प्राची अप्रैल 2016 : पाठकीय

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आपने कहा है सम्मान लौटाने का नाटक ‘प्राची’ फरवरी, 2016 मुखपृष्ठ से लेकर अंतिम पृष्ठ तक सौंदर्य व साहित्य से लबरेज है. संपादकीय में साहित्य...

आपने कहा है

सम्मान लौटाने का नाटक

‘प्राची’ फरवरी, 2016 मुखपृष्ठ से लेकर अंतिम पृष्ठ तक सौंदर्य व साहित्य से लबरेज है. संपादकीय में साहित्यकारों द्वारा लौटाये जाने वाले पुरस्कारों की नाटकीय घोषणा की चर्चा है. किसी ने पुरस्कार/सम्मान लौटाया नहीं. केवल लौटाने का वक्तव्य दिया है. काशीनाथ सिंह का ‘‘काशी का अस्सी’’ ग्यारहवां संस्करण बिक रहा है. इसमें केवल पूर्वी, देशज व बनारसी गालियों की भरमार है. राजेन्द्र यादव ने ‘हंस’ में उसका एक अंश छाप कर और भी चर्चित कर दिया था. यदि हम आप ऐसी गालियों भरी रचना तैयार करते तो कोई छापने को भी तैयार न होता. ‘‘हृदय परिवर्तन’’ कहानी में एक मां का अपनी युवा पुत्री को बाहर आने-जाने की छूट प्रदान करने का सुंदर घटनाक्रम रचा गया है.

रोटी, फ्लैट नं. 44, मड़ई, एवं अशोक अंजुम की गजलें प्रशंसनीय हैं.

केदारनाथ ‘सविता’, मीरजापुर (उ.प्र.)

 

बसंत ऋतु से संबंधित चित्र होना चाहिए

‘प्राची’ फरवरी, 2016 प्राप्त हुआ. कवर बहुत ही बढ़िया है. आंख बंद किए हुए युवती का सौन्दर्य देखने योग्य है. वैसे बसंत ऋतु से संबंधित कवर (मुख पृष्ठ) होना चाहिए था. इस अंक में मेरे मीरजापुर के केदारनाथ सविता की लघुकथा बहुत ही चुटीली व व्यंगपरक है. वे कुछ भी लिखते हैं...कविता, लेख या कहानी, सबमें हास्य का पुट घुस ही जाता है. मैं अपनी भी कुछ रचनाएं प्रकाशनार्थ भेज रही हूं. आशा है आप उसे प्राची में अवश्य छापेंगे.

पुनश्च...

प्राची का मार्च 2016 अंक मिला. आनन्द जी की कहानी ने मन को छू लिया. बेहद नए विषय को उठाया गया है...और मर्मस्पर्शी है. लघुकथा ‘आपकी मिसेज’ यह दर्शाती है कि

आधुनिक जीवन शैली में हम अपने सांस्कृतिक विचारों से किस तरह दूर होते जा रहे हैं. अशोक गुलशन की गजल ‘नफरत की दीवार हटाओ होली में’ अच्छी लगी. डॉ. मधुर नज्मी की गजल भी बहुत बेहतरीन लगी. उम्मीद है, इसी तरह अच्छी रचनायें पढ़ने को मिलती रहेंगी.

डॉ. अनुराधा चन्देल ‘ओस’, मीरजापुर (उ.प्र.)

 

