विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका -  नाका। प्रकाशनार्थ रचनाएँ इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी इस पेज पर [लिंक] देखें.
रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -

पिछले अंक

इस्माइल खान की कहानी - ममदू

साझा करें:

ममदू ममदू की माँ थैला झटक कर खाली करते हुए ममदू पर झल्‍लाई-कितनी बार तुझ से कहा है कि सिर्फ पन्‍नी ही बीन कर लाया कर, ये ढेर सारे कागज़ क्‍...

ममदू

image

ममदू की माँ थैला झटक कर खाली करते हुए ममदू पर झल्‍लाई-कितनी बार तुझ से कहा है कि सिर्फ पन्‍नी ही बीन कर लाया कर, ये ढेर सारे कागज़ क्‍यों भर लाता है। वो इब्राहिम पन्‍नी वाला सब छाँट-छाँट कर कागज़ अलग कर देता है, फिर तौलता है। जितना बोझ ढो कर लाता है उसमें तीन चार किलो ही पन्‍नी निकल पाती है, बाकी कागज़ का ढेर......। क्‍या फायदा ऐसी मेहनत का ? रोज़ मना करती हूँ पर मानता ही नहीं नासमिटा। अगर ढंग से बीने तो किलो दो किलो पन्‍नी तो और हो ही जाय, पर न जाने क्‍या धुन में रहता है यह लड़का....... ! छः सात साल का ममदू मुजरिम बना नीची निगाह किये माँ का उलाहना सुनता रहता चुपचाप। उसके मन में क्‍या चलता है, इससे किसी को क्‍या सरोकार। उसकी माँ के दिमाग़ में तो दो वक्‍त की रोटी की जुगाड़ के सिवाय कुछ आता ही कहाँ है। आज की साँसे खत्‍म हो रही है तो कल जीने की चिन्‍ता उसे दो रोटी के गोल चक्‍कर से बाहर निकलने ही नहीं देती। रोज सुबह वह भी काम पर निकल जाती और ममदू बड़ा सा मैला कुचैला थैला लेकर निकल जाता शहर की गन्‍दी और बदबूदार जगहों की सैर करने। उसकी मजबूर जगहें, गन्‍दी नालियाँ, नगर पालिका द्वारा जगह जगह रखे गये कचरे के डिब्‍बे, अस्‍पताल, सड़क किनारे लगी चाय की होटलें और उन बिल्‍डिंगों के आसपास जहाँ बेशउर लोग कचरा अपनी खिड़कियों से बाहर उछाल देते हैं। यही तो वे जगहें है जहाँ से ममदू के पेट की ज्‍वाला को ईंधन मिलता है। इन जगहों से घूमते-घूमते कभी-कभी उसका गुज़र अम्‍बेडकर स्‍कूल के सामने से भी हो जाता, जहाँ उसकी उम्र के बच्‍चे पढ़ते है। संयोग से कभी कभी उस वक्‍त बच्‍चों की खाने की छुट्टी होती। स्‍कूल के मैदान में घने नीम के पेड़ की छाँव में बच्‍चे अपने अपने टिफिन से खाना खा रहे होते, तो कोई भाग दौड़, खेल में व्‍यस्‍त रहते। बाल सुलभ ममदू अपने तन पर मैली चीथड़े हुई कमीज़ लटकाये, कन्‍धे पर कचरे का थैला लटकाये, स्‍कूल की बाउन्‍ड्री वाल के पास खड़ा हो जाता। कम ऊँची बाउन्‍ड्री वाल पर लगी मोटे तार की बड़े-बड़े चौकोर छेद वाली जाली से ममदू को अन्‍दर का सब नज़ारा दिखाई देता। अपने काम से बेखबर ममदू उन बच्‍चों को निहारने लगता। उसके मैल से काले पड़े चहरे पर दिव्‍य मुस्‍कान बिखरने लगती। काले चेहरे पर उसके पीले दाँत और उभर कर चमकने लगते। वह मन ही मन कुछ सोचता फिर आगे बढ़ जाता। उस मासूम के मन के भाव कोई क्‍या जाने! थोड़े आगे एक कम्‍प्‍युटर टायपिंग, फोटोकापी, लेमिनेशन, फेक्‍स और न जाने क्‍या-क्‍या काम की दुकान आती। सुबह-सुबह दुकान वाला सफाई करके ”कम्‍प्‍युटर पेपर वेस्‍ट” वह कागज़ जो टायपिंग में, या फोटोकापी करने में खराब हो गये दुकान के बाजू में डाल देता। यह सफेद प्रेस बन्‍द कागज ममदू को अच्‍छे लगते और वह उनको बटोर कर अपने थैले में डाल लेता। पढ़ना लिखना तो वह जानता ही नहीं पर वह साफ सुथरे सफेद कागज ममदू को भले लगते। घर जाकर उसे उन कागज़ो के बदले माँ की डाँट फटकार सुननी पड़ती, पर वह भी क्‍या करे कागज़ का और बच्‍चों का एक कुदरती रिश्‍ता है। कागज़ से निकली शिक्षा और बच्‍चों का मन जब एक हो जाते है तो मनुष्‍य का मनुष्‍य होना सार्थक हो जाता है। वह ज्ञान विज्ञान की सीढियाँ चढ़ता चला जाता है। संसार में महान्‌ से महानतम्‌ होता चला जाता है। तभी वह संसार का सर्वश्रेष्‍ठ प्राणी कहलाता है। ममदू की कहानी की जनक कागज़ और कलम ही तो है। मासूम और नासमझ बच्‍चा भी कागज़ के मोह में पड़ जाता है। फिर वह उसे फाड़े, पढ़ने का अभिनय करे या अपनी नन्‍ही नन्‍ही उँगलियों में कलम पकड़ कर कागज़ पर आड़ी तिरछी लकीरें खींचे। ममदू को भी कागज़ आकर्षित करते तो उसकी माँ को गन्‍दी मैली बदबूदार पालीथीन की थैलियों में अपना भविष्‍य नज़र आता। ममदू माँ की डाँट सुन ही रहा था कि पास की झुग्‍गी से सुरेखा हाँफती काँपती दौड़ी चली आई। हाथ में प्‍लास्‍टिक का खाद भरने वाला बड़ा-सा थैला लेकर झुग्‍गी के दरवाजे में झाँकती हुई बोली-काकी जल्‍दी चलो, पीठे का सरकारी गुदाम है ना जो गन्‍दे नाले के किनारे बना है, वहाँ पर बाहर पड़ी गेहूँ की बोरियाँ बारिश में फट गयीं है। गेहूँ बोरों से फिसल फिसल कर नाले में बह रहा है। गोमती और सुक्‍खी भी वहीं गई हैं। काकी एक साड़ी रख ले, नाले के पानी से गेंहू छानने के लिये और भरने के लिये कुछ बोरा वगैरह। गन्‍दे नाले के पानी में पड़े गेहूँ साड़ी के कपड़े से छान-छान कर भर लायेंगे।

