प्रमोद यादव की कहानी - एक ताज और...

SHARE:

एक ताज और.../ प्रमोद यादव          न मालूम जिंदगी के हर मोड पर मेरे साथ ऐसा क्यों होता है कि सुख और दुःख..खुशी और गम दोनो...



एक ताज और.../ प्रमोद यादव

  



      न मालूम जिंदगी के हर मोड पर मेरे साथ ऐसा क्यों होता है कि सुख और दुःख..खुशी और गम दोनों एक साथ ही मेरे पहलू में आते हैं. विवशता यह कि न मैं खुलकर रो पाता हूँ..न चाहकर हँस पाता हूँ. सुख-दुःख की मिलीजुली अनुभूतियों से न जाने मन कैसे विचित्र सा हो जाता है.

आज रमी को उसके घरवाले लिवा ले गए. रमी...मेरी दुल्हन...तीन दिन पहले ही तो मेरी-उसकी शादी हुयी है. इस शादी में न ही मेरी रजा थी और ना ही कोई इनकार. अगर इस शादी से इनकार न कर पाने का कोई कारण था...तो वह थी मेरी बूढी माँ. जिसे झुकी कमर से घर के काम-काज करते देख दिल पसीज जाता था. इसके अलावा एक ठोस, महत्वपूर्ण और मूल कारण जो था- वह थी-निकी...उसकी वादाखिलाफी,उसकी बेकार की दी गयी ढेरों तसल्लियाँ.

“निकी”... एक नाम..जिसके साथ मैंने कभी जीने-मरने की कसमें खाई थी. लेकिन अजीब त्रासदी कि न उसके संग मैं कभी जी सका ..और न मर सका. बड़ी खूबसूरत, मासूम, सीधी-सादी, पाक और उदार ह्रदय की लड़की थी-निकी. दस साल पहले उससे परिचय हुआ था.यह सिलसिला उसकी शादी तक चला. इस बीच चार साल में उसे अच्छी तरह देखा..परखा..जाना..और महसूस किया कि ‘आदर्श लड़की’ की परिभाषा शायद निकी ही है. 

सभी स्थितियां अनुकूल होते हुए भी मैं निकी से शादी न कर सका. जात-पांत के बंधन तो मैं तोड़ भी देता पर अपनी मुफलिसी को नजरअंदाज करना..मेरे लिए मुमकिन न था. निकी एक अमीर घराने से थी.फिर भी मुझसे शादी का हौसला रखती,.मुझे विश्वास था मेरी मुफलिसी से वह निर्वाह कर लेगी लेकिन न मालुम क्यों मुझे यह गवारा नहीं था. निकी रोती रही..बिलखती रही..और मैं दूर होता गया..दूर...बहुत दूर.....अंततः वह बुरी तरह टूट गयी...निराशाओं से घिर गयी. एक दिन बोली- ‘ठीक है अज्जू...दिल टूटने की आवाज सुनने से शायद तुम घबरा रहे हो...लेकिन मत घबराओ..क्या मेरा दिल सिर्फ मेरा ही है ? तुम्हारा कुछ भी नहीं ? तुम्हे.. तुमसे ज्यादा मैं जानती हूँ..इतने सारे दर्द ..उस पर मेरे प्यार का बोझ...मेरी यादें लिए तुम क्या ख़ाक जियोगे अज्जू ? फिर भी तुम चाहते हो कि मेरी शादी किसी और से हो जाए...तो तुम्हारी मर्जी..लेकिन क्या तब तक साथ नहीं दोगे ? ‘

और तब मैंने उसकी शादी तक उसे साथ देने का वादा बड़े ही बेमन से किया..एक भयावह सन्नाटा छोड़ निकी चली गयी. यादों को मैं कुचलता रहा..और यादें शिद्दत के साथ सिर उठाती रही. फिर धीरे-धीरे एक सामान्य जिंदगी जीने लगा..छह साल कैसे बीते, पता न चला. इस बीच न कभी निकी मिली न ही उसकी कोई खबर...बस इतनी जानकारी मिली कि उसके दो प्यारे-प्यारे बच्चे हैं. 

फिर अचानक बरसों बाद आगरे के ताजमहल में निकी से भेंट हुई.वह अनोखी रात मैं कभी भूल नहीं सकता....

....शरद पूर्णिमा की रात थी...आगरा ट्रांसफर हुए सात ही महीने हुए थे..ताजमहल की भव्यता देखने उस रात मैं भी गया था. प्रवेश-द्वार पर भीड़ जमा देख उत्सुकतावश मैं भीड़ में घुसा तो देखा- कोई आदमी बेहोश सा पड़ा था...बनारसी साडी में लिपटी एक संभ्रांत महिला उस पर झुकी उसे होश में लाने की कोशिश कर रही थी.करीब ही दो छोटे-छोटे बच्चे भीड़ से आतंकित सहमें खड़े थे. ज्योंही उस महिला ने भीड़ की ओर मुखातिब हो किसी डाक्टर के विषय में पूछते मदद मांगी...मैं स्तब्ध रह गया..आँखों  को विश्वास नहीं हुआ..मुंह से निकल ही गया- ‘ निकी...तुम...’ वह भी जोरों से चौंकी- ‘ अज्जू....तुम..’

