---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

वीरेन्‍द्र ‘सरल‘ का व्यंग्य - बिजली माता की महिमा

साझा करें:

बहुत दिनों के बाद मेरा ननिहाल जाना हुआ। घर के प्रवेश द्वार के पास ही नानी बैठकर चावल में से कंकड़ चुन रही थी। मैंने नानी जी को प्रणाम किया।...

बहुत दिनों के बाद मेरा ननिहाल जाना हुआ। घर के प्रवेश द्वार के पास ही नानी बैठकर चावल में से कंकड़ चुन रही थी। मैंने नानी जी को प्रणाम किया। उन्‍होंने मुझे आशीर्वाद देते हुये कहा-‘‘ सदा खुश रहो बेटा! तुम्‍हारे घर के सभी बल्‍ब जगमग-जगमग जले। कोई भी बल्‍ब फ्‍यूज ना हो। तुम्‍हारे घर की बिजली कभी गुल मत हो और बिजली बिल बहुत कम आय। आशीर्वाद सुनकर मेरा दिमाग घूम गया। मैं सोचने लगा, नानी ये क्‍या अंट-शंट कहे जा रही है। फिर विचार आया कि बुजुर्ग लोग कहते हैं ‘साठ बुद्धि नाश‘। नानी भी अब बुढ़ू हो गई है। शायद उम्र का प्रभाव है तभी ऐसा कह रही है।

मैं सीधे घर के भीतर चला गया मगर वहाँ सन्‍नाटा था। घर के पीछे वाली गली से शोर-गुल सुनाई दे रहा था। मैं वहीं पहुँच गया। पता नहीं मामी अपनी पड़ोसन से किस बात पर झगड़ती हुई कह रही थी कि तेरे घर के सभी बल्‍ब जल्‍दी-जल्‍दी फ्‍यूज हो जाये। बिजली हमेशा के लिये गुल हो जाये । भारी-भरकम बिजली बिल आ जाये। ये सब सुनकर मैं दंग रह गया। बात कुछ समझ में नहीं आयी। तभी मामी जी की नजर मुझ पर पड़ी। वह अपनी पड़ोसन को घूर कर ऐसे देखने लगी जैसे कह रही हो कि मिलते हैं ब्रेक के बाद। फिर मुझसे मुखातिब होकर बोली-‘‘अरे! भांजे, आप कब आये? चलो घर के भीतर बैठो ,बहुत तेज गर्मी है कहीं आपको लू न लग जाये।‘‘

मैं घर के भीतर आ गया। मेरे पीछे-पीछे मामी भी आ गई। मैं सोफे पर आराम से बैठ गया। मामी एक गिलास ठंडा पानी लाकर मेरे सामने रख गई और मामा जी को आवाज देने लगी , कहाँ हो? भांजा आया है। कमरे के भीतर से मामा जी बाहर आये। शायद वे आराम कर रहे थे तभी अनमने लग रहे थे। मैंने मामाजी का अभिवादन किया। मामाजी मेरे पास सोफे पर बैठते हुये कहने लगे- ‘‘और भांजे क्‍या हाल-चाल है? सभी बल्‍ब ठीक से जल रहे है न ? बल्‍ब ज्‍यादा फ्‍यूज तो नहीं होते? बिजली बिल तो कम आ रही होगी? बिजली ज्‍यादा गुल तो नहीं होती?‘‘

अब मुझसे रहा नहीं गया। दिमाग गरम हो गया। मैंने गुस्‍से में कहा-‘‘ कहीं आप लोग पागल तो नहीं हो गये हैं? जिसे देखो वही बिजली और बिजली बिल की बात कर रहें हैं। नानी आशीर्वाद भी देती है तो बिजली की। मामी पड़ोसन को बद्‌दुआ भी देती है तो बिजली की। आप कुशलक्षेम भी पूछते हैं तो बस बिजली की। ये क्‍या चक्‍कर है मामाजी?