यह खबर ऐसी थी कि जैसे स्‍विस बैंक में जमा सारा काला धन वापस आ गया हो और सरकार ने मुनादी करा दी हो कि यह जनता का माल है जो चाहे जितना भर कर ले जाये। ममदू की माँ ने कचरा बीनने वाला बड़ा थैला देखा तो वह जगह जगह से फटा हुआ था। उसने झट मैली कुचैली, मुड़ी-तुड़ी पालीथीन की आठ दस छोटी बड़ी थैलियाँ लीं। अपने बदन पर लपेटी पुरानी मैली साड़ी उतारी और ब्‍लाउज़ पेटीकोट में ही ममदू को साथ ले सुरेखा के पीछे भागी।

कुछ देर बाद नाले के गन्‍दे पानी से रिसती गेहूँ से भरी आठ दस छोटी-बड़ी, नीली-पीली, काली सफेद, पालीथीन की थैलियाँ ममदू की झुग्‍गी में रखी थीं। किसी ने कुछ नहीं कहा, पर गेहूँ से भरी यह गन्‍दी पालीथीन की थैलीयाँ ममदू के मन मस्‍तिष्‍क में उसका मुँह चिढ़ाती नाच रही थी, कह रही थी कि माँ ठीक कहती है कि यह गन्‍दी पालीथीन की थैलियाँ कागज़ से कहीं ज्‍यादा अहम्‌ है।

ममदू अपने दिमाग़ में ढेर सारी उथल पुथल लिये, मैला थैला कन्‍धे पर लटकाये अम्‍बेडकर स्‍कूल की बाउन्‍ड्री की जाली के पास खड़ा खेलते-कूदते साफ-सुथरे बच्‍चों को निहार रहा था। एक स्‍कूली बच्‍चा चोरों की तरह इधर-उधर देखता जाली के पास आया जहाँ ममदू खड़ा था। उसने जाली के पास दीवार की मुन्‍डेर पर अपना टिफिन बाक्‍स उल्‍टा कर सारा खाना फेंक दिया और डिब्‍बा बन्‍द कर वापस भाग गया। ममदू ने हाथ बढ़ाकर सारा खाना समेट लिया। फिर वह रोज़ खाने के लालच में उसी बाउन्‍ड्री वाल के पास खड़ा रहने लगा। बच्‍चा जो खाना वहाँ फेंक जाता ममदू उसे उठा लेता। एक दिन ममदू की उस लड़के से बात हो गई। लड़के ने खाना फेंकने का सारा किस्‍सा ममदू को बता दिया। ममदू आँखें फाड़कर उसकी बात सुनता रहा। मम्‍मी रोज़ यह टिफिन बना कर देती है पर यह खाना मुझे अच्‍छा नहीं लगता इसलिये मैं इसे यहाँ फेंक देता हूँ, मम्‍मी समझती है मैंने खा लिया। फिर मैं घर जाकर मिठाईयाँ, चाकलेट, आलू चिप्‍स्‌, बादाम, किशमिश, मैगी सब खाता हूँ। यह सब मुझे बहुत अच्‍छे लगते हैं। लड़के की बातें सुन कर ममदू के मुँह में पानी भर आया। ऐसी स्‍वादिष्‍ट चीज़ो की तो ममदू कल्‍पना भी नहीं कर सकता था। ममदू ने पूछा- इतना सारा सामान तुम्‍हारे यहाँ आता कहाँ से है?