यह समझते देर न लगी कि बेहोश व्यक्ति उसका ‘हसबेंड’ इन्दर ही होगा. 

‘ दो कदम दूर ही एक डाक्टर है..मैं अभी लेकर आया..’ इतना कह मैं भीड़ चीरकर  बाहर निकल आया. डाक्टर लेकर लौटा तो तीन-चार मिनटों में ही वह होश में आ गया. कार चलाने की स्थिति में वह था नहीं अतः मैं ही ड्राइव करते उन्हें होटल ले गया जहाँ वे ठहरे थे. उसके सामान्य होते ही , निकी की मानसिकता को ध्यान में रखते हुए मैंने ही अपना परिचय दिया- ‘अजय कहते हैं मुझे...पिछले सात महीनों से यहाँ नौकरी पर हूँ..मैं भी उसी शहर से हूँ जहाँ से आपकी ‘वाइफ’ है..निकी मेरी छोटी बहन की सहेली थी ..प्रायः मेरे घर इनका आना-जाना होता था..इसलिए परिचित था...लेकिन शादी के बाद कभी घर नहीं आई थी....आज अचानक यहाँ देखा तो....’

मेरे सीधे-सपाट परिचय से वह संतुष्ट हुआ और इस आकस्मिक सहयोग के लिए आभार माना. बहुत ही जल्द इन्दर घुल-मिल गया. इस छोटी सी मुलाक़ात में लगा कि वह अच्छे व्यक्तित्व का मालिक है. दोनों बच्चे भी जल्द ही हिल गए.इस बीच निकी अपने आपको व्यस्त रखने की असफल कोशिश करती रही. चाहकर भी वह मुझसे बोल नहीं पाई.बातों ही बातों में मालुम हुआ कि दूसरे दिन ही उनका दिल्ली जाने का कार्यक्रम है तो मैंने औपचारिकता जताते एक दिन और रुकने का आग्रह किया और अपने क्वार्टर में चलने का अनुरोध किया . पहले तो इन्दर इनकार करता रहा फिर एकाएक कुछ सोच कर बोला- ‘ ठीक है अजय...कल दोपहर यहाँ के एक फर्म ने पेमेंट का वादा किया है..कल आपके यहाँ का प्रोग्राम फिक्स ...’ 

दूसरे दिन मालूम हुआ कि इन्दर एक आकर्षक व्यक्ति ही नहीं बल्कि एक सफल ‘बिजनेसमैन’ भी है. सुबह-सुबह ही निकी व बच्चों के साथ पहुँच गया और एक कप चाय पी अपने काम के सिलसिले में जो निकला तो कई घंटों बाद लौटा. उन घंटों में निकी के साथ उस दिन जो बातें हुयी,वह आज भी मुझे अक्षरशः याद है. उस दिन निकी मुझे समझाती रही- ‘ अज्जू...तुम्हे शादी के लिए कहूँगी तो तुम कहोगे ...सभी लडकियां अपनी शादी के बाद लड़कों से यही कहती है..पर ऐसी बात नहीं है..और ना ही मेरी इस जिद्द से तुम यह समझना कि शादी कोई मजे की चीज होती है...और इसका तात्पर्य यह भी मत लेना कि मैं अपने वैवाहिक जीवन से दुखी हूँ..विवाह तो एक सामाजिकता है अज्जू...कब तक इससे दूर भागोगे ?.. तुमने कभी मेरी कोई बात नहीं मानी..मेरी हर इच्छा,हर सपने को तुमने रौंदा..मेरे बनाये हर ताजमहल से मुझे निराशा ही मिली..आज मैं अंतिम बार एक ताज और गढना चाहती हूँ...अपने लिए नहीं..केवल तुम्हारे लिए..हाँ अज्जू.. तुम्हारा यह दृढ निश्चय कि आजीवन अविवाहित रहोगे, ठीक नहीं है तुम्हारी हर पसंद और नापसंद से जितना मैं वाकिफ हूँ शायद तुम खुद उतना नहीं..मेरे ससुराल नागपूर के मकान के बगल ही तुम्हारे बिरादरी की एक सुन्दर,सुशील लड़की रहती है जो हर दृष्टिकोण से तुम्हारे काबिल है.तुम्हारे बारे में वह सब कुछ जानती है..चूँकि तुमसे मुलाक़ात की कभी कोई सम्भावना न थी इसलिए उसे कभी कहा नहीं.अब जाकर कहूँगी..आज ही उसे खत लिखती हूँ..डर है कि उसके बाबूजी कहीं जल्दबाजी न कर दे..क्योंकि पिछले साल से उसकी शादी की बात चल रही है..’