मामाजी कुछ कहते उससे पहले ही मामी कहने लगी-‘‘ अब आपको क्‍या बतायें भांजे, इस बिजली के चक्‍कर से आपके मामा जी बहुत मुश्‍किल से बचें हैं। मैंने मामा जी की ओर देखकर कहा-‘‘ मैनें तो मामा जी को पहले ही समझाया था कि आपकी पड़ोसन बिजली की चाल-चलन मुझे ठीक नहीं लगते, उससे बचकर रहियेगा मगर मेरी बातें यहाँ सुनता कौन है? मामी ने मामा की ओर घूर कर देखा तो मामाजी सकपका गये। मैनें बात सम्‍हालते हुये आगे कहा- ‘‘क्‍या हुआ था, कहीं मामा जी बिजली के करंट में चिपक तो नहीं गये थे?‘‘ मामी बोली-‘‘नहीं ऐसी बात नहीं थी। ये बिजली में नहीं चिपके थे बल्‍कि बिजली विभाग वाले इनके दिमाग पर चिपक गये थे। एक माह का पचास हजार बिजली बिल थमा गये थे जिसे देखकर इन्‍हें अटैक आ गया था। ये तो शुक्र है भगवान का जो हम इन्‍हें समय रहते अस्‍पताल पहुँचाने में सफल हो गये और इनकी जान बच गई। ये अभी भी बिजली बिल के नाम सुनकर ऐसे डर जाते हैं जैसे मंहगाई के नाम पर जनता और चुनाव के नाम पर सत्ताधारी नेता।‘‘

मैंने शिकायती लहजे में कहा-‘‘इतनी बड़ी घटना घट गई और आप लोगों ने हमें खबर तक नहीं की। चलो कोई बात नहीं। मामा जी की जान तो बच गई। वैसे भारी बिजली बिल देखकर इतना घबराने की बात नहीं थी। शायद धोखे में यह बिल आ गया रहा होगा। इसे बिजली ऑफिस में ले जाकर संबंधित अधिकारी को दिखा देते तो बिल कम हो जाता और मामा जी को अटैक भी नहीं आता।‘‘

बिजली ऑफिस के नाम सुनते ही मामाजी की तबियत फिर बिगड़ने लगी। उनका ब्‍लड प्रेशर बढ़ गया। वे डर के मारे काँपने लगे। मामी कुछ और कहती उससे पहले ही वे हाँफते हुये कहने लगे-‘‘ मेरे सामने बिजली ऑफिस का नाम भी मत लो भांजे! बिजली से ज्‍यादा करंट तो विभाग वाले ही मारते है। सच कहूं तो बिजली बिल देखकर मुझे अटैक नहीं आया था बल्‍कि बिजली विभाग वालों की बातें सुनकर आया था। मैं उस बिल को लेकर संबंधित अधिकारी के पास गया और उनसे पूछा था कि साहब! मेरे घर में चार-पाँच बल्‍ब ही जलते हैं। उसका यह भारी-भरकम बिल कैसे आ गया?‘‘ उन्‍होनें अपनी आँखें बंद करके ध्‍यानमग्‍न होकर कुछ सोचा फिर बोला- ‘‘आपके पूर्वज अपने समय का बिल भी पटाकर नहीं मरे हैं। उन सभी बिलों को आपके बिल में जोड़ा गया है इसलिये यह इतना भारी आया है।‘‘ उनकी बातें सुनकर मैंने कहा-‘‘मगर हमारे पूर्वजों के जमाने में तो बिजली होती ही नहीं थी तो फिर बिल का तो सवाल ही नहीं उठता। वे तो दीया-कंडिल और मोमबत्ती में सारी जिन्‍दगी गुजर-बसर करके स्‍वर्ग सिधार गये है। तो फिर?‘‘ मेरी बातें सुनकर साहब फिर ध्‍यानमग्‍न हो गये और कुछ देर बाद कहने लगे- ‘‘मैं यहाँ से स्‍पष्‍ट देख रहा हूँ कि आपके पूर्वज अभी भी स्‍वर्ग में मनमाने ढंग से बिजली का उपयोग कर रहे हैं। दिन-रात बल्‍ब जला रहे हैं। कूलर-पंखा और एयरकंडीशनर का उपयोग कर रहे है। वे स्‍वर्ग में जो बिजली खपत कर रहे हैं उनका बिल आपके खाते में जोड़ा गया है, समझ गये? अब आप मेरा ज्‍यादा दिमाग मत खाइये, सीधे बिजली बिल पटाइये और नहीं तो अपने घर का बिजली कनेक्‍शन कटाइये। यदि आपको मेरी बातों पर विश्‍वास नहीं है तो मैं अपने कर्मचारियों को आपके साथ भेज रहा हूँ। वे जाकर आपके घर की खुदाई करके देखेंगे। यदि खुदाई के दौरान बल्‍ब के काँच के टुकड़े, सड़े-गले वायर और टूटे-फूटे बटन होल्‍डर य प्‍लग निकल जाये तो समझ लेना मेरी बातें सही है।‘‘