वह बोला- बाजार से! मेरे पापा के पास बहुत पैसे होते है। वह आफिस में काम करते हैं न...! ममदू ने पूछा-आफिस में क्‍या काम होता हैं ? क्‍या वहाँ पैसे बनते हैं ?

वह लड़का बोला- नहीं, वहाँ कागज़ों की फाईलों में काम होता है। मेरे पापा बहुत सारे कागज़ पढ़ते हैं और बहुत सारे कागज़ लिखते हैं। फिर उनको बहुत सारे पैसे मिलते है। बस...फिर हम बाजार जाते हैं और बहुत सारी चीजे़ खरीदते हैं।

ममदू ने आश्‍चर्य से पूछा- क्‍या बैठे-बैठे सिर्फ कागज़ों को पढ़ने लिखने से इतने सारे पैसे मिलते है? ममदू कागज़ की महिमा को अपने अन्‍दर सहजता से महसूस नहीं कर पा रहा था। पर वह बहुत उत्‍सुक था उस लड़के से और बहुत कुछ जानने के लिये ।

लड़का बोला-मेरे पापा कार में बैठकर आफिस जाते हैं, शानदार सूट पहनकर, मेरी माँ भी बहुत अच्‍छी अच्‍छी साड़ियाँ पहनती है और मुझे बहुत प्‍यार करती हैं। हमारा घर भी बहुत बड़ा और बहुत सुन्‍दर है। मैं भी स्‍कूल मे पढ़ाई कर रहा हूँ। मैं भी पापा जैसा बनूँगा, बड़ा आदमी...! इतने में स्‍कूल की घन्‍टी बज गई और बच्‍चा भाग कर अपने दोस्‍तों के टोले में खो गया।

स्‍कूल की घन्‍टी बजना तो बन्‍द हो गई पर ममदू के मस्‍तिष्‍क में सैकड़ों घन्‍टियाँ बजने लगीं। उसके कानों में लड़के के शब्‍द गूँजने लगे...मेरी माँ बहुत अच्‍छी-अच्‍छी साड़ियाँ पहनती है.......। मुझे बहुत प्‍यार करती है....। हमारा घर भी बहुत बड़ा और बहुत सुन्‍दर है। मैं भी स्‍कूल में पढ़ाई कर रहा हूँ.......। मैं भी बनूँगा पापा जैसा बड़ा आदमी...! ममदू को अपने ख्‍यालों में दिखी अपनी झुग्‍गी के दरवाजे पर चीथड़ा लपेटी खड़ी उसकी माँ जो उसे प्‍यार करने के बजाय डाँट रही है, कि पन्‍नी के बदले कागज़ क्‍यों बीनकर लाया ? और उसे भला बुरा कह रही है। वह उदास हो गया और सोचने लगा-क्‍या यह कागज़ की किताबें पढ़ने से छोटा आदमी बड़ा आदमी बन जाता है ? ममदू का बाल सुलभ मन सोचने लगा.. अगर मैं भी कागज़ पढ़ सकूँ तो अच्‍छा-अच्‍छा खाना, अच्‍छे अच्‍छे कपड़े मुझे और मेरी माँ को भी मिलें......! ममदू के हृदय में उसके थैले में पड़े कागज़ों का आकर्षण और बढ़ गया। उसके मन में थैले में पड़े सफेद कागज़ और गन्‍दी पॉलीथीन की थैलियों के बीच जंग होने लगी। उसी उधेड़बुन में वह घर चला गया। माँ ने रोज़ की तरह आज भी उसे भला बुरा कहा पर वह अन्‍दर से पत्‍थर हो गया था।