एक सांस में वह इतना कुछ कह गयी..उसकी आँखों में आंसू भर आये थे.मैंने वादा किया तो खुशी से वह पागल हो गयी, बोली- ‘ अज्जू..मेरा चुनाव तुम्हे जरुर पसंद आएगा..हमने कभी तुम्हारा बुरा नहीं चाहा...और मरते दम भी हम ‘ जनाब ‘ का भला ही चाहेंगे..’

 ‘ जनाब ‘ शब्द सुन मैं चौंक गया..निकी की ओर देखा ..वह भी एकदम चुप्पी साध गयी..उसकी आँखों में भी अतीत झिलमिला गया था.. ‘ जनाब ‘ निकी का तकियाकलाम हुआ करता था..मैं अक्सर उसे ‘ जनाब ‘ कहने से मना करता और हर बार वह कहती- ‘ ठीक है..अब से नहीं कहूँगी..अब तो जनाब खुश ना ? ‘ और हम दोनों खिलखिलाकर हँस पड़ते. सच पूछो तो उसका ‘ जनाब ‘  कहना मुझे अच्छा ही लगता था.

‘ माफ करना अज्जू..आज सात-आठ साल बाद न जाने कैसे यह लफ्ज एकाएक होठों पर आ गया..ईश्वर गवाह है..इस लंबे अरसे में कभी यह लफ्ज होठों पर नहीं आया..खुदा करे..दुबारा यह लफ्ज इन होठों पर फिर कभी न आये...’

दिल्ली के लिए निकलते वक्त बार-बार वह ताकीद करती रही कि इसी सीजन में शादी करनी है..नागपूर पहुँचते ही बात कर सूचित करेगी..और स्वयं भी शादी में आएगी..मेरा पता ले वह चली गयी.

महीनों मैं निकी के खत का इन्तजार करता रहा पर कोई खत नहीं मिला. फिर दो महीने बीते..तीन महीने बीते..उसका कोई भी पत्र नहीं आया.इस बीच अचानक माँ की तबियत बिगड़ी तो महीने भर की छुट्टी ले घर पहुंचा.वहाँ एकाएक शादी की बात चली तो फिर निकी का ख्याल आया.उसके प्रति मन एक अजीब ही आक्रोश से भर गया.इधर माँ की कमजोरी मेरे दिलो-दिमाग को परेशान करती थी. हश्र यह हुआ कि मैंने अपनी शादी कि स्वीकृति दे दी. बार-बार माँ कहती रही कि गोंदिया जाकर एक बार लड़की को देख आ..पर मैंने इनकार कर दिया.अंततः गोंदिया में रमी के साथ मेरी शादी पक्की हुई और आनन्-फानन में शादी भी हो गयी.

तीन दिन पहले ही सुहागरात थी.मैंने एक नजर उसे देखा भी नहीं. कह दिया - ‘ मेरी तबियत कुछ अच्छी नहीं..अगर तन्हाई दे सको तो आभारी रहूँगा..’ और सोफे पर सो गया. मैंने यह जानने की कोशिश भी नहीं की कि मेरी इस बेरुखी से उस मासूम और  निर्दोष  पर क्या प्रतिक्रिया हुई होगी .यह क्रम कल तक चलता रहा. आज उसके भाई लोग रस्म के मुताबिक आठ-दस दिनों के लिए रमी को लिवा ले गए.

अभी-अभी पलग के सिरहाने पर उसका एक खत मिला है जिसे पढके न मैं मुस्कुरा पा रहा हूँ न ही रो पा रहा हूँ..समझ नहीं आता..मेरे साथ कैसा कुछ घटित हो रहा है..उसने लिखा है-

