---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

कुमार कृष्णन की रपट - स्वीडन में गांधीजी को दिया लोकप्रदत्त पुरस्कार राधा भट्ट को सौंपा

साझा करें:

महात्मा गांधी को नोबल पुरस्कार नहीं मिला तो इसके लिए दुनिया भर के लोग दुखी हुए पर इससे कम आहत स्वीडन के निवासी नहीं हुए, जहां से सैकड़ों लोगो...

image
महात्मा गांधी को नोबल पुरस्कार नहीं मिला तो इसके लिए दुनिया भर के लोग दुखी हुए पर इससे कम आहत स्वीडन के निवासी नहीं हुए, जहां से सैकड़ों लोगों को नोबल पुरस्कार मिल चुका है। उन्हें नोबल पुरस्कार से गांधीजी को वंचित रखने का मलाल हमेशा रहा। पिछले दिनों 5 दिसंबर को उन्होंने अपने इलाके में गांधी जी को मरणोपरांत लोक प्रदत्त पुरस्कार भारत की वरिष्ठ गांधीवादी राधा भट्ट को सौंप कर उनके संदेश को फैलाने का नया अभिक्रम किया। पुरस्कार समारोह कैसा था और किस तरह से संपन्न हुआ। इस बारे में राधा भट्ट की खुद की लिखी रिपोर्ट पेश है।


उत्तरी ध्रुव स्थित स्वीडन के पश्चिमी तट पर समुद्र से घिरा हुआ एक द्वीप है ओरूस्ट। इस द्वीप के पश्चिमी भाग की बस्तियां मछुआरों की थीं और पूर्वी भाग में किसानों के खेत और जंगल थे पर उपभोक्तावादी व्यवस्था के पैसा प्रवाह ने और तथाकथित प्रगति(विकास) के आकर्षण ने वह प्रकृति प्रधान जीवन शैली बदल दी है। व्यवसायिक मछली उद्योग ने समुद्र से मछलियां समाप्त कर दी हैं। लखपतियों ने मछुआरों के पुरानी पद्धति से बने काष्ठ निर्मित घर अपने ग्रीष्मावकाशीय समुद्र तटीय निवासों के लिए खरीद लिए हैं, यहां के स्थायी निवासी सरकारी अनुदान और आधुनिक कृत्रिम सामग्री से बने कम स्वास्थ्यकर घरों में रहने लगे हैं। इसमें उन्हें पैसे का लाभ हुआ है लेकिन जीवन के आनंद का घाटा हो गया है।


अब ये स्कूलों, दफ्तरों या बसों आदि में सामान्य नौकरी करते हैं या फिर अमीरों को बेचे गए अपने घरों का रखरखाव करते हैं। पहले इनमें से अनेक छोटी फिशिंग काष्ठ नौकाएं और बड़े समुद्री जहाज बनाने में सिद्धहस्त के रूप में प्रसिद्ध थे, अब इनकी जरूरत ही नहीं रही। इसलिए वे ग्लास फाइबर रिइनफोर्स्ड प्लास्टिक बोट याने शेलिंग शिप बनाते हैं, जो लखपतियों के काम ही आते हैं। इनके जीवन में धन आया है पर वे सामूहिकता के रिश्ते नहीं रहे, वह सौहार्दपूर्ण और साहसिक जीवन का आनंद नहीं रहा। ऐसे ही मछुआरों के एक गांव स्टौकन में 5 दिसंबर को इस द्वीप के आम लोगों द्वारा शुरू किए  फ्रैद्सस रोरेलसन पो ओरूस्ट (ओरूस्ट शांति आंदोलन) की ओर से ध्रुव प्रदेशीय विकट तूफानी ठंडी बरसात भरे मौसम में महात्मा गांधी को मरणोपरांत शांति पुरस्कार से नवाजा गया। बाहर असह्य ठंडी हवा चल रही थी लेकिन सभागार के भीतर लोग विशेष उत्साह और सहकार भरी भावना से लबरेज थे।