पानी की कीमत समझें

अभी-अभी जाड़ा बीता है. गर्मी की शुरुआत भी नहीं हो पाई है कि पहाड़ी गांवों में पानी की किल्लत होने लगी है. लोग पानी की एक बूंद के लिए तरसने लगे हैं. हैंडपंप चलाते-चलाते थक जाते हैं, किंतु पानी की एक धार नहीं गिरती. नहाने और कपड़े साफ करने की बात तो दूर, पीने के लिए भी पानी को तरसते लोगों की यह परेशानी भविष्य के लिए और भी बड़ी परेशानी न बन जाय. वास्तविकता तो यह है कि पहाड़ी गांवों में नहीं, अपितु मैदानी क्षेत्रों में भी पानी की समस्या बढ़ रही है. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पंपसेट, ट्यूबवेल की बोरिंग करने की मनाही है. भू वैज्ञानिकों का मानना है कि भूगर्भ जलस्तर दिन-प्रतिदिन नीचे चला जा रहा है. इसका कारण है- वर्षा का कम होना और जल का बहुत अधिक मात्रा में उत्सर्जन. भूजल का दोहन इतना अधिक है कि निकट भविष्य में गांव-नगर सर्वत्र पानी का अभाव हो जाएगा. लोग मशीनों से अंधाधुंध पानी निकाल रहे हैं. यह भूल बैठे हैं कि नीचे का जलस्रोत भी समाप्त हो सकता है और यदि ऐसा हुआ तो क्या होगा! पृथ्वी पर स्थित सभी प्राणियों के लिए जलसंकट पैदा हो जाएगा. बिना जल के किसी का अस्तित्व बचेगा क्या?

पहले लोग पढ़े-लिखे कम थे लेकिन प्रकृति का अनावश्यक दोहन करने में सकुचाते थे. यहीं नहीं वायु और जल को भी देवता समझते थे. जल की बर्बादी नहीं करते थे. बुजुर्ग कहते थे कि पानी व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए. पानी तो नाबदान से बह जाएगा, लेकिन तुम्हारा क्या होगा? रहीमदास भी ‘बिन पानी सब सून’ कहते हुए यहीं संदेश देना चाहते रहे होंगे. आज उद्योगों में खूब पानी खर्च हो रहा है. सिंचाई हो रही है. लोग एक बाल्टी पानी की जगह नहाने में चार बाल्टी पानी खर्च कर रहे हैं. सड़कें, गलियां धुली जा रही हैं. बाइक, मोटरगाड़ियां धुली जा रही हैं. अब शायद लोग इसे भी अपने जीवन स्तर से जोड़कर देखने लगे हैं कि उनके यहां कितना अधिक पानी लगता है. अगर किसी को समझाने की कोशिश करिए तो लड़ने पर उतारू हो जाता है. मैं इस पत्र के माध्यम से प्राची के रचनाकारों और पाठकों से अपील करना चाहता हूं कि आप लोग पानी की कीमत समझें. पानी बर्बाद न करें और दूसरों को भी पानी की बर्बादी न करने की सलाह दें. ऐसा न हो कि हम बच्चों को धन-दौलत तो देकर जाएं किंतु पानी एक-एक बूंद के लिए उन्हें तरसना पड़े.

अरविन्द अवस्थी, मीरजापुर

 

सर्वश्रेष्ठ पत्र

कानून की उपेक्षा का चित्रण

माह मार्च 2016 के प्राची के अंक में प्रकाशित सम्पादकीय ‘देश के गद्दार’ बहुत ही प्रभावशाली लगा. इसमें जो ऐतिहासिक तथ्य दिए गए हैं, वे इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि हमारे देश में कभी भी एकता और अखंडता नहीं रही और इसी कारण हमें हजारों वर्ष तक गुलामी भुगतनी पड़ी. आज भी ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो देश के साथ गद्दारी कर रहे हैं. ऐसे में देश की एकता कैसे सुरक्षित रह सकती है.

‘तीसरी कसम’ फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ द्वारा लिखी गयी कहानी काव्यमयी कहानी है. इसे जितनी बार पढ़ा जाए, वह हमेशा नई लगती है. कहानी में ग्रामीण परिवेश का अच्छा चित्रण किया गया है. ‘आग और समुद्र’ कहानी में सुल्तान जमील नसीम ने हिन्दू मुस्लिम एकता को कायम करने के लिए शादां की शहादत के माध्यम से जो हृदयस्पर्शी प्रभाव पैदा किया है, वह स्तुत्य है. कहानी संवेगों और मर्मस्पर्शी भावनाओं से ओतप्रोत है. ऐसी शिक्षाप्रद कहानी समाज में मिठास घोलने के लिए अत्यन्त आवश्यक है.

