रक्षा बंधन - राखी पर विशेष // मृत्युलोक से लेकर स्वर्ग तक में राखी धागे का रहा है महत्व // डॉ. सूर्यकांत मिश्रा

SHARE:

० इतिहास के पन्ने भी कहते है रोचक कहानी रक्षा बंधन का पर्व महज भाई-बहन के रिश्तों को मजबूती देने का संकेत ही नही है वरन् वेद-वेदान्त के दृष्...

image

० इतिहास के पन्ने भी कहते है रोचक कहानी

रक्षा बंधन का पर्व महज भाई-बहन के रिश्तों को मजबूती देने का संकेत ही नही है वरन् वेद-वेदान्त के दृष्टिकोण से भी यह दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि श्रावण मास की इसी पूर्णिमा तिथि को वेदों का अध्ययन भी प्रारंभ किया जाता था। शाक्त्रोक्त मतानुसार रक्षा बंधन के दिन पापों के निराकरण के लिए प्रायश्चित रूप में हेमाद्रि स्नान संकल्प करके दशविध स्नान करने का विधान भी बताया गया है। रक्षाबंधन का पर्व कच्ची डोरी से बांधे गये मजबूत बंधन का प्रतीक है। यही वह धागा है जो एक भाई को बहन के प्रति कर्त्तव्य निष्ठता का पाठ पढ़ाता रहता है। दूसरी ओर बहन भी अपने भाई के लिए हर प्रकार का त्याग करते हुए स्नेह के सागर में गोते लगाती रहती है। यह पर्व महज भाई-बहन को ही उत्तरदायित्व से नहीं बांधता है वरन् इसी दिन एक शिष्य अपने गुरू के पास पहुँचकर उससे रक्षा सूत्र बँधवाकर आशीर्वाद ग्रहण करता है। इतने अधिक गहरायी को अपने अंदर समेटे इस पर्व का रूप अब कुछ बदला-बदला सा दिखायी पड़ने लगा है। लोगों ने इस पर्व की गंभीरता और पवित्रता को कहीं न कहीं छिन्न-भिन्न करना शुरू कर दिया है। साथ ही यह पर्व वर्तमान में एक परंपरा को पूरा करने तक ही सिमटता जा रहा है। लोगों द्वारा इसे भी औपचारिकता के बंधन में जकड़ा जाना भाई-बहन के पवित्र रिश्ते पर प्रश्च चिन्ह लगाता दिखायी देने लगा है।

[ads-post]

भारतीय पर्वों में भाई-बहन के रिश्तों को मजबूती देने वाला पर्व रक्षाबंधन अपने महत्व के चलते अब अन्य धर्मावलंबियों द्वारा भी बनाया जाने लगा है। एक ही माँ का दूध पीकर बड़े हुए रिश्ते के भाई-बहनों के अलावा धरम भाई और धरम बहन भी इस महान पर्व की देन हैं। मनुष्य समाज को छोड़ भी दें तो ईश्वरीय सत्ता भी इस पर्व से अछूती नही रही है। कृष्ण द्वारा द्रौपती की चीरहरण से रक्षा भी इसी पर्व का मुख्य हिस्सा माना जाता है। इतिहास में सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के शत्रु पुरूराज को राखी का धागा बांधकर अपने पति के प्राणों की रक्षा की थी। मुगल सम्राट हुँमायु भी इस पवित्र बंधन में बंध चुके हैं। देव-असुर युद्ध में देवों की विजयी कामना के साथ स्वयं इन्द्राणी ने अपने पति इन्द्र के हाथ में रक्षा सूत्र बाँधकर अपने विश्वास को बुलन्दी दी थी, और इन्द्र की जीत ने रक्षा सूत्र की ताकत सिद्ध कर दिखायी थी। सभी पर्वों में यही एक ऐसा पर्व है जो भाई-बहन को हर स्थिति में समीप लाने प्रतिबद्ध दिखायी पड़ रहा है। पर्व से पूर्व ही भाई-बहन के पास पहुँचने की तैयारी में लग जाते हैं अथवा बहन अपने भाई के आगमन की प्रतीक्षा में न जाने क्या-क्या सपने संजोने लगती है। श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि श्रावणी पर्व के नाम से भी जानी जाती हैं।

