख लोग ऐल्डर ऐब्यूज़ से प्रभावित हैं।


आज अकेले इंडिया में अनगिनत एन.जी.ओ. और ओल्ड ऐज होम्स, ऐल्डर ऐब्यूज़ की दिशा में काम कर रहे हैं, जो चीख-चीख कर इस बात का खुलासा करते हैं कि किस तरह अपनों की लापरवाही के कारण बुढ़ापे की कमज़ोर दीवारॆं भरभरा कर गिर जाने को मजबूर हैं।

माँ तेरी चरण- धूल सिर- माथे,
पिता तेरॆ बोल मुझे राह दिखाते।


दोस्तों, जब हम अपने माँ-बाप के आश्रित होते हैं तब तो हम उनसे अपनी हर एक बात शेयर करते हैं, अपनी हर एक प्रॉब्लम का साल्यूशन उनसे पूछते हैं, लेकिन जब हम सेल्फ डिपेन्डेन्ट होने लगते हैं तब हमारॆ और माँ-बाप के बीच में प्राइवेसी जैसा शब्द आ जाता है। जी हाँ, हम क्यों खड़ी कर देते हैं, अपने और अपनों के बीच प्राइवेसी की दीवार, जो माँ- बाप को भरॆ- पूरॆ परिवार में भी अकेलेपन का ऐहसास कराती है ?


ऐल्डर ऐब्यूज की शुरुआत होती है बूढ़े माता-पिता को नाम लेकर पुकारने और तू-तड़ाक बोलने से, क्योंकि उन्हें अपमानित करने का और घर छोड़ने के लिए मजबूर करने का ये तरीका बहुत आसान नज़र आता है, जिसे साइलेन्ट ऐब्यूज़ के नाम से जाना जाता है, लेकिन माता-पिता तो बरदाश्त का वो गहरा सागर होते हैं,  जिसमें उनके कलेजे के टुकड़े की ये तीखी पुकारें भी समा जाती हैं। माता-पिता को घर से बाहर निकालने की ये कोशिशें यहीं नहीं थमतीं, एक-एक पैसे की मोहताजगी देकर माता-पिता को नज़राना दिया जाता है, फाइनेनशियल ऐब्यूज़ का, जो उन्हें तड़प- तड़प कर जीने के लिए मजबूर कर देती है। जब बात फाइनेन्शियल ऐब्यूज से बनती दिखायी नहीं देती, तब माता-पिता को शारीरिक प्रताड़ना देना शुरू कर दी जाती है, जैसे माँ के ऊपर ज़रूरत से ज़्यादा घरॆलू काम-काज डालना और पिता को पल-पल बाज़ार के चक्कर कटवाना,  लेकिन माता-पिता करॆं तो क्या ? अपने बच्चों की खुशियों की ख़ातिर वो फिजिकल ऐब्यूज को भी हँसकर सहते रहते हैं । लेकिन सीमायें तो वहाँ टूट जाती हैं जब छोटी- छोटी बातों पर कहासुनी के साथ माता-पिता के साथ धक्का- मुक्की और मार-पीट तक की जाती है। अपने जीवन के इस मोड़ पर आकर माता-पिता इमोशनल ऐब्यूज़ के साये में तड़पने के लिए मजबूर हो जाते हैं ।
ऐल्डर ऐब्यूज़ का सबसे बदसूरत चेहरा तो तब सामने आता है, जब इतना सब कुछ सहते-सहते उन्हें खुद से नफरत पैदा होने लगती है, जिसको नाम दिया गया है, सेल्फ नेगलेक्ट ऐब्यूज़ का। सेल्फ नेगलेक्ट ऐब्यूज़ में माता-पिता की हालत पागलों जैसी हो जाती है, वो अपना ख़्याल रखना छोड़ देते हैं और हर एक दिन अपनी मौत का इन्तज़ार करने लगते हैं ।


कितनी शर्मनाक समस्या है ऐल्डर ऐब्यूज, एक माता-पिता अपने चार बेटों को हँसते-रोते, सुख-दुःख सहते पाल लेते हैं, उन्हें ज़िन्दगी जीने के क़ाबिल बना देते हैं, उन्हें उनके पैरों पर खड़ा कर देते हैं, लेकिन वही चार बेटे मिलकर भी अपने बूढ़े माँ-बाप का सहारा नहीं बन पाते, सहारा बनना तो दूर वो उन्हें दो वक्त की रोटी तक नहीं दे पाते । क्यों होता है ऐसा ? आखिर क्यों भोगना पड़ता है बूढ़े माँ-बाप को ऐल्डर ऐब्यूज का दर्द ?


