प्रमोद भार्गव का आलेख - तात्याटोपे अंग्रेजों का गुलाम नहीं था

SHARE:

18 अप्रैल को तात्याटोपे की पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष आलेख न क्शे पर शिवपुरी जैसी छोटी जगह 1959 में उस समय अचानक चर्चित हो उठी थी, जब स्वतंत...

18 अप्रैल को तात्याटोपे की पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष आलेख

क्शे पर शिवपुरी जैसी छोटी जगह 1959 में उस समय अचानक चर्चित हो उठी थी, जब स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी, शौर्य और दुस्साहस के प्रतीक तात्याटोपे को मौत के सलीब पर लटका दिया गया था। हालांकि कतिपय विद्वानों ने यह भी भ्रम फैलाने की कोशिश की है कि जिस व्यक्ति को शिवपुरी में फांसी दी गयी, वह तात्या नहीं था। अपने कथन को सत्यापित करने के लिए उन्होंने किवदंतियों व जनश्रुतियों का सहारा लिया। किंतु सच यही है कि अलिखित आधार पर किसी हुतात्मा की शहादत को झुठलाया नहीं जा सकता। कारण कि वे स्थान, जिनसे तात्या का किसी न किसी रूप में नाता था आज भी वे शिवपुरी की धरती पर मौजूद हैं। तात्या द्वारा अदालत में दिया बयान और फिरंगी हुक्मरानों के वे कागजात जो तात्या की फांसी पर प्रमाण की मोहर लगाते हैं, इतिहास के सत्यापित अभिलेख के रूप में संग्रहित हैं।

तात्या टोपे का जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले के यवला ग्राम में 1814 में हुआ था। उनके पिता का नाम पांडुरंग भट्ट और माता का नाम रूक्मणी था। तात्या ने नाना साहब पेशवा के साथ रहकर राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ा। 20 जून 1858 को ग्वालियर में महारानी लक्ष्मीबाई के शहीद होने के उपरांत तात्या 'गुरिल्ला युद्धों' की शुरूआत करके स्वाधीनता यज्ञ में राष्ट्रीय बगावत की समिधायें डालते रहे। इस दौरान तात्या की उम्र करीब 45 वर्ष थी।

तात्या के अभिन्न साथियों झांसी की रानी, कुंवरसिंह, माधोसिंह, नवाब खान, बहादुर खान के प्राणोत्सर्ग के पश्चात नाना साहब के भूमिगत हो गए। तात्या ही क्रांति के अकेले प्रणेता रह गए। अकेले तात्या सैन्य और शस्त्रों से सम्पन्न फिरंगियों से मुकाबला नहीं कर सकते थे, इसलिए वे दक्षिण भारत के राजाओं से सहायता की उम्मीद में नर्मदा नदी पार कर दक्षिण पहुंच गए। किंतु यहां से बिना किसी सहायता के निराश होकर तात्या को उलटे पैर लौटना पड़ा। यहां से तात्या राजस्थान पहुंचे। किंतु वहां भी तात्या निराशा और अनिश्चय के ओर घोर अंधेरे में भटक कर रह गए। तात्या पर टिप्पणी करते हुए 'राजस्थान रोल इन द स्ट्रगल ऑफ 1857' नामक पुस्तक में लिखा है, 'राजस्थान में तात्याटोपे को किसी प्रकार की सहायता न मिलने से वह हताश हो गया और उसने किसी मराठा राज्य में जाने का विचार बनाया।'

थानेश्वर के वन प्रांतरों में तात्याटोपे और राव साहब पेशवा में मतभेद हो जाने के कारण संबंध विच्छेद हो गए। यहां से राव साहव पेशवा, फिरोजशाह, इमाम अली, और अंबापानी सिरोंज के जगलों में चले गए और तात्या पाड़ौन में जगलों में अपने मित्र मानसिंह की शरण में चले गए। यहां तात्या के अंतर्मन में विद्रोह की जो चिंगारियां फूट रही थीं, उन पर पानी फिर गया। 'सघर्षकालीन नेताओं की जीवनियां' पुस्तक में इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए लिखा है, '21 जनवरी 1859 को हुए सीकर युद्ध के बाद तात्या के भाग्य का सूर्यास्त हो गया। राव साहब पेशवा और फिरोजशाह उनका साथ छोड़ गए और तात्या 3-4 साथियों को साथ लेकर नरवर राज्य में स्थित पाड़ौन के जंगल में अपने मित्र मानसिंह के पास शरण में आ गए।'

