विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका -  नाका। प्रकाशनार्थ रचनाएँ इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी इस पेज पर [लिंक] देखें.
रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -

पिछले अंक

शशिकांत सिंह 'शशि' का व्यंग्य - वनहित में चिंतन

साझा करें:

वनहित में चिंतन व्‍यंग्‍य वन में चिंतनशिवीर का आयोजन किया गया था ।   चिंतन का मुख्‍य मुद्दा था -हिरणों पर बढ़ रहे हमले और निदान । इन दिनों ...

image

वनहित में चिंतन

व्‍यंग्‍य

वन में चिंतनशिवीर का आयोजन किया गया था   चिंतन का मुख्‍य मुद्दा था -हिरणों पर बढ़ रहे हमले और निदान । इन दिनों हिरणों का मांद के बाहर निकलना मुश्‍किल हो गया था । पहले से ही घात लगाये भेड़िये उनपर टूट पड़ते थे । भूखे भेड़ियों के सामने बेचारी हिरणों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं था । रोती-चिल्‍लाती रह जाती थीं । भेड़िये उन्‍हें चीर-फाड़ कर चल देते थे । जंगल से नियमित रूप से निकलने वाले अखबार-'हरितांचल' अपने संपादकीय में हिरणों पर हो रहे हमलों पर चिंता जता चुका था । शाकाहारी जीवों ने भी जुलूस निकालकर जंगल में ग्रास-मार्च किया था। ग्रास-मार्च में मुंह में तिनका दबाकर उन्‍होंने विरोध जताया था। इस जुलूस को लेकर हमेशा की तरह विद्वानों की राय अलग-अलग थी । एक वर्ग यह मानता था कि हिरणों को अपनी आवाज खुद ही बुलंद करनी चाहिए । कम से कम शेर सरकार की नींद तो टूटेगी । उन्‍हें अपने फर्ज याद तो आयेंगे। दूसरा वर्ग मानता था कि यह लॉ एंड आर्डर का मामला है। सरकार अपना काम कर ही रही है। बेकार का बवाल मचाना हो तो अलग बात है।

चिंतन शिविर के उपरांत जो फरमान वनहित में जारी किया गया वह इस प्रकार था ।

-' वन का शांत और सुरम्‍य वातावरण अत्‍यंत दूषित हो गया है। यह चिंता का विषय है। चिंतन शिवीर मेूं गहन विचार-विमर्श के बाद यह निष्‍कर्ष निकला है कि इन परिस्‍थितियों के लिए वन के हिरण ही जिम्‍मेवार हैं। उन्‍होंने अपने चाल-चलन में इतना परिवर्त्‍तन कर लिया है कि उनपर हमले बढ़ गये हैं। सदियों से भेड़िये , बाघ , चीते वन में शांतिपूर्ण सौहाद्र से रहते आ रहे हैं। हिरणें भी सदियों से वन में ही रहती आ रही हैं । हिरणों के आम जीवन में कभी भी आज की तरह अशांति नहीं रही । यदि प्राचीन काल की हिरणों से आज के हिरणों की तुलना करें तो हम पाते हैं आजकल की हिरणें अधिक कुलांचे भरती हैं। अधिक कुलांचे भरना किसी संस्‍कारी हिरण के लिए उचित नहीं है। हिरणों को चाहिए कि अपने कुलांचों पर हमेशा नियंत्रण रखें । मांसाहारी पशुओं का मन कुलांचों को देखकर मचल जाता है। वे शिकार करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। यदि देखा जाये तो किसी को शिकार के लिए उकसाना भी एक अपराध ही है। हिरणों पर ये अपराध भी साबित होता है। यानी कि वे कुलांचे तो भरती ही हैं साथ ही साथ मांसाहारी जीवों को शिकार के लिए उकसाती भी हैं। यह निंदनीय कृत्‍य माना जायेगा । हिरणों को एक और सलाह दी जाती है कि वे कहीं भी और कभी भी भटकने की आदत से परहेज करें । भटकने की आदत प्राचीन काल की हिरणों को नहीं थी तो जंगल में कितनी शांति थी । प्राचीन काल की हिरणें हमेशा झुंड में रहती थीं । प्रातःकाल सूर्योदय के उपरांत जब सूरज की किरणें तीखी हो जाती थीं तब हिरणें अपने समूह के साथ बाहर निकलती थीं । अहा कितना मनोरम समय था । आधुनिक हिरणियों को न तो वन की संस्‍कृति के प्राति आदर का भाव है न ही समाज का भय । जीव स्‍वतंत्रता के नाम पर दिन-दुपहर में इधर-उधर अकेली भटकना उन्‍हें अच्‍छा लगता है। परिणाम भी उन्‍हें भुगतना पड़ता है। दिन तो दिन है आजकल की हिरणियां तो रात में भी मांद से बाहर निकलने में संकोच नहीं करती हैं । यह जंगल की शांति के लिए अत्‍यंत बाधक है। मांसाहारी जीव रात में भटकते रहते है। उनके हत्‍थे कोई हिरणी चढ़ गई तो इसमें सारी गलती हिरणी की ही होगी । हिरणियों को चाहिए कि अपनी रक्षा का विशेष ध्‍यान रखें ।