‘बंजो’ कहानी हमें यह प्रेरणा देती है कि हम सहनशील बनें. सहनशीलता ही समाज में शांति स्थापित कर सकती है. ‘मैंने उस लड़की का खून किया’ कहानी में बस्सी जैसी परम्परा अनावश्यक है. इसका अंत किया जाना चाहिए. ‘स्वदेशी रेल’ हमारे देश में व्याप्त अनियमितता और कानून की उपेक्षा का एक जीता जागता चित्रण है. यदि हमारे देश में समय की पाबन्दी और कानून के पालन करने पर ध्यान नहीं दिया गया तो हम कभी भी उन्नति नहीं कर पायेंगे. ‘विराट महाराज की होली’ कल्पना की उड़ान का बहुत ही सजीव चित्रण है. कल्पना के आधार पर होलिका की कहानी बच्चों को बहुत ही सहज से हृदयंगम हो सकती है.

पत्रिका की लघुकथाएं बहुत ही सारगर्भित हैं तथा कविताएं बहुत ही बोधगम्य हैं. मैं प्राची की प्रगति की हार्दिक शुभकामना करता हूं.

शरदचन्द्र राय श्रीवास्तव, 5/132, विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)

(पत्र-लेखक को श्री अंशलाल पंद्रे की पुस्तक ‘सबरंग-हरसंग’ भेजी जाएगी. संपादक)

 

सम्मान लौटाने का नाटक

‘प्राची’ फरवरी, 2016 मुखपृष्ठ से लेकर अंतिम पृष्ठ तक सौंदर्य व साहित्य से लबरेज है. संपादकीय में साहित्यकारों द्वारा लौटाये जाने वाले पुरस्कारों की नाटकीय घोषणा की चर्चा है. किसी ने पुरस्कार/सम्मान लौटाया नहीं. केवल लौटाने का वक्तव्य दिया है. काशीनाथ सिंह का ‘‘काशी का अस्सी’’ ग्यारहवां संस्करण बिक रहा है. इसमें केवल पूर्वी, देशज व बनारसी गालियों की भरमार है. राजेन्द्र यादव ने ‘हंस’ में उसका एक अंश छाप कर और भी चर्चित कर दिया था. यदि हम आप ऐसी गालियों भरी रचना तैयार करते तो कोई छापने को भी तैयार न होता. ‘‘हृदय परिवर्तन’’ कहानी में एक मां का अपनी युवा पुत्री को बाहर आने-जाने की छूट प्रदान करने का सुंदर घटनाक्रम रचा गया है.

रोटी, फ्लैट नं. 44, मड़ई, एवं अशोक अंजुम की गजलें प्रशंसनीय हैं.

केदारनाथ ‘सविता’, मीरजापुर (उ.प्र.)

 

बसंत ऋतु से संबंधित चित्र होना चाहिए

‘प्राची’ फरवरी, 2016 प्राप्त हुआ. कवर बहुत ही बढ़िया है. आंख बंद किए हुए युवती का सौन्दर्य देखने योग्य है. वैसे बसंत ऋतु से संबंधित कवर (मुख पृष्ठ) होना चाहिए था. इस अंक में मेरे मीरजापुर के केदारनाथ सविता की लघुकथा बहुत ही चुटीली व व्यंगपरक है. वे कुछ भी लिखते हैं...कविता, लेख या कहानी, सबमें हास्य का पुट घुस ही जाता है. मैं अपनी भी कुछ रचनाएं प्रकाशनार्थ भेज रही हूं. आशा है आप उसे प्राची में अवश्य छापेंगे.

पुनश्च...

