वीरेन्द्र सरल का व्यंग्य - जनम-जनम का साथ है…

SHARE:

व्‍यंग्‍य जनम-जनम का साथ है वीरेन्‍द्र ‘सरल‘ लोग बताते है कि इस धरा-धाम पर उसका अवतरण मोबाइल धारण किये हुये ही हुआ था। इसी कारण उसकी सुबह ...

व्‍यंग्‍य

जनम-जनम का साथ है

image

वीरेन्‍द्र ‘सरल‘

लोग बताते है कि इस धरा-धाम पर उसका अवतरण मोबाइल धारण किये हुये ही हुआ था। इसी कारण उसकी सुबह ‘ऊँ मोबाइलाय नमः‘ की जाप से शुरू होती और रात में वह ‘गुडनाइट माय डियर मोबाइल‘ कहने के बाद ही बिस्‍तर पर जाता। कभी मोबाइल के बिगड़ जाने पर वह इतना दुःखी होता है, जितना अपने छोटे बच्‍चे के बीमार हो जाने पर या अपने पिताजी के दुर्घटनाग्रस्‍त हो जाने पर भी नहीं होता। कभी नेटवर्क प्राब्‍लम के कारण यदि उसकी किसी से बात नहीं हो पाती तो वह पंख कटी मुर्गी की तरह फड़फड़ाने लगता। दिन में व्‍यस्‍त सड़क पर चलते समय उसकी नजर हमेशा रास्‍ते से ज्‍यादा मोबाइल के स्‍क्रीन पर होती है। औेर ऊंगलियां बटनों से अठखेलियाँ करती रहती है। बाइक या चार पहिया चलाते समय उसका यह उत्‍साह कई गुणा बढ़ जाता है। जिन्‍दगी को भगवान भरोसे छोड़कर वह पूरा ध्‍यान हर पल अपने मोबाइल पर देता था। वह पुनर्जन्‍म के सिद्धांत को मानने वाला आदमी है, उसका कहना है कि जिन्‍दगी दोबारा मिल सकती है पर मोबाइल? मोबाइल के नाम पर सिर पर कफन बाँधकर गाड़ी चलाने वाले उस आदमी की वीरता देख लोग दाँतों तले ऊंगलिया दबा लिया करते हैं।

उसकी वीरता देख पुलिस वाले कई बार उसे सम्‍मानित भी करना चाहते थे। पर वह पुलिस वाले के हाथों सम्‍मानित नहीं होना चाहता था। वह उन्‍हें देख ऐसे बिदकता था, जैसे लाल कपड़े को देखकर साँड़। फिर वह अपनी गाड़ी ऐसे दौड़ाता था। जैसे कोई बिना लगाम का घोड़ा। पुलिस वाले हर बार उसे सम्‍मानित करने से चूक जाते और हाथ मलते रह जाते। उस आदमी के हाव-भाव देखकर ऐसा लगता था कि जैसे कोई फकीराना अंदाज में गा रहा हो, ‘मन लागो यार मोबाइल में ‘।

अन्‍ततः उसकी वीरता का समाचार यमलोक तक पहुँच गया। यमराज उसके दर्शन के लिये व्‍याकुल हो गये। उसे स्‍वयं उस बहादुर को सम्‍मानित करने के लिये यहाँ असमय ही प्रकट होना पड़ा। हुआ कुछ यूँ था कि एक दिन वह अपने मोबाइल पर किसी से बात करते हुये फुलस्‍पीड में गाड़ी चला रहा था। बातों में वह इतना मशगूल हो गया था कि उसे आगे-पीछे का कुछ भी ध्‍यान नहीं था। दिख रहा था तो सिर्फ मोबाइल का स्‍क्रीन, जैसे महाभारत में द्रोपदी स्‍वयंबर के समय अर्जुन को सिर्फ मछली की आँख दिखाई दे रही थी। अचानक हवा का एक झोंका आया और उसका प्राणों से प्‍यारा मोबाइल उसके हाथ से छूटकर व्‍यस्‍त सड़क के बीच में जा गिरा। मोबाइल को जरा-सा भी खरोंच ना आ जाये, यह सोचकर उसने तुरन्‍त अपनी बाइक फिल्‍मी हीरो के स्‍टाइल में मोड़ी और मोबाइल को उठाने के लिये झुका। तभी एक ट्रक उसे रौंदते हुये निकल गया।

