---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

शशिकांत सिंह 'शशि' का व्यंग्य - दो कुत्तों की कथा

साझा करें:

दो कुत्‍तों की कथा एक कुत्‍ता देशी था दूसरा विदेशी । दोनों एक ही तरह भौंकते थे । गुर्राते थे । काटने में फर्क रहा होगा लेकिन उसे जानने का इ...

दो कुत्‍तों की कथा

एक कुत्‍ता देशी था दूसरा विदेशी । दोनों एक ही तरह भौंकते थे । गुर्राते थे । काटने में फर्क रहा होगा लेकिन उसे जानने का इस खाकसार को मौका ही नहीं मिला । दोनों पूंछ हिलाते थे और अगली दोनों टांगों पर खड़े होकर मालिक का सत्‍कार करते थे । दोनों की मां अलग-अलग थी लेकिन उनकी दोस्‍ती गंदे नाले के किनारे हुई थी । गंदें नाले के किनारे दोनों पिल्‍लावस्‍था में कूं...कूं.... करते हुये मिले थे । उनकी माएं न जाने किन मजबूरियों में उन्‍हें छोड़ गई थीं । आदमी की माएं तो अनब्‍याही होने के कारण छोड़ जाती हैं। कभी-कभी कन्‍या बालिका होने के कारण भी मांए छोड़ जाती हैं। ये दोनों ही शर्त्‍तें यहां लागू नहीं होतीं क्‍योंकि विवाह की परंपरा अभी तक कुत्‍तों ने अपने यहां शुरू नहीं की है। उनके समाज में लिंगभेद भी नहीं है। हो सकता है कि धोखे से दोनों छूट गये हों लेकिन अभी कूं...कूं करते तीन दिन ही हुये थे कि एक पारखी आदमी की नजर कुत्‍तों पर पड़ गई। वह विदेशी कुत्‍ते का उठाकर ले गया । देशी अपनी बारी के इंतजार मेंं आज भी उसी गंदे नाले के किनारे कूं....कूं करता है।

विदेशी कुत्‍ते को ले जाकर उसके मालिक को जो खुशी मिली उसकी तुलना कुबेर की दौलत मिलने से ही की जा सकती है। वह उसे गले लगाकर नाच रहा था । उसने ले जाकर उसे महंगे वाले साबुन से नहलाया । एक नौकर से कहकर उसके लिए बाजार से गोश्‍त मंगवाया । कुत्‍ते ने जीवन में पहली बार गोश्‍त का आनंद लिया । उसका मन मयूर नाच उठा । उसने जोर से भौं.....भौं की । उसकी आवाज ही बदल गई । कहां कल तक वह कूं....कूं किया करता था । अब भौं-भौं करने लगा । देशी कुत्‍ता भी उनके पीछे-पीछे ही आया था लेकिन उसे अंदर नहीं आने दिया गया । वह हैरान था कि एक ही गंदे नाले से उठाये गये दो कुत्‍तों में यह वर्ग भेद किस लिए । यह उसके साथ क्‍या हो रहा है ? वह दरवाजे के बाहर ही बैठ गया । उसने भी तय कर लिया कि महलों वालों को सोने नहीं देगा । जब सबलोग आराम से सो जाते तो वह उच्‍च स्‍वर में रोने लगता। मालिक की नींद में खलल पड़ती और चौकीदार को डांट पड़ती । चौकीदार लाठी लेकर दौड़ता लेकिन गली के कुत्‍ते को पकड़ना इतना आसान काम नहीं था । विदेशी कुत्‍ते के अच्‍छे दिन आ गये थे । उसे नहलाने के लिए दो नौकर थे जो उसे रोज गर्म पानी से बाथ कराते थे । डॉग सोप लाया गया था । डॉग फूड लाकर उसे प्‍यार से पकाने के लिए महाराज था । उसका काम वैसे तो घर भर के लिए खाना पकाना था लेकिन डॉग के लिए विश्‍ोष व्‍यवस्‍था करता था । कहने की जरूरत नहीं कि वह कुत्‍ता अब डॉगी के नाम से जाना जाने लगा। यह कुत्‍ता कुत्‍ता ही रह गया ।