रात को नींद में उसे सितारों से जगमगाता आसमान दिखा। उसकी माँ एक बहुत सुन्‍दर साड़ी पहने, ढेर सारे गहने अपने ऊपर लादे एक बड़े से घर में, चाँदी के थाल में अच्‍छा-अच्‍छा खाना सजाये, दोनो बाँहें फैलाए उसे पुकार रही है। ममदू बहुत सुन्‍दर कपड़े पहने, हाथ में ढेर सारे कागज लहराते हुए उसकी ओर दौड़ा चला आ रहा है।

सुबह-सुबह लाउड स्‍पीकर के भोंगे की आवाज से उसकी नींद टूटी तो वह भागकर झुग्‍गी से बाहर आया। बाहर हल्‍की बारिश हो रही थी। उसने देखा झुग्‍गी बस्‍ती की तंग गलियों में सरकारी हरकारा एक रिक्‍शा में बैठा चिल्‍ला रहा था-हर बच्‍चे का अधिकार, शिक्षा का अधिकार। अपने बच्‍चों को पास के सरकारी स्‍कूल में पढ़ने भेजिये। सरकार ने बच्‍चों को मुफ्‍त शिक्षा का इन्‍तजाम किया है। वहाँ खाना भी मिलेगा और कपड़ा भी। रिक्‍शा जब ममदू की झुग्‍गी के पास से गुज़रा तो ममदू ने रिक्‍शे पर लगा पोस्‍टर देखा। उस पर लिखा था-“एक बेहतर कल बनाएं, सारे बच्‍चे स्‍कूल जाएं। कोई बच्‍चा छूट न पाए, हर बच्‍चा स्‍कूल जाए।” ममदू यह सब तो पढ़ नहीं सका, पर उसने देखा कि एक पेन्‍सिल पर सवार दो बच्‍चे बस्‍ते लटकाए मुस्‍कुराते हुए उड़े चले जा रहे हैं। एक माँ अपने बच्‍चे को गोद में बिठाए, स्‍लेट पर उसको लिखना सिखा रही है। मुख्‍यमंत्रीजी बच्‍चे को गोद में उठा कर मुस्‍कुरा रहे हैं। ममदू पोस्‍टर पर यह सब देखकर गद्‌गद्‌ हो गया। वह भागकर घर में आया। उसने माँ को देखा, वह सब तरफ से अंजान चूल्‍हे के पास चाय बना रही थी। बाहर भोंगे की आवाज का उस पर कोई असर नहीं था। वह पुलकित हो बोला-माँ मैं भी स्‍कूल........! जीने की उहापोह में माँ ने ममदू के शब्‍द सुने ही नहीं। आधे शब्‍द पानी के बुलबुले की तरह ममदू के मुँह में ही घुल गये। माँ ने कहा-“यह चाय पी ले और जल्‍दी जा अपने काम पर। देर होने पर मुँआ हरमू सब पन्‍नी बीन कर ले जायगा, तेरे जाने से पहले। सुबह बहुत जल्‍दी उठ कर भागता है हरामी..!” और एक टूटा कप बदरंग मैली चाय से भरा ममदू की ओर बढ़ा दिया। ममदू ने चाय के कप में झाँक कर देखा। एक क्षण के लिये वह कहीं खो गया। उसे लगा उसके नन्‍हे हाथों में एक सुनहरी प्‍याला है जिसमें उसके सारे सपने मोतियों की तरह भरे हैं। वह मोतियों को खुश होकर निहार ही रहा था कि- ”जा जल्‍दी कर...!” माँ की कठोर आवाज़ से घबराकर सुनहरी प्‍याला उसके हाथ से छूट गया। सारे सपनों के मोती बिखर गये। टूटे कप के टुकड़े और बदरंग मैली चाय झुग्‍गी के कच्‍चे फर्श पर फैल गई।

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * || * उपन्यास *|| * हास्य-व्यंग्य * || * कविता  *|| * आलेख * || * लोककथा * || * लघुकथा * || * ग़ज़ल  *|| * संस्मरण * || * साहित्य समाचार * || * कला जगत  *|| * पाक कला * || * हास-परिहास * || * नाटक * || * बाल कथा * || * विज्ञान कथा * |* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4095,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,341,ईबुक,196,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3061,कहानी,2275,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,110,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,29,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,245,लघुकथा,1269,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,19,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,340,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2013,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,714,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,802,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,18,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,91,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,211,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: इस्माइल खान की कहानी - ममदू
इस्माइल खान की कहानी - ममदू
http://lh3.ggpht.com/-ND7AW6Aa1XA/VFICPKRI1UI/AAAAAAAAbFw/qIHKnyMnHP4/image_thumb.png?imgmax=800
http://lh3.ggpht.com/-ND7AW6Aa1XA/VFICPKRI1UI/AAAAAAAAbFw/qIHKnyMnHP4/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/10/blog-post_337.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/10/blog-post_337.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