प्रमोद भार्गव का आलेख - नास्‍तिकों की बढ़ती संख्‍या

SHARE:

नास्‍तिकों की बढ़ती संख्‍या प्रमोद भार्गव भगवान को मानने और न मानने वालों का भी एक विश्‍वस्‍तरीय सर्वे हुआ है। इस सूचकांक के अनुसार विश्‍व ...

नास्‍तिकों की बढ़ती संख्‍या

प्रमोद भार्गव

भगवान को मानने और न मानने वालों का भी एक विश्‍वस्‍तरीय सर्वे हुआ है। इस सूचकांक के अनुसार विश्‍व में नास्‍तिकों का औसत 13 प्रतिशत है। 57 देशों के 51 हजार लोगों से की गई बातचीत के आधार पर नास्‍तिकों की सबसे ज्‍यादा 50 प्रतिशत संख्‍या चीन में है। प्रत्‍येक देश में लगभग 1000 स्‍त्री-पुरुषों से बात की गई है। भारत में भी नास्‍तिकों की संख्‍या बढ़ी है। इसके उलट पाकिस्‍तान में आस्‍तिकों की संख्‍या 6 प्रतिशत बढ़ी है। लेकिन अरबों की आबादी वाले देशों में महज एक हजार लोगों की बातचीत के आधार पर एकाएक यह कैसे मान लिया जाए कि इन देशों में नास्‍तिकों अथवा आस्‍तिकों की संख्‍या परिवर्तित हो रही है ?

आस्‍तिक और नास्‍तिकवाद के ताजा सूचकांक के मुताबिक इस तरह के 2005 में हुए सर्वे में 87 प्रतिशत भारतीयों ने बताया था कि वे धार्मिक हैं और ईश्‍वर में विश्‍वास रखते हैं। किंतु 2013 में यह संख्‍या 6 प्रतिशत घट कर 81 प्रतिशत रह गई। मसलन 19 प्रतिशत लोगों का भगवान से भरोसा उठ गया है। दुनिया में नास्‍तिकों का औसत आंकड़ा 2005 में चार फीसदी था, जो गिरकर अब तीन प्रतिशत पर आ गया है। पोप फ्रांसिस के देश अर्जेंटीना में खुद को धार्मिक कहने वालों की संख्‍या आठ प्रतिशत कम हुई है। इसी तरह खुद को धार्मिक बताने वालों की संख्‍या में दक्षिण अफ्रीका में 19, अमेरिका में 13 स्‍विटजरलैंड और फं्रास में 21 तथा वियतनाम में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है।

नास्‍तिक अथवा आस्‍तिकों की संख्‍या घटने-बढ़ने से देशों की सांस्‍कृतिक अस्‍मिताओं पर कोई ज्‍यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है। क्‍योंकि वर्तमान परिदृश्‍य में दुनिया की हकीकत यह है कि सहिष्‍णु शिक्षा के विस्‍तार और आधुनिकता के बावजूद धार्मिक कट्‌टरपन बढ़ रहा है। धार्मिक स्‍वतंत्रता पर हमले हो रहे हैं। यह कट्‌टरता इस्‍लामिक देशों में कुछ ज्‍यादा ही देखने में आ रही हैं। कट्‌टरपंथी ताकतें अपने धर्म को ही सर्वश्रेष्‍ठ मानकर भिन्‍न धर्मावलंबियों को दबाकर धर्म परिवर्तन तक के लिए मजबूर करती रही हैं। पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश में अल्‍पसंख्‍यक हिंदुओं के साथ यही हो रहा है। कश्‍मीर क्षेत्र में मुस्‍लिमों का जनसंख्‍यात्‍मक घनत्‍व बढ़ जाने से करीब साढे़-चार लाख कश्‍मीरी हिंदुओं को अपने पुश्‍तैनी घरों से खदेड़ दिया गया। पाकिस्‍तान में हालात इतने बद्‌तर हैं कि वहां उदारता, सहिष्‍णुता और असहमतियों की आवाजों को कट्‌टरपंथ ताकतें हमेशा के लिए बंद कर देती हैं। यहां के महजबी कट्‌टरपंथियों ने कुछ साल पहले अल्‍पसंख्‍यक मामलों के केंद्रीय मंत्री शहबाज भट्‌टी को पाकिस्‍तान के विवादास्‍पद ईशनिंदा कानून में बदलाव की मांग करने पर मौत के घाट उतार दिया था। शहबाज भट्‌टी कैथोलिक ईसाई थे। यह सीधे-सीधे अभिव्‍यक्‍ति की आजादी पर हमला था। जनरल जिया उल हक की हुकूमत के समय बने इस अमानवीय कानून के तहत कुरआन शरीफ, मजहब-ए-इस्‍लाम और पैंगबर हजरत मोहम्‍मद व अन्‍य धार्मिक शक्‍तियों के बारे में कोई भी विपरीत टिप्‍पणी करने पर मौत की सजा सुनाई जा सकती है। पांच बच्‍चों की 45 वर्षीय मां असिमा बीबी को इस कठोर कानून के तहत मौत की सजा हुई भी थी। मलाला यूसुफ पर तो महज इसलिए आतंकवादी हमला हुआ था, क्‍योंकि वह स्‍त्री शिक्षा की मुहिम चला रही थी। ईशनिंदा कानून का सबसे ज्‍यादा शिकार अल्‍पसंख्‍यक ईसाई होते हैं। दरअसल, धर्मांध ताकतों ने ईशनिंदा कानून को उदारवादियों को निपटाने का हथियार बना लिया है। ऐसी वजहों के चलते यहां अहमदिया और शिया - सुन्‍नी मुसलमानों के बीच विवाद चलता रहता है। अफगानिस्‍तान के कबाइली इलाकों में कट्‌टरपंथी तालिबान अल्‍पसंख्‍यक सिखों को भयभीत करता रहता है। तालिबानियों ने तोपों से बामियान की चट्‌टनों पर उकेरी गईं बौद्ध प्रतिमाओं को उड़ा दिया था। यहां शियाओं की मस्‍जिदों और पीर-फकीरों की मजारों पर भी हमले होते रहते हैं। जाहिर है, यदि पाकिस्‍तान में आस्‍तिकों की संख्‍या बढ़ रही है तो उसकी एक वजह ईशनिंदा कानून का मनौवैज्ञानिक प्रभाव भी है।

