---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

आकाश शर्मा पत्थर की दस कविताएँ

साझा करें:

माँ बात बचपन की है जब मैं छोटा सा था, बैग कंधे धरा और किताबें भरी , पहन कपडे नये माँ से कहने लगा। "आज ऑफिस मैं जाऊंगा ओ मेरी माँ , शाम...

image

माँ
बात बचपन की है जब मैं छोटा सा था,
बैग कंधे धरा और किताबें भरी ,
पहन कपडे नये माँ से कहने लगा।
"आज ऑफिस मैं जाऊंगा ओ मेरी माँ ,
शाम को लौट आऊंगा मैं काम से "
माँ की आँखों में थोड़ी चमक आ गयी,
और होंठों पे भीनी से मुस्कान भी।


माँ ने हस के कहा लल्ला ये तो बता,
आज संडे को ऑफिस में करना है क्या ।
मैंने बोला कि माँ मैं बहुत व्यस्त हूँ,
सोचता हूँ की पापा को आराम दूँ ।
मैंने अब तक बहुत कुछ है उनसे लिया,
वक़्त आया की मैं उनको उपहार दूँ ।
सुनके मुझको क्यों जाने वो रोने लगी,
आज पहले ही दिन कुछ तो गलती हुई ।
फिर गले से लगा के बड़े प्यार ,
बोली तुम हो स्वयं जैसे उपहार से ।
बेटे ज़िद्द ना करो बात मानो मेरी ,
एक दिन और दफ्तर की छुट्टी सही ।


बात मम्मी की सुन के मैं रोने लगा,
पूछ बैठा की माँ कब मैं हूँगा बड़ा ।
माँ ने सर मेरा आँचल से यूँ ढंक लिया,
सिमट आया हो आँचल में आकाश सा।
इतना आराम था उनके आँचल तले,
एक झपकी लगी औ हम दफ्फ़तर चले।
शाम को फिर से खुद में ही मैं खो गया,
सारी बातें थी, बातें हैं, बातों का क्य।


आज दूरी है इतनी जो मिटती नहीं ,
माँ है गुमसुम मगर कुछ भी कहती नहि।
रात दिन जिनके सपनों में मैं ही तो हूँ,
हैं पिता जिनकी आँखें भी बहती नहि।
बंन्द आँखों से भी सब नज़र आ रहा ,
आज फिर बैग ले कर मैं दफ्तर चला।
आज अम्मा की फिर है ज़रूरत मुझे,
आज फिर बैग ले कर मैं दफ्तर चला।
मन है भारी सा और जोश फ़ीका पड़ा ,
आज फिर बैग ले कर मैं दफ्तर चला।
मन ही मन मैं हूँ खुद को ही कोसे पड़ा ,
आज फिर बैग ले कर मैं दफ्तर चला।


कैसे कैसे सितम कर रही है हवा

कैसे कैसे सितम कर रही है हवा,
तेरी खुशबू सी छू कर गुज़र जाती है।
बाँध लो अपनी जुल्फों में तुम ये घटा,
ज़िन्दगी यूँ जवानी को समझाती है ।
कैसे कैसे सितम कर रही है हवा.....

ये हुआ क्या है मुझको खबर कुछ नहीं,
तेरे क़दमों के साये पे चलने लगा।
तुमसे मिलना बिछुड़ना न जाने है क्या,
इश्क़ की आग में मैं भी जलने लगा ।
कैसी गुमसुम सी खामोश सी ये फ़िज़ा,
शुष्क आहट भी ठिठुरन सी दे जाती है ।
कैसे कैसे सितम कर रही है हवा.....

