पद्मा मिश्रा का आलेख - कितने आजाद महिलाओं के सपने

SHARE:

-- -- कितने आजाद महिलाओं के सपने !-- [कल -आज -और कल]---- पद्मा मिश्रा ''दहलीज पर खडी औरत क्या सोचती है ?-नम आँखों से निहारती ,आका...


-- -- कितने आजाद महिलाओं के सपने !--
[कल -आज -और कल]----

पद्मा मिश्रा

''दहलीज पर खडी औरत क्या सोचती है ?-नम आँखों से निहारती ,आकाश का कोना -कोना -उड़ने को आकुल ,व्याकुल --पंख तौलती है -तलाशती है राहें --मुक्ति के द्वार की ''


मुक्ति के द्वार की तलाश आज भी जारी है -वह कभी मुक्त नहीं हो सकी -रुढियों से-,परम्पराओं से ,-सामाजिक विसंगतियों से ,अपनी ही कारा में कैद ,भारत की नारी आज भी अपने जीवन संघर्षों की लड़ाई लड़ रही है --सदियों की गुलामी से उत्पीडित -प्रताड़ित ,रुढियों की श्रृंखलाओं में बंदी -उसकी आँखों ने एक -सपना जरुर देखा था --- जब देश आजाद होगा-अपनी धरती  ,अपना आकाश अपने सामाजिक दायरों में वह भी सम्मानित होगी,--उसके भी सपनों ,उम्मीदों को नए पंख मिलेंगे,पर उनका यह सपना कभी साकार नहीं हो पाया।

अपने अधूरे सपनों के सच होने की उम्मीद लिए महिलाएं देश की स्वतंत्रता के संघर्ष में भी भागीदार बन जूझती रहीं-सामाजिक ,राजनीतिक ,चुनौतियों से ,-अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए -बलिवेदी पर चढ़ मृत्यु को भी गले लगाया पर हतभाग्य !--देश को आजादी तो मिली पर ''राजनीतिक आजादी'' ,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भी मिला ,पर अधूरा ,--नियमों -कानूनों,में लिपटा हुआ - -हजारों लाखों सपनों के बीच नारी मुक्ति का सपना भी सच होने की आशा जागी थी ,शांति घोष ,दुर्गा भाभी ,अजीजन बाई ,इंदिरा ,कमला नेहरु ,जैसे अनगिनत नाम जिनमे शामिल थे ---पर नारी मुक्ति के सपने कभी साकार नहीं हो पाए ,-उनकी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया  ,वे पहले भी सामाजिक , वर्जनाओं के भंवर में कैद थीं -आज भी हैं  ,पहले सती प्रथा के नाम पर पति के साथ जला दिए जाने की क्रूर परंपरा थी  , आज भी महिलाएं जलाई जाती हैं -कभी दहेज़ के नाम पर , तो कभी पुरुष प्रधान सामाजिक प्रताड़ना का शिकार होकर।

.बालिका - विवाह की अमानवीय प्रथा में कितनी ही नन्हीं ,मासूम बालिकाएं बलिदान हो जाती थीं --आज भी अबोध ,मासूम ,नाबालिग बच्चियां दुष्कर्म और दुर्व्यवहार का शिकार होती हैं --बेमौत मारी जाती हैं ,भ्रूण हत्याएं भी इसी क्रूर , नृशंस ,गुलाम मानसिकता का सजीव उदाहरण हैं। कभी महिलाओंने सोचा था की जब उन्हें आजादी मिलेगी उनकी भी आवाज सुनी जाएगी  ,वे भी विकास की मुख्य धारा में शामिल होकर अपनी मंजिल प्राप्त कर पाएंगीं ,पर आज वे अपने ही देश में सुरक्षित नहीं हैं ,--पहले भी घर व् समाज की चार दीवारों में आकुल -व्याकुल छटपटाती थी ं --और आज भी स्वतंत्रता के 66 वर्षों के बाद भी --वे चार दीवारों में बंदी रहने को विवश हैं क्योंकि बाहर की दुनियां उनके लिए निरापद नहीं है। यह कैसी बिडम्बना है !-कैसी स्वतंत्रता है !-जो मिल कर भी कभी फलीभूत नहीं हो सकी ----


जो रही भाल का तिलक उसे ,
देते फांसी के फंदे क्यों ?
जो घर आंगन का मान बनी ,
उससे नफरत के धंधे क्यों ?
फिर क्यों दहेज़ की बेदी पर ,
बेटियां जलाई जाती है ,
मुट्ठी भर सिक्कों की खातिर,
छत से फिंकवाई जाती हैं ?


