सूर्यकांत मिश्रा का आलेख - सफलता के मार्ग की बाधाओं को कैसे पार करें

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सफलता के मार्ग में बाधाएँ स्पीड ब्रेकर -: से अधिक कुछ नहीं :-     मनुष्य का शरीर काम करने के योग्य होते हुए भी कोई काम न करे तो उसे क्या कह...

सफलता के मार्ग में बाधाएँ स्पीड ब्रेकर
-: से अधिक कुछ नहीं
:-
    मनुष्य का शरीर काम करने के योग्य होते हुए भी कोई काम न करे तो उसे क्या कहा जा सकता है। जीवन में चलते रहने और अपने लक्ष्य की प्राप्ति में बढ़ते रहने का नाम ही जिन्दगी है जो व्यक्ति अथवा युवक कार्य में लगा होता है, वह बढ़ता ही जाता है। इसके विपरीत जो रूक जाता है, सोता रहता है, आलस्य करता है वह जिन्दगी की जंग में पीछे रह जाता है। इसीलिए कहा गया है-चंरैवेति, चंरैवेति, चंरैवेति ... अर्थात् चलना ही जिन्दगी है। हमारी जिन्दगी में हमारे द्वारा देखे जाने वाले सपने आसानी से पूरे नहीं हो पाते हैं। कारण बहुत सी रूकावटें व्यवधान पैदा करती है। ऐसी रूकावटों को हताशा की दृष्टि से न देखते हुए चुनौती के रूप में लेना ही लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग हो सकता है। हमारे विकास के मार्ग में आने वाले व्यवधानों को ठीक उसी प्रकार क्षणिक माना जाना चाहिए जिस प्रकार अबाधगति से दौड़ रहे वाहनों को सड़कों पर बने स्पीड ब्रेकर कुछ देर के लिए धीमा कर देते है, किन्तु उसके गुजरते ही वाहन की रफ्तार पुनः पहली वाली स्थिति में आ जाती है।

 
-: क्षणिक रूकावट को असफलता से न जोड़ें :-
    लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में आने वाली बाधाओं को कभी भी स्थायी बाधा न माने। उनसे निपटने अथवा उनका सामना करने दृढ़ प्रतिज्ञ हो निर्णय लें। ऐसी बाधाओं को सड़क के स्पीड-ब्रेकर से अधिक न समझें। न तो कभी किसी स्पीड ब्रेकर ने किसी वाहन चालक के गन्तव्य को रोक पाया है, और न ही उन्हें विचलित कर पाया है। कुछ समय के लिए वाहन की गति जरूर कम करना हमारी विवशता होती है, किन्तु अंततः इच्छित स्थान पर पहुंचकर ही वाहन और चालक दम ले पाते हैं। कहने का तात्पर्य अड़चनें राह अवरोधक नहीं वरन् सावधानी का सूचक होती हैं और हमें हर बाधा को पार करने के लिए सावधानी के साथ निर्णय लेना चाहिए। कोई भी बाधा कभी स्थायी स्वभाव लेकर नहीं आती है। जिन्दगी की धूप-छाँव की तरह हमें उनका भी अनुभव करना चाहिए। जिस प्रकार स्पीड ब्रेकर पर हम रूकते नहीं महज सम्हलते हैं उसी तरह रूकावटों पर भी संयम की जरूरत है हिम्मत हारने की नहीं ।


