‘गोदान’ और ‘रंटिटंङष़ी’ (दो सेर धान) एक अध्ययन / लंबोधरन पिल्लै. बी

SHARE:

‘गोदान’ और ‘रंटिटंङष़ी’ (दो सेर धान) एक अध्ययन ...

‘गोदान’ और ‘रंटिटंङष़ी’ (दो सेर धान)
एक अध्ययन





लंबोधरन पिल्लै. बी
कोयमबत्तूर कर्पगम विश्वविद्यालय में
डॉ.के.पी.पद्मावती अम्मा के मार्गदर्शन में
पी.एच.डी केलिए शोधरत


‘गोदान’ प्रेमचन्द से हमें प्राप्त उच्च कोटि का महाकाव्यात्मक उपन्यास है । ‘रंटिटंङष़ी’ मलयालम उपन्यासकार तकष़ी शिवशंकर पिल्लै से उपलब्ध अमर- अनुपम उपन्यास है । दोनों निश्चय ही कालजयी कृतियाँ है । युगांतरकारी श्रेष्ठ रचनाएँ युग से संबंधित नये - नये प्रश्नों को जगाती है । उसका समाधान ढूँढना सामाजिक जीव मनुष्य का बाध्य बन जाता है । कहा जाता है कि समाज की गतिशीलता विचार - पुनर्विचार पर निर्भर है।

‘गोदान’ पढ़ना वास्तव में भारत का इतिहास पढ़ना ही है । इस अमर रचना के बारे में डॉ. ज्ञानचन्द्र गुप्त का उल्लेख है :- “ गोदान’ आधुनिकता - बोध का प्रस्थान - बिन्दु है । नये विचार, नयी संवेदना और संरचना की नयी अन्विति है । कृषक जीवन के समस्त संबंध - असहायता, शोषण, संघर्ष, हर्ष - विषाद, आशा -आकांक्षा, संस्कार, मर्यादा, आस्था - अनास्था और जीवन मूल्य एक दूसरे से जुड़कर सामाजिक यथार्थ की बदलती तस्वीर पेश करते है ।”(गोदान विमर्श,पृ 9)

‘गोदान’ के पूर्व के उपन्यासों में प्रेमचन्द एक ही प्रकार का आदर्शवाद अपनाकर चले । लेकिन न सुधारवादी दृष्टि है न प्रचारवादी दृष्टि । ‘गोदान’ में न किसी आश्रम की स्थापना हुई है, न ही किसी गाँधीवादी नेता की अवधारणा । यहाँ प्रेमचन्द की दृष्टि यथार्थवादी सत्य से ओतप्रोत है ।

‘गोदान’ एक शुद्ध यथार्थवादी रचना है । प्रेमचन्द ने इसके सामाजिक रूप को युग - युग के मानवीय सत्य का रूप दिया है । समाज की समस्याओं का जितना गहन और व्यापक रूप ‘गोदान’ में प्राप्त है उतना पहले की किसी भी रचना में नहीं मिलता । साहित्य में पहली बार एक दीन - हीन निम्न वर्ग के किसान को नायक बनाकर उसके जीवन की मार्मिक परिस्थितियों का चित्रण हुआ है तो निश्चय ही वह ‘गोदान’ में ही है ।

तकष़ी ने भी अपनी लंबी जीवन यात्रा के बीच दो दर्जन से अधिक छोटे - बड़े उपन्यास, कहानियाँ, नाटक, यात्रा विवरण आदि लिखे है । प्रेमचन्द ने भी साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों से अपना नाम जोड़ा है । किंतु दोनों प्राय: उपन्यासकार के रूप में ही जाने जाते हैं । ‘गोदान’ की तरह, तकष़ी ने भी ‘रंटिटंङष़ि’ (दो सेर धान) में पतनोन्मुख सामंतवाद और तत्स्थान पर उदित पूंजीवाद दिखाने का सफल प्रयास किया है । इसलिए दोनों उपन्यास भूतकाल के ही नहीं, वर्तमान और भविष्यत् काल के भी दस्तावेज है । ‘गोदान’ प्रेमचन्द युग और प्रेमचन्दोत्तर युग के बीच की कड़ी है । तकष़ी की कृतियाँ को भी मलयालम गद्य काल के पुराने - आधुनिक युग के बीच की ‘कड़ी’ कह सकते हैं ।

