विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका -  नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.
रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -

पिछले अंक

स्वप्ना नायर का आलेख -- मोहन राकेश हिन्दी नाटक का नवीन हस्ताक्षर

साझा करें:

आलेख मोहन राकेश हिन्दी नाटक का नवीन हस्ताक्षर स्वप्ना नायर, तमिलनाड़ु के कॉयम्बत्तूर करपगम विश्वविद्यालय में प्रो.(डा.) के.पी.पद्मावती ...

आलेख

मोहन राकेश

हिन्दी नाटक का नवीन हस्ताक्षर

clip_image002

स्वप्ना नायर, तमिलनाड़ु के कॉयम्बत्तूर करपगम विश्वविद्यालय में प्रो.(डा.) के.पी.पद्मावती अम्मा के मार्गदर्शन में पी.एच.डी केलिए शोधरत

हिन्दी में नाटक का विकास आधुनिक काल में हुआ था। जिसमें महान साहित्य नायक बाबु भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का स्थान सर्वोपरी है। साहित्य में ‘भारतेन्दु युग’ नामक काल को निर्मित हरिश्चन्द्र को हिन्दी नाटक के संस्थापक माना जाता है। ‘नहुष’ उनका पहला नाटक है।

हमारी नाटक परंपरा की ओर दृष्टि डालते समय प्रथम नाटककार के स्थान में रीवा नरेश विश्वनाथ सिंह का नाम आता है। उनका ‘आनन्द रघुनन्दन’ को हिन्दी का पहला मौलिक नाटक माना जाता है। हिन्दी नाटक के इतिहास को कई चरणों में विभाजित किया जा सकता है।

1. भारतेन्दु युगीन नाटक।

2. प्रसाद युगीन नाटक।

3. प्रसादोत्तर बुद्धि प्रधान नाटक।

4. प्रसादोत्तर आधुनिक बोध को निरूपित करने वाले नाटक।

भारतेन्दु युगीन नाटक

भारतेन्दु ने उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में हिन्दी गद्य का स्वरूप निश्चित करके गद्य में विभिन्न प्रकार के रचनाएँ करने का प्रारंभ किया। वे स्वयं नौ मौलिक नाटक रचे तथा आठ नाटकों के अनुवाद प्रस्तुत किए। उनका प्रसिद्ध नाटक ‘सत्यवादी हरिश्चन्द्र’ है। इस युग के नाटकों का प्रमुख आधार संस्कृत भाषा पर रचित नाटक है। एक और विशेषता यह है कि इस काल में पद्य व्रज भाषा में और गद्य खड़ीबोली में लिखते थे। मालूम होता है कि इस समय के नाटककारों ने कथापात्रों के चरित्र-चित्रण में बड़ी ध्यान नहीं दिया है।

प्रसाद कालीन नाटक

clip_image004

बीसवीं सदी के आरंभ में मौलिक नाटकों की तुलना में अनूदित नाटकों का भरमार रहा और अनुवाद के स्रोत तीन भाषाओं से रहे, अंग्रेज़ी, बँगला और संस्कृत। यह तर्क रहित बात है कि हिन्दी नाटक का उत्थान महाकवि जयशंकर प्रसाद के साथ आरंभ हुआ। प्रसाद मुख्य रूप में कवि होकर भी नाटक क्षेत्र में भी अपना प्रतिभा दिखाया बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार है। उनका पहला प्रौढ़ नाटक ‘विशाख’ है। इसके बाद अजात शत्रु, स्कन्द गुप्त, चन्द्र गुप्त, राज्य श्री और ध्रुवस्वामिनी आदि लिखे गये। प्रसाद की सबसे बड़ी देन यह है कि उन्होंने हिन्दी के साहित्यिक नाटक का पुनरुद्धार किया। वे अपने नाटकों के संवाद और चरित्र-चित्रण पर नया रूप और भाव लाया।

प्रसादोत्तर हिन्दी नाटक

लक्ष्मी नारायण मिश्र प्रसादोत्तर नाटक क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध नाटककार है। वे आरंभ में सामाजिक नाटक रचकर साहित्य रंगमंच पर पदार्पण किया। मिश्र के समय का अन्य नाटककारों में उपेन्द्रनाथ अश्क का नाम उल्लेखनीय है। सेठ गोविन्ददास भी इस ज़माने के प्रसिद्ध नाटककारों में एक है। उनके समकालीन नाटक रचयिताओं में मोहन राकेश, लक्ष्मीनारायण लाल, रमेश बख्शी तथा सुरेन्द्र वर्मा के नाम आदर के साथ लिया जाता है। इस समय के नाटकों में प्रेम, सौन्दर्य और कल्पना की जगह समसामयिक यथार्थ ने ली है और आदर्श का चौखटा टूट गया है।