मैनें सोचा , मैं तो अभी प्‍लाट खरीद कर मकान बनवाया हूँ, वहाँ से इस तरह की साम्रगी कैसे निकल सकती है। मैं जोश में आकर कह गया कि अभी भेज दीजिये, हो जाय दूध का दूध और पानी का पानी। मेरी बातों से साहब को भी ताव आ गया। उन्‍होंने तुरंत कुछ कर्मचारियों को मेरे साथ भेज दिया। कर्मचारी यहाँ आकर पुरातत्‍व विभाग की तरह खुदाई करने लगे। बस थोड़ी-सी खुदाई हुई थी और सचमुच कुछ काँच के टुकड़े और सड़े-गले वायर निकल आये। मैं अवाक रह गया। पहले तो मुझे विश्‍वास ही नहीं हुआ पर बाद में मैं सोचने लगा, सचमुच ये बिजली वाले साहब तो त्रिकालदर्शी हैं। इनके पास जरूर महाभारत के संजय के समान दिब्‍यदृष्‍टि है या हो सकता है संजय के ही आधुनिक संस्‍करण हों। विभागीय कर्मचारी उन सामानों को जप्‍त करके पंचनामा करा कर ले गये। बाद में मुझे ध्‍यान आया कि मकान बनने से पहले यहाँ पर कूड़ा-करकट फेंकने का गड्ढा था। लोग यहाँ पर कचड़ा फेंकते थे । जिसे पटवा कर मैंनें मकान बनवाया है। शायद ये सामान उसे कचड़े में से हो। मैं तुरंत दौड़ते हुये ऑफिस गया और इन बातों को बताकर साहब को समझाने की कोशिश की पर साहब मानने को तैयार नहीं हुये और मुझे पचास हजार का बिल पटाना ही पड़ा। बिजली विभाग का यह सदमा मैं बर्दाश्‍त नहीं कर सका और मुझे अटैक आ गया। जिन्‍दगी के दिन अभी शेष है इसलिये बच गया।‘‘ इतना बताकर मामाजी फूट-फूटकर रोने लगे। थोड़ी देर बाद उन्‍हें चक्‍कर आ गया और वे बेहोश हो गये।

मामी ने कहा -‘‘भांजे अपने मामाजी को उठाकर तुरंत पूजा कमरे में ले चलो। देवी की पूजा करने के बाद ही इन्‍हें होश आ पायेगा।‘‘ मामी और मैं दोनों ने मिलकर मामा जी को उठाकर पूजा कमरे में ले आये। पूजा कमरे का नजारा देखकर मेरा दिमाग चकरा गया। मैं मुश्‍किल से बेहोश-बेहोश होते बचा।