यूँ तो सदियों की कोई तमन्ना न है ,
साथ पल भर का ही करदे मुझको अता ,
आओ फिर से वो लम्हें जियें इस तरह ,
जैसे यौवन बिखेरे कोई आइना ,
आओ ऐसे की ये फासले ना रहें ,
जैसे रिश्ता है बूंदों से बरसात का ।
कैसे कैसे सितम कर रही है हवा,
याद आती है आकर ठहर जाती है ।
कैसे कैसे सितम कर रही है हवा,
तेरी खुशबू सी छु कर गुज़र जाती है।

 

 

 


खिलौना

वही हुआ है जो अकसर ही होता आया है ,
दिया था दिल जिसे उसने ही दिल दुखाया है |
नया नहीं है ये मंजर मैं इसका आदि हूँ,
जो दर्द ना हो तो लगता है जैसे खाली हूँ|
जो चोट लगती है तो चीख भी निकलती है ,
है आग दिल की ये जलती है और सुलगती है |

जो जल के ख़ाक हुए उनको बहा आऊंगा ,
जो बच गए हैं उनको फिर से मैं सजाऊंगा |
कोई तो होगा कहीं जो अदब से आएगा ,
मुझसे खेलेगा और धीमे से मुस्कुराएगा।
कभी तो वो भी बड़ा होगा और वो सोचेगा ,
ये खिलौना है पुराना वो ऐसा बोलेगा |
किसी अलमारी के कोने में बैठ जाऊंगा ,
साल दर साल अकेला ही गुनगुनाउंगा |
इसी उम्मीद में की कोई फिर से आएगा ,
मुझसे बोलेगा वो और मुझको भी वो हंसाएगा |
आपने प्यारे से उन हाथों से मुझको थामेगा ,
हूँ मैं अच्छा ये कह के गले लगा लेगा |

यही है हाल यहाँ के सभी खिलौनों का ,
वही टिकता यहाँ जो है बसर डिठौने सा |
मुझसे खेलो मुझे फेंको या मुझसे प्यार करो ,
मुझको अपनाओ ठुकराओ तार तार करो |
सभी एहसास मैं शीशे छोड़ आया हूँ,
यकीं था मुझको तभी साथ तेरे आया हूँ |
मैं हूँ उस पल को निहारता जो ये भी हो जाये ,
जान तो हो मगर धड़कन ज़रा ठहर जाये|
बहुत हुआ अभी शायद ये मुझसे ना होगा ,
यहीं रूकूंग मैं बैठूंगा इस से पूछूंगा |
क्यों बार बार चोट खाने को तू आता है ,
तू बोलता क्यों नहीं क्यों अभी लजाता है |
ये हैं अन्धे इन्हें आवाज़ सुनाई देगी ,
क्यों तू बेबस से अपने अश्क दिखाता है |
नहीं नहीं ज़रा ठहरो क्या तलाशते हो नया ,
नया सा कुछ भी नहीं सब वही पुराना है ,
वही हुआ है जो अकसर ही होता आया है ,
दिया था दिल जिसे उसने ही दिल दुखाया है

 

 

काश

अब काश यहीं मैं सो जाऊं इक अच्छा सपना आ जाये,
और आँख खोलूं जीवन में धीरे से अँधेरा छा जाये ।
अब काश यहीं मैं सो जाऊं।

अब काश ये धड़कन रुक जाये ,
अब काश ये चिलमन बुझ जाये,
अब काश ये सूरज ना निकले,
अब काश ये सांसें रुक जाएं ,
अब काश मैं आँखें जब खोलूं ये अश्क की धारा रुक जाये।
अब काश यहीं मैं सो जाऊं।

अब काश ये प्याले खाली हों ,
अब काश ये रातें काली हों,
अब काश ये आँखें ना सोएं ,
अब काश ये लब कुछ ना बोलें,
अब काश कदम ना चल पाएं ,
अब काश ये लम्हा थम जाये,
अब काश ये आँखें जब खोलूं जीवन की कली मुरझा जाये ।
अब काश यहीं मैं सो जाऊं।

अब काश ये काश ही जीवन के,
सागर का मधुर किनारा हो,
हर इक रस्ते की मंजिल हो,
हर पथिक का यही सहारा हो,
ये सपना बस इक सपना हो,
बस काश ही काश हमारा हो,
बस काश ही काश हमारा हो,
अब काश यहीं मैं सो जाऊं।