चीन में 50 प्रतिशत नागरिकों का नास्‍तिक होना इस बात की तसदीक है कि नास्‍तिकाता कोई गुनाह नहीं है। क्‍योंकि चीन लगातार प्रगति कर रहा है। वहां की आर्थिक और औद्योगिक विकास दरें उंचाइयों पर हैं। अमेरिका के बाद अब चीन ही दुनिया की बड़ी महाशक्‍ति है। जाहिर है यदि नास्‍तिक होने के बावजूद किसी देश के नागरिक ईमानदार और कर्तव्‍यनिष्‍ठ हैं तो यह नास्‍तिकता देश के राष्‍टीय हितों के लिए लाभकारी ही है। बावजूद चीन में नस्‍लभेद चरम पर है। तिब्‍बतियों के साथ अमानवीय अत्‍याचारों का सिलसिला जारी है। चीन तिब्‍बती इलाकों में बड़ी संख्‍या में सेना भेजकर नस्‍ल बदलने के उपायों में लगा है।

यदि विकसित देशों की बात करें तो वहां केवल आर्थिक और भौतिक संपन्‍नता को ही विकास का मूल आधार माना जा रहा है। जबकि विकास का आधार चहुंमुखी होना चाहिए। सामाजिक, धार्मिक और शैक्षिक स्‍तर पर भी व्‍यक्‍ति की मानसिकता विकसित होनी चाहिए। पश्‍चिमी देशों में अमेरिका, ब्रिटेन और आस्‍टेलिया विकसित देश हैं, किंतु नास्‍तिकों की संख्‍या बढ़ने के बावजूद, यहां रंगभेद और धर्मभेद के आधार पर वैमन्‍स्‍यता बढ़ रही है। अमेरिका और ब्रिटेन में भारतीय सिखों पर हमले हो रहे हैं, जबकि आस्‍टेलिया में उच्‍च शिक्षा लेने गए भारतीय और पाकिस्‍तानी छात्रों में हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। धर्म और नस्‍ल के ऐसे सवाल हैं, जो जन्‍मजात संस्‍कारों और भावनाओं से जुड़े होते हैं। इन मसलों पर सभी धर्माें के लोगों की भावनाओं का सम्‍मान होना ही चाहिए।

कुछ समय पहले धार्मिेक स्‍वतंत्रता पर निगरानी रखने वाली अंतरराष्‍टीय समिति के एक अध्‍ययन की रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट में माना गया था कि धार्मिक स्‍वतंत्रता के मामले में अपेक्षाकृत भारत अब्‍बल है। क्‍योंकि यहां के लोग उदार हैं। सभी अल्‍पसंख्‍यक समुदायों के लोग बिना किसी भय के अपने धर्म का पालन कर सकते हैं। उनकी धार्मिक स्‍वतंत्रता पर किसी भी किश्‍म की कानूनी पाबंदी नहीं है। हालांकि अपवादस्‍वरुप धर्म के नाम पर दंगे हो जाते हैं, लेकिन इनकी पृष्‍ठभूमि में धार्मिक स्‍वतंत्रता को दबाने का उद्‌देश्‍य नहीं होता। भारत की धर्मनिरपेक्षता से दुनिया सीख ले सकती है, जहां बहुधर्मी, बहुसंस्‍कृति और बहु जातीय समाज अपनी-अपनी सांस्‍कृतिक विरासतों को साझा करते हुए साथ रह रहे हैं।