अब से कुछ समय पहले के परिवारों की तस्वीरें देखें तो हमें पता चलता है कि कई सारॆ परिवार एक साथ मिलकर रहते थे। घर में माँ-बाप को एक खास दर्जा दिया जाता था। घर के सारॆ लोग अपने हर तरह के मामले में उनसे सलाह-मशवरा किया करते थे, लेकिन आज के समय में परिवारों की तस्वीरों में सदस्यों की संख्या बहुत सीमित दिखाई पड़ती है। ये तस्वीरें इस ओर स्पष्ट संकेत करती है कि बदलते समय के साथ-साथ इन्सान ने खुद को माडर्न बनाने के साथ ही अपने संस्कारों और विचारों को भी माडर्निटी के रंग में रंग दिया है। टुकड़ों में रहते परिवारों में माँ-बाप के अंतिम दिन टुकड़ों में ही कटते रहते हैं। आज के समय में अपनी पर्सनल बातों को माता-पिता से शेयर करना ज़रूरी नहीं समझा जाता। घरों में माता-पिता अपने बच्चों से अलग-थलग पड़े रहते हैं,  क्योंकि उनके बच्चों की थिंकिंग में माता-पिता पुराने ख़्यालात के होते हैं। कुल मिलाकर ऐल्डर ऐब्यूज़ के अनगिनत कारण हैं, लेकिन जो सबसे अहम कारण हैं, वो अपना निशाना समाज के अति-आधुनिकीकरण पर ही साधते हैं। ऐल्डर ऐब्यूज़ इस आधुनिक विकृत समाज की ही एक विकृत देन है।


दोस्तों, कैसा है हमारा ये माडर्न समाज जो बूढ़े माँ-बाप को एक ठुकरायी हुई चीज़ समझता है ? कैसा होता है वो बेटा जो अपनी माँ को दुःख देकर चैन से सोते वक्त ये भूल जाता है कि उसे चैन की नींद देने के लिए उसकी माँ ने न जाने कितनी रातें जागते गुज़ारी होंगी ? आपने शायद एक कहावत ज़रूर सुनी होगी कि *ग़र बोया बीज बबूल का तो फूल कहाँ से पावे * , ठीक इसी तरह अगर हम आज अपने माता-पिता को ऐल्डर ऐब्यूज़ के कगार पर लाकर खड़ा कर देते हैं तो कल इसके बहुत सारॆ भयंकर दुष्परिणाम हमारॆ सामने आने वाले हैं।


घर में साथ रह रहे माता-पिता घर की नींव होते हैं, अगर किसी भी वजह से ये नींव कमज़ोर हो जाये और इससे अपनी ज़मीन छूटने लगे तो इसके आधार पर बने घर को ढहने में ज़्यादा वक्त नहीं लगता। अपने बच्चों द्वारा प्रताड़ित किये जाने पर या बच्चों के खुद ही घर से निकाले जाने पर,  जब माता-पिता घर से दूर हो जाते हैं तो घर दुर्दशा का शिकार होने लगता है। जहाँ घर के छोटे- मोटे झगड़ों को माता-पिता पल-भर में सुलझा दिया करते थे, वहीं उनकी नामौजूदगी में ये समस्याएँ विकराल रूप धारण करने लगती हैं। इसके अलावा बात क रॆं बच्चों की तो वो घर में घटित हो रही हर एक घटना पर नज़र रखते हैं। वो घर में जो होता देखते हैं, वैसा ही सीखते भी हैं। इस कारण अग़र आगे चलकर हम भी ऐल्डर ऐब्यूज़ के शिकार हो जाते हैं तो इसमें चौकने वाली कोई बात नहीं होगी, जैसा व्यवहार हम आज अपने माता- पिता के साथ कर रहे हैं, कल हमारॆ बच्चे भी हमारॆ साथ वैसा ही व्यवहार करेंगे..... भई, आज हम जैसा बीज बोयेंगे, कल फसल भी तो वैसी ही काटेंगे.....


-निशान्त शर्मा
आगरा

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 2
  1. Rachana bahut sarahneeya hai.Badhai sweekar karen. Bujurga logon dwara apni swayam ki upeksha, sonch me boodhepan ka bhaav, samaj se kate kate rahna, maya moh se buri tarah jakadna kuchh mamlon me unki daineeya awastha ka kaaran hain.Bachchon ki majbooriyan nahin samajhna bachchon se badle ki bhawna rakhkar unse aseemit aashain rakhna bhi katipay kuchh. aur karan hain.

    जवाब देंहटाएं
  2. bahot bdiya nishant bhai....apne likhe huye aalekh or kavitaye hame pdate rehna ...thnx

    जवाब देंहटाएं
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

|कथा-कहानी_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|हास्य-व्यंग्य_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|आलेख_$type=two$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|संस्मरण_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|उपन्यास_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लोककथा_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4062,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3026,कहानी,2266,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,99,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,244,लघुकथा,1255,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,327,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2009,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,711,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,798,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,89,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,209,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: निशान्त शर्मा का आलेख - ऐल्डर ऐब्यूज़ : बूढ़े माँ- बाप की दर्द भरी दास्ताँ
निशान्त शर्मा का आलेख - ऐल्डर ऐब्यूज़ : बूढ़े माँ- बाप की दर्द भरी दास्ताँ
http://lh5.ggpht.com/-8V__KlY53jA/UaClVWoHI9I/AAAAAAAAU3s/8Xgi04UORcI/clip_image001%25255B3%25255D.png?imgmax=800
http://lh5.ggpht.com/-8V__KlY53jA/UaClVWoHI9I/AAAAAAAAU3s/8Xgi04UORcI/s72-c/clip_image001%25255B3%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2013/05/blog-post_5727.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2013/05/blog-post_5727.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