पुरस्कार समारोह के लिए शांति आंदोलन के सदस्यों ने विभिन्न समूहों में बंट कर काम को आपस में बांट लिया था। सवा सौ लोगों के दो बार के भोजन और दो बार की चाय-पानी की व्यवस्था एक समूह ने संभाली थी, किसी ने सभागार को सजाया था। बैठक आदि की व्यवस्थाओं को विभिन्न अवसरों के अनुकूल बनाने की जिम्मेवारी दूसरे समूह ने ली थी। आंदोलन के अध्यक्ष सबके साथ थे। वे कभी मंच पर आते तो अगले कुछ मिनटों में वे ऐप्रन बांधे बर्तन धोते दिखाई देते या चाय-काफी परोसते, सबसे बोलते-बतियाते दिखाई देते थे। सबके द्वारा मिलजुल कर एकत्र किए साधनों और अपने श्रम से अर्जित विकेंद्रित सहकार्य पूर्ण कार्य संस्कृति का यह वातावरण मुझे गांधीजी के फिनिक्स आश्रम के उस दृश्य की याद दिलाता था, जब आश्रम के भवन निर्माण के लिए मिट्टी का गारा सानते-सानते गांधीजी आश्रम विद्यालय में पढ़ाने की अपनी बारी आते ही दौड़ कर वहां पहुंच जाते थे।


डेनमार्क से 8 घंटे की, स्टोकहोम से पांच घंटे की, गीथेनबर्ग से दो घंटे और युंगशिले से तीन घंटे तक कार चला कर आए मित्रों की हिम्मत की दाद देनी होगी। मौसम इतना खराब था कि रेडियो अत्यावश्यक काम के बिना बाहर न निकलने की हिदायत दे रहा था। आसपास के 10 से 15 किलोमीटर की दूरी से आए लोगों के साथ-साथ लैपलैंड से तीन दिन तक कार चला कर आए 77 साल के रौल्फ भी शामिल हो गए थे। लुन शहर से बंगाली बहन बुबु मुंशी और उनके पति लार्स एकलुन अपने-अपने अव्यवसायिक टैगौर क्वायर के 10 स्वीडिश साथियों के साथ आए थे। ये सब भी शांति आंदोलन के अंग ही थे।
इस द्वीप के 240 लोग इस आंदोलन के सक्रिय सदस्य हैं लेकिन उनके अलावा भी मित्र हैं, जो नियमित अध्ययन सत्रों में भले ही नहीं पहुंच पाते लेकिन प्रति वर्ष बड़े आयोजनों और साल में 10-12 भाषण सभाओं में पहुंचते हैं। लगता है गांधी विचार का मंथन, उस पर विश्वास और उस पर अमल करने की ईमानदार तमन्ना इनके मन में जागी है।

11 बजे ठीक पूर्व निर्धारित समय पर सेमिनार शुरू हुआ। कितनी अच्छी बात थी कि फूलों से बनी मालाएं, शॉल और स्मृति चिह्न से स्वागत करके समय बिताने की औपचारिकता नहीं थी। केवल 62 साल के बेंट टौर्स्टसन इस कम्यून के मेयर, जो हिरोशिमा के मेयर के शांति और अहिंसा अभियान को सक्रियता से यहां चला रहे हैं ने स्वागत में अपनी भावना व्यक्त की और कहा-मुझे अंग्रेजी भाषा नहीं आती लेकिन अपनी सम्माननीय अतिथि के सम्मान में जो भाषा उन्हें समझ में आती है वही मुझे बोलनी चाहिए। इसके लिए मैंने बहुत मेहनत करके अपना वक्तव्य तैयार किया है..हम सभी को युद्ध नहीं चाहिए। आतंकवाद से हम अपने बच्चों को बचाना चाहते हैं लेकिन चाहने से कुछ नहीं होगा। हमें उठ कर कुछ करना होगा। गांधी ने स्थायी शांति, सद्भावना और अहिंसा की राह बताई है। अब यह इस बात पर निर्भर   करता है कि हम कितनी दूर उस पर चल सकते हैं? पर हम चलेंगे।