दरअसल इसका मूल कारण यह है कि भारतीय दर्शन के इतिहास में भौतिकवाद और आदर्शवाद दो परस्‍पर विरोधी विचारधाराएं एक साथ चली हैं। चार्वाक नास्‍तिक दर्शन का प्रबल प्रणेता था। चार्वाक ने बौद्धिक विकास के नए रास्‍ते खोले। उसने अनीश्‍वरवाद बनाम प्रत्‍यक्षवाद को महत्‍ता दी। चार्वाक ने ही मुस्‍तैदी से कहा कि पृथ्‍वी, जल, अग्‍नि और वायु के अद्‌भुत समन्‍वय व संयोग से ही मनुष्‍य व अन्‍य जीव तथा वनस्‍पतियां अस्‍तित्‍व में आए हैं। जीवों में चेतना इन्‍हीं मौलिक तत्‍वों के परस्‍पर संयोग से प्रतिक्रया स्‍वरुप उत्‍पन्‍न हुई है। विज्ञान भी मानता है कि संपूर्ण सृष्‍टि और उनके अनेक रुपों से उत्‍पन्‍न उर्जा का ही प्रतिफल है। जीवधारियों की रचना में अभौतिक सत्‍ता की कोई भूमिका नहीं है। चेतनाहीन पदार्थों से ही विचित्र व जटिल प्राणी जगत की रचना संभव हुई।

चार्वाक के सिद्धांत को ही ब्रिटिश वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग ने मान्‍यता दी है। हॉकिंग ने कहा है कि ईश्‍वर ने ब्रहमांड की रचना नहीं की है। इसे समझने के लिए उन्‍होंने महामशीन ‘बिग-बैंग' में महाविस्‍फोट भी किया था। इसके जरिए उन्‍होंने ब्रहम्‍मांड की उत्‍पत्‍ति के संदर्भ में भौतिक विज्ञान के गुरुत्‍वाकर्षण सिद्धांत को मान्‍यता दी है। इस सिद्धांत के अनुसार लगभग बारह से चौदह अरब वर्ष पहले संपूर्ण ब्रहम्‍मांड एक परमाणविक इकाई के रुप में था। इससे पहले क्‍या था, यह कोई नहीं जानता। क्‍योंकि उस समय मानवीय समय और स्‍थान जैसी कोई वस्‍तु अस्‍तित्‍व में नहीं थीं, समस्‍त भौतिक पदार्थ और उर्जा एक बिंदु में सिमटे थे। फिर इस बिंदु ने फैलाना शुरु किया। नतीजतन आरंभिक ब्रहम्‍मांड के कण, समूचे अंतरिक्ष में फैल गए और एक-दूसरे दूर भागने लगे। यह उर्जा इतनी अधिक थी कि आज तक ब्रहम्‍मांड विस्‍तृत हो रहा है। सारी भौतिक मान्‍यताएं इस एक घटना से परिभाषित होती हैं, जिसे बिग-बैंग सिद्धांत कहते हैं।

दर्शन के विभिन्‍न मतों के ही कारण भारत में भगवान को नहीं मानना अपराध नहीं माना गया। इस कारण से किसी को फांसी नहीं दी गई। जैसा कि पाकिस्‍तान और अन्‍य इस्‍लामिक देशों में देखने में आता रहता है। इसलिए भारत या अन्‍य देशों में नास्‍तिक बढ़ रहे हैं, तो इस स्‍थिति को अथवा नास्‍तिकों को बुरी नजर से देखने की जरुरत नहीं है। क्‍योंकि नास्‍तिक दर्शन या नास्‍तिक व्‍यक्‍ति परलोक की अलौकिक शक्‍तियों से कहीं ज्‍यादा इसी लोक को महत्‍व देता है। कर्मकाण्‍ड से दूर रहता है। लेकिन इस दर्शन में उन्‍मुक्‍त भोग की जो परिकल्‍पना हैं, वह सामाजिक व्‍यवहार के अनुकूल नहीं है

--

प्रमोद भार्गव

शब्‍दार्थ 49,श्रीराम कॉलोनी

शिवपुरी मप्र

मो 09425488224

फोन 07492 232007

लेखक प्रिंट और इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया से जुड़े वरिष्‍ठ पत्रकार है।

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्रमोद भार्गव का आलेख - नास्‍तिकों की बढ़ती संख्‍या
प्रमोद भार्गव का आलेख - नास्‍तिकों की बढ़ती संख्‍या
http://lh3.ggpht.com/-4JvlpQzn_2A/UFl1qOVZ8XI/AAAAAAAAOZQ/rBYRWPx5A_g/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
http://lh3.ggpht.com/-4JvlpQzn_2A/UFl1qOVZ8XI/AAAAAAAAOZQ/rBYRWPx5A_g/s72-c/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2013/06/blog-post_4.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2013/06/blog-post_4.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content