सुभाष लखेड़ा के तीन व्यंग्य

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आओ ,  हम बाबा बनें ! अफ़सोस सिर्फ यही है कि यह ख्याल मुझे इतनी देर से क्यों आया ? खैर,  देर आयद दुरुस्त आयद ! आखिर, इससे पहले आता भी तो  ...

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आओहम बाबा बनें !

अफ़सोस सिर्फ यही है कि यह ख्याल मुझे इतनी देर से क्यों आया ? खैर,  देर आयद दुरुस्त आयद ! आखिर, इससे पहले आता

भी तो  मैं चाहते हुए भी बाबा न बन पाता।  दरअसल, आज मैं उम्र के जिस दौर में हूँ, हम बाबा उसी  उम्र में बन सकते हैं, पोते - पोतियों

के भी और नाती - नातिनों के भी। लेकिन मैं आपको जैसा बाबा बनने के लिए कह रहा हूँ, उसके लिए बच्चों के बच्चे नहीं अपितु अक्ल में

कच्चे कुछ ऐसे लोग चाहियें जो बिना  मेहनत किये एक सुखद जिन्दगी की तलाश में रहते हैं। ये लोग अपने देश में करोड़ों में हैं। फलस्वरूप, 

यदि आप मेरे आह्वान पर मेरे साथ बाबा बनते हैं तो लक्ष्मी कब से हमारे पाँव छूने के लिए व्यग्र है और यश कब से हमारे इंतज़ार में जूते

घिस रहा है।  आपको इन नामों से कहीं गलतफहमी न हो जाए, इसलिए आपको यह बताना जरूरी है कि जो लक्ष्मी आप सोच रहे हैं, वह तो  

हमारे पास कुछ समय बाद आयेगी। आखिर, करोड़ों का साम्राज्य कोई साल - दो साल में तो बनेगा नहीं। उसके लिए हमें सत्संग के साथ - साथ

भूमि हथियाने जैसे कुछ दूसरे उपाय भी करने पड़ेंगे। कुछ नेताओं के साथ भी तालमेल बिठाना पड़ेगा।

दरअसल, यह लक्ष्मी तो हमारी गली में रहने वाली वह लड़की है जो  किसी खांटी बाबा के आशीर्वाद से आगामी फिल्म में सलमान की हीरोइन

बनने की इच्छा पाले हुए है।  यश का भी ऐसा ही मामला है।  मैट्रिक में बड़ी मुश्किल से पास होने वाला यश कुछ वर्षों बाद सूबे का मुख्यमंत्री  

बनने के लिए आशीर्वाद चाहता है।  इधर जिन बाबाओं की दुकानें हैं, वे किसी न किसी को आशीर्वाद दे चुके हैं और यश को नए बाबा की तलाश है।

संतान की चाह रखने वाले  ऐसे दम्पतियों से भी संपर्क साधना होगा क्योंकि जो वर्तमान बाबाओं से निराश हो चुके हैं।

बहरहाल, खुशखबरी की बात है कि ऐसे लाखों लक्ष्मियाँ और यश हमारी प्रतीक्षा कर रहे हैं। और हाँ ,  मुख्य बाबा तो  मैं रहूँगा और आप

सहायक बाबा की भूमिका में रहेंगे।  आपको प्रारंभ में दिहाड़ी पर कुछ ऐसे लोग रखने हैं जो गली मोहल्लों में जाकर लोगों को बाबा  " चमत्कारी "  

की उन शक्तियों के बारे में बताएँगे जो उन्होंने आठ वर्षों तक हिमालय पर जाकर साधी हैं।  हाँ, बाबा चमत्कारी मेरा ही नाम होगा और एक बार

यह प्रक्रिया शुरू हो गयी तो समझो फिर  अपने आप भक्तों की संख्या में इजाफा होता जाएगा । तो फिर हाँ बोलो और शुरू हो जाओ। वैसे भी एक

बाबा का स्थान खाली होने वाला है।  

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कलयुगी महाभारत 
                                                                                   

अवकाश के क्षणों में सत्यभामा जी ने भगवान श्री कृष्ण से पूछ लिया - प्रभु, कलयुग में महाभारत हुआ तो उसमें कौन जीतेगा ?
भगवान ने मुस्कराते हुए कहा - प्रिय, कलयुग कागजी शेरों का जमाना होगा। इसमें अपने को शेर मानने वाले योद्धा अपने चारों तरफ

सुरक्षा घेरा बनाकर युद्ध क्षेत्र में उतरेंगे। यह युद्ध भी कागजी होगा और यह मैदानों के बजाय स्कूल - कॉलेज के भवनों, पंचायत घरों और

अन्य दूसरे सरकारी भवनों में होगा। ऐसे सभी युद्धों में सर गिने जायेंगे। इसलिए ऐसे युद्धों में तब कौरव ही जीतेंगे। बाणों की जगह बटन

दबेंगे और जिसके नाम के बटन को ज्यादा लोग दबाएंगे, वही विजयी माना जायेगा। पाण्डव तो पांच होंगे और कौरव सौ होंगे। मेरी सेना

भी कौरवों के साथ होगी। मैं पाण्डवों के साथ रहूंगा लेकिन मेरा वोट तो एक ही गिना जायेगा।
यह सुनकर सत्यभामा जी खिन्न स्वर में बोली - तो क्या आप पाण्डवों की मदद नहीं करेंगे ?
भगवान हँसते हुए बोले - सत्यभामा जी, आप यूं दुखी न हों। यह सब तो मेरी लीला है। द्वापर के पांडवों को तो मोक्ष प्राप्त हो गया था।

दरअसल, ये सभी कौरव हैं किन्तु ये जनता को बरगलाने के लिए नकली महाभारत खेल रहे हैं। चुनाव जीतने के बाद ये सब एक - दूसरे

की मदद करते हैं। कलयुग में यही होना है। जनता इस युग में कष्ट भोगने के लिए अभिशप्त है।

   " प्रभु ! आपकी लीला आप ही जानें। " यह कहने के बाद सत्यभामा जी निरीह भारतीय जनता के लिए प्रार्थना करने लगी।
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भ्रष्टाचार पर  सोचते हुए !