मोहन राकेश

clip_image006

हिन्दी नाट्य परंपरा के एक सशक्त आवाज़ है मोहन राकेश। वास्तव में राकेश हिन्दी नाटक क्षेत्र का नयी चेहरा है। राकेश कहानीकार, उपन्यासकार, निबंधकार और कवि भी है। उनका जन्म 8 जनवरी 1925 में पंजाब के अमृतसर पर हुआ था। उनके बच्चपन का नाम ‘मदन मोहन मुगलानी’ था। वे पंजाब विश्व विद्यालय से हिन्दी और अंग्रेज़ी में एम. ए. शिक्षा पूरा करके साहित्य पर उतरे। पहले वे अध्यापक का नौकरी करता था। ‘सारिका’ के संपादक के रूप में प्रसिद्ध हुए राकेश के ‘आषाढ़ का एक दिन’ संगीत नाटक अकादमी का पुरस्कार मिला गया नाटक है। नाटकों के सिवा राकेश ने अंधेरे बंद कमरे, अन्तराल तथा न आनेवाला कल आदि उपन्यास, क्वाटर तथा अन्य कहानियाँ, पहचान तथा अन्य कहानियाँ, वारिस तथा अन्य कहानियाँ, अन्तराल, इन्सान के खंडहर, एक और ज़िन्दगी, जानवर और जानवर जैसे कहानी संग्रह भी लिखे है। ‘आखिरी चट्टान’ तक उनके यात्रा वृत्तांत है। ‘परिवेश’ उनका निबंध संग्रह और ‘मृच्छकटिक’ एवं ‘शाकुंतलम’ अनुवाद है। वे नयी कहानी आन्दोलन के वक्ता रहा था। इस कालजयी नाटककार ने सीमा रेखाओं को पार करके हिन्दी नाटक को देश-विदेश तक की व्याप्ति दे दिया। 3 जनवरी 1972 दिल्ली में राकेश का निधन हुआ। नाट्य साहित्य न केवल अपनी विकास-यात्रा में वैविध्य पूर्ण रहा है, अपितु विकास के विभिन्न चरणों में प्रयोग से प्रगति, प्रगति से नव लेखन तक फैलता चला गया है। यही कारण है कि हिन्दी नाटक की विकास यात्रा के केन्द्र में प्रसाद स्थित है तो छठे दशक में मोहन राकेश।

clip_image008

मोहन राकेश हिन्दी नाटक रास्ता के एक ज्वलित दीपस्तंभ है। ‘नाटककार और रंगमंच’ नामक लेख में राकेश अपना मनोभाव व्यक्त करता है- ‘‘रंगमंच की पूरी प्रयोग-प्रक्रिया में नाटककार केवल अभ्यागत, सम्मानित दर्शक या बाहर की इकाई बना रहे, यह स्थिति मुझे स्वीकार्य नहीं लगती। न ही यह कि नाटककार की प्रयोगशीलता उसकी अपनी अलग चार दीवारी तक सीमित रहे और क्रियात्मक रंगमंच की प्रयोगशीलता उससे दूर अपनी अलग चारदीवारी तक। इन दोनों को एक धरातल पर लाने के लिए अपेक्षित है कि नाटककार पूरी रंग-प्रक्रिया का एक अनिवार्य अंग बन सके। साथ यह भी कि वह उस प्रक्रिया को अपनी प्रयोगशीलता के ही अगले चरण के रूप में देख सके।’’ उन्हें नाटक संबन्धी विषय पर अपनी आदर्श और निष्ठा है।

राकेश का स्थान

स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी नाटक में मोहन राकेश को महत्व पूर्ण स्थान होता है। राकेश ने नाट्य-लेखन के साथ साथ नये ढंग में रंग चेतना का विकास भी किया और नाट्य समीक्षा में यह बात अहम् हो उठी कि नाटक की आलोचना पाठ्य साहित्य के प्रतिमानों की भूमिका पर उतना उचित नहीं है। मोहन राकेश मानते है कि लिखित नाटक मंचीय प्रस्तुतीकरण में नया जन्म लेता है और एक ही नाटक प्रस्तुतीकरण की भिन्नता के कारण भिन्न रूप धारण कर लेता है। उनके अनुसार नाट्य साहित्य का महत्व दूसरा है। वह है एक स्तर पर वह लिखित रचना के रूप में साहित्यिक सौन्दर्य से वलयित है और दूसरे स्तर पर वह मंचीय गुणों के कारण प्रभावी है तथा जन मानस में धर किये हुए है। उनके नाटकों में ये दोनों पक्ष प्रबल है। मोहन राकेश के नाटक संवेदना, चरित्र-सृष्टि, आधुनिकता एवं शिल्प के नये प्रतिमान को प्रस्तुत करते है। उन्होंने पूरी सफलता के साथ आधुनिक मानव और उनके संबंधों को अपने नाटकों में निरूपित किया है।