आज महिलाएं शिक्षित हैं -जागरूक हैं -सपने देखती हैं तो उन्हें सच करना भी जानती हैं लेकिन कुछ मुट्ठी भर रेत से घरौंदे नहीं बनाये जा सकते,---देश की स्वतंत्रता का सूर्य जब प्रज्वलित हुआ --आशा की किरणें महिलाओं के दामन में भी झिलमिलाई थीं परन्तु उसी आंचल को दागदार बनते देर नहीं लगी,-वे अपने ही परिवेश ,समाज ,घर की सीमाओं में शोषित होती चली गईं -यह मानते हुए भी की -वे माँ हैं -बहन हैं -बेटी हैं--कितने रूपों और रिश्तों में जीती हैं वह -त्याग का प्रतिरूप बन कर,  पर उन्ही रिश्तों ने उसे कलंकित भी किया --यह हमारे आजाद देश की विकृत मानसिकता का घृणित परिणाम है

दामिनी, गुडिया जैसी मासूमो का बलिदान देश भूला नहीं है -अगर उनके विरोध में कहीं कोई दबी आवाज उभरी भी तो कुछ दिनों तक प्रेस में ,मीडिया और मुट्ठी भर बुद्धिजीवियों के बीच विमर्श का मुद्दा बनी बेटियाँ आंसू बहाने के सिवाय कुछ नहीं कर पातीं. और सरकार कुछ मुआवजा या दोषियों को दो तीन महीनो की सजा दे अपने कर्तव्य से मुक्त हो जाती है. ....और फिर एक नई यातनाकी कहानी का जन्म होता है. आखिर कब तक?..और कितनी बेटियों की बलि चढ़ेगी?क्या हमारा समाज कभी अपनी सोच बदलेगा?..बेटियाँ जो किसी का अभिमान ,किसी के माथे का तिलक बनगौरव व् साहस का नया इतिहास लिख सकती हैं ,उन्हें प्रताड़नाओं के दौर से कब तक गुजरना पडेगा. उन्हें ईमानदारी ,और दृढ़ संकल्पों के साथ शिक्षित और जागरुक बनाने की ठोस कोशिश क्यों नहीं होती?कितने ही बलिदानों ,संघर्षों ,से प्राप्त आजादी को हमने कुछ सत्ता लोलुपों के हाथ का खिलौना बना दिया  ।

वे देश के भविष्य से खेलते रहे -संविधानो -कानूनों ,न्याय और प्रगति के नाम पर आधी आबादी के भाग्य का फैसला सुनाते रहे ,परदे के पीछे से घिनौना खेल खेलते रहे ---पूरा देश देखता रह गया --न्याय की लम्बी लड़ाई और दोषियों को सजा दिलाने के लिए सविधान के पृष्ठ खंगाले जातेरहे -- महिलाओं ने खुद को ठगा सा महसूस किया लेकिन उन नर पिशाचों का ह्रदय न पसीजना था न पसीजा,- - क्या हम आदिम युग की और बढ़ रहे हैं ?..आजादी मिले वर्षों बीत गए -समय बदला --युग बदले --कामना तो यही की थी मनुष्यता के पक्षधरों से --उनकी सोच .विवेक ,बुद्धि का विकास होगा --मानवता के नये आयाम स्थापित होंगे ..शिक्षा होगी तो अन्तश्चेतना का भी उत्कर्ष होगा ...पर कितना दुःख होता है ये पंक्तियाँ लिखते हुए की परिवर्तनों के दौर से गुजर कर भी ---शिक्षित होते हुए भी हमने क्रूरता -संवेदना और नृशंसता की सारी वर्जनाएं --सीमाएं तोड़ दी हैं --महिलाओं के साथ पशुओं जैसा आचरण करने वाले जरा अपनी भावी पीढ़ी के विषय में भी सोचें --उनका कल क्या होगा ?...उनकी बहू बेटियां भी यदि इन दुष्कृत्यों का शिकार हुईं तो उनके आंसुओं का वे क्या जवाब देंगे ,,हर महिला माँ है ,बेटी है ,--बस एक बार सोच कर देखें।