अंततः जब फिरंगी सेनानायक तात्याटोपे को मारने अथवा गिरफ्तार करने में सफल न हो सके तो उन्होंने छल-कपट का रास्ता अपनाया। मानसिंह को अंग्रेजों ने उसका राज्य वापिस लौटाने का प्रलोभन देकर अपने पक्ष में ले लिया। '1857 के गद्र का इतिहास' में इस घटना के बारे में शिवनारायण द्विवेदी ने लिखा है, 'मानसिंह ने मित्रता से काम नहीं लिया। तात्या को पकड़वाने के लिये वह अंग्रेज सेनापति मीड़ से सलाह करने लगा। सेनापति मीड़ ने मानसिंह की जान बचाने और उसका जब्त राज्य वापिस दिलाने का वादा किया।' इसी किताब में आगे लिखा है, 'जिस समय मानसिंह मीड़ के साथ मिलकर षड़यंत्र रच रहे थे तब तात्या निश्ंिचत होकर पाड़ौन के जंगलों में आराम कर रहे थे। तात्या ने मानसिंह से सलाह लेनी चाही। मानसिंह दूसरी जगह पर थे। उसने तात्या को कहलाया-'मैं तीन दिन बाद मिलूंगा।'

पालसन ने इस घटना का उल्लेख यूं किया है, 'तात्या के पाड़ौन के जंगल में पहुंचने के तत्काल बाद ही राजा मानसिंह ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। तात्या के पुराने साथी उससे संपर्क साधे हुए थे। तात्या ने अपने पुराने साथियों को कहलवाया कि मानसिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया है और वह पाड़ौन के जंगल में है। वहां से उत्तर आया कि सिरोंज के जंगल में आठ-नौ हजार लोगों के साथ रावसाहव पेशवा हैं। साथ में 'फिरोजशाह अम्बापानी और इमाम अली भी हैं। इमाम अली ने तात्या को लिखा कि वह आकर मिले, किंतु तात्या मानसिंह से सलाह करना चाहता था।'

दरअसल तात्या यहीं धोखा खा गये, अपने मित्र मानसिंह के विश्वासघात ने इस शूरवीर तात्याटोपे को तीन दिन बाद 7 अप्रैल 1859 की रात पकड़वा दिया। 8 अप्रैल की सुबह सेनापति मीड़ के कैंप में तात्याटोपे को शिवपुरी लाया गया। तात्याटोपे पर राजद्रोह का मुकदमा कायम किया गया। शिवपुरी में एक फिरंगी अधिकारी के बंगले में फौजी अदालत लगायी गई। जहां सुबह से शाम तक तात्या की पेशी हुई। अदालत के समक्ष तात्या ने 10 अप्रैल 1859 को जो बयान दिया, गवाहों से जो बहस की, वह बहुत ही तर्कसंगत और विद्वतापूर्ण है। तात्या ने अपने बयान में कहा, 'मुझ पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया है, किंतु मैं अंग्रेजों की प्रजा कभी नहीं रहा, मैंने राजद्रोह किया ही नहीं ? पेशवा यहां के राजा थे और मैं उनका नौकर था, जो कुछ मैनें किया है, उनकी आज्ञा से ही किया है, अतः मैं राजद्रोही नहीं राजभक्त हूं.....। रणभूमि मे मैने अंग्रेजों से युद्ध किया है। उस समय मेरी तलवार के सामने जो अंग्रेज आए, उनको मैनें मारा है। व्यक्तिगत रूप से मैनें किसी अंग्रेज पुरूष, स्त्री, बालक को न तो मारा है और न ही फांसी पर लटकाया है.....। मेरे इस कार्य का मेरे रिश्तेदारों से कोई संबंध नहीं है। मेरा अपना यह व्यक्तिगत कार्य है। अतः मेरे माता-पिता, भाई-बहन तथा नाते-रिश्तेदारों को कष्ट न दिया जाए।' यह बयान हिंदी, अंग्रेजी, मराठी भाषा की 1857 की स्वतंत्रता संग्राम के ऊपर लिखी गयी अनेक पुस्तकों में उपलब्ध है।

तात्या ने अपना यह बयान हिंदी में दिया और इस पर मराठी में (तात्या टोपे कामदार नाना साहब बहादुर) दस्तखत किए। तात्या के इस बयान का अंग्रेजी अनुवाद गंगाप्रसाद नाम के व्यक्ति ने किया। 10 अप्रैल 1859 को ही तात्या का कोर्टमार्शल हुआ। कैप्टन बाघ कोर्टमार्शल के अध्यक्ष थे तथा इस समिति के चार अन्य सदस्य भी थे।