अब मुझको कुछ करना होगा

अब मुझको कुछ करना होगा ,
हंसता हूँ बहुत रोना होगा ,
चंचलता से कुछ ना होगा ,
गम्भीर ज़रा रहना होगा ,
अब मुझको कुछ करना होगा ।

जब तक मैं हंसता रहता हूँ ,
तुम्हें अच्छा अच्छा कहता हूँ ,
तुम मेरी बातें सुनते हो ,
मुझको भी अच्छा कहते हो ,
अब मुझको सच कहना होगा ,
गम्भीर ज़रा रहना होगा,
अब मुझको कुछ करना होगा ।

तुम्हें होगा खुद पे लाख गुमाँ ,
हम भी उसके ही बंन्दे हैं ,
तुम होगी खुद से ताज महल,
आँखों से नहीं हम अंन्धे हैं ,
उपहास कभी ना किया मगर ,
अब आज मुझे लड़ना होगा ,
अब मुझको सच कहना होगा ,
गम्भीर ज़रा रहना होगा,
अब मुझको कुछ करना होगा।

सम्मान तुम्हारा करते हैं ,
ये सोच के लब बस नहीं खुले ,
अपमान कहीं ना हो जाये ,
था याद तभी मुंह रहे सीए ,
ना हूँ गांधी और हाथ भी हैं ,
अगला थप्पड़ मेरा होगा ,
मर्यादा याद जो ना होती ,
प्रहार बहुत गहरा होता ,
अब मुझको सच कहना होगा ,
गम्भीर ज़रा रहना होगा,
अब मुझको कुछ करना होगा।

मैं अर्जुन कृष्णा सरीखा हूँ ,
इस रण सारे दुश्मन हैं ,
जब तक टलता है युद्ध मगर ,
प्रयास सादा हम करते हैं ,
रण नीति भी यह कहती है ,
निसश्त्र पे तुम ना वार करो ,
गर बैरी खुद भूले नीति ,
कर आँखें बन्द प्रहार करो ,
सच है ये गीता सार नहीं ,
ये सार तम्हें गढ़ना होगा ,
अब मुझको कुछ करना होगा ,
गम्भीर ज़रा रहना होगा,
अब मुझको कुछ करना होगा।

 

 

 

डर

डर लगता है मुझको ऐसी सच्ची झूठी बातों से ,
डर लगता है मुझको उन कसमों से और उन वादों से ,
और डर लगता है मुझको उन् सपनों से महताब से हैं ,
डर लगता है मुझको उन् अपनों के जो बस नाम के हैं ,
डर लगता है कन्धे पर उस भारी भारी बस्ते से ,
औ डर लगता है मुझको उस प्यारी सी पावन थपकी से ,
क्यों बिसर रहा खुद से करी हर इक उन् चंन्चल बातों को,
क्यों सहम गया हूँ मन ही मन जीवन के इन आघातों से ,
और क्यों न जाने कोई हो कठोर अंदर ही अंदर खेल रहा ,
क्यों काल सरीखा ये त्रिशूल सपनों को मेरे भेद रहा ,
क्यों करुणा रुपी यह बदल बस विष ही विष बरसाता है ,
क्यों सावन में भी बन पतझर यह जीवन बहता ,
ना जाने क्यों लगता है लगता है डर अपने मन का कुछ करने में ,
डर लगता है ना जाने क्यों अच्छे को अच्छा कहने में ,
डर लगता है मुझको की मैं शायद खुद को खो दूंगा ,
इस पालक झपकती दुनिया में बन संजय अब मैं रो दूंगा ।
मैं शायद खुद को खो दूंगा ……।

 

 

 

 

 

मन मोहि चंचल काया

मन मोहि चंचल काया थी
मन लूटने को तैयार भी था
मंजुल मनोज़ उन् नयनन में
मुझको सारा संसार दिखा ।