हम आवाज उठाते रहे -जुल्म के खिलाफ -नारी अस्मिता के लिए --पर कहाँ खो हो जाती हैं वे आवाजें ?..सत्ता बहरी है या समाज ?कहाँ जाएँ महिलाएं -बेटियां ,!-क्या एक बार फिर विध्वंशकारी क्रांति की प्रतीक्षा है ,,समाज को ...जब सब कुछ नष्ट भ्रष्ट हो केवल मौन ही शेष रह जायेगा !..पहले विदेशियों ,अंग्रेजों से संघर्ष था ,,पर आज अपनों से है,--अपनों से- अपनों का यह युद्ध ज्यादा कठिन है ,शक्ति की नियंता रही है नारी. जावन के संघर्षों में आज भी भारतीय नारी ने हार नहीं मानी है. अपनी प्रगति के रास्ते खुद तलाशे हैं, भारतीय नारी ने सपने भी देखें हैं तो अपने नीद की सुख छाँव में ,अपनों के बीच न की उसे तोड़ कर, विच्छिन्न कर ,वही हमारी संस्कृति की पहचान है. यदि वही पुन्य सलिला नारी हमारे समाज में पद दलित होती है तो यह लज्जाजनक और हमारी संस्कृति का अपमान है. और एक पददलित संस्कृति कभी किसी समाज को विकास का मार्ग नहीं दिखा सकती. हमें अपनी सोच को उदार बनाना होगा.,दहेज़,हत्या, भ्रूण ह्त्या जैसी बुराईयों को जड़ से मिटा कर एक नया आसमान बनाना होगा. जो हमें सुख की छाँह दे सके।


आज के सामाजिक परिवेश और पुराने ,रुढियों में जकड़े गुलाम मानसिकता वाले चंद मठाधीशों के बीच की सामाजिक स्थिति में कोई विशेष अंतर नहीं है, बस संघर्ष के दायरे बदल गए हैं,अब वह घर आँगन से निकल कर विभिन्न क्षेत्रों, महत्वाकांक्षाओं ,बौद्धिक धरातलों तक फ़ैल गया है, चुनौतियां बड़ी हैं ,पीढ़ियों की सोच को बदलने के लिए बहुत कुछ अभी किया जाना ,लिखा जाना बाकी है, प्रयास करते रहना है क़ि हम उनके साथ न्याय कर सकें,..आजादी के वास्तविक अर्थ को समझने की जरूरत है ,,आजादी सबके हित में हो ,समान ,वर्ग,लिंग,ज़ाति की विभिन्नताओं से परे हो .--लेकिन महिलाओं की आजादी का अर्थ उन्मुक्तता नहीं , बल्कि व्यक्तित्व के विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना हो तभी वह अपना आसमान खुद बना पायेगी।

हम सभी जानते हैं कि जीवन के अरण्य में नारी शीतल सुखद मलय बयार है जो संघर्षों, मुश्किलों ,पीड़ा व् वेदना के अनगिनत थपेड़े सह कर भी जीती है तो परिवार के लिए ,घर आंगन की मंगल कामना में ही जीवन का सार समझती है --वह कभी अलग नहीं होती अपनी पारिवारिक धुरी से ..पर जब चुनौतियां सामने हों तो वह न हारती है न झुकती है ...पर जब टूटी है तो प्रलय ही आई है ,,वह ममता है, मान है ,श्रृंगार है ,प्रेम है, क्या क्या न कहें --बस थोडा सा स्नेह दें और अमृत की मिठास जीवन को सुरभित बना जाएगी ,हम नारी के सम्मान की रक्षा करें तभी हमारी विश्व प्रसिद्ध संस्कृति जीवित रह पायेगी. -
----पद्मा मिश्रा

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: पद्मा मिश्रा का आलेख - कितने आजाद महिलाओं के सपने
पद्मा मिश्रा का आलेख - कितने आजाद महिलाओं के सपने
http://lh6.ggpht.com/-fd-yaOAswc8/UaCSFB9BSTI/AAAAAAAAU3M/tZHNz8K9q9c/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
http://lh6.ggpht.com/-fd-yaOAswc8/UaCSFB9BSTI/AAAAAAAAU3M/tZHNz8K9q9c/s72-c/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2013/08/blog-post_6649.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2013/08/blog-post_6649.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content