-: गतिशीलता और संघर्ष सफलता की सीढ़ी :-
    किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने अथवा उसके प्रभावकारी परिणाम् पाने के लिए सबसे जरूरी तत्व है कि आपके शरीर की सारी इकाइयाँ-शरीर, मन, वचन सभी एक साथ मिलकर कार्य करें। मनुष्य का हस्ट-पुस्ट शरीर ही अकेले सफलता का मार्ग तय नहीं कर सकता है। अपने मन को कठोर कर वचन की प्रतिबद्धता के सहारे किया गया कर्म ही साध्य हो सकता है। अपनी बुद्धि, समझदारी और योग्यता का समयानुकूल उपयोग भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हमारे शरीर, मन, वचन, योग्यता में से किसी भी एक की भटकन से बाधाएँ हम पर दबाव डाल सकती हैं। ऐसी स्थिति में शारीरिक तत्वों पर दोषारोपण हमारी समझदारी नहीं कही जा सकती है। लक्ष्य के अनुसार उसमें लगने वाली ऊर्जा, समय और संसाधन का सामंजस्य कार्य के परिणाम् पर प्रभाव डालता है। कुछ कार्यो का परिणाम् हमें तत्काल प्राप्त हो जाता है, तो कुछ में समय लगता है और कुछ का जीवन भर नहीं मिल पाता है। अतः इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम निराश होकर कायरता की चादर न ओढ़ें। यह सुनिश्चित है कि हम अतीत को बदल नहीं सकते और वर्तमान से बच नहीं सकते किन्तु भविष्य को गढ़ जरूर सकते है।

 
-: बिना समस्या के जीवन नही चल सकता :-
    अपने मन में कुछ करने की इच्छा की उत्पत्ति ही हमें कार्य के प्रति प्रेरित करती है। बिना इच्छा शक्ति के कोई भी कार्य सफलता तक नहीं पहुँच सकता है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि इच्छा, कार्य और प्रभाव साथ चलने वाली प्रक्रिया है। कोई भी एक मन से दूर हो जाये तो सफलता संदिग्घ ही होती है। यह भी शास्वत सत्य है कि हम बिना स्पीड ब्रेकर की सड़क पर नहीं चल सकते। ठीक इसी तरह यह भी प्रायोगिक रूप में सिद्ध हो चुका है कि बिना समस्याओं के हमारा जीवन भी नहीं चल सकता है। यदि सड़कों पर स्पीड ब्रेकर न हो तो रोज दुर्घटनाएँ होगी और अनियंत्रित गति हमारा जीवन छीनती ही रहेगी। इसी तरह जीवन में आने वाली रूकावटें अथवा कठिनाईयां हमें गंभीर चिन्तन के साथ सावधानी एवं सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। सफलता तक पहुँचने के लिए हमारे संकल्प में प्रतिबद्धता एवं शुद्धता का होना भी जरूरी हैं। शास्त्रों में कहा भी गया है कि - शुभ करोति कल्याणं। कार्य किसी भी प्रकार का हो उसे करने की निष्ठा जरूरी है। पाप से संबंधित कार्य को छोड़कर कोई भी कार्य हेय श्रेणी का नहीं होता है।


-: ब्रेकर और समस्याएँ स्थायी नहीं होती :-
    किसी भी सफल व्यक्ति की सफलता इस बात से नहीं आँकी जाती कि आज वह किस मुकाम पर है, बल्कि यह देखा जाना जरूरी है कि आज जिस प्रतिष्ठापूर्व स्थान पर वह है, उसके लिए उसने कितनी बाधाओं को पार किया है। कोई भी सड़क ऐसी नहीं होती जिसमें केवल ब्रेकर ही ब्रेकर हों। साथ ही कोई सफलता का मार्ग भी ऐसा नहीं होता जहां बाधाएं ही बाधाएं हों। ब्रेकर और बाधाएं आती जाती रहती है, वे स्थायी स्वभाव की नहीं होती। दोनों ही हमें प्रेरित और परेशान करते है जरूरी यह है कि हम न तो बहुत ज्यादा परेशान हो और न ही उनकी गंभीरता को समझने से दूर भागें। यदि हम समस्याओ को स्पीड ब्रेकर की तरह कुछ देर की बाधा न मानकर स्थायी बाधा मान लें तो यह सुनिश्चित है कि हम सफलता के द्वार तक नहीं पहुंच सकेगें। हम अपने मार्ग पर तेजी से दौड़ते हुए उस समय रूकते नहीं बल्कि धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं जब रोड पर ब्रेकर आ जाये। ठीक उसी प्रकार समस्याओं के आने पर भी हमें कुछ अलग हटकर निर्णय लेने की जरूरत पड़ती है। हमें इसे इस प्रकार भी समझ सकते हैं जैसे- ब्रेकर पर गति कम करने से हमें न तो झटका लगता है और न ही दुर्घटना होती है, ठीक उसी प्रकार जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना करने के लिए हमें अपने तरीकों में परिवर्तन लाना पड़ता है और यही सफलता का मार्ग खोलने में सहायक होता है। ब्रेकर का पता हमें तब लगता है जब हम उस पर से गुजर चुके होते हैं। इसी तरह कई बार समस्याएँ तब समझ में आती है जब वे हमें नुकसान पहुंचा चुकी होती हैं। यह घटना हमें सावधान करती है कि हम बीते हुए पर अधिक न सोचें वरन् भविष्य की लापरवाही से बचने सतर्क रहें।