पूर्ण जांच करने के पश्चात 18 अप्रैल 1859 को तात्या टोपे को नीम के पेड़ पर लटकाकर शाम पांच बजे शिवपुरी फांसी दे दी गई। दूसरे दिन तक शव पेड़ से लटका रहा। जिससे कि लोगों में आतंक कायम रहे और फिर कोई देश भक्त ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जेहाद छेड़ने की कोशिश न करे।

इसी बीच अनेक यूरोपियन सिपाहियों ने तात्या टोपे के सिर से एक या दो बाल काटे और उन्हें तात्या की अद्वितीय वीरता की स्मृति में धरोहर के रूप में संभाल कर रखा। तात्या टोपे की चोटी और पोशाक फिरंगियों ने लंदन भिजवा दिए। ये वस्तुयें आज भी लंदन म्यूजियम में उपलब्ध हैं। बड़े फिरंगी अफसरों को 19 अप्रैल 1859 की शाम को चार बज कर आठ मिनिट पर तात्या को फांसी दिये जाने की सूचना देने के लिए एक तार किया गया। 168 नंबर का यह तार केव्हिटन हलवर्ट इंदौर ने बीड़न (सेक्रेटरी टू गवर्नमेंट ऑफ कलकत्ता) को किया था।

इस तरह 18 अप्रैल 1859 को शुरू हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की धधकती आग की अंतिम मशाल तात्या टोपे की शहादत के साथ ही शांत हो गई। अपना सब कुछ न्यौछावर कर दासता से जूझने वाले इस अप्रतिम योद्धा की कृतज्ञ शिवपुरी के वासियों ने नीम के पेड़ के नीचे पत्थरों की एक समाधी बनाई। इसमें एक शिलालेख भी लगाया गया। जिस पर लिखा है, 'यहां न पर तानतीया टोपी ने पान सी पाया सन् 1859 में '। 1965 में जिला-प्रशासन ने इस समाधी को नष्ट कर दिया और यहां एक नया स्मारक बनवाया गया। जिसका शिलान्यास 18 अप्रैल 1968 को श्रीमती विजयाराजे सिंधिया ने किया। तात्या की आदमकद प्रतिमा का अनावरण 28 जनवरी 1970 को मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल ने किया। तब से यहां प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को तात्या का बलिदान दिवस मनाये जाने की परम्परा कायम हुई। दो दिन के इस आयोजन में कवि सम्मेलन और मुशायरे के कार्यक्रम होते हैं। राष्ट्रीय अभिलेखागार भोपाल के सौजन्य से शिवपुरी में एक प्रदर्शनी लगायी जाती है, जिसमें प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और पत्रों की प्रतिलिपियां दिखायी जाती हैं।

 

हां यह दुख की बात अवश्य है कि प्रशासन इस बलिदान दिवस को रस्मी तौर पर मनाये जाने के अलावा कोई कारगर पहल नहीं करता। तात्या से संबंधित स्थलों को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जा चुका है। इनमें जहां तात्या को कैद रखा गया और जिस भवन में फौजी अदालत लगायी गई प्रमुख हैं। कैदखाने का मूल रूप नष्ट हो चुका है। हर वर्ष इस कोठी में संग्रहालय स्थापित करके प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के हथियार और पत्र रखे जाने की मांग उठायी जाती है। बीते आठ साल से मध्यप्रदेश में भाजपा की वह सरकार है, जो शहीदों का उनका अपना स्थान दिलाने की बात करती है किंतु तात्या के मसले पर मौन है

प्रमोद भार्गव

शब्दार्थ 49,श्रीराम कॉलोनी

शिवपुरी म.प्र.

मो. 09425488224

फोन 07492-232007, 233882

लेखक प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार है ।

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्रमोद भार्गव का आलेख - तात्याटोपे अंग्रेजों का गुलाम नहीं था
प्रमोद भार्गव का आलेख - तात्याटोपे अंग्रेजों का गुलाम नहीं था
http://lh3.ggpht.com/-H15PPViPEnY/VLCZ8BlC8MI/AAAAAAAAc4Y/ihAosGGNEvo/image_thumb%25255B3%25255D.png?imgmax=200
http://lh3.ggpht.com/-H15PPViPEnY/VLCZ8BlC8MI/AAAAAAAAc4Y/ihAosGGNEvo/s72-c/image_thumb%25255B3%25255D.png?imgmax=200
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2015/04/taatyaatope-angrejon-kaa-gulaam-naheen.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2015/04/taatyaatope-angrejon-kaa-gulaam-naheen.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content