डॉगी के कुछ कोड अॉफ कंडक्‍ट भी थे । जब कोई मेहमान घर में आता तो मालिक उससे अंग्रेजी में बात करता था । पहले पहल तो उसे अंग्रेजी समझ में नहीं आई । बाद में उसने अनुमान से काम करना शुरू कर दिया । 'डॉट बार्क' मतलब भौंकना अभी नहीं है। बाद में जितना चाहे भौंक लो । 'सिट' मतलब बैठना । 'जम्‍प' मतलब कूदना । अर्थात वह पढ़ा-लिखा विदेशी डॉगी हो गया । अचानक एक दिन उसे पता चला कि उसकी नश्‍ल जर्मनी की है। उसका मालिक किसी मेहमान से परिचय करा रहा था कि डॉगी जर्मन नश्‍ल का है। सुबह होते ही डॉगी को उठा दिया जाता । रामु नाम का नौकर उसे बाहर ले जाकर पॉटी कराता था । युरिन भी वह बाहर ही करता । रामु करा दिया करता था । धीरे-धीरे अभ्‍यासवश उसे रामु को देखकर ही युरिन आने लगा । पौटी इत्‍यादि से निपट कर वह अपने मालिक के साथ गेट से बाहर जाता । तब उसे अपार खुशी होती । ताजी हवा में अपने मालिक के आगे वह दौड़ता चलता था । कद भी उसका काफी बड़ा हो गया था । यह कहना कठिन था कि कौन किसको लेकर जा रहा है। डॉगी मालिक को या मालिक डॉगी को । डॉगी के गले में एक महंगी बेल्‍ट थी जो शाायद इपोर्टेड चमड़े की थी । वह आम बोलचाल की भाषा में पट्टा कहलाता है । एक चेन थी जिसपर सोने का पानी चढ़ा था । डॉगी इन दो चीजों को देखकर बहुत खुश रहता था । दूसरे कुत्‍ताों के पास इतनी महंगी बेल्‍ट और चेन नहीं थे । उसकी खुशी का तब ठिकाना नहीं होता था जब एक लंबी सी कार में बिठाकर उसकी मालकिन उसे बाजार ले जाती थी । उसके लिए गेट खोलती । उसका चेन हाथ में लेकर दुकानों में जाती । उसके आनंद की सीमा नहीं थी । मालकिन उसे अपनी सहेलियों को दिखाती थी । वह झूम-झूम कर उनके कदम चूमता और दुम हिलाता ।

उधर देशी कुत्‍ता अपने चाल-चलन के कारण मार खाता और लोगों की दुत्‍कार सहता । उसकी सबसे बड़ी खराबी थी कि उसे भूख लगती थी । उसे खिलाने वाला तो कोई थो नहीं सो वह चोरी करने लगा । चोरी करने के दौरान उसने एक दो लोगों को काट भी लिया । उसे घर में ही घेरकर मारने की योजना बनाई जा रही थी । उसे घर में घेर भी दिया गया लेकिन वह दो चार लोगों को काट कर भाग आया । यानी वह काटना सीख गया । उसका सीना गर्व से चौड़ा हो गया । वह किसी को खाने-पीने का सामान ले जाते देखता तो जोर से गुर्राता । ले जाने वाला यदि डर गया तो फेंक कर भाग जाता । उसने अपना ठिकाना शुरू में तो एक पुलिया के नीचे ही बनाया था लेकिन बाद में वह मंदिर के बाहर बैठने लगा । वहीं भिखारी लोग भी रहते थे । उसे यह देखकर बहुत आश्‍चर्य होता कि आदमी भी खाने के लिए हाथ फैलाता है। कम से कम उसे हाथ तो नहीं फैलाना पड़ता था । उसका तो मालिक भी कोई नहीं था । उसे दुम भी हिलाने की जरूरत नहीं पड़ती थी । वह बागी हो गया । उसे काटने की आदत हो गई । वह उम्‍मीद तो यही करता था कि भगवान के लिए ले जाने वाले प्रसाद में से उसे भी दिया जाये लेकिन ऐसा होता नहीं था । भगवान खाते नहीं हैं फिर भी उनके लिए लोग ले जाते थे । वह खाता था फिर भी उसे देने वाला कोई नहीं था । उसके काटने की ख्‍याति बड़ी तेजी से फैलने लगी । लोग सरकार को गालियां देने लगे जो कुत्‍तों पर नियंत्रण नहीं रखती । कुत्‍तों ने देश का चैन और हराम दोनों छीन लिया है। भक्‍तों की एक टोली तो एक शिष्‍टमंडल लेकर जिला कल्‍क्‍टर के पास भी गई । पुलिस उस आवारा कुत्‍ते को खोजने लगी । वह भागा-भागा घुमता । उसे भूख फिर भी लग जाती । वह बहुत कोशिश करता था कि इधर-उधर फेंकी गई सामग्री से ही उसका काम चल जाये लेकिन ऐसा हो नहीं पता था। भूख लगने पर वह भूल जाता कि लोग उसके दुश्‍मन हो गये हैं। वह गुर्राता-काटता और माल छीनकर भाग जाता ।