‘गोदान’ में भारतीय जन जीवन के अनेक मुख उजागर होते हैं । इसमें डूबने वाले सामंतवाद और उगने वाले पूंजीवाद का चित्रण मुख्य है । ‘गोदान’ को शोषण के विरुद्ध का ‘धर्म युद्ध’ कहना उचित है । ‘रंटिटंङष़ी’ में तकष़ी भी पतनोन्मुख जमींदारी- सामंतवाद एवं तत् स्थान पर उदित पूंजीवाद दिखाते हैं । ‘गोदान’ के समान तकष़ी का ‘रंटिटंङष़ी’ भी हमें हर वातावरण में पुनर्विचार करने को उत्तेजित करता है ।

‘रंटिटंङष़ी’ तकष़ी शिवशंकर पिल्लै का प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसका प्रकाशन 1948 में हुआ था । मलयालम प्रकाशन से दस वर्ष बाद, 1958 में भारती विद्यार्थी ने ‘दो सेर धान’ नाम से इसका हिन्दी अनुवाद कर केंद्र साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित किया । ‘गोदान’ की तरह ‘रंटिटंङष़ी’ शोषित किसान - मज़दूरों के जीवन की लड़ाई का दर्पण है । केरल के किसानों- मज़दूरों के भौतिक एवं नैतिक जीवन का अद्भुत वर्णन इसमें मिलता है । ‘आलप्पुष़ा’ (स्थान विशेष) का ‘कुट्टनाडु’ (स्थान विशेष) ‘धान की खान’ के नाम से विख्यात है । यहाँ ‘पुलया’ और ‘परया’ (अनुसूचित) जाति के लोग मृत्यु पर्यंत धान उपजने का पेशा करते हैं । लेकिन मनुष्य होकर भी उसका जीवन मनुष्य समान नहीं है । उन मज़दूरों के मर्मस्पर्शी जीवन से ‘रंटिटंङष़ी’ उपन्यास संपुष्ट है ।

‘गोदान’ बड़ी गहराई से एक युग का प्रतिनिधित्व करने वाला उपन्यास है । यह भारतीय किसान की समर - गाथा है । ‘गोदान’ में प्रेमचन्द ने अपनी परवर्ती रचनाओं से अलग होकर यथार्थवाद को अपनाया है । घटना और अनुभूति, आदर्श और यथार्थ का सम्मेलन ‘गोदान’ की गरिमा को बढ़ाते है । इसमें उपन्यासकार ने सामाजिक यथार्थ के धरातल पर खड़े होकर किसान - इतिहास को भली - भाँति रेखांकित किया है । प्रेमचन्द के उस विशिष्ट सक्षमता को आलोचकों ने ‘आदर्शोन्मुख यथार्थवाद’ नाम से पुकारा है । ‘दो से धान’ के आरंभ से अवसान तक की घटनाओं में यथार्थ की चमक मिलती है । अथवा इसे निःसंकोच आदर्शोन्मुख यथार्थवादी रचना कह सकते है ।

‘गोदान’ के हीरो (Hero) होरी और ‘रंटिटंङष़ी’ का कोरन दोनों ग्रामीण कृषक - मज़दूर संस्कार - सभ्यता के प्रतीक हैं । ‘गोदान’ का होरी और ‘रटिटंङष़ी’ का कोरन आर्थिक स्थिति में ऋणी है । लेकिन दोनों के दृष्टिकोण में कुछ अंतर भी है । होरी में आदर्शवाद और यथार्थवाद है तो कोरन में आदर्श और यथार्थ के साथ विप्लव ज्वाला भी है।

‘गोदान’ में प्रेमचन्द ने जमींदारी - किसान संबंध को विविध आयाम से देखकर उसकी सद् एवं दुष्परिणाम यथा तथा खींचा है । ‘रंटिटंङष़ी’ में तकष़ी ने एक पग आगे बढ़कर दोनों वर्गों के संघर्ष का चित्रण भी देते हैं । होरी जमींदार अमरपाल सिंह के अन्यायों को चुपचाप सहन कर आगे जाते है । उसमें अनीति के बदले प्रतिकार भावना जागरित नहीं होती । किंतु ‘रंटिटंङष़ी’ का नायक कोरन अनीति नहीं सहता है । नीति के लिए विप्लव का विचार उसकी नस - नस में व्याप्त है । वह ‘पुन्नप्र’ - ‘वयलार’ (स्थान विशेष) के कम्युनिस्ट योद्धाओं के समान शस्त्र लेकर लड़ता है ।