फिर माइक मुझे थमा दिया जाता है। मुझे सर्वप्रथम मेयर को धन्यवाद देना था। मैंने कहा कि अंग्रेजी भाषा न मेरी मातृभाषा है न ही आपकी। इन भाषाओं से भी बढ़ कर एक हृदय और विचारों की भाषा है उसमें हमारी समझ बढ़ती है। उसमें हम एक हैं। मुझे प्रत्यक्ष हिंसा, युद्ध, आतंकवाद, सेनाएं, सैनिक संधियां, अस्त्र- शस्त्रों की बढ़ती विनाशकता, जिनका ये शांतिवादी विरोध करते हैं की जड़ में उसके मूलकारण में जाना था, मैंने उपभोगवादी व्यवस्था की ओर लोगों का ध्यान खींचा, जिसमें जीवन का एकमात्र उद्देश्य ही बन गया है, अधिक उत्पादन अधिक उपभोग, सीमाहीन विलास और गला काट होड़ की कभी न थमने वाली दौड़, इस कुचक्र में फंसी हमारी जिंदगी जो प्रतिक्षण हिंसा को उपजा रही है, जो  प्रतिपल विषमता की खाई को चौड़ी करती जा रही है, जिसने प्राकृतिक विरासतों का इस क्रूरतापूर्वक दोहन किया है कि मानव जीवन खतरे में पड़ चुका है। मैंने कहा, इसलिए तो आज दुनिया पेरिस में बैठकर उस जलवायु परिवर्तन की मार से बचने के उपाय खोज रही है, जिसे गांधीजी ने श्ौतानी सभ्यता कहा था और यह भी कहा था कि यह स्वयं ही अपने विनाश का कारण बनेगी। क्या आप इस व्यवस्था को बदलने के लिए सोचेंगे?


प्रश्नोत्तर काल कम दिलचस्प नहीं था, साफ दिखाई देता है कि ग्लोब के इस उत्तरी भाग में भी लोग उस निकट आ गए विनाश से डरे हुए हैं। मैं देखती हूं डर के कारण दिमाग काम सही दिशा में नहीं कर पाता। इसलिए तुमने मेरे निर्दोषों को मारा तो मैं भी तुम्हारे निर्दोषों को बमों से उड़ा दूंगा। इस प्रकार के अविवेकी निर्णय लिए जाते हैं। हिंसा से प्रतिहिंसा ही जन्म लेगी। हिंसा किसी समस्या का हल नहीं कर सकती, सबसे बड़ी शक्ति अहिंसा है, जो निर्भय व्यक्ति, निर्भय समाज और निर्भय देश का सबसे कारगर और मजबूत साधन है। गांधीजी के निष्कर्ष आज के संदर्भ में कितने सही और सटीक हैं। लंबे समय तक प्रश्नों की निरंतरता में समझने-समझाने का विचार प्रवाह और संवाद का अच्छा प्रयास चलता रहा। जिज्ञासाएं अभी थमी नहीं थीं लेकिन निर्धारित समय सीमा ने थमने को बाध्य कर दिया। लंबे-चौड़े स्वीडिशों के बीच छोटे कद की भारत की बेटी बुबु मुंशी के हाथ हारमोनियम पर थिरकने लगे और वे अपने जीवंत अंदाज और मधुर आवाज में गा उठी-आनंद लोके मंगलालोके बीराजे सत्य सुंदर....। उनके पीछे क्वायर सदस्य स्वीडिश स्त्री-पुरुष गुरुदेव रवींद्र के बंगाली भाषा में रचित गीत अपने दमकते चेहरों में मुस्कान लिए गले और आंखों से गीत के सुर और भाव को ताल देते हुए बुबु मुंशी के साथ गाने लगते हैं। सभागार में बैठे लोग सच में भोजन के साथ बराबर संगीत का आनंद ले रहे थे।


हम शस्त्रों की बिक्री में नहीं, संस्कृतियों का आदान-प्रदान करने में विश्वास रखते हैं ताकि दूरियां और अजनबीपन हटे और निकटता और आत्मीयता बढ़े। एर्नी फ्रीहोल्ट, जो ओरूस्ट शांति आंदोलन के प्रणेताओं और स्थापनकर्ताओं में से एक हैं सभा का संचालन करते हुए कहती हैं- मुझे बांग्लादेश और भारत ने जो जीवन मूल्य सिखाए हैं, वे सृष्टि को बचाने वाले हैं। चाय-काफी पीते हुए अलग-अलग मेजों के चारों ओर लोग यही चर्चा कर रहे थे। वे शायद कुछ गहरे जाकर अपने रोजाना के जीवन को टटोल रहे थे। अपनी व्यक्तिगत आजीविका को जांच रहे थे। उसमें कितनी हिंसा है, जो युद्धों, आतंकवाद, विषमता और जलवायु परिवर्तन को आमंत्रित करती है। यह परखने की कोशिश हो रही थी कि पहले कदम में कितनी हिंसा कम की जा सकती है।