डॉग के अच्‍छे दिन बहुत अधिक दिन नहीं रहे । उसकी उम्र बढ़ रही थी । अब पहले की तरह चपलता उसमें नहीं रही । वह उतनी जल्‍दी दुम नहीं हिला पाता था । उसकी गुर्राहट में भी अब पहले वाली खनक नहीं रही । देह ढ़लने लगी । मालिक ने एक नया सुंदर , छबरैला पिल्‍ला खरीद लिया । उसकी मेहमानवाजी दिन-रात होने लगी । इसको कभी कोई एक रोटी दे न दे । जंजीर से बंधे बंधाये डॉगी की हालत खराब होने लगी । वह गुस्‍से में रहता । इतने दुलार के बाद यह अपमान !! एक दिन उसने उस नये पिल्‍ले को काट खाया । पिल्‍ला मर गया । मालिक को पांच हजार का नुकसान हो गया । उसने डॉग को मार कर घर से निकाल दिया । वह भूखा-प्‍यासा पुलिया के किनारे बैठा था । उधर कुत्‍ता भी लोगों और नगरपलिका की गाड़ी से बचता बचाता वहीं आकर बैठ गया । उसने डॉगी को पहचान लिया क्‍योंकि उसने बचपन से ही उस पर नजर रखी थी । बाद दुआ सलाम के जो वार्त्‍ता हुई वह इस प्रकार थी -

-' आदमी बहुत स्‍वार्थी जानवर होता है। उसे केवल अपनी खुशी से मतलब है। '

डॉग ने फिलासफी दी ।

-' हां , ये बात तो है लेकिन हमें भी रोटी के लिए अपनी आजादी दाव पर नहीं लगा देनी चाहिए । तुम्‍हारा नाम डॉग हो या श्‍ोरू रहोगे तो कुत्‍ते ही । उससे अच्‍छा तो मैं हूं कि बचपन से आजतक कुत्‍ता ही हूं । '

-'..........................- पर तुम्‍हें भी तो समाज का दुश्‍मन माना जाता है। सब तुम्‍हारी जान के पीछे पड़े हैं। मेरी समझ में नहीं आता कि तुममे और मुझमें फर्क क्‍या है ? ' डॉग ने फिर दर्शन बघारा ।

-' सीधी बात है। तुम्‍हारे चमड़े का रंग मुझसे नहीं मिलता । मेरे पास तुम्‍हारी तरह बाल नहीं है। तुम बचपन में कितने रोबीले दिखते थे । मैं मरियल सा था । '

-' हां.....................पर भौंकने, गुर्राने, और काटने में तो तुम मुझपर बीस ही पड़ोगे । '

-' आदमी अंदर की नहीं बाहर की चमक देखते हैं। उन्‍हें आपस में भी इन्‍हीं बातों पर लड़ने की आदत है। हम तो फिर भी कुत्‍ते हैं ।

 

शशिकांत सिंह 'शशि'

जवाहर नवोदय विद्यालय , शंकरनगर, नांदेड़ महाराष्‍ट्र 421736

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4017,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,111,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2983,कहानी,2237,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,533,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,94,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,344,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,66,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,14,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1243,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2002,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,705,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,790,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,16,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,79,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,200,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: शशिकांत सिंह 'शशि' का व्यंग्य - दो कुत्तों की कथा
शशिकांत सिंह 'शशि' का व्यंग्य - दो कुत्तों की कथा
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/08/blog-post_70.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/08/blog-post_70.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