इन्टरनेट की इस इक्कीसवीं शताब्दी ने भी महत्वपूर्ण भारतीय पर्व को एक अलग ही रंग देना शुरू कर दिया है। अब अपने भाई से हजारों मील दूर रहने वाली बहन राखी और कुंकुम, रोली वाला तिलक डाक से न भेजकर इन्टरनेट के सहारे संदेश और फोटो गैलारी के माध्यम से आरती की थाली और राखी कम्प्यूटर पर भेजकर अपना स्नेह प्रदर्शित कर रही है। ऐसे प्रेम के प्रतीक को भाई न तो छू सकता है और न ही अपनी कलाईयों पर धारण कर सकता है। कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि जहां डाक सुविधा का लाभ न मिल पा रहा हो वहाँ इन्टरनेट ने प्रत्यक्ष रूप से भाई-बहन को मिलाकर त्योहार का बड़ा तोहफा ही देने का प्रयास किया है। इतना अवश्य है कि जब तक भाई के माथे पर तिलक न सजे और हाथ पर राखी का धागा न चढ़े रक्षा का पर्व अधूरा ही प्रतीत होता है। दूसरी ओर देखें तो यह एक आकर्षित करने वाला व्यवसाय बनकर रह गया है। एक आम व्यापारी यही चाहता है कि इस दिन ढेरों राखियाँ बिके, खूब मिठाइयाँ एवं उपहार लोगों द्वारा खरीदे जायें ताकि मोटा मुनाफा कमाया जा सके।

यही राखी का पर्व आज से लगभग तीन दशक पूर्व एक अलग ही जोश और उमंग में हुआ करता था। बहने अपने भाइयों के लिए रंग बिरंगे जूट के धागों से स्वयं हस्तकला का नमूना पेश करते हुए आकर्षक राखियाँ बनाया करती थीं। चांदी जैसे जरी के धागे और सुनहरे तारों की लड़ियाँ जब राखी पर आकर्षक रूप से सजाये जाते थे तब बहन का प्यार उमड़ कर त्योहार की खुशी का इजहार किया करता था। इतना ही नहीं सोने और चांदी की राखियाँ बहन के अटूट स्नेह को सदैव के लिए भाई की कलायी पर बांधा करती थी। अब महंगाई के इस दौर में राखियों का बाजार सस्ती सामाग्रियों के मेल-जोल से बनायी गयी राखियों तक सीमित रह गया है। ऐसी राखियाँ हाथ की कलाई पर घण्टे भर भी टिक नही पाती और हल्के पानी के साथ ही कलाई छोड़ जमीन पर जा गिरती है। पुरोहितों द्वारा कलाई में बांधी गयी मौली धागे की राखी ही पर्व को महिनों जिन्दा रख पा रही है। एक ओर जहाँ बहनों ने स्वयं राखी बनाना छोड़ दिया है वहीं भाइयों ने भी तोहफे की रस्म रूपयों के द्वारा पूरी करना शुरू कर दी है। उपहार की अहमियत क्या होती है इसे समझने और समझाने की जरूरत शायद नही है। भाई द्वारा दिया गया छोटा सा उपहार जब तक बहन के पास होता है वह उसे देखते ही के प्यार की उमंगों और लहरों में खो जाती है। भाई और बहन को पर्व की इसी विशेषता को पुनः याद करते हुए उसे अमिट बनाने आगे आना होगा।