 
-: ब्रेकर और समस्याओं के रूप अनेकः-
    सड़कों पर पाये जाने वाले ब्रेकर और हमारे अपने जीवन में आने वाली समस्याएँ अलग-अलग प्रकार की होती हैं। आपने देखा होगा सड़क के ब्रेकर कुछ बड़े ही ढलान लिये होते हैं जिन्हें पार करने में अधिक दिक्कत नहीं होती। कुछ ऐसे होते हैं जो पूरे परिवार के साथ दिखायी पड़ते है अर्थात् चार से छै की संख्या में होते हैं जो हमारी गाड़ी के कलपुरजों को हिलाकर रख देते हैं। कुछ स्पीड ब्रेकर ज्यादा ऊंचाई लिए होते हैं तो कुछ की ऊंचाई समाप्त हो चुकी होती है, इन्हें हम उनके चरित्र के अनुसार पार कर लेते है। इसी तरह जीवन में आने वाली समस्याएं अलग-अलग स्वभाव की होती है। कुछ को सुलझाने में कठिनाई का अनुभव नही होता तो कुछ का हल ढुंढने में हमारे दांतों में पसीना आ जाता है। इतना जरूर है कि हमारी समझ- और संयम के चलते प्रत्येक समस्या हल हो ही जाती है। एक ही राह पर लगातार अथवा, लम्बे समय से चलते रहने के कारण हमें उनके आने का एहसास पहले ही हो जाता है और हम अपनी गति धीमी कर लेते हैं। इसी तरह जीवन की छोटी-बड़ी रूकावटों को चुनौती मानते हुए हम उसके पार भी उतर जाते हैं। साथ ही हमारे दिमाग में समस्याओं से निपटने और उन्हें परास्त करने से संबंधित ब्लू प्रिन्ट पहले ही तैयार हो जाता है। यही कारण है कि भविष्य में समस्याएँ आने से हम उन्हें आसानी से हल कर लेते हैं।
    हमें यह बात सदैव अपने दिमाग में रखनी चाहिए कि हमने अपने जीवन के जो लक्ष्य तय किये हैं उन्हें पाने के लिए, हमें एक नहीं अनेक कठिनाईयों पर विजय पाना होगा। बाधाएँ आयेंगी और हमें उन्हें पीछे धकेलना होगा। यह भी शक्ति पैदा करनी होगी कि हमारी राहों में आने वाली बाधाएँ सड़क पर बने ब्रेकर की तरह ही होगी, जो हमें कुछ समय के लिए हमारी सफलता की गति को धीमी कर दिखाएंगी, किन्तु अंततः हमारे सपनों को साकार करने में हमारी दृढ़ता सहायक होगी और बाधाओं को हमारा मार्ग छोड़ना ही होगा।

                


                                प्रस्तुतकर्ता
                                       (डा. सूर्यकांत मिश्रा)
                                     जूनी हटरी, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)
                                      मो. नंबर 94255-59291

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रचनाकार: सूर्यकांत मिश्रा का आलेख - सफलता के मार्ग की बाधाओं को कैसे पार करें
सूर्यकांत मिश्रा का आलेख - सफलता के मार्ग की बाधाओं को कैसे पार करें
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https://www.rachanakar.org/2014/05/blog-post_7756.html
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