वनहित में यह चिंतन जारी करते ही चर्चा शुरू हो गई । बुद्धिजीवी दो वर्गों में बंट गये । एक भेड़ियों के साथ दूसरा हिरणियों के । भेड़ियों के साथ जो वर्ग था उसके तर्क थे कि यह एक व्‍यावहारिक कदम है। वन की शांति इसी में बनी रह सकती है। अत्‍याधुनिक बनने का यह अर्थ नहीं कि हम अपनी जड़ों को भूल जायें। हमारी संस्‍कृति यही है। दूसरे वर्ग ने उनकी आलोचना की । उनका कहना था कि हिरणियों को पूरी स्‍वतंत्रता है कि वे जहां चाहें जब चाहें , घूमें । किसी को उनकी आजादी में बाधक बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती। भेड़ियों को चाहिए कि वे हिरणों को न खायें । उन्‍हें अपने संत स्‍वभाव का परिचय देना चाहिए । हिरणियों को पूरे सम्‍मान के साथ उनकी मांद तक छोड़ आना चाहिए । यह नई सदी है। नई सदी में मांसाहरी और शाकाहारी में कोई भेद नहीं होना चाहिए । सर्वत्र शांतिपूर्ण सहअस्‍तित्‍व का आभास होना चाहिए । वन में रामराज्‍य कायम हो जाये तभी सच्‍चा विकास माना जायेगा । बुद्धिजीवियों के अलावा आम जीवों को भी एक समूह था जो अपनी राय रखता तो था लेकिन प्रकट नहीं करता था । उनमें तरह-तरह की अभिव्‍यक्‍तियां थीं । कुछ जीव मानते थे कि यह लॉ एंड आर्डर का मसला है। कानून सख्‍त हो । दोषियों को उचित सजा मिले तो अपने आप अपराध रुक जायेंगे । कुछ जीव इसके विपरीत सोचते थे । वे भेड़ियों के सुधरने तक इंतजार करना बेहतर मानते थे।