यमराज बांहे फैलाये कह रहा था कि धन्‍य हैं आप, आपकी वीरता देख मेरी आँखे धन्‍य हो गईं। यह मेरा परम सौभाग्‍य है कि आप मेरे कार्यकाल में स्‍वर्गारोहण कर रहे है। आइये, जल्‍दी चलिये यमलोक में आपके स्‍वागत की तैयारी बड़ी जोर-शोर से चल रही है।

मरकर जिन्‍दगी के कव्‍हरेज क्षेत्र से बाहर हो जाने के बाद भी उसका जीव मोबाइल पर किसी से बात करने की कोशिश कर रहा था। जिसे देख यमराज मुस्‍कुराते हुये बोला-‘‘अरे! अब तो इसे छोडि़ये महाशय, जल्‍दी चलिये देर हो रही है।‘‘ उसने झुंझलाकर यमराज को झिड़कते हुये कहा-‘‘अरे चुप रहो यार, दो मिनट घरवालों से बात तो कर लेने दो। तुम्‍हें जल्‍दी पड़ी है तो जाओ, अपना पता ठिकाना छोड़ दो, मैं आराम से आ जाऊँगा, ओ के। दो मिनट रूक भी नहीं सकते, कहीं भागे थोड़े ही जा रहा हूँ।‘‘ यमराज को अपना-सा मुँह लेकर रह जाना पड़ा और वह अपने मोबाइल में व्‍यस्‍त हो गया।

इधर घटना स्‍थल पर भीड़ बढ़ गई थी। पुलिस के सिपाही, पत्रकार, फोटोग्राफर सब आ गये थे। भीड़ हटाई जा रही थी, फोटो खींचे जा रहे थे। तभी एक सिपाही के मोबाइल का रिंगटोन बजा। उसने कॉल रिसीव करने से पहले मोबाइल का स्‍क्रीन देखा, एक अनजाना और नया नम्‍बर था। उसने कॉल रिसीव करते हुये पुलिसिया अंदाज मे कहा-‘‘कौन है बे?‘‘ जवाब मिला-‘‘साहब मैं बोल रहा हूँ, देख नही रहे हैं? अरे! साहब मैं आपके सामने मरा हुआ पडा हूँ और इधर यमराज के साथ खड़ा हूँ। मैंने तो आपको यह बताने के लिये फोन किया है कि आप उस ट्रक वाले को छोड़ दीजिये, उसकी कोई गलती नहीं है। मैं तो स्‍वयं अपने मोबाइल के साथ सती हुआ हूँ। ट्रक चालक और उसके मालिक को नाहक परेशान ना किया जाय। सर, आपके साथ जो पत्रकार बंधु है कृपा करके उन्‍हें भी मेरा यह संदेश सुना दीजिये ताकि वे जनहित में इसे प्रकाशित कर सके। और हाँ एक बात और, मेरी यह अंतिम इच्‍छा मेरे घरवालों को भी बता दीजिये कि जब मेरी शव यात्रा निकाले तो मेरे दोनों हाथ कफन से बाहर रखे और मेरे एक हाथ में एक लेटेस्‍ट मॉडल का मोबाइल जरूर पकड़ा दें। जिससे लोगों को पता चले कि इस नश्‍वर संसार में आदमी के साथ मोबाइल के सिवा और कुछ भी नहीं जाता। साथ-ही -साथ, समय-समय पर मेरे मोबाइल को यहीं से रिचार्ज भी कराते रहें, पता नही स्‍वर्ग में ये सब सुविधा है या नहीं। ‘‘

ये सब सुनकर सिपाही का दिल धक-धक करने लगा। बड़ी मुश्‍किल से उसने अपने आप को सम्‍हाला। आवश्‍यक कार्यवाही के बाद मृतक के शव को पोस्‍टमार्टम के लिये डॉक्‍टरों को सौप दिया गया। कुछ समय बाद डॉक्‍टर चीरघर में शव का पोस्‍टमार्टम करने लगे।