धनिया (गोदान) और चिरुता (रंटिटंङष़ी) में भी कई समानताएँ है । होरी की मृत्यु के अवसर पर धनिया धैर्य नहीं छोड़ती, परिस्थिति का सामना करती है । चिरुता में प्रतिक्षण जमींदार की क्रूरता की प्रतिकार ज्वाला धधकती है । धनिया एक कर्तव्य निष्ठ आदर्श पत्नी के स्तर तक सीमित रहती है और सारी मुसीबतें दुर्भाग्य समझकर सहती है तो ‘रंटिटंङष़ी’ की ‘चिरुता’ इससे एक कदम आगे बढ़कर एक विप्लवकारी ओजस्वी नारी रत्न के पद को अलंकृत करती है । चिरुता कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्या बन कर जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार होती है । तकष़ी की चिरुता शस्त्र लेना पाप नहीं समझती । कोरन के जेल जाते समय चिरुता उस विडंबना पूर्ण वातावरण का धैर्य पूर्वक सामना करती है ।

प्रेमचन्द और तकष़ी साम्यवाद से अतृप्त न थे । ‘गोदान’ और ‘रंटिटंङष़ी’ में दोनों का साम्यवादी दृष्टिकोण दो रूपों में प्रकट होते है । तकष़ी कोरन के हाथ में शस्त्र देकर संघर्ष भूमि की ओर भेजते है तो प्रेमचन्द का होरी और गोबर साम्यवाद को ‘सहन समर’ के रूप में स्वीकारते हैं । प्रेमचन्द और तकष़ी का रचना काल भिन्न है । ‘गोदान’ के रचना काल में उत्तर भारत में कम्युनिस्ट पार्टी का स्थान दुर्बल था । यह एक आदर्श के रूप से बढ़कर एक विप्लव संघ का रूप - भाव न ही पा चुका था । लेकिन ‘रंटिटंङष़ी’ के रचना काल में केरल में ‘कम्युनिस्ट पार्टी’ ‘विप्लव पार्टी’ के रूप में संघर्ष में सक्रिय थी ।

‘गोदान’ में मुख्य (ग्रामीण) कथा और गौण (शहरी) कथा है । दोनों कथा ताल - मेल खाकर एक साथ चलती है । इसलिए इसमें कथापात्रों का बाहुल्य है । परंतु ‘रंटिटंङष़ी’ में केवल मुख्य कथा (ग्रामीण) ही है । इसलिए ‘गोदान’ की तुलना में ‘रंटिटंङष़ी’ में पात्रों की संख्या कम है ।

प्रेमचन्द के समान तकष़ी भी ग्रामीण है, फिर भी प्रेमचन्द ने नगर की कथा को नहीं छोड़ा है । ‘गोदान’ के अमरपाल सिंह, प्रो. मेहता या मिस मालती के जैसे शहरी कहने योग्य कोई पात्र ‘रंटिटंङष़ी’ में नहीं है । तकष़ी पेशे में वकील है, प्रेमचन्द वकील नहीं, अध्यापक वृत्ति करते थे । फिर भी दोनों ने समाज रूपी अदालत में दरिद्रों - पद दलितों की वकालत ली । ‘गोदान’ में प्रेमचन्द प्रोफसर, व्यापारी, मज़दूर, मालिक, डाक्टर, पुरोहित जैसे समाज में विभिन्न पद भार करने वालों को एक पंक्ति में लाये हैं । ‘रंटिटंङष़ी’ में मज़दूर- मालिक को छोड़कर उच्च शिक्षित और पद भार संभालने वाला कोई पात्र नहीं है । यह तो पहले ही स्पष्ट किया गया है कि तुलनात्मक अध्ययन या अनुसंधान में शत प्रतिशत साम्य नहीं दिखायी पड़ता । वैषम्य भी तुलनात्मक अध्ययन (अनुसंधान) का एक भाग है ।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि ‘गोदान’ और ‘रंटिटंङष़ी’, दोनों उपन्यास अनेक समानताओं और कुछ असमानताओं के साथ, समानांतर चलने वाली, भारत की दिशा सूचक कृतियाँ है । दोनों हमारी महान कालजयी उपलब्धियाँ भी है ।

Written By : LEMBODHARAN PILLAI. B, Research scholar, Under the guidance of Dr.K.P Padmavathi Amma, Karpagam University, Coimbatore.
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: ‘गोदान’ और ‘रंटिटंङष़ी’ (दो सेर धान) एक अध्ययन / लंबोधरन पिल्लै. बी
‘गोदान’ और ‘रंटिटंङष़ी’ (दो सेर धान) एक अध्ययन / लंबोधरन पिल्लै. बी
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2016/02/blog-post_93.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2016/02/blog-post_93.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content