कुछ शब्द गुलाबी हूंठों को ,
छू करके शराबी हो बैठे ।
तेरी तन सुगंन्ध चहुँ ओरे है यूँ ,
मौसम बरसाती हो जैसे ।
साँसों की महक जुल्फों की घटा ,
कोई शाम सुहानी हो जैसे।
हर शब्द तेरे उपमा ,
खुद में ही कहानी हो जैसे।
ऐ हुस्न तेरी तस्वीर में ही ,
रंगों का मुझे विस्तार दिखा ।
मंजुल मनोज़ उन् नयनन में
मुझको सारा संसार दिखा ।

मेरे हर पल में बातों में तुम ,
सपनों में हो और रातों में तुम।
तुम हो मन में सु-विचारों सी ,
खुशबू सी कोई हो बागों की।
तुम हो आँगन जो की ,
मन मंदिर को सुशोभित करता है ।
तुम वो मदिरा का प्याला हो ,
जिसे पा मैकश मतवाला हो।
प्रारम्भ भी हो और अंत भी तुम ,
तम्हें देख के मन उल्लसित हो।
जिसके भी जीवन में तुम हो,
फिर और उसे क्या ख्वाहिश हो।
फिर और उसे क्या ख्वाहिश हो ……।

 

 


कैसे कह दूँ की कुछ हुआ ही नहीं

कैसे कह दूँ की कुछ हुआ ही नहीं ,
सोचता हूँ क्यों ये हुआ यूँ ही।
शाम को नींद गुम थी आंखों से,
रात सपने सज़ा के सोया था।
भोर होते ही चाँद को देखा ,
बांहों में बांहें डाले सोया था ।

आज का दिन कहीं न ढल जाये ,
ठहर जा आसमान वाले ,
ज़रा सा थम जा रे।
आज की शाम के तसवुर में ,
मैं बेबस हूँ उनके पहलू में ।
मेरी नज़रें भी कर रही हैं बगावत मुझसे ,
साँस करती हो ज़िन्दगी से अदावत जैसे।
तेरी उम्मीद में न जाने क्यों सुकूँ सा है ,
इश्क बेताश् है मुझको या फिर जुनूँ सा है ।
कोई तो बात है मैं जिसको भूलता ही नहीं ,
अभी नहीं , अभी नहीं थोड़ा ठहर ज यहीं ।

अभी खुला नहीं है उसके दिल का दरवाज़ा ,
इश्क चढ़ने लगा है मुझपे और भी ज़्यादा ।
रंग गहरा रहा है सुर्ख़ तेरे होठों का ,
साँस मरहम बानी है आज दिल की चोटों का।
आज भर जाएंगे जखम सारे ,
आज टूटेंगे ये भरम सारे ।
आज सब कुछ भुला के आया हूँ ,
मुझको उड़ने दे इन में हवाओं में।
आज कलियाँ चुरा के लाया हूँ ,
बन के खुशबू बिखर फ़िज़ाओं में ।
सुन ले ऐ आसमान वाले थोड़ा रहम करदे ,
जो है मेरा उसे तू मेरे एहतराम करदे ।
ठहर जा आज की ये दिन न फिर से आयेगा....|
आज रूठा जो मुझसे वो संगदिल ,
यकीं है फिर न लौट पायेगा ।
ठहर जा आसमां तुझको कसम है तारों की ,
आज थम ज है बात दिल के चमन बहारों कि।
ठहर जा आसमां वाले ,
ज़रा सा थम ज रे…।


घड़ी

ये कैसी घड़ी बनायीं है,
मेरे मन को जो ना भायी है ।
बस चौबीस घंन्टे हैं इसमें ,
दिन लंम्बे रात ज़रा सी है ।
ये कैसी घड़ी बनायीं है,
मेरे मन को जो ना भायी है ।

बिस्तर पर सुइयां तेज़ चले,
दफ्फ़तर में काँटा जम जाये ।
बस राम राम जपता हूँ मैं ,
शायद ये लंगड़ा चल जाये ।
कुछ न कुछ है षडयंत्र छुपा ,
किसने ये अकल लड़ाई है ।
किसने ये घड़ी बनाई है ……
मेरे मन को जो ना भायी है ।