जंगल के अखबार -हरितांचल' ने भी अपने संपादकीय में जंगल के इस फरमान का विरोध किया। उन्‍होंने हिरणों की स्‍वतंत्रता के पक्ष में अपने को प्रस्‍तुत किया । परिणामस्‍वरूप हरितांचल की प्रतियां जंगल के मुख्‍य चौराहे पर फाड़ी गईं । जलाने का जुगाड़ न होने के कारण कुछ जीव अफसोस करके रह गये । हरितांचल के कार्यालय में तोड़-फोड़ की गई । संपादक किसी तरह जान बचाकर भागा । संपादक के घर पर भी पथराव किया गया । उसके घर के कांच तोड़ दिये गये । उसकी बीबी मायके चली गई । वह बहुत पहले से समझाती रहती थी कि जिसके घर कांच के होते हैं वे दूसरे के घरों पर पत्‍थर नहीं मारते । बिना मतलब जीवों की वकालत मत किया करो । विज्ञापन की खाओ और हरिगुण गाओ । संपादक सुनता नहीं था । उसको परिणाम भुगतना पड़ा । मीडिया की आवाज को इस तरह दबाने के प्रयासों की घनघोर निंदा की गई । बुद्धिजीवियों का एक समूह राजा से मिला और उनसे वनतंत्र की रक्षा करने की मांग की । वनतंत्र में यदि आवाज उठाने की छूट नहीं होगी तो कहां होगी ? राजा ने उनकी मांगों के प्राति सहानुभूति दिखाई तथा गंभीरता से विचार किया । हरितांचल के संपादक की सुरक्षा बढ़ा दी गई । राजखर्च से उनके घर की मरम्‍मत कराई गई । अभी तीन दिन भी नहीं बीते थे कि संस्‍कृति रक्षक समूह का एक शिष्‍टमंडल राजा से मिला । उन्‍होंने राजा से मांग की कि वन में यदि आजादी के नाम पर सबको छूट दी गई तो एक दिन यहां भी लोकतंत्र वाली स्‍थिति हो जायेगी। जंगल भी आदमियों के समाज की तरह निरंकुश और निर्लज्‍ज हो जायेगा । हिरणों को कोई लाज-शर्म नहीं हैं जिसके कारण हमारे और आपके बच्‍चे बिगड़ रहे है। उनपर लगाम लगाना बेहद जरूरी है। राजा ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया तथा एक जांच आयोग का गठन कर दिया । जांच आयोग का कामयह देखना था कि आने वाले दिनों में जंगल में शांति किस प्रकार कायम रह सकती है। कौन-कौन से तत्‍व जंगल की शांति को भंग करने के लिए जिम्‍मेवार हैं ? आयोग के अध्‍यक्ष चीता जी बने । उनके श्‍ोर साहब से बहुत अच्‍छे संबंध बताये जाते हैं । चीता कमिटी के फैसले आने तक राजा किसी भी निष्‍कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते थे । पहुंचे भी नहीं ।

सारी कवायद में किसी ने भी हिरणों से नहीं पूछा कि उनकी अपनी इच्‍छा क्‍या है ? वास्‍तव में उन्‍हें किस प्रकार अपनी रक्षा करनी है ? उन्‍हें किस प्रकार आजादी चाहिए ? उनसे पूछना न तो समाज के कर्णधारों ने जरूरी समझा न सरकार के तारणहारों ने । हिरणियों ने संशय से आसमान को देखा । उन्‍हें पता था कि अखबार और सरकार अपने-अपने हिस्‍से के कर्त्‍तव्‍यों का पालन कर रहे हैं। भेड़ियों ने एक बुलंद ठहाका लगाया और अगले शिकार की योजना बनाने लगे ।

शशिकांत सिंह 'शशि'

जवाहर नवोदय विद्यालय , शंकरनगर, नांदेड़

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * || * उपन्यास *|| * हास्य-व्यंग्य * || * कविता  *|| * आलेख * || * लोककथा * || * लघुकथा * || * ग़ज़ल  *|| * संस्मरण * || * साहित्य समाचार * || * कला जगत  *|| * पाक कला * || * हास-परिहास * || * नाटक * || * बाल कथा * || * विज्ञान कथा * |* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4095,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,341,ईबुक,196,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3061,कहानी,2275,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,110,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,29,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,245,लघुकथा,1269,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,19,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,340,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2013,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,714,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,802,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,18,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,91,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,211,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: शशिकांत सिंह 'शशि' का व्यंग्य - वनहित में चिंतन
शशिकांत सिंह 'शशि' का व्यंग्य - वनहित में चिंतन
http://lh3.ggpht.com/-jTIHvBlSGR0/VGMmP78AuYI/AAAAAAAAbTY/0OengTI3WG0/image_thumb.png?imgmax=800
http://lh3.ggpht.com/-jTIHvBlSGR0/VGMmP78AuYI/AAAAAAAAbTY/0OengTI3WG0/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/11/blog-post_99.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/11/blog-post_99.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