पोस्‍टमार्टम के दौरान शव के सीने मे कम्‍पन होने लगा। स्‍वीपर शेयर बाजार की तरह उछल पड़ा। स्‍वीपर बोला-‘‘सर! लगता है, आपका मोबाइल बज रहा है। शायद किसी का फोन आया है?‘‘ डाक्‍टर ने उसे डपटते हुये कहा-‘‘बकवास बंद करो, चुपचाप अपना काम करो। मैं अपना मोबाइल घर पर छोड़ आया हूँ और तुम्‍हारा मोबाइल अस्‍पताल में पड़ा है फिर यहाँ किसका मोबाइल बजेगा? शायद तुमने सिपाही की बात सुन रखी है तभी डर के मारे अनाप-शनाप बके जा रहे हो।‘‘ स्‍वीपर चुपचाप काम करने लगा। कुछ समय बाद वहाँ फिर मोबाइल का रिंग-टोन जोर-जोर से बजने लगा। ‘छोड़ेंगे ना हम तेरा साथ वो साथी मरते दम तक, मरते दम नहीं, सात जनम तक, सात जनम नहीं जनम जनम तक।‘

अब तो डॉक्‍टर के भी कान खड़े हो गये। वे सावधानी से मौका मुआयना करने लगे। उसका ब्‍लडप्रेशर पेट्रोल के दाम की तरह बढ़ने लगा। लेकिन उसने हिम्‍मत से काम लेते हुये कहा-‘‘लगता है इसके जेब मे मोबाइल पड़ा है। जेब टटोलकर तो देखो जरा।‘‘ स्‍वीपर ने डरते हुये कहा-‘‘सर, इसके कपड़े तो पहले से ही उतारे जा चुके हैं। जब कपड़े ही नहीं पहने हैं तो जेब कहाँ से होगी।‘‘ डाक्‍टर माथे पर छलक आये पसीने को पोछते हुये कहा-‘‘बात तो तुम सही कह रहे हो पर कम्‍पन तो सीने में ही हो रहा है। जरा सीने का विच्‍छेदन करके तो देखो।‘‘ डॉक्‍टर के इशारे पर सीने का विच्‍छेदन करके देखा गया। तो दोनों यह देखकर दंग रह गये कि शव के हृदय में मोबाइल की मनोहर छवि बसी थी। तस्‍वीर एकदम स्‍पष्‍ट थी। रिंगटोन उसी तस्‍वीर से बज रहा था और कम्‍पन भी वहीं से हो रहा था। दोनों उस महान मोबाइल प्रेमी को मन-ही-मन प्रणाम करते हुये कहने लगे-‘‘अहो भाग्‍य, हमारा जन्‍म सफल हो गया आपके दर्शन लाभ पाकर। धन्‍य हैं हम जो हमें आपके दिल के भीतर झाँकने का सौभाग्‍य मिला, मोबाइल आपकी आत्‍मा को शांति प्रदान करे।‘‘

पोस्‍टमार्टम के पश्‍चात उसके शव को परिजनों को सौंप दिया गया। उसकी अंतिम इच्‍छा का सम्‍मान करते हुये उनके परिजनों ने उसे अंतिम बिदाई देते समय उसके हाथ कफन से बाहर निकाल कर रखे थे और उसके एक हाथ पर मोबाइल भी रखा गया था। परिजन बिलख-बिलख कर रो रहे थे। लेकिन उसके चेहरे पर असीम शांति के भाव थे और होठों पर मधुर मुस्‍कान। ऐसा लग रहा था कि उसकी आत्‍मा मोबाइल में समाहित हो गई हो। तभी उसके मोबाइल का रिंगटोन फिर बजने लगा। जिसमे गाना आ रहा था, ‘जनम-जनम का साथ है हमारा तुम्‍हारा, अगर न मिलते इस जीवन में तो लेते जनम दोबारा ‘।

----

 

वीरेन्‍द्र सरल

बोड़रा

पोष्‍ट-भोथीडीह ,व्‍हाया-मगरलोड़

जिला-धमतरी ,छ ग

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: वीरेन्द्र सरल का व्यंग्य - जनम-जनम का साथ है…
वीरेन्द्र सरल का व्यंग्य - जनम-जनम का साथ है…
http://lh4.ggpht.com/-YUvMArlmVCk/U9Tf1DR7fvI/AAAAAAAAZxw/HsI15f6lHDA/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
http://lh4.ggpht.com/-YUvMArlmVCk/U9Tf1DR7fvI/AAAAAAAAZxw/HsI15f6lHDA/s72-c/image_thumb%25255B1%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/07/blog-post_88.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/07/blog-post_88.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content