यह कैसा खेल खिलौना है।,
सब जिसके आगे बौना है ।
कुछ न कुछ तो बदलावा करो ,
बस मेरा बेडा पार करो ।
कोई ऐसी घड़ी बनाओ तुम ,
जो चलती हो तारे गिन गिन ।
जल्दी से अब ये कर डालो ,
बस इसमें ही चतुराई है ।
किसने ये घड़ी बनाई है ……
मेरे मन को जो ना भायी है ।

खुशियों के पल छोटे करदे ,
और गम में ये विस्तार करे ।
ये सच में अपनी दुश्मन है ,
कुछ भी हो ये चलती ही रहे ।
क्यों घड़ी घड़ी घड़ियाल घड़ी ,
है मगर मगर सच्चाई है ।
किसने ये घड़ी बनाई है ……
मेरे मन को जो ना भायी है ।

ये तीन सखा मिल आपस में पकड़म पकड़ाई खेल रहे ,
हस्ते गाते हर इक पलछिन मेरे मन आनंद को भेद रहे ।
इनकी इस भागा दौड़ी में क्यों मैंने जान फसायी है ,
किसने ये घड़ी बनाई है ……
मेरे मन को जो ना भायी है ।

ये सन्नाटों में शोर करे ,
टिक टिक से मुझको बोर करे।
ये मुर्गा बांग भी देती है ,
ये चिड़िया सरस चहकती है ।
इतना कुछ इसमें कर डाला ,
कांटे निकाल नम्बर डाला ।
दीवाल से उठ ये हाथ बँधी ,
जो थी दिक्कत वो वहीँ रही ।
अब भी दिन लम्बे के लम्बे ,
अब भी मेरे मेरी रातें छोटी हैं ।
जिसने ये घड़ी बनायी है,
उसकी भी पुश्तें रोती हैं ।

 

 

 


शर्मा यु कैन लीव फॉर दा डे

कितने सपने कितने अरमान ले कर हम तेरे दर पे खड़े
और आप ने ऐसे कैसे कह दिया
शर्मा यु कैन लीव फॉर दा डे ।

थकता चेहरा बोझल आँखें कुछ तुमको दीखता ही नहीं,
मेरी मेहनत मेरा पसीना सब झूठा बस तुम ही साही।
तुम हो भूत, पिसाच, निशाचर हम भी अपनी ज़िद्द पे अड़े,
और आप ने ऐसे कैसे कह दिया
शर्मा यु कैन लीव फॉर दा डे ।

कि अरमानों पे घात लगाये बैठे थे क्यूं मेरे तुम,
भीड़ बहुत थी साब अच्छे थे तुम मेरे हाय पेले क्यूं। .
हमसे भूल हुई हैं भैया अब हम तुम्हारे पैर पड़े,
और आप ने ऐसे कैसे कह दिया,
शर्मा यु कैन लीव फॉर दा डे ।

और आज जो शर्मा चल देगा फिर मुड़ कर कभी ना आएगा,
जितना तेरा कद है ये उसपे से नींव उठाएगा ।
दोष न देना अब मुझको मैं ये कदम बढ़ता हूँ ,
अरमानों की ख़ाक जोड़ सपनों को आज सजाता हूँ ।
अब ना कोई अश्क बहेगा और ना सपना टूटेगा ,
जिसने जिसका सपना लूटा ,
ये शर्मा उसको लूटेगा.......|
 

(चित्र – रेखा श्रीवास्तव की कलाकृति)

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4041,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3005,कहानी,2255,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,541,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,96,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,345,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,67,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1249,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2006,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,709,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,794,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,84,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,205,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: आकाश शर्मा पत्थर की दस कविताएँ
आकाश शर्मा पत्थर की दस कविताएँ
http://lh4.ggpht.com/-7pQy-a2gvzk/U6psb-LC6iI/AAAAAAAAY8Y/-_3S-bN1FtE/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
http://lh4.ggpht.com/-7pQy-a2gvzk/U6psb-LC6iI/AAAAAAAAY8Y/-_3S-bN1FtE/s72-c/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/06/blog-post_25.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/06/blog-post_25.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