साहित्य के नोबेल पुरूस्कार से सम्मानित गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने राखी पर्व को एक अलग ही भावना से जोड़ा था। उनका मानना था कि रक्षाबंधन का पर्व केवल भाई-बहन के प्रेम संबंधों का ही पर्व नही बल्कि इंसानियत का पर्व है। विश्व कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इस पर्व पर बंग-भंग के विरोध में जन-जागरण किया था। साथ ही इस पर्व को एकता और भाईचारे का प्रतीक बनाया था। सन् 1947 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में जन जागरण के लिए भी इसी पर्व का सहारा लिया गया। इसमें कोई संदेह नही कि रिश्तों से ऊपर उठकर रक्षाबंधन की भावना ने हर समय प्रत्येक जरूरत पर अपना रूप बदला है। जरूरी होने पर हिन्दु युवती ने मुसलमान भाई की कलाई पर राखी का धागा बाँधकर प्यार को धरम भाई तक पहुँचाया, तो सीमा पर ऐसी ही बहनों ने सैनिकों को राखी बाँधकर उन्हें अपना भाई बनाया। वर्तमान में राखी देश की रक्षा, पर्यावरण की रक्षा, हितों की रक्षा आदि के लिए भी बाँधी जाने लगी है। इस प्रकार देखा जाये तो यह पर्व हमारा राष्ट्रीय पर्व बन चुका है।

सुप्रसिद्ध कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान से लेकर आजादी के दीवाने चंद्रशेखर आजाद तक ने राखी के महत्व को उस ऊंचाई पर पहुँचाया जहाँ इस पर्व का उत्साह हर किसी के लिए आनंद और खुशी लुटाता दिखायी पड़े। सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी पंक्तियों में लिखाः-

मैंने पढ़ा शत्रुओं को भी, जब-जब राखी भिजवायी,

रक्षा करने दौड़ पड़े वे, राखी बन्ध शत्रु भाई।।

इसी तरह क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद के जीवन की एक घटना ने राखी के धागों को मजबूती प्रदान की है। बात उन दिनों की है जब क्रांतिकारी आजाद स्वतंत्रता की जंग में व्यस्त थे। फिरंगियों से बचने एक बार उन्होंने तूफानी रात में एक कुटिया में शरण लेना चाहा। उस कुटिया में एक विधवा अपनी बेटी के साथ रहती थी। हट्टे-कट्टे आजाद को डाकू समझकर उस विधवा ने उन्हें शरण देने से इंकार कर दिया, किन्तु जब आजाद ने अपना परिचय दिया तो वह महिला शरण देने तैयार हो गयी। बातचीत के दौरान आजाद को आभास हो गया कि गरीबी के कारण उसकी बेटी का विवाह नही हो पा रहा है। आजाद ने उस वृद्धा से कहा कि मुझ पर 5 हजार रूपये का ईनाम रखा गया है, मुझे फिरंगियों को सौंपकर उस रूपये से बेटी का विवाह कर दो। यह सुनकर उस वृद्धा विधवा ने कहा- भैय्या़। तुम देश की आजादी के लिए अपनी जान हथेली में लेकर घूम रहे हो और न जाने कितनी बहु-बेटियों की इज्जत तुम्हारे भरोसे है। मैं हरगिज ऐसा नही कर सकती। यह कहते हुए उसने एक रक्षा सूत्र आजाद की कलाई में बांध दिया सुबह जब विधवा की आँख खुली तो आजाद वहां से जा चुके थे और उनकी तकिया के नीचे पांच हाजार रूपये रखे थे। एक पर्ची में आजाद ने लिख छोड़ा था-अपनी प्यारी बहन हेतु एक छोटी सी भेंट आजाद।।

---

(डा. सूर्यकांत मिश्रा)

जूनी हटरी, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)

मो. नंबर 94255-59291

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: रक्षा बंधन - राखी पर विशेष // मृत्युलोक से लेकर स्वर्ग तक में राखी धागे का रहा है महत्व // डॉ. सूर्यकांत मिश्रा
रक्षा बंधन - राखी पर विशेष // मृत्युलोक से लेकर स्वर्ग तक में राखी धागे का रहा है महत्व // डॉ. सूर्यकांत मिश्रा
https://lh3.googleusercontent.com/-JuZLwYihLDU/WYRixMCUp7I/AAAAAAAA6As/-_nwb5gAvVwHu670gHoKjK5bEllM2E8owCHMYCw/image_thumb?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-JuZLwYihLDU/WYRixMCUp7I/AAAAAAAA6As/-_nwb5gAvVwHu670gHoKjK5bEllM2E8owCHMYCw/s72-c/image_thumb?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2017/08/blog-post_84.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2017/08/blog-post_84.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content