सेमिनार का अंतिम शब्द ओरूस्ट शांति आंदोलन के मुख्य प्रणेता और गांधी विचार के अध्येता और प्रचारकर्ता ओला फ्रीहोल्ट धन्यवाद ज्ञापन के साथ कुछ शब्द कहने मंच पर आए। बीसवीं सदी के चालीसवें उस दशक से बहुत समय गुजर चुका, इस बीच बहुत से युद्ध लड़े जा चुके और पागलपन की बहुत-सी दौड़ दौड़ी जा चुकी है। इस सब के बाद भी उस अकेले आदमी के सोच को लेकर, आज भी शांति के आकांक्षी मानवमानव की सच्ची आजादी की खोज में एकत्र हो रहे हैं। महात्मा गांधी ने हमें दिखाया कि कैसे हिंसा को अहिंसा द्वारा पछाड़ते हुए अहिंसा के माध्यम से दमन, अन्याय और गरीबों की कृषि भूमि की लूट को रोका जा सकता है। उन्होंने दूसरे पर कष्ट, निराशा और दुख ढाने के बदले स्वयं कष्ट उठाने का साहस कर दिखाया। उन्होंने अपना अपेक्षारहित प्रेम उनके लिए भी बनाए रखा जो उन्हें अपना दुश्मन मानते थे, वे सत्य के बल पर निर्भय थे। कायरता को उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कभी ऊंचे सिंहासन पर बैठने, संत कहलाने का सपना भी नहीं देखा। वे तो निरंतर सामान्य निर्धन आम आदमी बने रहे फिर भी हम उन्हें महात्मा कहते हैं तो कहें कोई हर्ज नहीं बशर्ते कि हम अपने दैनिक सामाजिक और राजनीतिक जीवन में उनके विचारों और उनके आचरित मूल्यों को अपनी जीवन शैली में स्थान देने का प्रयास करें। मेरी आशा है कि यह लोक प्रदत्त शांति पुरस्कार महात्मा गांधी के उस महान लक्ष्य को सिद्ध करेगा उनके संदेश की याद सबको दिलाएगा।


हम महात्मा गांधी के काम के लिए आजीवन समर्पित उनकी अनुयायी राधा भट्ट से प्रेरणा लेते हैं। इस प्रेरणा से एक से दूसरे को शृंखलाबद्ध रूप में प्रेरित करते हुए हम इस दुनिया को बेहतर स्थान बनाने का प्रयास करते रहेंगे। वास्तव   में शांति स्वयं एक मार्ग है। यह कहते हुए बिना किसी आडंबर के एक चार किलो का पत्थर का स्मृति चिह्न ओला और युवा मार्टिन(जिसने पत्थर बनाया था) ने मेरे हाथ में सौंप दिया, जिस पर अपनी श्रद्धा के कुछ शब्द लिखे हुए थे। ओला फ्रीहोल्ट सही कहते हैं- पहला तो लोक प्रदत्त नोबल शांति पुरस्कार समिति के लिए एक जवाब है कि गांधी को मान्यता न देकर उन्होंने इतिहास की बड़ी भूल की है, दूसरे हम यूरोपीय देशों के लिए एक संदेश कि अपने दुखों के निराकरण के लिए क्यों दिग्भ्रमित हो रहे हैं, निराकरण गांधी के पास है।

--

kumar krishnan (journalist)

mob.09304706646

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4039,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3000,कहानी,2253,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,540,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,96,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,345,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,67,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1248,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2005,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,708,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,793,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,83,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,204,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: कुमार कृष्णन की रपट - स्वीडन में गांधीजी को दिया लोकप्रदत्त पुरस्कार राधा भट्ट को सौंपा
कुमार कृष्णन की रपट - स्वीडन में गांधीजी को दिया लोकप्रदत्त पुरस्कार राधा भट्ट को सौंपा
https://lh3.googleusercontent.com/-x5-OIkpaHp4/Vnju6RDilhI/AAAAAAAApYc/ZAhX3Mm7Mgk/image_thumb.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-x5-OIkpaHp4/Vnju6RDilhI/AAAAAAAApYc/ZAhX3Mm7Mgk/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2015/12/blog-post_843.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2015/12/blog-post_843.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