‘ मेरे सुहाग,...चरण स्पर्श...लड़कियां शादी या सुहागरात के जो सपने संजोकर ससुराल जाती हैं,उसके विषय में जिक्र नहीं करुँगी..सिर्फ इतना कहूँगी... सरसरी तौर पर ही सही, मेरा यह खत तुम पढ़ लो..’तुम’ की धृष्टता के लिए क्षमा चाहती हूँ..तुम्हारी बेरुखी का मुझे कोई गिला नहीं..लेकिन इतनी भी क्या बेरुखी कि ‘जनाब’ ने अपनी दुल्हन की सूरत तक न देखी..सोची थी,.शायद मुझे देख तुम पहचान जाओगे..लेकिन तुमने तो देखना भी गवारा नहीं किया..तुम्हे शायद मालूम न हो..तुमसे मेरी शादी कितनी कठिनाई से हुई है..एक इंजीनियर के साथ मेरी सगाई होने ही वाली थी कि एकाएक निकी जीजी का खत मिला जिसे उन्होंने दिल्ली से ड्राप किया था.....मालूम हुआ कि उसने तुम्हे शादी के लिए राजी कर लिया है... मैंने लड़की होकर भी घरवालों के सामने यह बोलने की बेशर्मी की कि मुझे तुमसे प्यार है..अन्यथा यह सगाई नहीं टलती..और जानते हो अज्जू..ऐसा मैंने क्यों किया ?  क्योंकि यह मेरी निकी जीजी ...मेरी अभिन्न सहेली निकी की अंतिम ख्वाहिश थी..वह चाहती थी कि मेरी शादी तुमसे हो...तीन-चार महीने पूर्व जब तुमसे मिलकर लौट रही थी तो रास्ते में उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई...और इन्दर व निकी जीजी घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिए...दोनों बच्चों को खरोंच तक नहीं आई... उसकी मौत से जिन सदमों से मैं गुजरी हूँ..भगवान न करे..तुम गुजरो...मैंने चाहा कि तुम्हें  सूचित करूँ लेकिन आगरे का पता नहीं मिला...जीजी की मौत से मैं पागल हो गयी थी...उसके सिवा मेरा अपना और कोई न था..उसने तुम्हारे बारे में सब कुछ बताया था...यहाँ तक कि तुम्हारी-उसकी मुहब्बत की पूरी दास्तान भी..मैं तुम्हारे बारे में सुन-सुनकर ही तुमसे प्रभावित हो गयी थी ..मैं अक्सर उसे कहती- ‘ जीजी ..अब तो हम तुम्हारे ‘ जनाब ‘ से ही ब्याह रचाएंगे..’

और आज देखो...सचमुच तुमसे रचा ही लिया..यह निकी की प्रबल इच्छा का ही परिणाम है अज्जू कि हम तुम अचानक मिल सके...तुमसे ब्याह की बातों को मैं सपना मानने लग गई थी..मेरी शादी नागपूर से होती तो शायद तुम पहचान लेते पर शादी मामा के घर गोंदिया से हुई इसलिए तुमने भी ध्यान नहीं दिया..अज्जू...निकी तो अब नहीं रही..कोशिश करुँगी कि उसके सपनों को साकार कर सकूँ..निकी के घर मेरा रोज का आना-जाना है..दोनों बच्चों को अब तक मैं ही सम्हालती रही हूँ..सोचती हूँ..इस बार अपने दोनों बेटों को लेकर आऊ..क्या ख्याल है ‘ जनाब ‘ का ..?

ऐ अज्जू..उदास मत होना भई...हम अभी बहुत दूर हैं तुमसे...तुम्हारे आंसू तक नहीं पोंछ पायेंगे..तो जल्द से जल्द मुझे लेने आ रहे हो ना...?

‘ जनाब ‘ के इन्तजार में- ‘ जनाब ‘ की – रमी. ‘

बार-बार पढ़ने पर भी दिल नहीं भर रहा है..बिलकुल निकी जैसी साफ-साफ़ बातें...वही ‘जनाब’ वाला तकियाकलाम...वही प्यारी-प्यारी बातें..निकी के प्रति जो गुस्सा और आक्रोश उपजा था,उसे याद कर खुद से नफरत हो रही है..रमी की स्पष्टवादिता और निकी की अंतिम इच्छा की पूर्ति से जहां संतुष्ट हूँ,वहीँ उसकी कमी से  बार-बार मेरे अंदर कुछ बिलख सा रहा है..महीनों पहले की उसकी एक-एक बात आज याद आ रही है- ‘ हमने कभी तुम्हारा बुरा नहीं चाहा अज्जू..मरते दम तक हम जनाब का भला ही चाहेंगे...अंतिम बार मैं एक ताज और गढना चाहती हूँ..बस..एक ताज और..’

                          xxxxxxxxxxxxxxx

                                               प्रमोद यादव 

                                               दुर्ग,छत्तीसगढ़

                                        मोबाईल- 09993039475    


नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्रमोद यादव की कहानी - एक ताज और...
प्रमोद यादव की कहानी - एक ताज और...
http://2.bp.blogspot.com/-jx-V5Ox19Q8/Ulp6x6_Pq7I/AAAAAAAAWQQ/6MdsBy4aYks/clip_image002%25255B4%25255D.jpg?imgmax=800
http://2.bp.blogspot.com/-jx-V5Ox19Q8/Ulp6x6_Pq7I/AAAAAAAAWQQ/6MdsBy4aYks/s72-c/clip_image002%25255B4%25255D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2013/10/blog-post_31.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2013/10/blog-post_31.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content