प्राची का मार्च 2016 अंक मिला. आनन्द जी की कहानी ने मन को छू लिया. बेहद नए विषय को उठाया गया है...और मर्मस्पर्शी है. लघुकथा ‘आपकी मिसेज’ यह दर्शाती है कि

आधुनिक जीवन शैली में हम अपने सांस्कृतिक विचारों से किस तरह दूर होते जा रहे हैं. अशोक गुलशन की गजल ‘नफरत की दीवार हटाओ होली में’ अच्छी लगी. डॉ. मधुर नज्मी की गजल भी बहुत बेहतरीन लगी. उम्मीद है, इसी तरह अच्छी रचनायें पढ़ने को मिलती रहेंगी.

डॉ. अनुराधा चन्देल ‘ओस’, मीरजापुर (उ.प्र.)

 

पानी की कीमत समझें

अभी-अभी जाड़ा बीता है. गर्मी की शुरुआत भी नहीं हो पाई है कि पहाड़ी गांवों में पानी की किल्लत होने लगी है. लोग पानी की एक बूंद के लिए तरसने लगे हैं. हैंडपंप चलाते-चलाते थक जाते हैं, किंतु पानी की एक धार नहीं गिरती. नहाने और कपड़े साफ करने की बात तो दूर, पीने के लिए भी पानी को तरसते लोगों की यह परेशानी भविष्य के लिए और भी बड़ी परेशानी न बन जाय. वास्तविकता तो यह है कि पहाड़ी गांवों में नहीं, अपितु मैदानी क्षेत्रों में भी पानी की समस्या बढ़ रही है. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पंपसेट, ट्यूबवेल की बोरिंग करने की मनाही है. भू वैज्ञानिकों का मानना है कि भूगर्भ जलस्तर दिन-प्रतिदिन नीचे चला जा रहा है. इसका कारण है- वर्षा का कम होना और जल का बहुत अधिक मात्रा में उत्सर्जन. भूजल का दोहन इतना अधिक है कि निकट भविष्य में गांव-नगर सर्वत्र पानी का अभाव हो जाएगा. लोग मशीनों से अंधाधुंध पानी निकाल रहे हैं. यह भूल बैठे हैं कि नीचे का जलस्रोत भी समाप्त हो सकता है और यदि ऐसा हुआ तो क्या होगा! पृथ्वी पर स्थित सभी प्राणियों के लिए जलसंकट पैदा हो जाएगा. बिना जल के किसी का अस्तित्व बचेगा क्या?

पहले लोग पढ़े-लिखे कम थे लेकिन प्रकृति का अनावश्यक दोहन करने में सकुचाते थे. यहीं नहीं वायु और जल को भी देवता समझते थे. जल की बर्बादी नहीं करते थे. बुजुर्ग कहते थे कि पानी व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए. पानी तो नाबदान से बह जाएगा, लेकिन तुम्हारा क्या होगा? रहीमदास भी ‘बिन पानी सब सून’ कहते हुए यहीं संदेश देना चाहते रहे होंगे. आज उद्योगों में खूब पानी खर्च हो रहा है. सिंचाई हो रही है. लोग एक बाल्टी पानी की जगह नहाने में चार बाल्टी पानी खर्च कर रहे हैं. सड़कें, गलियां धुली जा रही हैं. बाइक, मोटरगाड़ियां धुली जा रही हैं. अब शायद लोग इसे भी अपने जीवन स्तर से जोड़कर देखने लगे हैं कि उनके यहां कितना अधिक पानी लगता है. अगर किसी को समझाने की कोशिश करिए तो लड़ने पर उतारू हो जाता है. मैं इस पत्र के माध्यम से प्राची के रचनाकारों और पाठकों से अपील करना चाहता हूं कि आप लोग पानी की कीमत समझें. पानी बर्बाद न करें और दूसरों को भी पानी की बर्बादी न करने की सलाह दें. ऐसा न हो कि हम बच्चों को धन-दौलत तो देकर जाएं किंतु पानी एक-एक बूंद के लिए उन्हें तरसना पड़े.

अरविन्द अवस्थी, मीरजापुर

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर 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रचनाकार: प्राची अप्रैल 2016 : पाठकीय
प्राची अप्रैल 2016 : पाठकीय
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https://www.rachanakar.org/2016/04/2016_89.html
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