पूजा कमरे के दीवारों पर जगह-जगह ‘श्री बिजली माता सदा सहाय‘ और ‘श्री बिजली माता का भण्‍डार सदा भरपूर रहे‘ लिखा हुआ था। लकड़ी के एक पीढ़े पर कलश स्‍थापित किया गया था। कलश के ऊपर होल्‍डर फिट करके उसमें जीरो वाट का बल्‍ब लगाया गया था। जो जल रहा था। उसी की पूजा की गई थी। पास में खुशबूदार अगरबत्ती जलायी गई थी। अक्षत-गुलाल और फूल चढ़ाये गये थे और नारियल भी तोड़ा गया था। पुराने बिजली बिलों के बंडल को लाल कपड़े से लपेट कर रखा गया था।

मैं कई बार कमरे के चारों तरफ घूम-घूमकर स्थिति का जायजा लिया , विचार किया पर कुछ समझ न पाया। अन्‍ततः मैंने मामी से पूछा-‘‘मामी जी! आप लोग ये कौन सी देवी की पूजा करते हैं, मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ।‘‘

मामी ने मुझे समझाते हुये कहा-ये बिजली देवी है भांजे। भारी-भरकम बिजली बिल के प्रकोप से बचने के लिये हमें बिजली देवी की पूजा करनी पड़ती है। पुराने बिजली बिलों का हम पाठ करते हैं इसे हम बिजली चालीसा कहते हैं। बिजली विभाग के एक कर्मचारी ने ही बिजली माता के प्रकोप से बचने का यह उपाय बतलाया है। महीने भर हम बिजली माता पर जो चढ़ोत्तरी चढ़ाते हैं उसे वही कर्मचारी आकर ग्रहण करता है। उन्‍होंने हमें बिजली माता की आरती भी लिखकर दी है। इसे पढ़कर देखोगे तो आप खुद भी बिजली माता के भक्‍त बन जाओगे।

मामी की बातें सुनकर मुझे बड़ा आश्‍चर्य हुआ। बिजली को भी देवी के रूप में पूजा जाता है यह मैं पहली बार ही देख-सुन रहा था। मैंने आरती पढ़कर देखा, जिसकी अंतिम पंक्‍ति पर लिखा हुआ था-

‘‘श्री बिजली जी की आरती जो कोई नर-नारी गावै।

दिनभर बिजली पावै, बिल बिल्‍कुल कम आवै।‘‘

------

वीरेन्‍द्र ‘सरल‘

बोड़रा( मगरलोड़)

पोष्‍ट-भोथीडीह

व्‍हाया-मगरलोड़

जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)

पिन-493662

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
  1. अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव8:56 am

    श्री वीरेन्द्र सरल जी का व्यंग अच्छा लगा मनुष्य की आदत होती है जिसकी कृपा चाहिये
    और जो परेशां करती है या जिससे डर लगता है
    उन सभी की पूजा करने लगता है सो बोलो
    बिजली मैय्या की जय वोह तो आवें पर भारी भरकम बिल न लावें

    उत्तर देंहटाएं

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

रचनाकार - हिंदी साहित्य का असीमित आनंद लें

---प्रायोजक---

---***---

|कथा-कहानी_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|हास्य-व्यंग्य_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|संस्मरण_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

आपके लिए हिंदी में सैकड़ों वर्ग पहेलियाँ

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|उपन्यास_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

|लोककथा_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=complex$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3996,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,110,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2968,कहानी,2228,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,529,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,94,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,339,बाल कलम,25,बाल दिवस,3,बालकथा,62,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,10,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,26,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,240,लघुकथा,1217,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1995,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,700,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,782,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,75,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,196,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: वीरेन्‍द्र ‘सरल‘ का व्यंग्य - बिजली माता की महिमा
वीरेन्‍द्र ‘सरल‘ का व्यंग्य - बिजली माता की महिमा
http://lh4.ggpht.com/-YKzcZ0lUqDM/Uw2xMAqmFsI/AAAAAAAAXhk/1_G55Y3vEBA/image%25255B3%25255D.png?imgmax=800
http://lh4.ggpht.com/-YKzcZ0lUqDM/Uw2xMAqmFsI/AAAAAAAAXhk/1_G55Y3vEBA/s72-c/image%25255B3%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/05/blog-post_26.html
https://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2014/05/blog-post_26.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