मोहन राकेश के नाटकों में आषाढ़ का एक दिन, लहरों का राजहंस और आधे-अधूरे तथा उनके अवसानोपरांत कमलेश्वर द्वारा पूरा किया ‘पैर तले की ज़मीन’ आदि सभी नाटक आधुनिक बोध के वाहक है। आषाढ़ का एक दिन का प्रकाशन 1958 में हुआ था। इसे आधुनिक हिन्दी नाटक के प्रवाह धारा का प्रथम नाटक माना जाता है। यह नाटक ऐतिहासिक clip_image010

पृष्ठभूमि पर रचित होकर भी आधुनिक लगता है। रंगमंच प्रस्तुतीकरण उनके नाटकों के शीर्षस्थ गुण है। उनकी नाट्य-भाषा निरन्तर साहित्यिकता अथवा काव्यात्मता से बोलचाल के मुहावरे में ढलती गयी है। उसमें पर्याप्त नाटकीयता एवं जीवनी शक्ति है। इतना ही नहीं, राकेश ने कथा तत्व, चरित्रांकन, वस्तु-विन्यास, अभिनेता और शिल्प को पूर्णता देने में या कहें कि उसे व्यवहारिक और स्वाभाविक बनाने में पर्याप्त श्रम किया है। नाट्य-लेखन के क्षेत्र में राकेश की परिकल्पनाएँ यथार्थ से पुष्ट, समकालीन जीवन की त्रासदी से संस्पर्शित और अस्तित्ववादी चेतना से वलयित है तो उनका शिल्प अकृत्रिम और जीवंत अवश्य है।

आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे नाटकों में मोहन राकेश ने यथार्थ परिवेश को प्रस्तुत किया है। आषाढ़ का एक दिन में उन्होंने कलाकार की सृजनात्मक प्रतिभा की समस्या को लेकर अपने विचारों को प्रस्तुत किया है। वास्तव में मोहन राकेश के चर्चित तीनों नाटक तीन बिन्दुओं से महत्वपूर्ण जीवन स्थितियों के संकेत देते है, प्रेम, विरक्ति और अधूरापन की संकेत। ये तीनों नाटक अपने आप में उपलब्धि है और मोहन राकेश की रचनात्मक प्रतिभा को उजागर करता है। इन तीनों नाटक राकेश के अमरत्व को उज्ज्वल बना देता है।

सहायक ग्रंथः-

1.हिन्दी साहित्य का इतिहास, डा. नगेन्द्र।

2.हिन्दी साहित्य का इतिहास, डा.चातक एवं प्रो.राजकुमार वर्मा।

3.नाटककार और रंगमंच, मोहन राकेश।

(Swappna Nair, Research scholar, under the guidance of Dr.K.P.Padmavathi Amma, Karpagam University,Coimbatore,Tamil Nadu)

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * || * उपन्यास *|| * हास्य-व्यंग्य * || * कविता  *|| * आलेख * || * लोककथा * || * लघुकथा * || * ग़ज़ल  *|| * संस्मरण * || * साहित्य समाचार * || * कला जगत  *|| * पाक कला * || * हास-परिहास * || * नाटक * || * बाल कथा * || * विज्ञान कथा * |* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4082,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,341,ईबुक,196,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3038,कहानी,2273,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,102,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,29,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,244,लघुकथा,1265,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,19,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,327,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2011,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,712,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,800,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,18,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,89,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,209,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: स्वप्ना नायर का आलेख -- मोहन राकेश हिन्दी नाटक का नवीन हस्ताक्षर
स्वप्ना नायर का आलेख -- मोहन राकेश हिन्दी नाटक का नवीन हस्ताक्षर
http://lh6.ggpht.com/-hdN5JkhzJ9M/U6ptfCJ36rI/AAAAAAAAY8o/SlhhjgrSVBQ/clip_image002_thumb.jpg?imgmax=800
http://lh6.ggpht.com/-hdN5JkhzJ9M/U6ptfCJ36rI/AAAAAAAAY8o/SlhhjgrSVBQ/s72-c/clip_image002_thumb.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/06/blog-post_9935.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/06/blog-post_9935.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