 

आजकल दिमाग अक्सर भ्रष्टाचार पर स्वयं सोचने लगता है दरअसल, दिमाग पिछले कुछ वर्षों में लगातार इसी विषय पर अन्ना, रामदेव,
केजरीवाल, मोदी और कहीं वे नाराज न हो जायें तो आडवाणी जी के विचार सुनता रहा है। इसके अलावा स्वयं भ्रष्टाचार में संलिप्त अन्य दूसरे नेता
भी इस विषय पर अपनी राय व्यक्त करते रहे हैं। भ्रष्टाचार का सर्वाधिक  सुंदर नख - शिख वर्णन करने में वे माहिर होते हैं क्योंकि वे भ्रष्टाचार की
वजह से ही पैदा हुए लगते हैं। हमारे टीवी से जुड़े मीडिया कर्मियों का तो यह प्रिय विषय है। वे अपने चैनलों में नियमित रूप से एक सफ़ेद दाड़ी वाले
को, एक गंजे युवा को और  अपने कुछ ऐसे परिचितों को बुलाकर इस विषय पर बहस कराते हैं जिनका खुद का दामन जगह - जगह दागी प्रतीत होता है।

खैर, आज रात से दिमाग शायद सोते समय भी इसी विषय पर सोचता रहा क्योंकि मैं सपने में एक ऐसे नेता की प्रशंसा में कविता पाठ कर रहा था

जिनके कुछ किस्म के भ्रष्टाचारों से उनकी वह पत्नी भी परेशान है जिसने नेता जी से कहकर अपने सभी भाइयों को कई नगरों में करोड़ों के प्लाट लाखों में
दिलाये और अपने लिए भी विदेशी बैंकों में भारी धन राशि जमा कराई है। बहरहाल, दिमाग का क्या ? वह अब बगावत कर चुका है। वह आज उस भ्रष्टाचार
के बारे में सोच रहा है जिसे करोड़ों रुपये के एवज में वे लोग करते हैं जिन्हें इस देश के लोग अपना नायक - नायिका मानने के भ्रम में फंसे हुए हैं। यह भ्रष्टाचार
विभिन्न उत्पादों के विज्ञापन से जुड़ा हुआ है।

दिमाग का मानना है कि यदि आपने किसी पदार्थ को कभी भी इस्तेमाल नहीं किया है और न आपने उसके बारे में कोई जांच - पड़ताल की है तो फिर
आप किस हक़ से उसे आमजन को इस्तेमाल करने को कहते हैं ? हमारे देश में फिल्मों सहित विभिन्न क्षेत्रों में चोटी पर पहुंचे नायक - नायिकाएं सभी ऐसे
उत्पादों की तारीफ़ में विज्ञापनों में कसीदे काढ़ते नजर आते हैं जिनको उन्होंने कभी भी इस्तेमाल नहीं किया है और न भविष्य में करेंगे। हमारी फ़िल्मी नायिकाएं
जिन साबुनों के विज्ञापनों से करोड़ों कमाती हैं, उनका इस्तेमाल वे सिर्फ तस्वीर खिंचवाने के दौरान करती हैं। हमारे जो फ़िल्मी नायक गर्भवती महिलाओं को
ऐसे विज्ञापनों में सलाह - मशविरा देते हैं, वे अपने लिए बच्चे किराए की कोख से पैदा करवाते हैं। हमारे कुछ नायक जिन्हें कुछ लोग  भगवान का दर्ज तक
देते हैं, वे तेल - तौलियों के विज्ञापनों में नजर आते हैं। इनमें ऐसे लोग भी हैं जो सिर्फ अपने उत्पादों पर भरोसा रखते हैं, शेष सभी उन्हें लूटेरे नजर आते हैं।

मेरा दिमाग मेरे से ही पूछ रहा है कि क्या यह भ्रष्टाचार नहीं है। मैंने किसी का नाम नहीं लूंगा जबकि दिमाग मुझे लगातार उनका नाम लेकर परेशान कर
रहा है। उनके नाम आप सभी जानते हैं। अ से  लेकर ज्ञ तक, आप सभी के विज्ञापन देखते आये हैं। दिमाग तो सिर्फ आप से आपकी राय जानना चाहता है।
आखिर, जिस तेल या साबुन को वे खुद इस्तेमाल नहीं करते, उसे हमें लगाने को क्यों कहते हैं ? दिमाग परेशान है। उसे यह भी मिड -डे मील जैसा भ्रष्टाचार
लगता है क्योंकि ये सब वे पैसा बनाने के लिए करते हैं, जनता को सही मार्ग दर्शन देने के लिए नहीं !

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- सुभाष लखेड़ा, सी - 180 , सिद्धार्थ कुंज, सेक्टर - 7, प्लाट नंबर - 17, नई दिल्ली - 110075           

नाम

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श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: सुभाष लखेड़ा के तीन व्यंग्य
सुभाष लखेड़ा के तीन व्यंग्य
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